कम्यूनिस्ट चीन से सीमा विवाद सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ सरकार द्वारा तय ढर्रे पर चल रही है।
वर्षों से लंबित यह जटिल सीमावर्ती झंझट सलटाने के लिए दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर पर वार्ताओं का सिलसिला भाजपा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में अपने चीन दौरे के क्रम में शुरू किया। उन्होंने ही चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ को इस बात के लिए राजी किया कि विशेष प्रतिनिधि स्तर से वार्ताओं का सिलसिला चलाया जाये ताकि किसी अन्य कारणवश रिश्ते में आई खटास के चलते यह विवाद ठंडे बस्ते में ही पड़ा न रहे। सीमा विवाद सुलझाने के लिए इस स्तर का एक ‘मैकेनिज्म’ तैयार करने के लिए पहले दौर की बातचीत 2003 में ही वाजपेयी शासन के समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र और उनके चीनी काउंटरपार्ट दई बिंगुओ के बीच हुई।
गत सप्ताह 15 जनवरी को शुरू 15वें दौर की सीमावार्ता में भारत की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और चीन की ओर से दई ने ही हिस्सा लिया, जो अभी अपने देश में स्टेट काउंसिलर हैं।
वर्ष 2011 के जनवरी में इसी समय भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी के नेतृत्व में उनकी पार्टी का संसदीय प्रतिनिधिमंडल चीन के सरकारी दौरे पर गया था। गडकरी अपनी पत्नी समेत पूरी तरह पारिवारिक सद्भावना यात्रा पर गये थे। उन्होंने भी चीनी नेताओं से बातचीत के दौरान कहा कि मौजूदा विशेष प्रतिनिधि स्तर की सीमावार्ता 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के दौरान तय ढर्रे पर चल रही है। पांच दिन के अपने चीन प्रवास के क्रम में भाजपा का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उन तमाम महत्वपूर्ण स्थानों पर गया, जहां जहां भारत चीन संयुक्त उद्यम परियोजनाएंं काम कर रही हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने इस बात पर बल दिया कि सरकारी स्तर के अलावे पार्टी स्तर से भी द्विपक्षीय सहयोग और आपसी हित के अहम मुद्दों पर संपर्क बनाये रखने के लिए ऐसी पहल का विशेष महत्व है। नितिन गडकरी का सरकारी दौरा संसद के दोनों सदनों में मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष के रूप में था।
भाजपा शासन काल में भी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी के नेतृत्व में वामदलों का संसदीय प्रतिनिधिमंडल सरकारी दौरे पर चीन भेजा गया था।
भारत-चीन संबंधों के दलाईलामा फैक्टर को भी भाजपा ने कांग्रेस से अलग अंदाज में डील किया। भाजपा शासनकाल में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ जब दिल्ली आनेवाले थे, उस समय जंतर-मंतर पर जत्थेवार अनशन कर रहे तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं को वहां से जबरन हटा दिया गया। चीनी दूतावास के सामने सड़क पर लेटने की उनकी कोशिश नाकामयाब कर दी गई थी। अभी नवम्बर 2011 में शिवशंकर मेनन और दई की बातचीत सिर्फ इसलिये नहीं हो पायी, क्योंकि उसी समय दिल्ली में आयोजित विश्व तिब्बती सम्मेलन स्थगित करने का चीनी आग्रह भारत सरकार ने नामंजूर कर दिया।
अप्रैल 2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वेन जियाबाओ की सान्या में इस मुद्दे पर बातचीत उसी मैकेनिज्म पर केन्द्रित थी। उसके पहले 2010 में वेन जब दिल्ली आये तब भी वाजपेयी के योगदान की चर्चा हुई, जिसका उल्लेख जनवरी 2011 में नितिन गडकरी ने चीन में किया।
अन्य पड़ोसी देशों के साथ विवादित संबंध को बेहतर बनाने में भी भाजपा की ओर से सार्थक पहल हुई है। इसी हफ्ते विदेशमंत्री एस-एम. श्रीकृष्ण के श्रीलंका की चार दिवसीय यात्रा से लौटने के बाद लोकसभा में विपक्षी नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज का श्रीलंका जाने का कार्यक्रम बना है। विधानसभा चुनाव के बाद वे कोलंबो जाएंगी। हाल ही में वे चेन्नई जाकर तमिलों को सांत्वना दे आयी हैं। श्रीलंका सरकार ने लिट्टे सफाया युद्ध से विस्थापित तमिल अल्पसंख्यकों के पुर्नवास के लिए कोई ठोस कार्यक्रम नहीं शु रू किया है, न ही उन्हें सिंहलियों के समान नागरिक अधिकार देने को तैयार है। जबकि भारत सरकार ने तमिलनाडु की भावनाओं के मद्देनजर श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास के लिए करोड़ों में सहायता उपलब्ध करायी है।
गत सप्ताह नेपाल की यात्रा पर भी भाजपा की नजर है। क्योंकि चीन द्वारा तिब्बत के रास्ते नेपाल तक रेल नेटवर्क तैयार करने की रिपोर्ट है ताकि भारत की सीमा के और ‘करीब’ पहुंचा जा सके। सुषमा स्वराज ने विगत दिनों एक सेमिनार में कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े वैदेशिक मामलों में भी सरकार के साथ-साथ विपक्ष का दायित्व बनता है।
रक्षाहित को ध्यान में रखकर इजराइल से नजदीकी स्थापित करने में भी मुख्य रूप से पहल भाजपा ने की है। भाजपा शासनकाल में जसंवत सिंह ने विदेशमंत्री और रक्षामंत्री के रूप में इजराइल का दौरा किया। गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी अपने पहले विदेशी दौरे पर इजराइल गये। विदेशमंत्री एस-एम. कृष्णा इसो महीने इजराइल दौरे से लौटे हैं।