अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े कुछ अप्रिय प्रसंग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ के अनुसार अगले पांच वर्षों में 70 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की योजना लगभग अंतिम चरण में है । अगले चरण के चंद्र मिशन चंद्रयान 4 और 5 का भी डिजाईन तैयार कर लिया गया है । इस वर्ष के अंत या 2025 की शुरूआत तक कभी.भी चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है । पहले ये योजना 2022 में पूरी होने का अनुमान इसरो ने व्यक्त किया था ।
जुलाई, 2024 के अंतिम सप्ताह में संसद के बजट.सह मानसून सत्र में इस वर्ष के लिए तय अंतरिक्ष मिशनों के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में इसरो की तरफ से स्पष्ट जवाब नहीं आया था । अमेरिका की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था छौ।(नासा. नेशनल एयरोनोटिक्स स्पेस एजेंसी) और इसरो के संयुक्त मिशन के तहत पहला ऐसा मिशन है, जिसका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था । अत्याधुनिक तकनीक वाले राडारों से युक्त इस मिशन का यह उपग्रह बहुउद्देशीय जानकारी जुटाने के लिए अंतरिक्ष में तैनात किया जानेवाला था । इसरो पृथ्वी पर होनेवाले रक्षात्मक उपायों समेत जलवायु परिवर्तनए ग्लेसियरों में आनेवाले बदलावो, भूकंप, तूफान के समय की गतिविधियों का किसी भी मौसम में अंतरिक्ष से ऑब्जर्वेशन करना आसान हो जाता ।
लोकसभा में 26 जुलाई को अपने जवाब में इसरो ने बताया कि अमेरिका और भारत की अंतरिक्ष एजेंसियों का एक संयुक्त मिशन 2024 में लान्च हो पाएगा, ऐसा नहीं लगता ।
अमेरिका से प्राप्त तकनीकों और नासा के साथ मिलकर इसरो ने कई उपग्रह अंतरिक्ष में उतारे हैं । सारे उपग्रह राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की होड़ में उतारे गए हैं । इसमें इसरो का अमेरिका और रूस जासूसी उपग्रह वाले उपकरण की खरीद काफी समय से विवाद का विषय बना हुआ है । अपने तरह के इस पहले अंतरिक्ष मिशन के आकाश की सतह पर पहुंचने के बाद कुछ.न.कुछ खुलासा होगा, जिसके विषय में इसरो ने 260702024 को संसद में स्पष्टीकरण दिया ।
चन्द्रयान मिशनों पर इसरो ने 2023 से फोकस किया और 2024 पूरे वर्ष यह सुर्खियों में रहा ।
230802024 को देश में पहली बार ‘राष्ट्रीय रक्षा दिवस’ समारोह के बाद से चंद्रयान मिशन चर्चा में है । 2023 में 23 अगस्त को विक्रम लैंडर ने चंद्रयान. 3 मिशन के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की । ऐसा करके भारत ने इतिहास रच दिया । दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश भारत बन गया । इसरो की यह सफलता और देश की बहुत बड़ी उपलब्धि सराही गयी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने के लिए एलान किया कि 2024 से हर साल 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा । स्वतंत्रता सेनानियों और दिवंगत राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों की स्मृति में मनाये जानेवले दिनों की भरमार में ऐसा दिवस एक अभिनव प्रयोग साबित होगा । ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ आयोजन की नयी शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे समय में की, जब भाजपा ने पार्टी और सरकारी स्तर से राजनीतिक मतलब साधनेवाले दिवसों का तांता लगा रखा है । ‘संविधान हत्या दिवस’ ए 25 जून, 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित इमर्जेंसी को ‘लोकतंत्र हत्या दिवस’ और 50802019 को जम्मू व कश्मीर से धारा.370 हटानेवाले बिल के संसद में पास होने को ‘स्वर्ण मुकुट दिवस’ की झड़ी लगी हुई है ।
ऐसे सियासी माहौल में ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ मनाने की घोषणा का इसरो समेत पूरे देश ने स्वागत किया । लोगों का ध्यान उस तरफ चला गया, जो केंद्र सरकार की योजना थी ।
23 अगस्त, 2024 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस से संबंधित दो.तीन बातों को ध्यान में रखकर ही हम इसरो से जुड़े अन्य तथ्यों की परत.दर.परत सप्रंसग व्याख्या कर पाएंगे । अमेरिका, रूस और चीन के बाद चन्द्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करनेवाला चौथा देश भारत हो गया ।
सबसे पहले अहम और महत्वपूर्ण तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्यारे देशवासियों’ ने यह देखा कि इस समारोह में वे स्वयं मौजूद नहीं थे । जबकि उन्होंने ही गत वर्ष चन्द्रयान.3 मिशन कंट्रोल सेंटर से इसके चंद्रमा के दक्षिणी सतह पर उतारे जाने के बाद वहां जाकर लान्चिंग साईट को ‘शिवशक्ति प्वाइंट ‘बताया और 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया । उसी जगह उसी दिन प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों का हौसला बुलंद करने के लिए यह भी एलान किया कि यह हर साल 23 अगस्त का दिन राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में देश भर में मनाया जाएगा । जब 23 अगस्त, 2023 को यह दिवस मनाने का दिन आया, तो प्रधानमंत्री समारोह से ही नहीं, देश से ही बाहर थे । और तो और, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी विदेश में थे । याद रहे इसरो समेत तमाम अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों के सभी मिशन मुख्य रूप से देश की रक्षा, सुरक्षा तकनीकों को अन्य महाशक्तियों से टक्कर लेने लायक बनाने पर केंद्रित है । देश के अंदर और विदेश में इसरो से जुड़े विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा के बैनर तले की गयी जासूसी के लिए बनी क्रायोजेनिक इंजिन खरीद को लेकर उपजे । इसमें अमेरिका और रूस दोनों से चली सौदेबाजी में इसरो के वैज्ञानिक बलि का बकरा बने और जब पहला राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इसरो को देशवासियों के साथ वाहबाही देने का समय आया, तो प्रधानमंत्री तथा रक्षामंत्री उससे एक दिन पहले ही विदेश चल दिए । ठीक 23 अगस्त को ही दोनों ही रक्षा, सुरक्षा संचालकों के इस विदेश दौरे का रोचक पहलू देखिए । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अमेरिका में रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन(स्सवलक लेजपद) से हाथ मिला रहे थे और दो रक्षा सौदों को अंतिम रूप दे रहे थे । चंद्रयान.3 लान्चिंग साईट को ‘शिवशक्ति विंदु ‘बतानेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23ण्08न्2024 को रूस और यूक्रेन के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति बोलोदिमिर जेलेंन्सकी से गले मिल रहे थे । क्योंकि उसके कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी ने मास्को जाकर रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के साथ भारत.रूस ऐतिहासिक मैत्रीपूर्ण संबंध को मजबूती प्रदान की थी । रूस यात्र की अंतरराष्ट्रीय हलकान में अच्छी चर्चा नहीं हुई । इसलिए नरेंद्र मोदी यूक्रेन भी गए । यूक्रेन का दौरा करनेवाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बने । मगर भारतवासियों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि अपने देश के एस ऐतिहासिक समारोह के दिन प्रधानमंत्री विदेश दौरे में नया अध्याय जोड़ें ।
मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू का संबोधन और चंद्रयान.3 टीम के वैज्ञानिकों को विज्ञान टीम पुरस्कार रस्मी जैसा लगा । अंतरिक्ष मंत्री जितेन्द्र सिंह की मौजूदगी और उनके भाषण को नोटिस नहीं लिया गया ।
लेकिन समारोह में उपस्थित इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ ने प्रधानमंत्री के एलानों की याद दिलाकर समारोह में पहुंचे वैज्ञानिकों के साथ.साथ देशवासियों का भी मर्म स्पर्श किया । इस बात का जिक्र इसलिए युक्तिसंगत है, क्योंकि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की थीम रखी गयी थी. ‘चंद्रमा का स्पर्श करते हुए जीवन का स्पर्शरू भारत का अंतरिक्ष मिशन’ । इसका उल्लेख राष्ट्रपति ने अपने भाषण में किया । इसरो चेयरमैन ने कहा. ‘चंद्रयान.3 की लैंडिंग का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा करने का ऐसा प्रभाव पडेगा, हमने कल्पना नहीं की थी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लैंडिंग के कुछ दिन बाद कंट्रोल सेंटर पहुँचे’ । इसरो प्रमुख सोमनाथ ने अपने भाषण में वो सारी पंक्तियां शब्दशः हूबहू 230802204 को भारत मंडपम में दुहरायी, जो गत वर्ष कंट्रोल सेंटर में प्रधानमंत्री के मुंह से निकली थी । प्रधानमंत्री का r पर पोस्ट संबोधन समारोह में पढ़ा गया. ष्ठअंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपलब्धियों पर हमें गर्व है । आज का दिन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के योगदान को याद करनेवाला है । हमने इस क्षेत्र में भविष्य की कई योजनाएं तैयार की हैं और आगे भी समय.समय पर करते रहेंगे’ । प्रधानमंत्री अगर स्वयं समारोह में शामिल होकर यह बात कहते तो माहौल वैज्ञानिकों को ज्यादा अच्छा लगता और इसरो चेयरमैन को प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी का मलाल व्यक्त नहीं करना पड़ता । कहने की जरूरत नहीं कि चेयरमैन एस. सोमनाथ ने प्रधानमंत्री के पिछले वर्ष के उद्गारों का उल्लेख वैज्ञानिकों का कसैला मूड ठीक करने के लिए किया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेशयात्रा चंद्रयान. 3 लैंडिंग के ठीक पहले तय की हुई थी । उन्हीं के द्वारा घोषित पहली वर्षगाठ पर निजी, पारिवारिक जिंदगी और स्वास्थ्य को इसरो प्रबंधन के पास गिरवी रखने की मजबूरी झेलते हुए देश के लिए घुट रहे वैज्ञानिकों के मन की बात जानने का समय प्रधानमंत्री नहीं निकाल पाए । लेकिन अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम( 25 अगस्त) से पहले देश लौट आए । नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया कि उनकी सारी भावनाएं राजनीतिक हैं । 23 अगस्त के अंतरिक्ष दिवस समारोह के दिन नए मिशनों की जानकारी इसरो चेयरमैन ने दी और उसकी लांचिंग को लेकर चल रही अटकलबाजी पर प्रकाश डाला । समारोह के पहले ही एस. सोमनाथ बता चुके थे कि चंद्रयान.4 और 5 का डिजाईन तैयार है । लेकिन 23 अगस्त को उन्होंने कहा कि चांद से मिट्टी और चट्टान के नमूने इकट्ठा करने के लिए चंद्रयान.4 की लांचिंग 2027 में होगी । इसरो प्रमुख ने कहा कि इस मिशन से 5 किलोग्राम मिट्टी और चट्टान लाने की योजना है । राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने इसरो की सराहना करते हुए कहा कि चाहे वो मंगल मिशन हो या एक साथ 100 से अधिक उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण, हमने कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं । राष्ट्रपति ने सही कहा, सुनकर सबको अच्छा लगा । मगर इन उपलब्धियों को हासिल करने में जुटे अनुसंधानकर्ता वैज्ञानिकों की जीवनलीला त्रासदी और छटपटाहट से भरी है । उसके बावजूद अंतरिक्षकर्मियों ने अगले ही दिन 24 अगस्त को पहली बार रीयूजेबल हाइब्रिड रॉकेट रूमी.1 की सफल लांचिंग करके एक और नयी उपलब्धि की जानकारी दी । चेन्नई तट से छोड़ा गया यह रॉकेट ग्लोबल वार्मिंग ओजोन परत और जलवायु परिवर्तन से सम्बोधित जानकारी भेजेगा । अब देखिए कि कितनी तनावपूर्ण और संवेदनशील विषम परिस्थितियों में काम करने का अंतरिक्ष वैज्ञानिक विवश हैं । यह स्थिति ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत चरितार्थ करती है । एक ओर चंद्रयान मिशन अभियान चंद्रमा की तरह आलोकित गर्व करने लायक चिराग है और दूसरी तरफ ऐसे काली मिट्टी और चट्टानों के मलबे में दबी है । सभी जानते हैं कि 2030 तक अंतरिक्ष अभियानों को मलबा मुक्त करने का लक्ष्य है । राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन भाषण में इसका जिक्र किया ।
जब भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा था, उसी समय हिन्दुस्तानी मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के लगातार गिरते स्वास्थ्य की खबर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से आ रही थी । 05 जून से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स की आंखों व मस्तिष्क में खराबी आ गयी है और साथ.साथ उन्हें अंतरिक्ष में ले जानेवाला यान भी खराब हो गया है । नासा से जुड़ी सुनीता विलियम्स और उनके साथ गये अंतरिक्ष यात्री बुच लिमोर दोनों की तबियत बिगड़ने की खबरें बार.बार मिलने के बावजूद नासा ने कहा कि दोनों अपना मिशन पूरा करके फरवरी, 2025 से पहले नहीं लौट सकते ।
यही करूण कहानी इसरो के अंदर की है, जिसकी जानकारी छिपाने की कोशिशों के बावजूद बाहर आ जाती है । गौरतलब है कि इसरो के सारे अभियानों का खाका नासा के सहयोग से तैयार किया गया है । चंद्रयान मिशन समेत तमाम जासूसी तकनीकों की पढ़ाई इस अभियान योजना को अंजाम तक पहुंचाने का नक्शा तैयार करनेवाले विक्रम साराभाई से लेकर अभी तक के ज्यादातर वैज्ञानिकों ने अमेरिका से की है । इसलिए इसरो के अंदर भी मानवीय भावना और संवेदना उपकरणों में समा गयी है ।
इसरो के वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन का नाम अभी लोग भूले नहीं है । जिन्हें पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के आरोप में केरल पुलिस ने गिरफ्तार किया और काफी समय तक जेल में रखकर यातनाएं दी । जुलाई, 2022 में रिलीज हुई नाम्बी नारायणन की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘रॉकेट्री रू दि नाम्बी एफेक्ट’(त्वबामजतल रू जेम छंउइप र्ममिबज) जिन पाठकों ने देखी होगी, उन्हें एक प्रसंग याद दिलाना चाहता हूँ । जासूसी करनेवाले क्रायोजेनिक इंजिन अमेरिका के बजाए रूस से सस्ता मिलने के कारण नाम्बी नारायणन अपने साथियों की टीम लेकर रूस पहुंचे । वहां से चोरी.छिपे अफगानिस्तान.पाकिस्तान के रास्ते यह उपकरण भारत लाना था । उस अभियान में जुटे एक वैज्ञानिक की छोटी बच्ची की मौत की खबर केरल से रूस पहुंची । नाम्बी नारायणन की भूमिका फिल्म में निभाने वाले आर. माधवन अपने साथी से यह सूचना छिपाते हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य सिर्फ मिशन पूरा करने पर केंद्रित था, चाहे किसी सहयोगी का परिवार बर्बाद क्यों न हो जाए । अभियान पूरा करके लौटने के बाद नाम्बी नारायणन को 1994 में पुलिस ने देश के खिलाफ जासूसी के आरोप में पकड़ लिया ।
नवंबर, 1994 में केरल पुलिस ने नाम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया । उन्हें दी गयी कथित यातना की जानकारी जब सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो सितंबर, 2018 में शीर्ष कोर्ट ने जांच आयोग गठित किया । सीबीआई भी केरल पुलिस का साथ देती रही । सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2021 में सीबीआई ने विशेष जांच दल के प्रमुख और खुफिया शाखा से जुड़े केरल पुलिस के आईपीएस समेत चार अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया । लेकिन आज तक यह पता नहीं चला कि इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की क्या कानूनी कार्रवाई हुई । केरल पुलिस के समर्थन से नाम्बी नारायणन पर जानलेवा हमला करनेवाले लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई ।
नाम्बी नारायणन ने स्वयं उस फिल्म को तथ्यों पर आधारित बताया । पत्रकार के रूप में उनसे बातचीत करनेवाले बॉलीवुड स्टार शाहरूख खान को उन्होंने बताया. इस बात का मलाल है कि मुझे यातनाएं देनेवाले और मुझ पर हमला करनेवाले कानून की गिरफ्त से बाहर हैं’ ।
नाम्बी नारायणन को 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया । नाम्बी के पास मुआवजा राशियों की वर्षा हुई । सबसे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रूपया मुआवजा दिया । 2021 में केरल सरकार ने 17 करोड़ रूपया का भुगतान करके राज्य सरकार के खिलाफ दायर इस पीड़ित से मुकदमा समाप्त कर लिया । लेकिन जो मानसिक यंत्रणा नाम्बी नारायणन ने उतने वर्ष झेले उसकी भरपाई मुआवजे से नहीं हो सकती, यह नारायणन का दर्द है । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मुआवजा दिलवाया ।
2011 में सूचना अधिकार के अंतर्गत प्राप्त जानकारी के अनुसार इसरो ने अपने 684 स्टाफ की मौत का कारण बताने से इन्कार कर दिया । लेकिन यह स्वीकारा कि गत 15 वर्षों में 1733 लोगों की मौत विभिन्न बीमारियों से हुई । आत्महत्या, लाइलाज जानलेवा बीमारियों से हुई इन मौतों की न जांच होती है और न इसका कारण इसरो मृतकों के परिवारजनों को बताता है । दोनों ही मामला रहस्यपूर्ण है ।
इसरो चंद्रयान मिशनों के जनक महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की सांसें सिर्फ 52 साल की उम्र में बंद हो गयीं । होटल के एक कमरे में उनकी लाश पायी गयी । आज तक कोई नहीं जानता कि उनकी मौत कैसे हुई । ऐसे असामान्य और निर्मम दीवारों के अंदर काम करनेवाले अंतरिक्षकर्मियों के साथ देश नहीं है, जिनकी आंखों व मस्तिष्क पर मौत का धुंध छाया रहता है । इनकी जिंदगी की कीमत पर राजनीतिक वाहवाही लूटना और गर्व का प्रचार करना वैज्ञानिकों की जलती आत्मा पर नमक छिड़कने जैसा है । इन्सानियत शर्मसार हो रही है ।
अप्रील, 2022 में भारत ने नयी अंतरिक्ष नीति चीनए ऑस्ट्रेलिया और रूस से प्रतिस्पर्धा में बनायी, जो अभी अंतरिक्ष मिशन में अब्बल है । उनकी तुलना में भारत का प्रोजेक्ट छोटा है, क्योंकि अंतरिक्ष बजट ही मात्र 2 प्रतिशत है । 2030 का लक्ष्य चीन से होड़ लेने के लिए रखा गया है, जो उस समय तक 13ए000 उपग्रह छोड़ने की योजना बना चुका है ।
सुरक्षा के जितने पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं, उतनी ही असुरक्षा की भावना प्रबल होती जा रही है । एक दूसरे को पछाड़ने और रक्षा दुर्ग भेदने की तैयारी में जुटे रहने के बावजूद सभी देश हाथ मिलाने के समय सशंकित रहते हैं ।
थल, जल का कोना.कोना हमेशा निबटने के लिए मुस्तैद टैंकों और व्यापारिक झंडा लगाए टोही युद्ध पोतों से भरा है । प्रशांत महासागर के बाद हिन्द महासागर और दक्षिण चीन सागर में तनातनी तथा मोर्चाबंदी का जाम लगा है । यह धींगामुश्ती और मोर्चाबंदी धरती से उड़कर आकाश तक ले जानेवाले मिशन यानों ध उपग्रहों के जरिए अंतरिक्ष में पहुंची हुई है । अब वहां भी जाम लगा है । यानों को उतरने की जगह तलाशनी पड़ रही है । युद्ध और परस्पर संदेह जैसी स्थिति का दुष्पपरिणाम बार.बार भुगतने के बावजूद सबक यही लिया गया है कि कैसे दूसरे को सबक सिखाया जाए ।
ऐसे में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री शांति मिशन के लिए समर्पित पं. जवाहर लाल नेहरू की यह पंक्ति सटीक बैठती है. ‘इन्सान कितना बेवकूफ व जाहिल है कि हजारों वर्षों के तजुरबे से नहीं सीखता और बार-बार वही हिमाकत करता जाता है ।