पश्चिम बंगाल विधान सभा ने सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम और शौर्य की तारीफ की । विधान सभा अध्यक्ष, बिमान बनर्जी ने कहा कि किसी विधान सभा द्वारा ऐसा प्रस्ताव लाया जाना पहला उदाहरण है, जब पाकिस्तान के साथ हुए हालिया संघर्ष में सैनिक कार्रवाई का समर्थन किया गया है ।

लेकिन इस पर सदन के अंदर चर्चा उस समय खटास में बदल गयी, जब विपक्षी नेता शुभेन्दु अधिकारी ने ‘ऑपरेशन’ के साथ ‘सिंदूर’ को जोड़ दिया । तीन घंटे चली इस बहस के दौरान भाजपा सदस्य इस बात को लेकर हंगामा मचाते रहे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र नहीं किया । मुख्यमंत्री ने सशस्त्र बलों के पाकिस्तानी कब्जेवाले कश्मीर(पीओके) के अंदर घुसकर पाकिस्तानी फौज को कड़ी शिकस्त देने की प्रशंसा में प्रस्ताव सदन में पेश किया, लेकिन उसमें से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शब्द हटा दिया । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिया हुआ नाम है, जो उन्होंने तीनों सेनाओं के प्रमुखों को पाकिस्तान के खिलाफ हमले की पूरी छूट देने के समय इस अभियान का यही नामकरण किया था । प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के सभी नेता पीओके कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहते हैं और ‘सिंदूर’ शब्द पर ज्यादा जोर देते हैं । तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को इस पर एतराज है ।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे के क्रम में यह मुद्दा विवाद का कारण बना । अमित शाह का भाषण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर केंद्रित था और उन्होंने दीदी पर ‘सिंदूर’ का अपमान करने का आरोप लगाया । अमित शाह के जाने के बाद दीदी ने केंद्रीय गृह मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि अमित शाह ‘सिंदूर बेच रहे हैं’ । ममता बनर्जी ने कई मंचों पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा पश्चिम बंगाल में 2026 में होनेवाले विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का प्रचार राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कर रही है । कांग्रेस समेत सारे विपक्षी नेता भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के राजनीतिकरण का आरोप लगा रहे हैं ।

गत हफ्ते के इस प्रकरण से पहले भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राजनीतिक रंग देखने को मिला ।

तृणमूल कांग्रेस विधायक नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार का ‘युद्ध का नाम देकर खेल और पूर्व नियोजित ड्रामा’ करार दिया । कोलकाता में दिए गए भाषण पर भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) को नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती को हिरासत में लेकर पूछना चाहिए कि इस सूचना का स्रोत और विश्वसनीयता का आधार क्या है ।

उसी दिन यानी कि 06 जून को अहमदाबाद पुलिस ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस के महासचिव राजेश सोनी को ऐसे ही बयान के कारण भारतीय न्याय संहिता की कड़ी धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया । पुलिस ने उन्हें सोशल मीडिया पर ‘दिग्भ्रमित करनेवाली’ और ‘सेना का मनोबल गिराने वाली’ टिप्पणी के लिए दोषी पाया । गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि मेरे साथी ने सिर्फ यह बात प्रकाश में लाने का प्रयास किया कि जिन सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मोर्चा लिया और शहीद हुए उन्हें इसका उचित श्रेय मिलना चाहिए । उसके बजाए सरकार करदाताओं के पैसे से अपनी पब्लिसिटी इस तरह कर रही है, मानो भाजपा कार्यकर्ताओं का योगदान हो । आकाशवाणी और दूरदर्शन से कर समय से चुकाने के लिए ‘हर करदाता राष्ट्रनिर्माता’ बताकर जाग्रत करने के बारे में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जोड़ दिया गया है । गुजरात कांग्रेस नेता राजेश सोनी की सोशल मीडिया टिप्पणी का इशारा उसी ओर है ।

अहमदाबाद विमान हादसे के बाद से सबका ध्यान उस तरफ है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर देश में राजनीतिक बयानवाजी थोड़ी थमी हुई है ।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम को लगातार अपनी कूटनीतिक राजनीति का मुद्दा बनाए हुए हैं । इस संबंध में विपक्षी दलों की ओर से बार.बार सवाल उठाए जा रहे हैं । भारतीय विदेश मंत्रालय ने कई बार स्पष्टीकरण देकर विपक्ष को संतुष्ट करने का प्रयास किया है कि संघर्षविराम द्विपक्षीय वार्ता से हुआ है । भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच सीधी बातचीत के बाद एक.दूसरे के खिलाफ सैनिक कार्रवाई बंद करने पर सहमति बनी । विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी दोनों ने ही जोर देकर कहा है कि इसमें किसी दूसरे देश की कोई भूमिका नहीं है ।

अमेरिकी राष्ट्रपति संघर्षविराम के समय 10 मई से ही यह राग अलाप रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति उन्हीं की मध्यस्थता में बनी । विपक्षी दलों ने उसी समय यह सवाल उठाकर केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने कहा, जब संसंघर्षविराम की खबर अमेरिका से आयी । भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि संघर्षविराम में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं है और दोनों देश के सैन्य प्रमुखों ने आमने.सामने बात करके संघर्षविराम लागू किया है । उसके अगले दिन 11.12 मई को डोनाल्ड ट्रंप ने एक डिग्री और आगे बढ़कर बड़बोलापन का परिचय दिया । अमेरिकी राष्ट्रपति ने संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता की बात पहले से ज्यादा जोर देकर कही और कश्मीर समला सुलझाने में सहायता की भी पेशकश कर डाली ।

एक महीना से ज्यादा गुजर गया । डोनाल्ड ट्रंप का दावा जारी है, जिसे वे एक दर्जन से ज्यादा बार दुहरा चुके हैं । अमेरिकी राष्ट्रपति कश्मीर समस्या को ृहजारों वर्ष पुरानी’ और इसके हल में मदद के साथ.साथ भारत तथा पाकिस्तान दोनों से एक समान रिश्ता रखने की बात भी कह चुके हैं । कारण जो भी हो, भारत की लाचारी अब देश में अंदर और बाहर छिपी नहीं है । भारतीय विदेश मंत्रालय अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट की खुलकर आलोचना नहीं कर पा रही है ।

पाकिस्तान के दुनिया भर में दुष्प्रचार और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सही तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया । इसमें संसद सदस्यों के अलावे वर्तमान व पूर्व राजनयिक और विशेषज्ञ शामिल किए गए । कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अमेरिका गए । वहां के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेन्स समेत अन्य राजनयिकों से भी मिले । उसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिनिधिमंडल के लौटने के बाद फिर दुहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘व्यापार’ के साथ ‘युद्ध’ रोका ।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने अब यह सवाल उठाया है कि इस पूरे प्रकरण पर प्रधानमंत्री क्यों चुप हैं । यह 13.14 जून की बात है, जब प्रधानमंत्री ग्रुप.7 देशों की बैठक में भाग लेने साइप्रस होते हुए कनाडा रवाना हो रहे थे । उधर पाकिस्तान भी भारत के पदचिन्हों पर चलते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले और बाद की स्थिति बताने के लिए इंगलैंड और अमेरिका को आश्वस्त करने में जुटा है । यही दोनों सुपरपावर हैं जो दुनिया के किसी भी देश की आपसी लड़ाई के साथ.साथ शांति मध्यस्थता के लिए उतावले रहते हैं ।

पाकिस्तान ने अपना समानान्तर अभियान भारतीय प्रतिनिधिमंडलों के विदेशों से लौटने के बाद अमेरिका से शुरू किया है । पकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी(पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 09 जून को वाशिंगटन होते हुए लंदन पहुंचा । पाकिस्तान ने भी भारत की देखादेखी प्रतिनिधिमंडल भेजने का एलान भारतीय प्रतिनिधिमंडल की रवानगी के पहले की कर दिया था । पाकिस्तानी नेता के इंगलैंड पहुंचने से पहले वहां के विदेश मंत्री डेविड लेमी भारत दौरे पर आए और भारत के विदेशमंत्री जयशंकर ने उनसे स्पष्ट वहां कि आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं । 17 मई को डेविड लेमी समाचार एजेंसी रायटर के साथ एक भेंट में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हो गए । ब्रिटेन के विदेशमंत्री के दावे में एक नया पहलू जोड़ते हुए कहा कि इंगलैंड और अमेरिका इस क्षेत्र में युद्धविराम की दिशा में काम कर रहे हैं ।

भारत इस बात पर जोर दे रहा है और कायम है कि 22 अप्रील को कश्मीर के पहलगाम में पाक समर्थित आतंकी हमले में पर्यटक समेत 26 लोग मारे गए । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जवाबी कार्रवाई थी । विदेशों में भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने यही तथ्य समझाने का प्रयास किया । लेकिन पाकिस्तान का मकसद दूसरा है । डोनाल्ड ट्रंप का नवंबर, 2024 में दूसरी बार अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से कलेवर बदला हुआ है । अब आतंकवाद और उसका सरगना पाकिस्तान के प्रति डोलाल्ड ट्रंप का नजरिया बदल गया । पाकिस्तान इसका भरपूर लाभ उठाना चाहता है ।

बिलावल मुट्टो जरदारी के अमेरिका से इंगलैंड जाने के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर अमेरिकी सेना के बुलावे पर वाशिंगटन 12 जून को पहुंचे । असीम मुनीर को पाकिस्तानी परंपरा के अनुसार सत्ता का संभावित दावेदार माना जा रहा है। अमेरिकी सेना की 250वीं वार्षिक परेड में शामिल होने पाकिस्तानी ‘फील्ड मार्शल’ को बुलाया गया ।

अमेरिका ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता दे चुका है और विश्व बैंक से भी दिलवा चुका है ।

कश्मीर के बहाने अमेरिका भारत और पास्तिान का हाल इस्राईल और इरान वाला तथा कश्मीर को फिलस्तीन बनाना चाहता है । अमेरिका की तरह इस्राईल भी भारत की कमजोर नस बना हुआ है । गाजा पट्टी पर ताजे इस्राईली हमले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश निंदा प्रस्ताव पर भारत तटस्थ रवैया अपने देश में पसंद नहीं किया गया । इस्राईल अमेरिका इशारे के बगैर भारत के समर्थन में खड़ा नहीं हो सकता । भारत की तर्ज पर अमेरिका ने भी चीन से व्यापारिक रिश्ता फिर जोड़ने की पहल शुरू की । पीओके पर पाकिस्तान का खुलकर साथ देने से चीन को रोकने के लिए भारत ने 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद टूटा संपर्क फिर से स्थापित किया ।

21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र पर अबकी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हावी रहेगी । इस अभियान के कई पहलू विपक्षी दलों की नजर में संदिग्ध हैं, जिसका खुलासा सरकार को करना होगा । कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल ऑपरेशन के समय से ही इस पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे थे । जून के पहले सप्ताह में सरकार का विपक्ष के दवाब में मानसून सत्र का एलान करना पड़ा ।

देश.विदेश में उठ रहे इस विवाद के साथ.साथ भारत में सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर भी असहज स्थिति ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आड़ में पैदा हुई है । इसमें सियासी राजनीति उजागर हुई है । विपक्ष ने सवाल उठाया है कि सबसे पहले सैनिक अधिकारी कर्नल सोफिया कुरेशी पर अनर्गल आपत्तिनजक टिप्पणी करनेवाले मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह गिरफ्तार क्यों नहीं हुए घ हरियाणा में प्रोफेसर अली खॉ महमूदाबाद को तुरंत क्यों गिरफ्तार किया गया घ हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर अली खॉ ने मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर टिप्पणी के बाद गिरफ़्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी । वे अंतरिम जमानत पर चल रहे हैं ।

देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, राजनीतिज्ञों ने इसकी आलोचना की । प्रोफेसर महमूदाबाद के खिलाफ लगे आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित हरियाणा पुलिस कर रही है ।

मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकियों की बहन’ बताया था, जो कर्नल व्योमिका सिंह के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान रोजाना मीडिया ब्रीफिंग कर रही थी । विजय शाह को मध्य प्रदेश पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश से दर्ज एफआईआर की तामीली के बजाए सुप्रीम कोर्ट जाने का अवसर दिया । सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कमिटी गठित की और मानीटरिंग अपने हाथ में लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को आगे कुछ करने से रोक दिया ।

छुट्टा घूम रहे विजय शाह 10 जून को मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल हुए । एक हफ्ता पहले गुजरात में कांग्रेस नेता राजेश सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया । गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है ।