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पुस्तकें

लेखक की प्रकाशित पुस्तकें — उनके विषय, परिचय और उपलब्धता

नक्सल आंदोलन के 50 साल : रास्ता किधर है?

राजनीति और सामाजिक आंदोलन

नक्सल आंदोलन के 50 साल : रास्ता किधर है?

नक्सल आंदोलन स्वतंत्र भारत के सबसे जटिल और लंबे सामाजिक-राजनीतिक संकटों में से एक रहा है। 1967 के नक्सलबाड़ी विद्रोह से शुरू होकर यह आंदोलन भूमि, असमानता, शोषण, राज्य की प्रतिक्रिया, हिंसा और लोकतांत्रिक राजनीति के कठिन प्रश्नों से लगातार जुड़ा रहा है।

कश्मीर टुडे : धारा 370

कश्मीर, संविधान और राजनीति

कश्मीर टुडे : धारा 370

अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति, संवैधानिक स्थिति और भारत की संघीय बहस को नए सिरे से परिभाषित किया। यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक मोड़ को उसके अतीत, वर्तमान और दूरगामी प्रभावों के साथ समझने का प्रयास है।

नगा संकट : भारत की लाइलाज खाज

पूर्वोत्तर, राजनीति और राष्ट्रीय प्रश्न

नगा संकट : भारत की लाइलाज खाज

नगा प्रश्न स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे और जटिल राजनीतिक-सामाजिक संकटों में से एक है। यह पुस्तक नगा आंदोलन, अलग संप्रभु पहचान की मांग, हिंसा, शांति-वार्ताओं और पूर्वोत्तर भारत की बदलती राजनीति को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में समझने का प्रयास है।

कुछ अनसुलझे राज : नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर गुंटर ग्रास

इतिहास और राजनीतिक जीवनी

कुछ अनसुलझे राज : नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर गुंटर ग्रास

गुंटर ग्रास, भारत और नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी यह पुस्तक साहित्य, इतिहास और राजनीति के एक असामान्य संगम को सामने लाती है। नोबेल पुरस्कार प्राप्त जर्मन लेखक गुंटर ग्रास के भारत-प्रवास, कोलकाता से उनके संबंध, भारतीय संस्कृति पर उनकी दृष्टि और नेताजी को लेकर उनके विवादित विचार इस पुस्तक के केंद्र में हैं।

पिकासो : एक जीवनी

कला और जीवनी

पिकासो : एक जीवनी

पाब्लो पिकासो आधुनिक कला के उन विरल चित्रकारों में हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे मानो ब्रश, रंग और तूलिका हाथ में लिये पैदा हुए थे। चित्रकला से लेकर शिल्प, रेखांकन, रंगमंच-सज्जा और दृश्य-रचना तक—कला का शायद ही कोई क्षेत्र हो, जिसे पिकासो ने छुआ न हो।

पत्रकारिता के ज्वलंत मुद्दे

मीडिया और पत्रकारिता

पत्रकारिता के ज्वलंत मुद्दे

पत्रकारिता केवल खबर लिखने की विधा नहीं, बल्कि समाज, सत्ता और सार्वजनिक जीवन को समझने की जिम्मेदारी भी है। इसी बुनियादी दृष्टि से लिखी गई यह पुस्तक हिंदी पत्रकारिता के उन प्रश्नों पर केंद्रित है, जिनसे हर गंभीर पत्रकार, विद्यार्थी और पाठक को गुजरना पड़ता है।

संघर्ष की विरासत : आंग सान सू की

जीवनी और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श

संघर्ष की विरासत : आंग सान सू की

आंग सान सू की का जीवन बीसवीं और इक्कीसवीं सदी के लोकतांत्रिक संघर्षों की सबसे चर्चित कथाओं में से एक है। म्यांमार में सैन्य शासन के विरुद्ध उनके लंबे अहिंसक संघर्ष ने उन्हें अपने देश की सीमाओं से बाहर भी साहस, धैर्य और लोकतांत्रिक आकांक्षा का प्रतीक बनाया।

इरोम शर्मिला और आमरण अनशन

मानवाधिकार और जन-आंदोलन

इरोम शर्मिला और आमरण अनशन

इरोम शर्मिला चानू का संघर्ष आधुनिक भारत के नागरिक प्रतिरोध की सबसे असाधारण कथाओं में से एक है। मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून — AFSPA — के विरोध में उनका लंबा आमरण अनशन केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध नैतिक साहस की अद्वितीय मिसाल है।