नरेन्द्र मोदी का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने के रिकार्ड पर समारोहों का सिलसिला जारी है । साथ-साथ 12 साल की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार आकाशवाणी और अखबारों के पहले पृष्ठ पर विज्ञापन के जरिए भी चल रहा है । इसकी कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं थाम रखी है । सबसे बड़ी रिकार्ड उपलब्धि यह बतायी गयी है कि नरेंद्र मोदी प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से तीन दिन ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री बने रहे । नरेंद्र मोदी से पूर्व सबसे लंबे समय तक जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री रहे ।

नरेंद्र मोदी के ऐसे पहले प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड़ सरकार के मंत्री, नेता और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में 12 जून को जश्न, उत्सव मना रहे थे ।

और उसी दिन उन लाखों परिवारों में मातम और निराशा का माहौल था, जिनके बच्चों की नीट परीक्षा प्रश्न पत्र लीक होने के कारण रद्द कर दी गयी । कथित प्रश्न पत्र लीक खुलासे को लेकर बवाल होने के बाद सरकार ने 03 मई को हुई नीट परीक्षा रद्द कर दी और फिर से परीक्षा की तारीख 21 जून घोषित कर दी । परीक्षा रद्द होने का सदमा कई छात्र झेल नहीं पाए और देश भर के पांच से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्या कर ली । इससे प्रभावित 22.8 लाख छात्र हताशा में घुट रहे हैं और उनमें से अधिकांश दोबारा से परीक्षा केंद्र पहुंचने की मानसिक हालत में नहीं हैं । अभिभावक, मां-पिताजी अपने बच्चों का हौसला नहीं बढ़ा पा रहे हैं ।

प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस उपलब्धि को बार-बार दुहराया है कि 25 करोड़ लोगों को गरीबी से मुक्ति मिली । प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर बन रहे हैं, जो कल तक गरीब थे वे आज मध्यम वर्ग की श्रेणी में हैं, उनके भविष्य का रोड मैप रखा । कहना सही है । मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में सुधार हुआ, गरीबी से मुक्ति पानेवाले परिवारों के बच्चे मध्य और उच्च आय वर्ग वालों जैसे सपने देखने लगे । लेकिन ऐसे बच्चों का सपना लगातार चूर-चूर हो रहा है । पैसे लेकर प्रश्न पत्र लीक करने और अमीरों के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए साधारण परिवारों के बच्चों का भविष्य चौपट किया जा रहा है ।

2014 के बाद से 89 विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र अब तक लीक हुए हैं और यह सिलसिला रूक नहीं रहा है । नीट-यूजी 2024 परीक्षा इतिहास का रिकार्ड सबसे बड़ा घोटाला साबित हुआ । इम्तहान के थोड़े समय बाद ही चारों तरफ हंगामा हो गया कि बिहार और झारखंड में प्रश्न-पत्र लीक हुए । बिहार पुलिस ने धरपकड़ अभियान चलाया, कुछ लोग गिरफ्तार हुए ।

नरेंद्र मोदी 2014 में पहली बार और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने । जून 2026 में 12 साल के ‘ऐतिहासिक रिकार्ड’ उत्सव के समय नीट-यूजी -2026 घपलें के बिस्तार में जाने से पहले 2017 घोटाले का ब्योरा लेते हैं, जिसको लेकर देशभर में हंगामा हुआ था । 2017 का कर्मचारी चयन आयोग(एसएससी) स्टाफ सेलेक्शन कमीसन) परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने का मामला था । काफ़ी समय तक पीड़ित अभ्यर्थियों का बवाल सुर्खियों में रहा । सुप्रीम कोर्ट में मामला गया । सुनवाई के बाद केंद्र सरकार की सफाई से शीर्ष कोर्ट संतुष्ट नहीं हुई और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही दागी, दोषपूर्ण करार दिया । एसएससी के दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर के सामने युवाओं ने धरना, प्रदर्शन किया । लेकिन प्रशासन ने प्रश्न-पत्र लीक को स्थानीय स्तर पर कुप्रबंधन कहकर पल्ला झाड़ लिया और दोबारा परीक्षा का विरोध किया । लेकिन केंद्र सरकार न तो चेती, न ही युवाओं के कैरियर की सौदेबाजी करनेवाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी(NTA - नेशनल टेस्ट एजेंसी) पर कोई अंकुश लगाया । अगर 2017 में ही केंद्र सरकार ने एनटीए को चेतावनी दी होती और किसी हाई पावर निगरानी एजेंसी को परीक्षा प्रक्रिया की मानीटरिंग का जिम्मा दिया जाता तो शायद 2024 और 2026 में उससे भी बड़े घपले सामने नहीं आते ।

जून, 2026 में जब सिर के ऊपर से पानी गुजर गया तब जाकर केंद्र ने सबक ली और नीट पेपर लीक के मद्देनजर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव को कहना पड़ा कि रेलवे भर्ती परीक्षाओं के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त की जा रही है ।

यह बात रेलमंत्री ने 12 जून के जश्न से फारिग होने के बाद 13 जून को कही । उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित करनेवाली रेलवे अब अपना खुद का परीक्षा तंत्र स्थापित करेगा, जिसके तहत रेलवे

के अंदर ही एक स्वायत्त परीक्षा विंग बनायी जाएगी । अश्विनी वैष्णव के अनुसार इस योजना में प्रश्न पत्र किसी कमर्सियल इंटरनेट या क्लाउड सर्वर पर अपलोड नहीं होगा । परीक्षा शुरू होने से पांच मिनट पहले रेलवे के इनक्रिप्टेड रेलनेट ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क के जरिए सीधे परीक्षा केंद्र में रखे मास्टर हब और वहां के अभ्यर्थी के टैबलेट पर भेजा जाएगा, ताकि पेपर लीक न हो पाए ।

नरेंद्र मोदी 4,398 दिन(12 साल 14 दिन) तक लगातार देश का नेतृत्व संभालने वाले पहले प्रधानमंत्री 12 जून को साबित हुए । एक तरफ जश्न मनाया जा रहा था, और दूसरी तरफ केंद्रीय गृह सचिव तथा कैबिनेट सचिव 12 जून को दोबारा होनेवाली नीट-यूजी परीक्षा के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम में जुटे थे । कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने नीट-यूजी परीक्षा तैयारी की समीक्षा के बाद 12 जून को ही कहा कि उच्चस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है । ऐसी चाक-चौबंद परीक्षा पहली बार हो रही है, जिसमें प्रश्न-पत्र वायु सेना के विमान से 18 लोकेशन तक और फिर सेना तथा अर्द्धसैनिक बलों की गाड़ियों से कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे । नेशनल एंट्रेस एलिजिबिलिटी टेस्ट( NEET- राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा) सेना के जरिए कराने का यह नया रिकार्ड है । पुख्ता सैनिक कवर के बाद 14 जून को पुनर्परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी किए गए ।

वायुसेवा के विमान और हेलीकोप्टर उन क्षेत्रों में प्रश्न-पत्र ले जा रहे हैं, जहां स्थिति चिंताजनक है । रक्षा प्रतिष्ठान, सिविल अधिकारियों और सुरक्षा बलों के सहयोग से प्रश्न-पत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण रख रहे हैं । सुत्रों के अनुसार प्रश्न-पत्र सेट करने, मोडरेटिंग करने और अनुवाद करनेवाले सारे विशेषज्ञों को घर से बाहर निकलने, मोबाईल, इंटरनेट, लैपटॉप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा और उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क परीक्षा प्रक्रिया तक नहीं रहेगा । ऐसा इसलिए किया गया है ताकि प्रश्न-पत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के दौरान अनधिकृत दखलंदाजी संभव न हो । ये सारा एजेंडा कैबिनेट सचिव और गृह सचिव ने जश्न के दिन 12 जून को ही आपात् बैठक में तैयार किया ।

नरेंद्र मोदी शासनकाल के रिकार्ड 12वें साल पूरे होने के समय सैनिक सुरक्षा के बीच नीट-यूजी परीक्षा करवाना भी रिकार्ड उपलब्धि मानी जाएगी । युवाओं का वर्तमान और भविष्य की सौदेबाजी करनेवाले याचिकाओं द्वारा छात्रों के सुनहरे सपनों से खिलवाड़ का विस्फोट इसी समय हुआ । इस उपलब्धि को भाजपा के सभी नेताओं ने डंप रखने का प्रयास किया ।

नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री है, जिन्होंने जनता से सरोकार का ‘मन की बात’ सीरीज चलाया । हर हफ्ते वे लोगों से रूबरू होते हैं और उस कार्यक्रम का आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के सभी प्रादेशिक केंद्रों से वहां की स्थानीय भाषाओं में अनुवाद प्रसारित होता है । उसके बाद प्रधानमंत्री ने बच्चों से ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम भी चलाया । प्रधानमंत्री बच्चों को ‘दवाब में और तनाव में’ परीक्षा न देने की सीख देते हैं । लेकिन अभी अपने 12 साल के रिकार्ड शासनकाल के पंप एंड शो जश्न में मशगूल नरेंद्र मोदी ने उन लाखों बच्चों को ‘जय श्री राम’ भरोसे छोड़ दिया । जो तनाव के कारण आत्महत्या करने की हालत में पहुंच गए ।

शुक्र है, संसद की स्थायी समिति का, जिसने छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जतायी, प्रभावित परिवारों को सांत्वना दी और उनकी मदद के सुझाए भी दिए । कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने एनटीए और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अधिकारियों को 10 जून को तलब किया । स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी इस संसदीय समिति ने साल में दो बार नीट कराने की सिफारिश की, जिससे छात्रों पर दवाब कम होगा ।

नरेंद्र मोदी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़(एनडीए) के इस रिकार्ड कार्यकाल के दौरान पीड़ित छात्रों की आत्महत्याओं का भी रिकार्ड है । इसने देश में ‘महामारी’ का रूप ले लिया है । यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त टास्क् फोर्स ने आत्महत्या के कारणों के अध्ययन के बाद की है । 2013 से 2023 के दौरान आत्महत्याओं में 65% वृद्धि दर्ज की गयी । राष्ट्रीय अपराध शोध ब्यूरो ने 2014 से 2024 के दौरान आत्महत्याओं में 80% बढ़ोतरी बतायी है ।

इस मानव निर्मित आपदा पर काबू पाने के लिए सेना के जरिए राहत पहुंचायी जा रही है । वायुसेना के हेलीकोप्टर द्वारा ले जाए गए प्रश्न-पत्र ‘स्ट्रांग रूम’ में रखे जा रहे हैं । इसके बावजूद एनटीए संचालित परीक्षा व्यवस्था गड़बड़ी कर रही है ।

14 जून को कैबिनेट सचिव सोमनाथन को एनटीए महानिदेशक के साथ गंभीर विमर्श करना पड़ा । पता चला की नीट-यूजी पुनर्परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक करने के नाम पर ‘प्राइवेट माफिया’ ने फिर पैसे ठग लिए । अहमदाबाद पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया । अभिभावकों में रोष और छात्रों में आक्रोश है । छात्रों का फीस रिफंड हड़पने और फिर से प्रश्न-पत्र दिलाने के झांसे देकर 1-5 करोड़ संदिग्ध लेन-देन उजागर हुए ।

ऐसी अराजक स्थिति की चक्की में पिसनेवाले सबसे ज्यादा साधारण परिवार हैं, जिन्होंने व्यवस्था पर भरोसा किया और व्यवस्था उनके साथ विश्वासघात कर रही है । बच्चों को पुनर्परीक्षा के लिए 15 मिनट ज्यादा समय और रफ के लिए एक्सस्ट्रा पेज देने की घोषणा 12 जून को ही कर दी गयी । लेकिन छात्रों को 21 जून की परीक्षा के लिए एनटीए के बेबसाईट से ही एडमिट कार्ड डाउनलोड करना है ।

2018 में स्थापित एनटीए द्वारा केंद्रीय और राज्य स्तर पर आयोजित परीक्षाओं में विगत 9 वर्षों में 70 से 90 प्रश्न-पत्र लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं । फिर भी केंद्र सरकार एनटीए पर निर्भर है, जो संस्था अवाम की उम्मीदों की धंधेबाजी करनेवाली प्राइवेट एजेंसियों पर निर्भर है । एनटीए के पास अपना इन्फ्राएक्टर नहीं है । तथ्य बताते हैं कि यह एक आऊटसोर्सिंग एजेंसी है, जो पंजीकृत सोसायटी की तरह हर साल 6 लाख आवेदकों के लिए परीक्षाएं आयोजित करती है । लेकिन एनटीए का सेट-अप संघ लोक सेवा आयोग जैसा नहीं है । एनटीए प्रश्न पत्र सेट करने, परीक्षा केंद्रों तक लाने-ले जाने, प्रश्न पत्र रखने का काम कंटैक्ट पर रखे गए कुछ स्टाफ द्वारा व्यावसायिक कोचिंग माफिया और परीक्षा व्यवस्था की सौदेबाजी के धंधे में बच्चों की उम्मीदों का व्यापार करनेवाले संगठित अपराध सिंडिकेट के जरिए कराती है । इस काम में जुटे माफियाओं पर या तो सरकार का नियंत्रण नहीं है, अथवा इनकी ‘पावरफुल’ लॉबी इतनी तगड़ी है कि सरकार विकल्प नहीं ढूंढ़ पाती ।

‘12 साल विकास के जनकल्याण के विश्वास’ के नारों की धूम मची है । स्कूल से कॉलेज तक के बच्चों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं । इसी विवाद के बीच सीबीएसई(केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) में भी अनियमितता पायी गयी, जिस पर केंद्रीय सूचना आयोग ने सीबीआई से जवाब मांगा है, तो सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(डी) का हवाला देकर जानकारी छिपा रही है ।

केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति शुरू से ही विवादित रही, जिसका परिणाम सामने है । परीक्षा शुल्क के रूप में वसूले गए हजारों करोड़ रूपये घपले की जानकारी डंप रखने की कोशिश की गयी है, उनमें से अहम 2023 से राज्यसथा कमिटी की रिपोर्ट है । 31/07/2024 को संसद के मानसून सत्र में एक सवाल के जवाब में केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजुमदार ने यह स्वीकारा । मंत्री ने सदन को बताया कि 6 वर्षों में एनटीए ने 448 करोड़ का रिकार्ड मुनाफा कमाया । परीक्षा शुल्क के नाम पर उगाही की गयी इतनी बड़ी रकम परीक्षा व्यवस्था पर बहुत कम खर्च होती है । आखिर यह पैसा कहां जा रहा है?

संसद में कई बार इस सामाजिक त्रासदी पर हंगामा हुआ है । अभी आनेवले मानसून सत्र में फिर होगा । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा से ही आंदोलन छेड़ा है, जो कोचिंग सेंटर हब के साथ-साथ आत्महत्याओं का भी सबसे बड़ा केंद्र है । काकरोच जनता पार्टी का शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जगह-जगह चल रहे प्रदर्शनों में भारी संख्या में युवा जुट रहे हैं । इसके लद्दाख राज्य आंदोलन के नेता सोनम वांगचुक भी शामिल हो गए हैं ।

भाजपा के कुछ नेताओं ने रिकॉर्ड 12 साल जश्न के अवसर पर कहा कि कांग्रेस ने सिर्फ गड़बड़ घोटाले किए, यह 12 साल भ्रष्टाचार मुक्त शासन का ही पहला रिकॉर्ड है ।

इस संबंध में 2011 में मनमोहन सिंह ने नेतृत्ववाले कांग्रेस गठजोड़ शासन का एक दुर्लभ उदाहरण सीबीएसई द्वारा आयोजित ऑल इंडिया इंजीनियरी प्रवेश परीक्षा के प्रश्न-पत्र लीक होने की जानकारी 01/05/2011 के ज्यों ही सामने आयी, आयोजकों ने कुछ ही घंटों में डुप्लीकेट प्रश्न-पत्र सभी केंद्रों में पहुंचा दिए । इस त्वरित व्यवस्था से करीब 10 लाख बच्चों को राहत मिली । उन्हें दबाब, तनाव में न जाने दिया गया । वास्तव में यह

पूरा जश्न राजनीतिक था । जुलाई, 2025 में इंदिरा गांधी का और जून, 2026 में उनके पिता जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी ने तोड़ा । 12 जून की पार्टी के दिन परोसी गयी थालियों में झालमुड़ी भी थी, जो पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने प्रधानमंत्री को पेश किया । नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान जो झालमुड़ी खायी, वो करामती साबित हुई । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का 15 साल शासन और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस दोनों का पतन हो गया |