श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर अपनी हत्या की भारत द्वारा कथित ‘साजिश’ का पहले खुलासा किया और इस मीडिया खबरों का बार-बार खंडन किया । फिर अपने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को भारत के दौरे पर भेजा । लेकिन मामला यहीं खतम नहीं हुआ । श्रीलंका सरकार रचित इस सियासी तमाशा और उससे जुड़े पेंचों से कुछ अन्य षडयंत्रों के तार परत-दर-परत खुल रहे हैं । श्रीलंका के सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों ही राजनयिकों की मिलीभगत से सोची-समझी सुनियोजित कूटनीति के तहत यह विवाद खड़ा किया प्रतीत होता है । जितनी बातें सामने आ रही हैं, सबका ओर-छोर संदेह पैदा करनेवाला है ।

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने मंत्रिमंडल की बैठक में गत हफ्ते एम. थॉमस नामक एक भारतीय के हवाले से बताया कि भारत की एलीट खुफिया एजेंसी ‘रॉ’(तॅ. रिसर्च एंड एनेलिसिस विंग) उनकी हत्या करना चाहता है । राष्ट्रपति के अनुसार उसभारतीय ने ‘रॉ’ की इस साजिश की जानकारी होने का दावा किया। यह खबर स्वाभाविक रूप से श्रीलंका के प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में सुर्खी बनी । सिरिसेना अच्छी तरह जानते थे कि यह खबर तो उछलना ही है । जब पूरी तरह उछल गयी, तब श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके इन मीडिया रिपोर्टों को ‘गलत’ बताया । उतना ही नहीं, मैत्रीपाला सिरिसेना खुद और उनके राष्ट्रपति भवन कार्यालय ने बार-बार इस पर सफाई तथा स्पष्टीकरण दिया ।

17 अक्टूबर को श्रीलंका के राष्ट्रपति सिरिसेना ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके ‘सफाई’ दी और उसके तुरंत बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे नयी दिल्ली पहुंच गए । विक्रमसिंघे तीन दिन भारत में रहे । श्रीलंका में भारत के सहयोग से चल रही इन्फ्रा परियोजनाओं को फोकस में रखा गया । लेकिन जो चर्चा हॉट थी, उस पर दोनों देशों के नेताओं की चर्चा हुई या नहीं, इस पर संशय बरकरार रहा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने श्रीलंकाई काउंटरपार्ट के सम्मान में भोज दिया । विदेशमंत्री सुषमा स्वराज, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, संयुक्त प्रगतिशील गठजोड़ की चेयरपसन सोनिया गांधी समेत कई नेता श्रीलंकाई प्रधानमंत्री से मिले । मुलाकातों के बारे में सिर्फ इतनी ही सूचना बाहर आयी कि दोनों देशों के आपसी सहयोग और रिश्ते पर बातचीत हुई । भारत-श्रीलंका रिश्ता नाजुक मोड़ पर है और इसका एक कारण है, चीन से श्रीलंका की नजदीकी और दूसरा है, तमिलनाडु । क्योंकि श्रीलंका में नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर चले संघर्ष का वहां की सरकार सफाया कर चुकी है । यह तमिलनाडु का कभी न भरने वाला जख्म है । ऐसे में श्रीलंकाई प्रधानमंत्री की भारतीय प्रधानमंत्री समेत विभिन्न राजनयिकों से भारत की खुफिया एजेंसी द्वारा श्रीलंकाई राष्ट्रपति की हत्या की कथित साजिश वाली विवादास्पद खबर तथा उसके खंडन-मंडन की चर्चा न होना अटपटा लगता है ।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री तो स्वदेश लौट गए, मगर श्रीलंका से ज्यादा भारत में हॉट चर्चा बनी बकौल सिरिसेना ‘फर्जी’ यह खबर कुछ और खुलासे लायी । खबर भारत की है पर तार श्रीलंका से जुड़ा है । जिसभारतीय एम थॉमस के हवाले से श्रीलंका के राष्ट्रपति ने अपनी हत्या की ‘साजिश’ का प्रचार किया वो श्रीलंका के ही जेल में है । उसे आतंक-निरोध कानून के अंतर्गत एक महीना पहले 23 सितंबर को कोलंबो में एक श्रीलंकाई नागरिक नामल कुमारा के घर से गिरफ्तार किया गया । नामल कुमारा स्वयंभू भ्रष्टाचार निरोध आंदोलनकारी कहलाता है ।

श्रीलंकाई अधिकारियों ने ‘थॉमस’ की पहचान इसी नाम से बतायी है । विक्रमसिंघे के स्वदेश लौटने के एक ही दिन बाद मुंबई के एक व्यक्ति ने खुद को थॉमस का भाई बताते हुए कहा कि थॉमस मानसिक रूप से विक्षिप्त है । सूत्रों के मुताबिक थॉमस के भाई ने भी अपना नाम नहीं खोला और कहा कि थॉमस की दिमागी हालत सही नहीं है, शारीरिक रूप से भी विकलांग है इसलिए उसे तत्काल जेल से रिहा करके उसके मानसिक इलाज की जरूरत है । थॉमस के भाई ने और भी कई सनसनीखेज खुलासे किए । थॉमस के भाई के अनुसार 25 संतबर को भारतीय अधिकारी उससे मिले और बताया कि थॉमस को श्रीलंका में उसके टूरिस्ट वीसा की अवधि समाप्त होने के काफी समय बाद तक टिके रहने के कारण गिरफ्तार किया गया । उसने कहा कि भारतीय अधिकारी थॉमस की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसका आधार कार्ड देखना चाहते थे । गिरफ्तारी से एक सप्ताह पहले थॉमस से बात हुई और उसने कहा - ‘मेरी जान को खतरा है और वो जान के दुश्मनों से घिरा है ।’ यह बात भी थॉमस के भाई ने ही बतायी जो चेन्नई से आकर मुंबई में रहता है और चेन्नई में इसके काफी संपर्क हैं । थॉमस के भाई के मुताबिक 1997 में एक दुर्घटना में उसके सिर में भारी चोट लगी और उसी समय से वो मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया, उसे जेल की नहीं, इलाज की जरूरत है ।

23 सितंबर से जेल में बंद श्रीलंका सरकार द्वारा पहचाॅनित थॉमस के भाई का यह कथन अगर सही है तो श्रीलंकाई अधिकारियों को एक महीना में कैसे नहीं पता चला कि थॉमस मानसिक रूप से बीमार है । अगर पता चल गया कि वो एक विक्षिप्त के हवाले से राष्ट्रपति ने इतना बड़ा हंगामा कैसे खड़ा कर दिया? इसके पीछे क्या इरादे हो सकते हैं, यह गंभीर चर्चा का विषय बनता है । क्योंकि इस पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलायो ।

इस पूरे प्रकरण पर भारतीय अधिकारियों ने चुप्पी लगा रखी है । श्रीलंकाई प्रधानमंत्री को भारतीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि श्रीलंका में आम चुनाव से पहले भारत उसकी सभी परियोजनाओं का काम पूरा कर देगा । श्रीलंका में 2020 में आम चुनाव है और उसके पहले 2019 में भारत में आम चुनाव आ जाएगा । श्रीलंका में भी अन्य पड़ोसी देशों की तरह भारत के प्रति नफरत का चुनावी कार्ड चलता है । भारत के भी तमिलनाडु में श्रीलंका के साथ रिश्ते का विधान सभा और लोकसभा दोनों चुनावों पर असर पड़ता है ।

तमिल मामले को लेकर भारत से बैर की उपज पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षा को हराकर जनवरी, 2015 में मैत्रीपाला सिरिसेना राष्ट्रपति बने और सबसे पहले भारत आए । मई, 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में भाग लेने राष्ट्रपति माहिंदा राजपक्षा आए थे । 2015 में सिरिसेना ने संविधान संशोधन करके राष्ट्रपति पद को दो कार्यकाल तक सीमित कर दिया । महिंदा राजपक्षा दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं । हाल में उन्होंने भारत आकर 2020 में तीसरी बार चुनाव लड़ने का संकेत दिया ।

महिंदा राजपक्षा गत माह उस समय भारत में थे, जब श्रीलंका सरकार ने अपने राष्ट्रपति की हत्या की कथित साजिश की जानकारी देनेवाले थॉमस को गिरफ्तार किया । महिंदा राजपक्षा ‘भारत-श्रीलंका रिश्ते: बदलते आयाम’ पर व्याख्यान देने सितंबर में आए और उसी समय श्रीलंका में नये ‘आयाम’ की तैयारी चल रही थी । महिंदा राजपक्षा ने तमिल जले पर नमक छिड़ककर खटास पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी । तमिल विद्रोही गुट लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम(लिट्टे) का युद्ध के सभी मानदंडों को ताक पर रखकर सफाया को उचित ठहराते हुए महिंदा राजपक्षा ने यह भी कह डाला कि लिट्टे भारत के लिए भी खतरा था, क्योंकि इसी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की । भाजपा के ही सुब्रमण्यम स्वामी ने राजपक्षा को आमंत्रित किया ।

राजपक्षा ने 2008-09 के लिट्टे युद्ध के समय भारत-श्रीलंका के बीच राजनयिक विचार-विमर्श में श्रीलंका की ओर से आए जिन राजनयिकों का नाम लिया, उसमें रक्षा सचिव गोताबाया राजपक्षा भी थे ।

अभी राष्ट्रपति मैत्रीपाला ने जो कथित ‘रॉ’ साजिश का खुलासा किया, उसमें मैत्रीपाला सिरिसेना के साथ गोताबाया राजपक्षा की भी हत्या की बात कही गयी । सिरिसेना स्वयं महिंदा राजपक्षा मंत्रिमंडल में शामिल थे । चुनाव के समय साथ छोड़कर उन्होंने राजपक्षा को हराया ।

राजपक्षा ने सितंबर में दिल्ली आने से पहले यह प्रचारित कर दिया कि भारत ने साजिश करके उन्हें हरवाया । राजपक्षा ने चुनाव में चीन से मदद ली और सिरिसेना भी चीन से सट गए । श्रीलंकाई प्रधानमंत्री के लौटने के दो दिन बाद 22 अक्टूबर को चीन के गृहमंत्री झाओ केझी दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ सुरक्षा सहयोग समझौता किया । भारत और चीन के बीच ऐसा पहला समझौता है ।

थॉमस के भाई ने ये भी बताया कि 2016 के बाद उसने थॉमस को नहीं देखा है और 2017 में उसने श्रीलंका में मजे में रहने की बात कही । उस समय से दोनों ‘भाई’ मिस्ट कॉल से संपर्क में थे । गत महीने थॉमस के गिरफ्तार होने और इस महीने कथित साजिश में उसका नाम घसीटने की जानकारी मिली ।