इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस से भारत के अंदर जासूसी को लेकर घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है । पेगासस के जरिए भाजपा समेत विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं, उद्योगपतियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की कथित जासूसी पर हंगामे के कारण संसद का मानसून सत्र शुरू होने के दिन से लेकर लगातार हंगामे की भेंट चढ़ा हुआ है । संसद के दोनों सदनों में दस दिनों से सदस्य बार-बार इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति(जेपीसी) से जांच की मांग उठा रहे हैं और सरकार से स्पष्ट बताने की मांग कर रहे हैं कि इजराइली फोन हैकिंग जासूसीवयर पेगासस से लोगों की निगरानी हुई या नहीं । भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा समेत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्री इन आरोपों से इन्कार करते हुए उल्टे विपक्ष पर संसद नहीं चलने देने का आरोप तो लगा रहे हैं, मगर न तो जेपीसी से जांच कराने का तैयार हो रहे हैं न ही इस बहुचर्चित राजनीतिक विवाद पर वक्तव्य देने को । जबकि सत्र के पहले दिन 19 जुलाई को जब संसद में इस विवाद पर हंगामे की शुरूआत हुई तो प्रमुख नेताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावे कई केंद्रीय मंत्रियों के भी नाम उछाले । रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्वनी वैष्णव, जलशक्ति राज्यमंत्री पहलाद पटेल का नाम सुर्खियों में आया । विपक्षी नेताओं में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) के भतीजे अभिषेक बनर्जी का भी नाम आया । गैर-भाजपा दलों के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी पेगासस जासूसी नेटवर्क राडार में थे ।
राहुल गांधी ने अपनी फोन टेपिंग पर भाजपा को नया नाम देकर(भारतीय जासूस पार्टी) प्रतिक्रिया व्यक्त की । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप हैं । 19 जुलाई को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्वनी वैष्णव ने जो खुद की जासूसी समेत इस सनसनीखेज आरोप का खंडन किया, उसी को अन्य मंत्री भाजपा सांसद और बोलने में मुखर पूर्व मंत्री, रविशंकर प्रसाद बार-बार दुहरा रहे हैं । संसद सदस्यों ने सबसे ज्यादा हंगामा पूर्व और वर्तमान संवैधानिक पदाधिकारियों की कथित जासूसी की खबरों पर मचाया । पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने अपने फोन की जासूसी पर कोई टिप्पणी नहीं की ।
इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस की कथित जासूसी को लेकर सबसे ज्यादा हंगामा भारत में हो रहा है । इस फोन टैपिंग नेटवर्क की सबसे ज्यादा गहराई तक घुसपैठ भारत में हैं । दुनिया के किसी भी अन्य देश से ज्यादा इजराइल की नजदीकी नरेंद्र मोदी शासनकाल के सात वर्षों में भारत से बढ़ी है । पेगासस को लेकर इजराइल में भी विपक्षी नेताओं ने हंगामा मचाया हुआ है । अन्य देशों में भी इजराइल के इस सॉफ्टवेयर से विवाद खड़ा हो गया है । दुनियाभर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है । फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट को फोन करके अपने फोन की जासूसी की शिकायत बतायी ।
ग्लोबल मीडिया कन्सोर्टियम की ताजी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 50,000 सेलफोन नंबरों की जासूसी पेगासस के जरिए की जा रही है । इस सॉफ्टवेयर का निर्माण इजराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप ने की है और इजराइली रक्षा मंत्रालय के सहयोग से इसका ग्लोबल निर्यात होता है । मीडिया कन्सोर्टियम कंपनी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय अखबारों में आयी है कि फ्रांस के राष्ट्रपति और उनकी सरकार के 15 मंत्रियों के मोबाइल फोन की पेगासस से जासूसी की जा रही है। इजराइल ने भी विश्व के किसी भी देश से ज्यादा मजबूत रिश्ते हालिया वर्षों में भारत से बनाए हैं । इजराइल के पुराने दोस्तों में अमेरिका और फ्रांस की तुलना में भारत का पलड़ा भारी तो नहीं, लेकिन समान कहा जा सकता है ।
लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और उनके अन्य मंत्री पेगासस जासूसी का तार इजराइल से जुड़े होने के कारण इस सनसनीखेज मामले पर स्पष्ट कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री वित्त मंत्री पी. चिदबंरम ने 25 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में बयान देने की मांग की । प्रधानमंत्री ने चुप्पी साधे रखी । और 25 जुलाई को ही फ्रांस के राष्ट्रपति ने इजराइल के प्रधानमंत्री से फोन करके विरोध जताया और अपनी संसद को विश्वास में लेने के लिए बयान दिया । लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजराइल की पेगासस जासूसी पर तो भरोसा है, मगर अपनी संसद को भरोसा में लेना वे जरूरी नहीं समझते ।
इजराइल के चैनल-12 ने 25 जुलाई को दिखाया कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रोन ने इजराइली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट को फोन करके कहा कि ‘इस मामले को गंभीरता से लिया जाए ।’ उसके पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा की बैठक बुलाकर पेगासस जासूसीवेयर से देश में उत्पन्न असुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया ।
इजराइली प्रधानमंत्री बेनेट ने जवाब में मेक्रोन को बताया कि ये आरोप उस समय के हैं, जब वे प्रधानमंत्री नहीं बने थे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति को इस मामले को देखने का भरोसा दिलाया ।
मानसून सत्र शुरू होने के दिन 19 जुलाई को जिस वक्त भारतीय संसद में पेगासस जासूसी को लेकर विपक्षी सदस्य सरकार को ‘देश पहले, राजनीति बाद में’ वाले भाजपा के ही प्रचार की याद दिला रहे थे, उसी वक्त उसी दिन इजराइली संसद में गठजोड़ सरकार के एक घटक ने ही अपने रक्षा मंत्रालय से जवाब-तलब किया । मोरेज पार्टी के प्रमुख स्वास्थ्य मंत्री नित्जान होरोविज ने संसद नशे से बाहर निकलकर संवाददाताओं को बताया कि पेगासस जासूसी वेयर के जरिए विश्वभर में पत्रकारों, अधिकारियों और मानवाधिकार के लिए लड़नेवाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की फोन टेपिंग की रिपोर्टों के संबंध में अपने रक्षामंत्री से बात करेंगे । उन्होंने कहा कि पेगासस बनानेवाली कंपनी एनएसओ के ऐसे विवादास्पद निर्यात से देश की छवि खराब हुई है । 17 मीडिया संगठनों की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसओ स्पाईवेयर का विश्वभर में दुरूपयोग हो रहा है । होरोविज इजराइल रक्षा मंत्री निर्णायक सुरक्षा मंत्रिमंडल के एक सदस्य भी हैं ।
एनएसओ को पेगासस जासूसीवेयर के निर्यात का लाइसेंस देनेवाला इजराइल का रक्षा मंत्रालय चुप है । फ्रांस के राष्ट्रपति की शिकायत के जवाब में एनएसओ ने सफाई दी कि इमैनुएल मेक्रोन का मोबाइल फोन पेगासस की निगरानी में नहीं है । लेकिन इजराइल में भी इस शिकायत स तहलका मचा हुआ है । रक्षा मंत्रालय ने एनएसओ के साथ बैठकें की जिसमें इजराइल की सरकारी खुफिया एजेंसी मोसाद के पूर्व प्रमुख बेन-बाराक शामिल थे । अमेरिकी सीआईए के बाद दुनिया की सबसे मजबूत और खतरनाक खुफिया एजेंसी मानी जाती है - ‘मोसाद’ । इमनुएल मेक्रोन का सीधा आरोप है कि मोरक्को की फौज ने उन पर और उनके 15 मंत्रियों की जासूसी के लिए पेगासस का इस्तेमाल किया । इजराइल, फ्रांस की सरकार हरकत में आयी । किसी भी देश ने अपने आंतरिक मामले की इजराइली जासूसी का विरोध जताने से ज्यादा इजराइल से रिश्ते को महत्व नहीं दिया ।
इजराइल से ‘नजदीक रिश्ता’ भारतीय जनता पार्टी की है, भारत की नहीं । इसलिए समूचे भारत के सारे गैर-भाजपा दलों के भारी विरोध के बावजूद भाजपा सरकार इस विवाद से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है ।
हर मुद्दे पर हमेशा बोलते रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप हैं । क्योंकि वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी भाजपा गठजोड़ सरकार(1999-2004) के दौरान इजराइल से स्थापित नजदीकी को काफी आगे तक ले गए हैं ।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में पेगासस जासूसी पर बहस की मांग की । दोनों ने संयुक्त संसदीय समिति या सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत जज से मामले की जांच कराने की मांग की ।
सरकार की अनसुनी के दौरान ही दीदी(ममता बनर्जी) ने पेगासस जासूसी की जांच के लिए अपनी ओर से अलग जांच आयोग गठित करने का एलान कर दिया । 1952 के जांच आयोग एक्ट के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत प्राप्त अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज मदन बी. लोकुर और कलकता हाईकोर्ट के रिटायर चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य को जांच आयोग का सदस्य नियुक्त किया । इस एक्ट के तहत केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जांच आयोग गठित करने का अधिकार प्राप्त है ।
पेगासस जासूसीवेयर के जरिए भाजपा की निगरानी राजनीति और उसके विरोध में नया राजनीतिक मोड़ आ गया । नरेंद्र मोदी-दीदी के बीच बंगाल विधान सभा चुनाव के समय से ठनी हुई है । दीदी ने पेगासस के खिलाफ जांच आयोग का गठन दिल्ली जाने से पहले कर डाला । नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तीसरा मोर्चा बनाने के सिलसिले में विभिन्न दलों से तीन दिनों की भेंट-मुलाकात के लिए दीदी 26 जुलाई को जांच आयोग को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद दिल्ली रवाना हुई । उसी समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व सहयोगी वी. के. जैन की भी फोन टेपिंग की खबर आयी ।
इजराइली जासूसीवेयर की भारत के अंदर चल रही खुफियागिरी को हल्के ढंग से नहीं लिया जा सकता । नरेंद्र मोदी शासनकाल में भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से लेकर कृषि, व्यापार, वाणिज्य और लगभग सारे राष्ट्रीय मामलों में गहराई तक इजराइली निर्भरता कायम हुई है ।
इससे भाजपा की कश्मीर नीति भी प्रभावित हुई है । कश्मीर में और दुनियाभर के मुस्लिम बहुल आबादी वाले देशों में भाजपा की कश्मीर नीति की तुलना इजराइल की फिलस्तीन नीति से करते हैं ।
गौरतलब है कि भारत में किसी भी गैर-भाजपा सरकार ने इजराइल से नजदीकी को महत्व नहीं दिया । विदेशी और घरेलू नीति में अंदर तक इजराइल की ऐसी घुसपैठ पहले नहीं देखी गयी । इजराइल जानेवाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, नरेंद्र मोदी । 2000 में इजराइल जानेवाले भारत के पहले गृहमंत्री थे, लालकृष्ण आडवाणी और पहले रक्षा मंत्री थे, जसवंत सिंह ।