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Governance, Institutions & Public Policy

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शशिधर खान का ब्लॉग: चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का सवाल

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संसद में दो प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए गए, जिनमें सीईसी और ईसी की नियुक्ति हेतु स्वतंत्र चयन समिति की मांग उठाई गई। जॉन ब्रिटास और मनीष तिवारी के सुझावों में प्रधान न्यायाधीश, विपक्ष के नेता, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री जैसे विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों को शामिल करने की बात कही गई, जो पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ और अजय रस्तोगी ने सरकार से सीईसी के लिए कॉलेजियम गठित न करने पर सवाल उठाया। यह बहस लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी सुधारों की अनिवार्यता को रेखांकित करती है।

उपराज्यपाल बनाम जनादेश के ‘टेकनीकल दिग्भ्रम’

यह लेख राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) बिल, 2021 के पारित होने पर केंद्रित है, जिसने दिल्ली की निर्वाचित सरकार के अधिकारों को कम कर दिया और उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां प्रदान कीं। यह बिल आम आदमी पार्टी के जनादेश और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के बावजूद पारित हुआ, जिससे दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रहा टकराव और गहरा गया। लेख में इस संशोधन को भाजपा द्वारा दिल्ली में लगातार हार स्वीकार न करने का परिणाम बताया गया है, और पुडुचेरी में भी इसी तरह की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।