पूर्वोत्तर, राजनीति और राष्ट्रीय प्रश्न
नगा संकट : भारत की लाइलाज खाज
नगा प्रश्न स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे और जटिल राजनीतिक-सामाजिक संकटों में से एक है। यह पुस्तक नगा आंदोलन, अलग संप्रभु पहचान की मांग, हिंसा, शांति-वार्ताओं और पूर्वोत्तर भारत की बदलती राजनीति को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में समझने का प्रयास है।
शशिधर खान ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत ही उत्तर-पूर्व भारत के अशांत क्षेत्रों की रिपोर्टिंग से की थी। चार दशकों से अधिक समय तक उन्होंने नगा आंदोलन और पूर्वोत्तर के अलगाववादी प्रश्नों पर देश के प्रमुख राष्ट्रीय और प्रादेशिक अखबारों में लगातार लिखा। इस लंबे अनुभव के कारण यह पुस्तक केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि जमीन, इतिहास, समाज, धर्म, हिंसा और राजनीति की परतों को साथ रखकर किया गया विश्लेषण है।
पुस्तक 1947 के बाद से नगा आंदोलन की यात्रा, अलग झंडे और संविधान की मांग, भारतीय संघ के साथ टकराव, तथा बार-बार शुरू होकर अटक जाने वाली शांति प्रक्रिया को सरल लेकिन गंभीर ढंग से सामने लाती है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो पूर्वोत्तर भारत को सतही समाचारों से आगे जाकर, उसके इतिहास और राजनीतिक मनोविज्ञान के भीतर समझना चाहते हैं।