मेरे बाजूवाले फ्लैट में रहनेवाली मैडम बिहार सरकार में अधिकारी हैं । उनके पास अपनी गाड़ी नहीं है और उन्हें सरकारी वाहन भी मिला हुआ नहीं है। मैडम ने एक रिक्सावाले को ठीक कर रखा है, जो उन्हें ऑफिस ले जाता है । शनिवार, रविवार की छुट्टी तो रिक्सावाले को पता है । पर्व त्योहार की जानकारी तो रहती ही है, कभी ऑफिस नहीं जाना होता है तो मैडम एक दिन पहले ही नहीं आने को बोल देती हैं ।

2 अक्टूबर के दिन 9.30 के 10 मिनट बाद तक जब मैडम नहीं निकली, तो रिक्सावाले ने मैडम के दरवाजे की घंटी बजायी । दरवाजा खोलते ही रिक्सावाले को देखा तो मैडम ने झिड़का - ‘तुमको पता नहीं, आज गांधी जयंती है छुट्टी है?’ रिक्सावाले ने भोलेपन से जवाब दिया - ‘मेरे को क्या पता कि गांधी जयंती है, ऑफिस की छुट्टी है, आपने तो कल बताया नहीं । हम तो घंटी बजाए कि देखें क्या हुआ, मैडम को लेट हो रहा है ।’

2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन जननेताओं की भागीदारी वैसी ही देखने को मिली, जैसी हर साल रहती है । सरकारी अधिकारियों में सिर्फ उन्हीं को मजबूरन घर से बाहर निकलना पड़ता है, जो मंत्रियों से संबद्ध हैं या ऊंचे पदों पर हैं । स्कूल, कॉलेज, बैंक, कोर्ट तथा अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए गांधी जयंती का मतलब सिर्फ छुट्टी से है । 150वीं होने के बावजूद न कोई उत्साह, न कोई जोश । शनिवार, रविवार को नहीं पड़ने का सुखद दिन टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और राज्य सरकारों का अपने-अपने स्थानीय मुद्दों में सनी गांधी जयंती समारोह देखकर गुजारा । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विषय में तो सबेरे सिर्फ इतनी ही खबर नजर आयी कि उन्होंने दिल्ली में राजघाट पर स्थित बापू की समाधि पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की । राष्ट्रपति का यह रस्मी समारोह वहीं तक सीमित रहा, जैसा हर वर्ष रहता है ।

लेकिन दोपहर से देर शाम तक आमलोग जननेताओं - मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक को गांधी जयंती मनाते देखते रहे । केंद्र में और कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के कारण सत्तारूढ़ भाजपा का आयोजन जनता के बीच ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल्ली से लेकर उनके और महात्मा गांधी के भी गृह प्रदेश गुजरात से आ रहे टीवी कवरेज पर जनता की नजर रही । लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपनी श्रद्धांजलि में जो बयान दिये, उसे भी पर्याप्त मीडिया कवरेज मिला ।

दक्षिण अफ्रीका से भी बापू की 150वीं जयंती मनाने की रिपोर्ट अगले दिन मिली । लेकिन 2 अक्टूबर को गांधी से ज्यादा भारत में दक्षिण अफ्रीका से तीन टेस्ट मैच श्रृंखला में पहले दिन के खेल की चर्चा थी । रोहित शर्मा के सलामी बल्लेबाज के रूप में पहला टेस्ट मैच शतक पर लोगों का ध्यान केंद्रित रहा । गांधी जयंती मनाने भारत से अधिकारी और नेता दक्षिण अफ्रीका गए थे । सबसे ज्यादा ‘उत्साहित’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में अपने संबोधन भाषण में गांधी चर्चा करके लौटे थे, इसलिए अहमदाबाद के सारे आयोजनों में उनका वैसा ही जज्बा था ।

विपक्षी नेताओं के लिए तो 2 अक्टूबर का ही सब कुछ समाप्त हो गया । लेकिन सरकारी आयोजन अभी जारी हैं । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधी यात्रा रवाना किया जो 30 जनवरी, 2020 को गांधी की पुण्यतिथि तक चलेगी ।

प्रधानमंत्री ने बापू जयंती के दिन ‘स्वच्छ भारत’ अभियान क्रम में शौचालय निर्माण का आंकड़ा प्रस्तुत किया और प्लास्टिक, पोलीथीन का इस्तेमाल छोड़ने पर बल दिया । संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी प्रधानमंत्री ने शौचालय निर्माण का आंकड़ा दिया । शांति और अहिंसा में बापू के योगदान को उससे कम अहमियत दी ।

नरेंद्र मोदी ने न्यूयार्क में बापू को भी ऐसा ‘राउडी मोदी’ पंप एंड शो समां में बांध दिया मानो संयुक्त राष्ट्र में गांधी चर्चा करनेवाले वे पहले भारतीय नेता हों । शायद उन्हें पता हो कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2007 से ही गांधी जयंती मनायी जाती है । ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में 150वीं जयंती उसकी अगली कड़ी बनी और देश दुनिया में स्वागत हुआ ।

कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि गांधी की जगह आरएसएस(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को प्रतीक बनाने की कोशिश चल रही है । उन्होंने गांधी के नाम पर राजनीति करने का भी भाजपा पर आरोप लगाया । सोनिया गांधी का ऐसा कहना बिल्कुल बेबुनियाद नहीं है । आम जनता ने बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘राष्ट्रवादी’ और ‘देशभक्त’ के रूप में महिमा मंडित होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में देखा है । नरेंद्र मोदी शासनकाल में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की मृत्यु जांच/गुमशुदगी रहत्य की डिक्लासिफाई फाइलें इतनी उछलो कि लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गयी । लेकिन आम जनता को यह पता नहीं चलने दिया गया कि 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब नेता जी मृत्यु रहस्य की जांच के लिए जस्टिस जी. डी. खोसला आयोग बनाया, उसी समय महात्मा गांधी की मृत्यु की जांच के लिए भी जस्टिस जे. एल. कपूर की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया । कपूर आयोग की जांच रिपोर्ट किसी को नहीं मालूम ।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्म दिन वाला 2 अक्टूबर लो प्रोफाइर्लल में बीता । आम जनता के बीच कोई चर्चा नहीं । प्रबृद्ध लोगों में हालिया रिलीज फिल्म ‘ताशकंत फाईल’ के कागजात हावी रहे । लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मृत्यु भी रहस्य बनी हुई है, जिसकी जांच में कांग्रेस या भाजपा सरकारों में से किसी ने दिलचस्पी नहीं ली ।

सुर्खियों में पड़ोसी देश चीन का मामला रहा । 30 सितंबर को चीन की राजधानी बीजिंग से एक साथ दो खबरें आयी । पहली खबर में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने अपनी सरकार की ओर से जारी बयान में गांधी को भारत का ही नहीं, पूरे विश्व का शांति और भाईचारा का प्रेरक बताते हुए भारत-चीन को उसका ‘सहयात्री’ कहा । दूसरी खबर थी, चीन में सत्तारूढ़ कम्यूनिस्ट पार्टी शासन स्थापना की 70वीं वर्षगाठ पर शक्ति प्रदर्शन की । कोलकाता स्थित चीन के वाणिज्य दूत झा लियू ने भी 30 सितंबर को ‘चीन-भारत मैत्री’ की दुहाई दी ।

2 अक्टूबर के दिन सैनिक प्रदर्शन चल रहा था और भारत, चीन के सैनिक अधिकारी आपस में मिल रहे थे । यह खबर इसलिए भी मायने रखती है, क्योंकि अगले हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिन्पिंग ‘सहयात्री’ बनने भारत आने की चर्चा है । चीनी सेना ने अमेरिका तक भेदी मिसाइल प्रदर्शन को प्रचारित किया । गत हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मजबूत ‘दोस्ती’ करके लौटै हैं ।

150वीं जयंती पर केरल से मंदिर से सम्बद्ध एक तथ्य का खुलासा हुआ । केरल का साबरीमाला मंदिर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है । इसलिए गांधी जयंती के समय ऐसी जानकारी सामने आने का महत्व है । जानकारी ये है कि 1925 में कन्याकुमारी स्थित भगवती अम्मन मंदिर में महात्मा गांधी को प्रवेश नहीं करने दिया गया । जीवनपर्यन्त अछूतों और छोटी जात के लोगों का हरिजन कहकर उन्हें मंदिर में प्रवेश कराने के लिए बापू लड़े । लेकिन बापू को उस मंदिर में बाहर से दर्शन करना पड़ा । महात्मा गांधी को यह कहकर भगवती अम्मन मंदिर में प्रवेश से रोक दिया गया कि उन्होंने इंगलैंड की यात्रा की । बाप् ने इसके खिलाफ अपने साप्ताहिक अखबार ‘नवजीवन’ में लिखा । 29 मार्च, 1925 के अंक में ‘कन्याकुमारी का दर्शन’ शीर्षक से महात्मा गांधी का लेख छपा हुआ है ।

हर साल गांधी जयंती के समय ही नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होती है । शांति और अहिंसा का संदेश देनेवाले महात्मा गांधी को पूरी दुनिया में लोग अवतारी पुरूष मानते हैं । लेकिन गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार न तो जीते-जी, न ही मरणोपरान्त दिया गया । हर वर्ष की तरह इस बार यह समाचार विदेश से आया और विदेश में ही इसके बारे में टीका-टिप्पणी छपी । 1901 से नाबेल पुरस्कार श्रृखंला शुरू हुई । 1948 में बापू की हत्या के बाद नॉर्वे की नोबेल कमिटी के जूरिस्ट फेड कास्टवर्ग ने गांधी को मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार देने का प्रस्ताव भेजा । दोबारा-तिबारा प्रस्ताव गया, परन्तु अमल में आज तक नहीं आया । यह जनचर्चा नहीं है । इस संबंध में सिर्फ बुद्धिजीवी लोग बुद्धिविलास करते हैं और उनकी देखादेखी कुछ नेता भी कभी-कभार इसमें शामिल हो जाते हैं ।

मानव निर्मित विपदा झेल रहे कश्मीर के लोग क्या गांधी जयंती मनाते । लेकिन बिहार में खासकर पटना तथा आसपास का जल प्रलय प्राकृतिक से ज्यादा मानव निर्मित विपदा है । 2 अक्टूबर के दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोगों की जलजमाव त्रासदी और त्राहि के विषय में मीडिया कर्मियों के सवाल पर उबल पड़े । लेकिन गांधी जयंती तालाब खुदवाने और हरियाली के लिए पौधे लगाने की चर्चा करके मना लिया । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान सभा का विशेष सत्र बुलाया । लेकिन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस विधायकों ने यह कहकर बायकाट किया कि उनकी गांधी जयंती भाजपा से अलग होगी । 2 अक्टूबर को देर रात तक सदन में मुख्यमंत्री रहे ।