जीवनी और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श
संघर्ष की विरासत : आंग सान सू की
आंग सान सू की का जीवन बीसवीं और इक्कीसवीं सदी के लोकतांत्रिक संघर्षों की सबसे चर्चित कथाओं में से एक है। म्यांमार में सैन्य शासन के विरुद्ध उनके लंबे अहिंसक संघर्ष ने उन्हें अपने देश की सीमाओं से बाहर भी साहस, धैर्य और लोकतांत्रिक आकांक्षा का प्रतीक बनाया।
यह पुस्तक सू की के जीवन, उनके पारिवारिक राजनीतिक विरासत, लोकतंत्र बहाली के आंदोलन, जेल और नजरबंदी के वर्षों तथा म्यांमार की जटिल सत्ता-संरचना को सरल और प्रभावी ढंग से सामने रखती है। इसमें एक ऐसी महिला की कहानी है, जिसने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संवाद, धैर्य और शांतिपूर्ण प्रतिरोध को अपना मार्ग बनाया।
चार दशकों से अधिक समय से राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर शशिधर खान सक्रिय लेखन करते रहे हैं| इस क्रम में उनकी दृष्टि समसामयिक घटनाओं को सत्ता , समाज और इतिहास के व्यापक संदर्भ में देखने पर केंद्रित रही| 1980 के दशक में छात्र आंदोलन से आंग सान सू की के शांतिपूर्ण संघर्ष की शुरुआत से लेकर अभी तक उसके हर पहलू पर नियमित रूप से शशिधर खान अखबारों में बेबाक टिप्पणियाँ करते रहे हैं|
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो आंग सान सू की को केवल एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि म्यांमार के लोकतांत्रिक संघर्ष की जटिल पृष्ठभूमि में समझना चाहते हैं।
English Translation Available
इस पुस्तक की लोकप्रियता और व्यापक पाठकीय रुचि के कारण इसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी उपलब्ध है। अंग्रेज़ी संस्करण उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो म्यांमार, आंग सान सू की और लोकतांत्रिक संघर्ष की इस कथा को हिंदी से बाहर व्यापक संदर्भ में पढ़ना चाहते हैं।