Short Stories

कहानियाँ

लघु कथाएँ और समाज-आधारित रचनाएँ

आत्मसम्मान

इंदिरापुरम स्थित मेरे फ्लैट के सामने वाले घर में झाड़ूपोछा बर्तन करती है दुर्गा । चौथे माले पर टॉप फ्लोर के इस दोनों फ्लैट के बीच में टेरेस है । एक ही सीढ़ी से चढ़ना उतरना पड़ता है । दुर्गा जब तक अंदर सब काम करती है, उसका छोटा बच्चा बाहर दो-चार सीढ़ी नीचे उतरकर मां के इंतजार में बैठा रहता है । मेरा दरवाजा प्रायः खुला रहता है, इसलिए बच्चे पर रोज नजर पड़ती है । एक दिन वो बच्चा मेरी तरफ वाली सीढ़ी पर दरवाजे के पास बैठ जाता है । बच्चे की आंखों में भूख और कुछ खाने की ललक मुझे प्रतीत हुई ।

भीख के खुल्ले पैसे

दिल्ली से पटना जा रही ट्रेन श्रमजीवी एक्सप्रेस की स्लीपर क्लास बॉगी - जनरल क्लास से थोड़ा बेहतर । क्योंकि बर्थ अगर रिजर्व है तो रात को सोने की जगह मिल जाती है । अपने नियत समय दिन के एक बजकर 15 मिनट यानी सवा बजे गाड़ी खुलती है । समय ऐसा है कि ड्यूटी जानेवालों की भीड़ नहीं है, इसलिए थोड़ी राहत है । खचाखच भीड़ में भिखमंगे भी कम चढ़ते हैं । धक्कामुक्की में लंगड़ाते हुए चलना या भीख मांगने की लाचारी मजबूरी दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता । लकुटिया टिकाने के लिए भी तो जगह चाहिए । मैं अक्सर श्रमजीवी एक्सप्रेस से दिल्ली पटना आना-जाना करता रहा हूँ और स्लीपर क्लास से ही चलता हूँ - चाहे रिजर्वेशन हो या न हो । पटना से इस ट्रेन के खुलने का समय सबेरे 11 बजे है । पटना से दिल्ली आने में भी भीड़ से कम साबका पड़ता है । क्योंकि ऑफिस जानेवालों का समय बीत चुका होता है । भिखमंगे भी दिल्ली की तुलना में प्लेटफार्म पर या डब्बे में कम नजर आते हैं ।

चोट

वर्ष 1997 का अगस्त महीना । दिन के एक डेढ़ बजे दिल्ली के आनंद बिहार बस स्टॉप पर खड़ा हूँ । मुझे 534 नंबर की बस पकड़नी है । सुबह-शाम की तरह भीड़ दुपहरी में नहीं होती आईटीओ और मंडी हाउस की सीधी बस कम होने के कारण बस बदलकर जाना पड़ता है । मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है । इसलिए डायवर्सन के चलते उस रूट से जाना पड़ता है, जिधर मेट्रो अभी नहीं जानेवाला है । दोपहर में डीटीसी और प्राइवेट दोनों ही बसों की आवाजाही जब देर -देर से होती है, तो कभी-कभी भीड़ हो जाती है । तेज बारिश के कारण बस स्टॉप पर बने शेड में भींगने से बचना मुश्किल हो गया है । इसलिए जो भी बस आ रही है, लोग आगे बदलने और बारिश से बचने के लिए चढ़ जाते हैं । अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे आनंद बिहार से ही बसें बनकर चलती हैं । फिर भी लटकने की नौबत है । 534 नंबर की दो बसें निकल गयी, मैं नहीं चढ़ पाया । दिल्ली में बस चाहे सरकारी हो या निजी, ड्राइवर और कंडक्टर यात्रियों से बहुत बदतमीजी से बात करते हैं । आगे के दरवाजे से बस में चढ़ना मना है और पिछले दरवाजे से चढ़ते समय अगर किसी यात्री का दोनों पैर सीढ़ी पर नहीं पड़ा तो भी बस आगे बढ़ जाती है । डीटीसी बसों में कंडक्टर पिछले दरवाजे के पास बैठा रहता है, वो भी किसी यात्री के लटकने की परवाह नहीं करता ।

ग्यारह जने

छठुआ की बेटी की लाश आंगन में पड़ी है । उसके सारे गोतिए लाश घेरकर बैठे हैं । उन्हें इस बात की चिंता है कि बेटी की मजदूरी से पेट पालनेवाला छठुआ ग्यारह जनों को कहां से खिलाएगा । लाश उसी चीथड़े से ढंकी है, जिसमें सवेरे बेटी मरी पायी गयी । कहते हैं, सांप काट लिया । जिन गोतियों ने छठुआ की बीबी-बच्चे को एक शाम खाना देने लायक नहीं समझा, उन्होंने छठुआ को कफन के पैसे और श्राद्ध-भोज के चावल-दाल के लिए उसे गांव के महाजन रघुनाथ बाबू के यहां भेजा हुआ है । बड़े दयालू हैं, उन्होंने ही छठुआ की बीबी के श्राद्ध में वासडीह का अंगूठा निशान लेकर मदद की थी । छठुआ की बीबी उन्हीं के यहां बर्तन मांजते हलवाहों के लिए रोटी सेंकते काली खांसी से मरी ।

अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े कुछ अप्रिय प्रसंग

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ के अनुसार अगले पांच वर्षों में 70 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की योजना लगभग अंतिम चरण में है । अगले चरण के चंद्र मिशन चंद्रयान 4 और 5 का भी डिजाईन तैयार कर लिया गया है । इस वर्ष के अंत या 2025 की शुरूआत तक कभी.भी चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है । पहले ये योजना 2022 में पूरी होने का अनुमान इसरो ने व्यक्त किया था ।

नौकरी

इलाके के बड़े जमीन्दार और पूर्व पंचायत प्रमुख राम बुझावन बाबू के दालान पर शाम को बैठकी जमती है । चाय, पान, खैनी का दौर चलता रहता है । गांव और आसपास के टोले के पांच-सात लोगों का हर समय आना-जाना लगा रहता है। उनमें से एक हैं दिगंबरजी, जो सबसे पहले आते हैं और सबसे बाद में जाते हैं । प्रायः रात को रह भी जाते हैं । ये राम बुझावन बाबू के करीबी लगुओं-फगुओं में से हैं । कोर्ट-कचहरी या पंचैती वगैरह में कहीं जाने के समय भी दिगंबरजी साथ रहते हैं ।

सारंगी

बलुआही घाट के किनारे स्थित मंदिर कई मायने में गांव के अन्य मंदिरों से विशिष्ट और अद्भुत है । घाट से सटा हुआ श्मशान है । गांववालों का कहना है कि उस मंदिर से सारंगी की आवाज आती रहती है । गांव से बाहर सुनसान या श्मशान के आसपास वाले मंदिर से कोई आवाज आती है तो उसे लोग भुतहा कहते हैं । डर के मारे शाम से उस रास्ते से आवाजाही बंद हो जाती है । दिन को भी लोग प्रायः उधर जाने से परहेज करते हैं ।

समाज को ‘हाईजैक’ कर लिया है विवादित फिल्मों ने

24x7 अर्थात् चौबीस घंटे चलायमान टी वी चैनल देख रहे हों, पुनर्जीवित दूरदर्शन से टाईमपास कर रहे हों अथवा आकाशवाणी के एफएमएएम चैनल सुन रहे हों तो आपको हर कार्यक्रम या बुलेटिन से पहले और बाद में तथा बीच में भी बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की आवाज सुनाई देगी । फिर बॉलीवुड स्टार शिल्पा शेट्टी की भी आवाज सुनाई देगी । आम आदमी के हित में सरकार की सामाजिक सरोकार वाली योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे स्टारों की आवाज और स्टाईल में वैसे विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं ताकि हर तबके के लोगों पर उसका असर हो । उनमें शौचालय अपने घर में बनवाने के लिए गांव के लोगों को प्रेरित करने और कूड़ा फेंकने का सलीका शहरवासियों को सिखानेवाले विज्ञापन संदेशों पर ज्यादा जोर दिया जाता है । यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य और नित्य कृत्य से जुड़ा है । अमिताभ बच्चन ‘पहलवानजी’ के प्रतीक माध्यम से शौचालय बनवाने के लिए जनहित सीख देते हैं और शिल्पा शेट्टी अपने पड़ोसी ‘शर्माजी’ के बहाने एपार्टमेंट में कूड़ा कूड़ेदान में ही फेंकने की सलाह देती हैं । अपने जमाने की बहुचर्चित सुपरस्टार स्वप्न सुंदरी लोकसभा सदस्य हेमा मालिनी पोलियो खुराक का संदेश देती हैं - ‘दो बूंद जिंदगी की’ । एक और सुपर स्टार विद्या बालन बहू-बेटी के रूप में गांव की काकियों को शौचालय बनवाने के लिए समझाती हैं । बॉलीवुड के संगीत और गायक सुपरस्टार कैलाश खेर का सूफी टाईप गायन की विज्ञापन रिकॉर्डिंग कई जन-कल्यानकारी स्वच्छता योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए सुनायी जाती है । अमिताभ बच्चन की डुगडुगी के साथ सुनायी जानेवाली सुबह आठ बजे की समाचार बुलेटिन कई लोगों को याद हो गयी हैं - ‘दरवाजा बंद बीमारी बंद पेड़ के नीचे.......।’ क्योंकि गांव-कस्बों के किसान और ऐसे लोग नौकरी या अन्य व्यवसाय के अलावे अपनी खेती-बाड़ी भी चलाते हैं, उनके बीच सबसे ज्यादा सुनी जानेवाली सवरे की यही बुलेटिन है । हिट स्टार की तरह हिट संगीत का भी इस्तेमाल किया जा रहा है । परिवार नियोजन की प्रेरणा महिलाओं को हिट विवाह गीत - ‘बन्नो तेरा मुखड़ा’ का धुन वाली पैरोडी से दी जा रही है । यूनिसेफ ने पोलियो, तपेदिक अभियान की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन का अभियान एंबेसेडर का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन न अमिताभ को हेपेटाइटिस जागरुकता अभियान का दक्षिण पूर्व एसिया एंबेसेडर नियुक्त किया हुआ है ।

टेबुल की फीस

जमीन जायदाद मकान की रजिस्ट्री वाले ऑफिस से साफ-सुथरी छवि लेकर रिटायर हुए लाला बद्री नारायण को उसी टेबुल से साबका पड़ गया, जिस पर वे कभी खुद बैठा करते थे । हमउम्र पड़ोसी टीकमचंद को साथ लेकर उन्होंने कई चक्कर लगाये । रोज-रोज ‘कल दस बजे आइये’ सुनते-सुनते लाला का धैर्य जबाब दे गया - आखिर आप मोटी फाईल बढ़ा क्यों नहीं रहे हैं, वो कल कब आएगा जब आप उस फाईल पर से धूल झाड़ने का समय निकाल पाएंगे?