पड़ोसी देशों में चीन एकमात्र इतना शक्तिशाली है जो भारत के लिए चुनौती है । पाकिस्तान हमेशा से चीन के निकट रहा है और भविष्य में भी रहेगा । लेकिन नेपाल, बांग्लादेश और समुद्री पड़ोसी श्रीलंका भी भारत के बजाए चीन को अपना ज्यादा ‘हितैषी’ मानते हैं ।
विदेश नीति के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘पड़ोसी प्रथम’ वाले सिद्धान्त पर चल रहे नरेंद्र मोदी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ सरकार के लिए पड़ोसी देशों का यह रवैया चिंता का कारण बना हुआ है ।
सीमावर्ती बनाव के बावजूद चीन भारत से द्विपक्षीय वार्ता जारी रखा है । क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सनकी टैरिफ नीति ने चीन और अमेरिका को आमने-सामने ला खड़ा किया है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की ‘दोस्ती’ जानते हुए भी चीन ने ऐसी रणनीति अपनायी है, जिससे भारत के साथ व्यापारिक हितों को कोई नुकसान न पहुंचे । उसके अलावे सामाजिक रिश्ते अनुकूल रखना भी चीन के अजेंडे में है । कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा पर भारत और चीन के अधिकारियों के बीच इस हफ्ते सहमति बनी । जुलाई से यात्रा शुरू होगी । सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने हाल ही में कहा कि गत अक्टूबर से दोनों देश पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की संख्या कम करने और फौजी कमांडरों के ही स्तर से गश्ती तथा अन्य छोटी-मोटी वारदातें सुलझाने के प्रयास में जुटे हैं ।
भारत एक सीमा से ज्यादा चीन की परवाह नहीं करता । चीन इस बात को समझता है ।
चीन के वाणिज्य और व्यापार मंत्रालय ने 21.04.2025 को भारत समेत सभी देशों को अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ चेताया कि अमेरिका के साथ कोई व्यापारिक समझौता न करें । उसी दिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेन्स अपने परिवार के साथ भारत से व्यापार समझौते पर वार्ता करने दिल्ली में थे । 12 वर्षों में भारत आनेवाले पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं जे. डी. वेन्स । इसके पहले जो बाइडन 2013 में दिल्ली आए थे ।
भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता काफी समय से बंद है, जिसका एक प्रमुख कारण है जम्मू व कश्मीर का विशेष संवैधानिक प्रावधान धारा-370 को समाप्त करके 2019 में इसे पूरी तरह भारतीय हिस्सा बनाने का भारत सरकार का फैसला । उस समय चीन ने भी इसके खिलाफ बयान दिया था और अभी भी चीन कश्मीर पर पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश से भी आधिकारिक स्तर की वार्ता सहजता से शायद न हो पाए । अगस्त, 2024 में शेख हसीना को अपदस्थ पर मोहम्मद युनुस के अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार बनने के बाद से बांग्लादेश पर चीन और पाकिस्तान दोनों हावी हैं ।
04 अप्रैल, 2025 को बैंकॉक में बिम्स्टेक(BIMSTEC) क्षेत्रीय सम्मेलन में पहुंचे नरेंद्र मोदी और मोहम्मद युनुस की मुलाकात अच्छे माहौल में नहीं हुई । क्योंकि उसके पहले मोहम्मद युनुस चीन जाकर बंगाल की खाड़ी में ऐसे कारोबार के लिए आमंत्रित कर आए, जो सीधे भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल व्यापारिक मुहाने पर है । उतना ही नहीं युनुस पाकिस्तान से करीबी स्थापित करने की कोशिश में भी जुट गए । भारत और बांग्लादेश के बीच वहां हो रहे हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हमले समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर तल्ख बयानबाजी बढ़ती जा रही है । अप्रैल में पाकिस्तान ने भारत से सामाजिक रिश्ते सहज करने के लिए भारतीय सिख श्रद्धालुओं को 50 वर्षों में पहली बार 6,751 वीजा जारी किए । 1974 के पाकिस्तान-भारत धार्मिक प्रोटोकॉल समझौते के अंतर्गत किसी भी धार्मिक त्योहार में भाग लेने के लिए सिर्फ 3,000 तीर्थ यात्रियों को ही इजाजत है ।
10 अप्रैल को सिख तीर्थयात्रियों का जत्था बाघा बोर्डर पार करके ननकाना साहिब के रास्ते में था और पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भारत-बांग्लादेश रिश्ते में आयी तल्खी का फायदा उठाने की तैयारी में जुटा था । शेख हसीना 15 साल के शासनकाल में पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी और चीन से भी औपचारिक रिश्ता रखा । पाक विदेश सचिव आमना बलूच 2010 से टूटा कूटनीतिक रिश्ता जोड़ने 16.04.25 को ढाका पहुंची । बांग्लादेश से विदेश कार्यालय मशविरा स्थापित करने के विषय में बांग्ला विदेश सचिव मोहम्मद जशीमुद्दीन से आमना बलूच मिली ।
शेख हसीना के नेतृत्ववाली बांग्लादेश की अवामी लीग सरकार की भारत से नजदीकी रही । अगस्त, 2024 में अपदस्थ किए जाने के बाद से हसीना ने भारत में शरण ले रखी हैं । बिम्स्टेक(BIMSTEC) की बैंकॉक शिखर बैठक के सिलसिले में नरेंद्र मोदी ने जब मुहम्मद युनुस से हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हमला बंद करने कहा तो जवाब में युनुस ने शेख हसीना को बांग्लादेश भेजने बोला ।
एक तरफ तो भारत-चीन कूटनीतिक रिश्ते की 75वीं वर्षगांठ का ‘खुशनुमा’ माहौल है और दूसरी तरफ पड़ोसी देश अपने व्यापारिक तथा कूटनीतिक सरोकार में चीन को ज्यादा तवज्जो देकर भारत के अंदर बाहर माहौल बिगाड़ रहे हैं ।
मोहम्मद युनुस चीन-बांग्लादेश रिश्ते की 50वीं वर्षगांठ चीन जाकर मना आए । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेन्स से मिलकर सऊदी अरब के लिए रवाना हुए, लेकिन बीच में ही लौटना पड़ गया । प्रधानमंत्री तुरंत एक्शन में आए, पाक राजनयिकों को भारत छोड़ने का अल्टीमेटम दिया । 22.04 को कश्मीर के प्रमुख पर्यटक स्थल पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले में 28 की मौत हुई । मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई गंभीर रूप से जख्मी हुए । 2019 में पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद यह सबसे बड़ा हमला था । ठीक दुपहरी में सेना और पुलिस की वर्दी में पांच-सात जवानों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी । नाम पूछ-पूछकर मारा ।
नरेंद्र मोदी 1960 की सिंधु जल संधि स्थगित की, जिससे पाकिस्तानी जल को तरसेंगे । हमले में जे. डी. वेन्स दिल्ली में ही थे और रक्षा-व्यापार सौदे को अंतिम रूप दे रहे थे । प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक छद्म गुट ने हमले की जिम्मेदारी ली, जिसके बारे में बताया जाता है कि यह गुट अगस्त, 2019 के बाद बना है ।
भारत-पाक कूटनीतिक संपर्क आवाजाही खत्म हो गयी । 22.04.2025 की इस जघन्य घटना से पहले पाक सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘नस’ बताया और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कान्फ्रेंस (ओआईसी) ने इसका समर्थन किया । पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों इस संगठन के सदस्य हैं । भारत ने पाकिस्तान और ओआईसी दोनों को करारा जवाब दिया । उस समय भारत स्थित चीनी राजदूत शू फेइहोंग भारत के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की बात कह रहे थे और यहां लोग इस बात से खुश थे कि 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प के बाद से तनाव कम होता गया है । उसमें दोनों देशों के सैनिक मारे गये थे ।
चीन ने कभी-भी संयुक्त राष्ट्र समेत किसी अंतरराष्ट्रीय फोरम पर आतंकवाद को तरजीह देने के लिए पाकिस्तान की निंदा नहीं की ।
आतंक संचालक पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का दस्ता फरवरी, 2025 में ढाका पहुंचा । उसी समय बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने मस्केट में भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान दक्षिण एसियाई क्षेत्रीय सम्मेलन(सार्क) को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया, जो 2006 के उरी हमले के बाद से डंप है ।
सार्क की तरह बिम्स्टेक भी भारत की पहल पर बना संगठन है । खाड़ी देशों का आपस में तकनीकी और आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाला बिम्स्टेक में पाकिस्तान नहीं है । इसमें खाड़ी देशों से सटे देश नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाइलैंड हैं ।
सम्मेलन समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैंकॉक से कोलंबो रवाना हुए । 05.04.2025 को श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके के साथ नरेंद्र मोदी ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए और 10 दिन बाद श्रीलंका ने भारतीय समुद्री सीमा के निकट पाकिस्तान को सैन्य अभ्यास की इजाजत दे दी। भारत के एतराज के बाद ना कहा ।
सितंबर, 2024 में श्रीलंका में अपनी कम्युनिस्ट पार्टी नेशनल पीपुल्स पावर(छच्च) की भारी जीत के बाद राष्ट्रपति बने दिसानायके दिसंबर में भारत आये और फिर जनवरी, 2025 में चीन गए । चीनी जंगी जहाज के लिए श्रीलंका ने हंबनटोटा बन्दरगाह 99 वर्ष के लिए चीन को दिया हुआ है ।
दिसंबर, 2024 में ही नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली चीन जाकर बीआरआई(बेल्ट रोड इनिशिएटिव) समझौता कर आए, जिसका पाकिस्तान से भी ताल्लुक है ।
नेपाल में कम्युनिस्ट गठजोड़ सरकार और म्यांमार में चीन समर्थित सैनिक तानाशाही है, जो चीन के इशारे पर भारत के पूर्वोत्तर उग्रवादियों को उकसाता है । भुटान इस विवाद से अलग है ।