राजनीतिक विवादों से घिरे इजराइल निर्मित स्पाईवेयर पेगासस जासूसी कांड की जांच रिपोर्ट सामने आने से कई बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो भाजपा नीत केंद्र की गठजोड़ सरकार सार्वजनिक नहीं करना चाहती । पेगासस स्पाईवेयर के जरिए भाजपा सरकार ने अपने देश में कई प्रमुख राजनीतिज्ञों, पत्रकारों और सामाजिक संगठनों की जासूसी करायी । इस सनसनीखेज मामले की जांच प्रक्रिया की मॉनिटरिंग सीधे सुप्रीम कोर्ट कर रही है ।
जांच रिपोर्ट का इंतजार भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना को है, भारत की जनता को है । लेकिन प्रचंड जनादेश की आठवीं सालगिरह मना रही भाजपा गठजोड़ सरकार इसे टालने का प्रयास छोड़ना नहीं चाहती । पहले तो केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में चल रही सुनवाई की तारीखें किसी-न-किसी बहाने बढ़वाती रही । इसके लिए संसद के अंदर के मामले का हवाला देकर न्यायपालिका की लक्ष्मण रेखा की याद दिलाने की भी कोशिश की गयी । पेगासस जासूसी कांड पर वर्ष 2021 के मानसून सत्र से शुरू हंगामा फिर शीतकालीन सत्र और 2022 के बजट सत्र में भी जारी रहा । जिस राजनीतिक जासूसी को लेकर पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ था, उस पर भारत सरकार न तो संसद में चर्चा कराने को तैयार थी, न ही सदस्यों के सवालों का माकूल जवाब सरकार के पास था । गत वर्ष 19 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के दिन ही कांग्रेस के राहुल गांधी, पी. चिदंबरम और मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में पेगासस जासूसी पर बहस की मांग की कांग्रेस समेत सभी विपक्षी सदस्यों ने संयुक्त संसदीय समिति या सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत जज से जांच कराने की मांग उठायी । देश के सर्वोच्च जनमंच संसद में राजनीतिक और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में एक विदेशी स्पाईवेयर का इस्तेमाल गलत नहीं माना ।
जनप्रतिनिधियों से जानकारी छिपाने के सरकार के इरादे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने की अर्जी जब चीफ जस्टिस ने स्वीकार कर ली, तो सरकार ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला दिया । सरकार की नीयत संदिग्ध होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27.10.2021 को पूरे पेगासस स्पाईवेयर प्रकरण की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी और इसकी निगरानी का काम पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज आर. वी. रवीन्द्रन को सौंपा ।
चीफ जस्टिस एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने देश की प्रमुख हस्तियों की अवैध तरीके से निगरानी के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल गलत बताते हुए जांच स्वयं कराने का फैसला किया । सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट पर सरकार फ्री पास नहीं ले सकती । 22.02.2022 को सुनवाई के दिन सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश होनेवाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के पास जवाब तैयार नहीं था । वे ज्यादा समय चाहते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट 25 फरवरी से आगे की तारीख देने को तैयार नहीं हुई । 22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट पीठ पेगासस आरोपों की जांच के लिए गठित टेक्निकल कमिटी की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आलोक में सुनवाई करनेवाली थी । सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमिटी में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी से सम्बद्ध विभिन्न क्षेत्रों के जानेमाने विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया । इस टेक्निकल कमिटी ने 21.02.2022 को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी और सुप्रीम कोर्ट पीठ ने 22.02.2022 को सुनवाई की तारीख रख दी । सॉलिसिटर जनरल ने अपनी लाचारी दिखाई तो सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी । अंतरिम जांच रिपोर्ट में भी कई ऐसे जासूसी भेदियों का राज अवश्य खुला होगा, इसलिए सरकार फाइनल रिपोर्ट आने तक इसे छिपाए रखना चाहती है । 20.05.2022 को जस्टिस(रिटायर) आर. वी. रवीन्द्रन ने टेक्निकल कमिटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट पीठ से फाइनल जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 20 जून तक का समय मांगा । चीफ जस्टिस ने स्वयं पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए समय तो दिया, मगर साथ में जांच की निगरानी कर रहे जज रवीन्द्रन से यह भी कहा कि जितना जल्दी संभव हो, फाइनल रिपोर्ट सौंप दें । चीफ जस्टिस समेत तीन जजों की पीठ ने टेक्निकल कमिटी से कहा कि चार हफ्ते के अंदर जांच पूरी करके निगरानी कर रहे जज को सौंपें ।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह किया । इसका विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह अंतरिम रिपोर्ट है और सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए ।
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 20 मई की सुनवाई के दिन कहा. ष्ट29 मोबाइल डिवाइसों की जांच चल रही है । उन सबने अपने सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं । टेक्निकल कमिटी के सदस्य विशेषज्ञों ने सरकार, पत्रकार, विभिन्न एजेंसियों को नोटिस जारी किया है और उनसे आपत्तियां भी मांगी है । इसलिए हम समय देंगे । लेकिन उन्हें निर्देश दिया जाता है कि जो मोबाइल डिवाइस मिले हैं, उनकी जांच का काम चार हफ्ते के अंदर पूरी कर लें ।
अब 20 जून तक फाइनल जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट को भी उसके अध्ययन में थोड़ा समय लगेगा, तबतक के लिए सरकार को राहत मिल गयी ।
इजराइल से रक्षा सौदे के अंतर्गत खरीदे गए पेगासस स्पाईवेयर की करतूतों पर भारत के अंदर और विदेशों में भी काफी विवाद और हंगामा सामने आ चुका है । इसलिए आम लोग बखूबी समझ रहे हैं कि सरकार फजीहत से बचने के लिए अपने अनुचित कारनामों की असलियत छिपाना चाहती है । अगर 20 जून तक फाइनल रिपोर्ट सामने आ गयी, तो सरकार के लिए फिर मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना करके संसद में नाक बचाना कठिन हो जाएगा ।
संसद में पेगासस जासूसी पर हुए हंगामे की पूरी खबर जनता के बीच गयी है । सुप्रीम कोर्ट में इस पर हुई सुनवाई की खबर जनता तक पहुंची है । उसके बावजूद सरकार ‘राजनीतिक’ जासूसी को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ठ से जुड़ा मामला बताकर जनता से ज्यादा इजराइल से अपनी दोस्ती को तवज्जो दे रही है । जबकि इजराइल निर्मित पेगासस स्पाईवेयर के सियासी इस्तेमाल को लेकर खुद इजराइल के अंदर और यूरोपीय देशों में भी विवाद हुआ है । इजराइल का भारत से ज्यादा पुराना दोस्त अमेरिका ने सबसे पहले पेगासस को काली सूची में डाला । इजराइली रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित कंपनी एन. एस. ओ. निर्मित पेगासस को भारत सफेद सूची में रखना चाहता है ।
संसद का बजट सत्र शुरू होने से दो दिन पहले 29.01.2022 को ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में खबर छपी कि पेगासस स्पाईवेयर बनानेवाली इजराइली कंपनी एनएसओ से भारत सरकार ने 2 अरब डॉलर का सौदा 2017 में किया । खबर के अनुसार इस पेगासस डिवाइस का इस्तेमाल विपक्षी दलों के नेताओं, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और यहां तक कि नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के सदस्यों के खिलाफ जासूसी के लिए किया जा रहा है । इस पर तो संसद में हंगामा होना ही था । लेकिन इससे बिल्कुल बेखबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-इजराइल रिश्ते की 30वीं वर्षगांठ मनाने और इसे ‘प्रगाढ़’ठ करने का यही ‘उपयुक्त समय’ बताया । नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन के लिए बड़ी सहजता से इजराइली प्रधानमंत्री नफताली बेनेट को दिल्ली आने का न्योता दे डाला । 02.04.2022 से 05 अप्रैल तक उनकी भेजवानी की तैयारी शुरू हो गयी । बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा था और दोनों ही चरणों में पेगासस पर विपक्षी सदस्य सरकार से जवाब मांगते रहे । इजराइल प्रधानमंत्री को वैसे प्रतिकूल माहौल में भारत आना ‘उपयुक्त’ नहीं लगा और उन्होंने अपना दौरा स्थगित कर दिया । भारत में मीडिया ऑनलाइन ‘दि वायर’ ने उजागर किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर, जुलाई, 2021 में चुनाव आयुक्त रहे अशोक लवासा और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जासूसी राडार में थे । भाजपा की नीतियों से सहमति नहीं रखनेवाले 40 पत्रकार समेत कई प्रमुख व्यक्तियों के नाम थे ।