इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस को लेकर जब भारत में बवाल मचा हुआ था, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत-इजराइल के बीच 30 साल पुराने रिश्ते की दुहाई देते हुए कह रहे थे कि इस आपसी संबंध को आगे ले जाने का इससे बेहतर समय दूसरा नहीं हो सकता ।

संसद का बजट सत्र शुरू होने से दो दिन पहले 29 जनवरी को अमेरिकी अखबार ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में पेगासस स्पाईवेयर(खुफिया तंत्र) बनानेवाली इजराइली कम्पनी एनएसओ ग्रुप के साथ भारत के 2 अरब डॉलर के सौदे की खबर को लेकर भारत में हंगामा मच गया । सारे विपक्षी दल संसद में सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए । ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में छपी खबर के अनुसार भारत और इजराइल के बीच 2017 में हुए इस सौदे के अंतर्गत खरीदे गए स्पाईवेयर का इस्तेमाल विपक्षी दलों के नेताओं, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और यहां तक कि नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के सदस्यों के भी खिलाफ किया जा रहा है । इस खुलासे के बाद तो बवेला होना ही था । विपक्षी दलों ने एक स्वर से एक विदेशी कंपनी से रक्षा सौदे के नाम पर खरीदे गए स्पाईवेयर से अपने देश के अंदर की जा रही जासूसी को देशद्रोह बताया और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप का आग्रह किया, क्योंकि पेगासस के जरिए जजों की भी जासूसी का खुलासा हुआ है ।

इससे बिल्कुल बेखबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 जनवरी को ही भारत-इजराइल रिश्ते की 30वीं वर्षगांठ मना रहे थे । इस अवसर पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत-इजरायल आपसी संबंधों को आगे ले जाने और नए लक्ष्य निर्धारित करने का इससे अच्छा समय दूसरा नहीं हो सकता’ ।

बजट सत्र शुरू होने से पहले हुए इस सनसनीखेज खुलासे को लेकर हंगामा होना ही था और लगता है सत्र के पहले चरण 11 फरवरी तक तो अवश्य ही संसद का दोनों सदन पेगासस हंगामे की भेंट चढ़ेगा । विपक्ष प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण पर अड़ा है । अब देखना है कि नरेंद्र मोदी इजरायली कंपनी का बचाव करते हैं या अपना । नरेंद्र मोदी अपने 8 वर्षों के शासनकाल में सबसे ज्यादा नजदीकी इजरायल से बढ़ायी है और पेगासस बनानेवाली कंपनी एनएसओ इजरायली रक्षा मंत्रालय के सहयोग से इसका ग्लोबल निर्यात करता है ।

पेगासस जासूसी खुलासा नया नहीं है । 2021 में संसद का मानसून सत्र इस हंगामे की भेंट चढ़ा । उसके पहले सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जा चुका था । जुलाई, 2021 में दुनिया भर के अखबारों में यह खबर उछली कि इजरायल के रक्षा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त एनएसओ कंपनी के स्पाईवेयर पेगासस का इस्तेमाल भारत समेत विभिन्न देशों की सरकारें गैरकानूनी तरीके से पत्रकारों, एक्टिविस्टो(कार्यकर्ताओं)ए मंत्रियों और विपक्षी सदस्यों के खिलाफ जासूसी के लिए कर रही है । भारत में मीडिया ऑनलाइन ‘दि वायर’ ने नाम के साथ यह उजागर किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजनीतिक रणनीति तैयार करनेवाले प्रशांत किशोर, उस समय चुनाव आयुक्त रहे अशोक लवासा और अभी सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भाजपा के निशाने पर थे । उस वक्त अश्विनी वैष्णव मंत्री नहीं थे । निशाने वाली खुलासा सूची में 40 पत्रकारों समेत और भी कई ऐसे नाम थे, जो भाजपा की नीतियों से सहमति नहीं रखते थे ।

2021 में संसद के मानसून सत्र से शुरू हुए इस हंगामे ने शीतकालीन सत्र का पीछा किया और इस वर्ष भी कोई सत्र इससे अछूता नहीं बचेगा ।

अभी के विवाद में नया सिर्फ इतना है कि ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने यह खुलासा ठीक बजट सत्र शुरू होने के समय किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके बावजूद भारत-इजरायल रिश्ते को ‘प्रगाढ़’ बनाने के लिए ‘यही सबसे उपयुक्त समय’ बताया ।

2021 में पूरे वर्ष चले इस हंगामे से बिल्कुल बेखबर नरेंद्र मोदी इजरायल से नजदीकी बढ़ाते रहे ।

02.11.2021 को ग्लासगो में कॉप.26 जलवायु शिखर बैठक के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट से मुलाकात तो इतनी अच्छी रही कि नफ्ताली बेनेट ने अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता भारत के प्रधानमंत्री को दिया ।

उसी समय अमेरिका ने पेगासस कंपनी एनएसओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया । राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने वाणिज्य मंत्रालय को स्पष्ट निर्देश दिया कि अमेरिका के अंदर जासूसी करनेवाली इस कंपनी से कोई सौदा नहीं हो सकता ।

इजरायल का विश्व में अमेरिका से बड़ा हितैषी कोई दूसरा देश नहीं है । लेकिन भारत के नरेंद्र मोदी, अमेरिका को मात देने के लिए देश की अंदरूनी सियासी राजनीति के चलते देश को ही दांव पर लगा दिया है ।

अक्टूबर, 2021 के अंतिम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस स्पाईवेयर के बचाव में सरकार की यह दलील ठुकरा दी कि यह ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जुड़ा मामला है, इसलिए हर बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती ।

27.10.2021 को चीफ जस्टिस एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली तीन सुप्रीम कोर्ट जजों की पीठ ने साफ. साफ कह दिया कि ‘सरकार हर बार राष्ट्रीय सुरक्षा की दुहाई देकर फ्री पास नहीं ले सकती’ठ और मामले की विस्तृत जांच के लिए टेक्निकल विशेषज्ञों की 3.सदस्यीय कमिटी गठित कर दी ।

इसकी बिल्कुल परवाह न करते हुए 31.10.2021 को भारत ने इजरायल के साथ रक्षा से सम्बन्धित मुद्दों पर बातचीत के दौरान एक ‘संयुक्त कार्यदल’ गठित करने पर सहमति जतायी ।

अभी लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने जब पेगासस पर विशेषाधिकार नोटिस दिया तो संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने सुप्रीम कोर्ट की आड़ लेकर इसे गलत करार दिया । सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने और धोखा देने का आरोप का दस्तावेज शीर्ष कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों से ही मिल जाता है।

सरकार को हंगामे का अंदाजा था, इसलिए बजट सत्र के पहले चरण में कोई विधेयक न लाने का फैसला किया T ।

गया ।

2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनएसओ के साथ 2 अरब का रक्षा सौदा करने गए, उसी का हिस्सा है पेगासस स्पाईवेयर । भारत ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंध 30 वर्ष पहले जरूर कायम किए, मगर राजनयिकों का आदान. प्रदान भाजपा गठजोड़ शासनकाल में शुरू हुआ । वर्ष 2000 में भाजपा गठजोड़ शासन में लालकृष्ण आडवाणी इजरायल जानेवाले भारत के पहले गृहमंत्री थे । जसवंत सिंह इजरायल जानेवाले पहले रक्षा मंत्री थे । नरेंद्र मोदी इजरायल जानेवाले पहले प्रधानमंत्री हैं ।

भारत की फिलस्तीनियों के अस्तित्व की लड़ाई से हमदर्दी रही, इसलिए इजरायल से रिश्ता मजबूत गैर-कांग्रेस सरकारों ने नहीं कायम किया । अंदरूनी सुरक्षा के लिए इजरायल से मदद भाजपा सरकार के समय शुरू हुई । अभी भारत एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन ईरान और इजरायल के बीच लड़ाई का माध्यम बना हुआ है । नवंबर, 2021 में जब सुप्रीम कोर्ट में मामला था और दुनिया भर में हंगामा मचा था । उस समय भारत स्थित इजरायली राजदूत नाओर गिलोन और इरानी राजदूत डॉ अली चेगेनी फरवरी, 2020 में इजरायली दूतावास पर हुए हमले के लिए ट्वीटर पर भड़ांस निकाल रहे थे ।