हिंदू अल्पसंख्यकों के दर्जे का सवाल
यह लेख उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के कानूनी और संवैधानिक मुद्दे पर केंद्रित है जहाँ उनकी आबादी कम है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं, विशेषकर अश्विनी उपाध्याय और देवकी नंदन ठाकुर द्वारा, और कोर्ट के विभिन्न पीठों के रुख पर चर्चा की गई है, जिसमें अल्पसंख्यक पहचान को राज्य स्तर पर निर्धारित करने पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार के बदलते हलफनामों और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने का भी उल्लेख है।