पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तानी फौज के हौसले पस्त होने और संघर्षविराम सहमति की नौबत आने तक पूरे देश का माहौल शान.गुमान से गर्म है । भारत की ताकत का दुनिया में डंका बजना देशवासियों की राष्ट्रीय भावना को बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है । इसका कारण है . देश की रक्षा और प्रतिष्ठा सर्वोपरिए जिसमें सियासी या चुनावी राजनीति की गुंजाईश नहीं । लेकिन संघर्षविराम के समय से लगातार ऐसे प्रसंग सुर्खियों में है, जो सीधे तौर पर दलीय राजनीति का स्वाद खट्टा करनेवाले हैं ।

10 मई को संघर्षविराम सहमति के समय से लेकर संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की विभिन्न देशों को ऑपरेशन सिंदूर की असलियत से अवगत कराने के लिए रवानगी तक लोगों ने यही देखा.सुना । मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाने और सत्तारूढ़ भाजपा का जवाब सफाई देने का सिलसिला जारी है । इससे आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की सारी उपलब्धि और सफलता राजनीति के बाद व्यक्तिगत छींटाकशी के गर्त में मिलती जा रही है । यहां तक कि प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजने के लिए विभिन्न दलों से संसद सदस्यों के चयन में भी भाजपा और कांग्रेस का मतभेद मनभेद जैसा लगा । अन्य दलों ने भी अपनी राजनीति भड़ांस निकाली ।

ऐसे अप्रिय प्रसंग सामने आ रहे हैं, जिसका सामाजिक जन.जीवन पर भी असर पड़ रहा है । लोग.बाग आपस में घर में, सफर में, चाय की दुकानों में यही बातें करते देखे जाते हैं । इसमें सरकार के साथ.साथ बड़ी अदालतों के लिए भी संभालना कठिन हो रहा है ।

21 मई को कश्मीर में आतंकवाद को कड़ी शिकस्त देने की सफलता पर विजय दिवस मनाया जा रहा था । कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 पर्यटकों के परिवार समेत मारे जाने के जवाब में सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर ‘अभियान चलाया । देश के अन्य हिस्सों में भी राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस का 21 मई के दिन जोश और जश्न जैसी लहर थी । उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेता प्रधानमंत्री मोदी से ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल किए जा रहे थे । विदित हो कि 21 मई को ही 1991 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी श्रीलंकाई तमिल आतंकवादी गुट लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(लिट्टे) के मानव बम विस्फोट में तमिलनाडु में मारे गये थे ।

लेकिन राहुल गांधी उस दिन ऑपरेशन सिंदूर के ही औचित्य पर सवाल दुहरा रहे थे । राहुल गांधी ने ऑपरेशन की जानकारी पाकिस्तान को देना ‘अपराध’ बताया । उन्हें यह जानने में कोई रूचि नहीं है कि भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर(पीओके) के अंदर घुसकर बकौल सेना 24 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए और कितने पाकिस्तानी विमान गिरा, । राहुल गांधी को सिर्फ यही जानकारी चाहिए कि भारत ने कितने विमान खो, और चेतावनी के बात कितने आतंकी मारे ।

पाक पोषित आतंकवाद की तस्वीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए विश्व अभियान के तहत संसद सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजने की तारीख संयोजवश 21 मई को ही थी । इस प्रतिनिधिमंडल में कई पूर्व राजयनिक विदेश सचिव और बुद्धिजीवी भी शामिल किए गए । कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से लेकर केंद्र सरकार की सभी नीतियों पर सवाल उठाए । विदेश सचिव विक्रम मिसरी की सफाई और स्पष्टीकरण से कांग्रेस को छोड़कर सभी दल तथा पूरे देश के लोग आश्वस्त हैं । कांग्रेस के जो नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे से सहमत नहीं हुए और सरकार का समर्थन करनेवाला रवैया अपनाया उससे कांग्रेस नेतृत्व ने किनारा कर लिया । सबसे ज्यादा विवाद लोकसभा सदस्य पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर के नाम को लेकर हुआ, जो पहले से ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की नीतियों की आलोचना करते आ रहे हैं ।

प्रतिनिधिमंडल में जितने लोग शामिल किए गए हैं, उनमें अकेले शशि थरूर अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व वाले हैं । वे संयुक्त राष्ट्र के अपर महासचिव रहने के साथ.साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव भी लड़ चुके हैं । अभी शशि थरूर विदेश मंत्रालय से संबद्ध संसदीय समिति के भी अध्यक्ष हैं । इसलिए शशि थरूर को अमेरिका भेजे जानेवाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपा गया । बातते चलें कि विवाद की शुरूआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की ।

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम के लिए ‘मैंने मध्यस्थता की, कश्मीर पर भी मध्यस्थता को तैयार हूं ।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘दोस्त’ बतानेवाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार.बार संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता की बात दुहरायी और बवाल के बाद इससे इन्कार कर दिया । इस पर भी सवाल उठा कि संघर्षविराम की खबर सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से क्यों आयी ।

प्रतिनिधिमंडल की रवानगी के समय 21.222 मई को माहौल असहज और राजनीतिक मतभेदों के कारण बिगड़ा हुआ था ।

एक तरफ तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत सैनिक अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को विपक्षी दल संतुष्ट नहीं हो रहे हैं । दूसरी तरफ ऑपरेशन सिंदूर की आड़ में अपनी सांप्रदायिक सोच से भाजपा के लोग सामाजिक सद्भाव बिगाड़ रहे हैं ।

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में उपमुख्यमंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर अभियान की हर रोज देश को जानकारी देनेवाली कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ बता दिया । भारत का ऑपरेशन इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है । इसका मतलब ये नहीं कि एक महिला फौजी अफसर को मुस्लिम के रूप में देखा जाए । विजय शाह के खिलाफ विशेष जांच दल गठन में मध्यप्रदेश महिला पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया है । विशेष जांच दल(एसआईटी) को 23 मई तक रिपोर्ट देनी है । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई करनेवाली पीठ में भी एक महिला जज थी । पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश पर विजय शाह के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज किया, उस पर भी हाईकोर्ट को फटकार के सथ कहना पड़ा कि पुलिस ने मुख्य मुद्दा की उपेक्षा करके जानबूझकर ऐसा कमजोर मामला बनाया ताकि आसानी से एफआईआर रद्द हो जाए । विजय शाह की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक एसआईटी रिपोर्ट आने तक है । अग्रिम जमानत और एफआईआर रद्द करने की विजय शाह की अर्जी पर सुप्रीम जजों को कहना पड़ा. ‘आपकी माफी स्वीकारने योग्य नहीं है, आंसू घड़ियाली हैं । आपको शर्म आनी चाहिए ।’ विजय शाह ने बवाल मचते ही कर्नल सोफिया को ‘अपनी बहन’ बना दिया ।

ऐसा ही एक और मजहबी गुट वाला मामला भाजपा शासित हरियाणा से सामने आया और वो भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा । अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत तो दे दी, लेकिन उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए 24 घंटे के भीतर आईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने का आदेश हरियाणा पुलिस को दिया, जिसमें एक महिला अधिकारी हो ।

अली खान महमूदाबाद को हरियाणा पुलिस ने फेसबुक पर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट के खिलाफ एफआईआर के तुरंत बाद 18 मई को ही गिरफ्तार कर लिया । एफआईआर दर्ज करानेवाली रेनु भाटिया हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हैं । उसके पहले से मध्यप्रदेश में मंत्री विजय शाह के खिलाफ मामला चल रहा था । कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों का विरोध एक स्वर से उभरा कि विजय शाह के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश से दर्ज एफआईआर पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और भाजपा मंत्री को बचाव का भरपूर अवसर दिया । महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से 21 मई को अंतरिम जमानत मिली ।

यह सारा कुछ उसी समय देश के अंदर हुआ, जब पाकिस्तानी दुष्प्रचार के खिलाफ भारत की आतंक रोधी छवि बेहतर बताने के लिए संसदीय प्रतिनिधिमंडल विदेश रवाना हो रहे थे । 20 मई को राजनीतिक बयानबाजी की बार और पलटवार ने तो मर्यादा की सीमा लांघ दी । भाजपा ने राहुल गांधी को ‘मीर जाफर’ तो कांग्रेस ने विदेशमंत्री जयशंकर को ‘जयचंद’ करार दिया । यह वार भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय और कांग्रेस के पवन खेड़ा के बीच चला ।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महमूदाबाद के बारे में जानकारी दी कि वे पद्म भूषण प्राप्त भारत के पूर्व विदेश सचिव जगत एस. मेहता के पौत्र हैं । 1976.79 के दौरान जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेशमंत्री थे, उस समय जगत मेहता विदेश सचिव थे । महमूदाबाद की गलती थी उनकी फेसबुक पोस्ट और उनका नाम ।

संयोग या दुर्योग कहा जाए कि 21 मई को ही सुप्रीम कोर्ट में वक्फ एक्ट की संवैधानिकता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी । इस एक्ट को लेकर देश के मुस्लिम समुदायों में रोष है, जगह.जगह दंगे भी हुए । मुस्लिम और महिला का मामला ऑपरेशन सिंदूर की समाप्ति के बाद से हावी है । ऑपरेशन सिंदूर पर विदेश सचिव विक्रक्फ़म मिसरी ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को रवानगी से पहले तथ्यों से अवगत कराया । उसके पहले मंत्रालय से संबद्ध संसदीय समिति की शशि थरूर की अध्यक्षता में हुई बैठक में विक्रम मिसरी ने कहा कि संघर्षविराम में अमेरिकी राष्ट्रपति की कोई भूमिका नहीं है और सैन्य कार्रवाई की पूर्व सूचना पाकिस्तान को नहीं दी गयी । समिति ने सर्वसम्मति से मिसरी को ट्रोल करने की निंदा की । सभी सदस्य इस तथ्य से सहमत हुए कि भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ(डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशन) की आपसी बातचीत के बाद संघर्षविराम सहमति बनी । भारतीय सेना कह रही है ऑपरेशन बंद नहीं हुआ है, स्थगित किया गया है ।

विवाद का एक कारण संसदीय प्रतिनिधिमंडल के लिए उनकी पार्टी द्वारा प्रस्तावित मुस्लिम नाम भी रहा । कांग्रेस द्वारा भेजे गए दो मुस्लिमों की जगह भाजपा ने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को लिया । ये भी ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस नेतृत्व से सहमत नहीं हैं । तृणमूल कांग्रेस ने युसुफ पठान पर एतराज किया तो उनकी जगह अभिषेक बनर्जी को लिया ।

अमृतसर स्वर्ण मंदिर पर आतंकी हमले की आशंका पर मंदिर के ग्रंथियों ने जोरदार शब्दों में इस बात को सराकर गलत बताया कि स्वर्ण मंदिर परिसर में हवाई रक्षा प्रणाली तैनाती की इजाजत दी गयी है ।