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Foreign Affairs & Neighbourhood

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बांग्लादेश से रिश्तों में हसीना फैक्टर की बाधा

बांग्लादेश की नई बीएनपी सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की दिल्ली यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों में शेख हसीना के प्रत्यर्पण के प्रश्न को केंद्रीयता दे दी है। भारत के लिए हसीना शासनकाल में रणनीतिक निकटता और सीमा-सुरक्षा लाभ रहे, परंतु उनकी घरेलू दमनकारी छवि और 2024 के जनविद्रोह ने उन्हें भारत के लिए एक अवरोधक उत्तराधिकार बना दिया है। नई सरकार भारत से संपर्क बढ़ाने की इच्छा रखती है, किंतु हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। यह स्थिति भारत की कूटनीति के समक्ष नैतिक, कानूनी और रणनीतिक विरोधाभास उत्पन्न करती है।

श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव पर है भारत की नजर

श्रीलंका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव भारत-श्रीलंका संबंधों को प्रभावित करने वाले अप्रिय मुद्दों से घिरे हैं। वर्तमान राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, और महिंदा राजपक्षे के भाई गोटाबाया राजपक्षे एक मजबूत उम्मीदवार हैं। लेख बताता है कि कैसे विभिन्न श्रीलंकाई राजनीतिक दलों ने भारत को अपनी आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल और सत्ता संघर्ष में मोहरा बनाया है, खासकर तमिल मुद्दे और भारतीय खुफिया एजेंसी 'रॉ' से जुड़े आरोपों के संदर्भ में। भारत इस चुनाव पर करीब से नजर रख रहा है क्योंकि इसके परिणाम द्विपक्षीय संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

24 अक्टूबर(संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस) के लिए विशेष 72वें वर्ष में भी पांच ‘वीटो’ के चंगुल में संयुक्त राष्ट्र

यह लेख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति के प्रभुत्व और भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे पी-5 देश (अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, फ्रांस, चीन) अपनी वीटो शक्ति के कारण संयुक्त राष्ट्र पर हावी हैं, और भारत के प्रयासों के बावजूद सुधारों को रोक रहे हैं। लेख में अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का उल्लेख है, जो भारत की वीटो शक्ति की मांग को खारिज करते हैं, जबकि भारत-अमेरिका संबंधों में अन्य क्षेत्रों में निकटता बढ़ रही है।