अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर दार्जीलिंग बंद, हड़ताल के साथ हिंसक आंदोलन चलानेवाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा(जीजेएम) ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आश्वासन पर बंद समाप्त कर दिया । जीजेएम नेता बिमल गुरूंग और उनके सहयोगी केंद्र सरकार की ओर से वार्ता के लिए बुलावे के इंतजार में बैठे हैं । उधर पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा और राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच गोरखालैंड को लेकर ठनी हुई है । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) और भाजपा प्रदेश यूनिट के अध्यक्ष दोनों ही अलग गोरखालैंड राज्य गठन के खिलाफ हैं ।
गोरखा नेताओं का सपना ‘साकार’ करने के वायदे पर 2014 में दार्जीलिंग लोकसभा सीट जीतने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने गोरखालैंड पर चुप्पी साध रखी है । इसलिए प्रदेश भाजपा नेताओं को गोरखालैंड पर कुछ बोलने से परहेज करना पड़ रहा है । लेकिन दार्जीलिंग की राजनीतिक गतिविधियों से अपने को अलग-थलग रखना भी संभव नहीं हो पा रहा है । समूचा दार्जीलिंग दीदी और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के हाथ में चले जाने का डर लगातार बना हुआ है । ताजातरीन हालातों के मद्देनजर हिंसा के लिए राज्य सरकार और सीपीएम(मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी) को जिम्मेदार ठहराने तथा शांति का श्रेय खुद लेने का भाजपा का कोई बयान दार्जीलिंग की गोरखा जनता नहीं स्वीकारेगी ।
राजनाथ सिंह तीन महीने से ज्यादा समय तक दार्जीलिंग में बेमियादी बंद हड़ताल के कारण सामान्य जन-जीवन ठप्प और अस्त-व्यस्त देखते रहे । 26 सितंबर को राजनाथ सिंह ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर बंद के आयोजक जीजेएम प्रमुख बिमल गुरूंग समेत तमाम गोरखालैंड समर्थक गोरखा नेताओं से हड़ताल वापस लेने की अपील की । 26 सितंबर को बंद का 104वां दिन था । केंद्रीय गृहमंत्री ने दशहरा, मुहर्रम जैसे पर्व के दौरान शांति कायम करने के उद्देश्य मात्र से बंद वापस लेने की अपील की ।
गोरखा नेताओं को यह भी संदेश भिजवाया कि केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा से एक पखवाड़े के अंदर आधिकारिक स्तर की वार्ता आयोजित करने कहा गया है, जिसमें राज्य सरकार भी शामिल हो ।
केंद्रीय गृहमंत्री की अपील के जवाब में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा नेता बिमल गुरूंगा ने बंद वापस लेने के अपनी पार्टी के फैसले का वीडियो संदेश सार्वजनिक किया । बिमल गुरूंगा को गिरफ्तार करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस वारंट लिए उन्हें खोजती फिर रही है। फरार गुरूंगा किसी अज्ञात स्थान में छिपकर गोरखालैंड राज्य आंदोलन का संचालन कर रहे हैं। बंद तो वापस हो गया, मगर दार्जीलिंग में शांति और सुव्यवस्था कायम नहीं हो पायी, जिसके लिए राजनाथ सिंह ने 104 दिनों तक ‘दार्जीलिंग की स्थिति पर नजर’ रखे रहने के बाद बंद वापस लेने को अपील की । हड़ताल समाप्त होने के बाद हिंसा तब भड़की, जब पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कलिम्पोंग गये । दार्जीलिंग से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार चार अक्टूबर को दिलीप घोष पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजुमदार के साथ वार्ता के लिए ‘माहौल’ का सर्वेक्षण करने वहां पहुंचे । दिलीप घोष के काफिले पर हमला उस समय हुआ, जब वे एन. सी. गोयनका रोड स्थित ‘गोरखा दुख निवारण सम्मेलन’ हॉल से बाहर निकलकर दार्जीलिंग थाना की ओर बढ़ रहे थे । दिलीप घोष ने जीजेएम के बिमल गुरूंगा विरोधी नेता विनय तमांग के समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया और कहा कि वे उन तीन व्यक्तियों को बचा रहे थे, जो हमले में घायल हुए । दिलीप घोष के खिलाफ काले झंडे लिए नारेबाजी करते हुए गोरखालैंड समर्थकों ने बार-बार कहा कि ‘104 दिनों तक कोई भाजपा नेता हमारा दुख देखने क्यों नहीं आए’ । उस दौरान हिंसा में मारे गये 13 लोगों के परिवारजनों का दुख जानने कोई भाजपा नेता, कोई मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी नेता नहीं गए । दार्जीलिंग लोकसभा सीट से 2014 में गोरखालैंड राज्य के लिए आवाज उठाने के ही मुद्दे पर जीजेएम के समर्थन से जीते केंद्रीय मंत्री एस. एस. अहलूवालिया ने तो एक दिन के लिए भी दार्जीलिंग में कदम नहीं रखा । वे भी हिंसा में मारे गए और घायलों का दुख बांटने नहीं आए ।
दिलीप घोष के दौरे से उपजी हिंसा के बाद दार्जीलिंग की जिला मजिस्ट्रेट जोयोशी दास गुप्ता का कहना पड़ा कि 104 दिनों की हड़ताल के बाद सामान्य स्थिति बहाल हुई है और अब राजनीतिक दौरे के कारण हिंसा भड़की है । इसलिए उन्होंने ऐसे दौरों पर रोक लगा दी । सिलीगुड़ी के मेयर और वरिष्ठ सीपीएम नेता अशोक भट्टाचार्य को जिला मजिस्ट्रेट ने मना कर दिया । मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएम के नेता भी बंद के दौरान दार्जीलिंग जाने से बचते रहे ।
सात अक्टूबर को जीजेएम के विनय तमांग गुट ने पार्टी का 11वां स्थापना दिवस समारोह बिमल गुरूंगा और रौशन गिरि की गैरमौजूदगी में मनाया । दिलीप घोष पर हमले को सही ठहराया । 2007 में सुभाष घीसिंग के गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट(जीएनएलएफ) से अलग होकर बिमल गुरूंगा और रौशन गिरि ने जीजेएम की स्थापना की । विनय तमांग और अनित थापा बिमल गुरूंगा के सहयोगी थे, जो आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) को सहयोग कर रहे हैं । भाजपा और सीपीएम दोनों दीदी का काट प्रस्तुत करने के लिए गोरखालैंड पर गोलमटोल बयानबाजी कर रहे हैं । एकमात्र दीदी हैं, जिनका रवैया 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से स्पष्ट है कि दार्जीलिंग को पश्चिम बंगाल से अलग नहीं होने दिया जाएगा । एकमात्र नेता दीदी हैं, जो बंद के दौरान दार्जीलिंग गयीं और गोरखा नेताओं से वार्ता भी की । उनके पास दार्जीलिंग में हिंसा का हल हमेशा रहा और आज भी है । दीदी ने 2011 विधान सभा चुनाव के समय सिलीगुड़ी जाकर गोरखा नेताओं से भाई का रिश्ता कायम किया और दार्जीलिंग में हिंसा राज समाप्त किया । हिंसा का निदान 30 वर्षों में राज्य की सीपीएम सरकार और केंद्र की कांग्रेस या कोई गठजोड़ सरकार के पास नहीं था ।
दार्जीलिंग में इतना लंबा बंद पहले कभी नहीं देखा गया । दीदी ने हिंसा के लिए कायम गोरखा एकजुटता तोड़ी और बंद के दौरान गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन(जीटीए) से बिमल गुरूंग के इस्तीफे के बाद उनके लंबे बंद की जिद के विरोधी विनय तमांग को अध्यक्ष मनोनीत कर दिया । केंद्र की वर्तमान भाजपा गठजोड़ सरकार ने त्रिपक्षीय वार्ता की बात कही है, जो होनी मुश्किल है । दिलीप घोष ‘गोरखा दुख निवारण’ के बजाए बढ़ाने का उपाय कर आए । सूत्रों से पता चला कि वे दार्जीलिंग से निकलकर बिमल गुरूंग से मिलने संभवतः सिक्किम गए, जहां सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने गुरूंग को छिपने को सुरक्षित जगह दे रखी है । चामलिंग प्रबल गोरखालैंड समर्थक हैं । भाजपा नेता दिलीप घोष और सीपीएम नेता अशोक भट्टाचार्य दोनों जोर देकर कह रहे है कि बिमल गुरूंग को शामिल किए बगैर वार्ता नहीं हो सकती ।
केंद्रीय गृहमंत्री ने वार्ता का रास्ता खोला है । जीजेएम नेताओं के मुताबिक गोरखालैंड को छोड़ दार्जीलिंग में वार्ता का कोई मुद्दा ही नहीं है । बिमल गुरूंग इसी पर अड़े हैं । भाजपा ने गोरखालैंड का नाम लेना छोड़ दिया है । बिमल गुरूंग के खिलाफ आठ जून को दार्जीलिंग स्थित राजभवन में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान पुलिस टुकड़ी पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज है । 15 जून से दार्जीलिंग बंद की तैयारी हो चुकी थी । बिमल गुरूंग ने 29 अगस्त को कोलकाता में दीदी द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में जब आंदोलन वापस लेने से इंकार कर दिया, उसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ । उत्तरी बंगाल विकास मंत्री रवीन्द्रनाथ घोष गुरूंग और रौशन गिरि को आतंकवादी घोषित कर चुके हैं ।
राजनाथ सिंह के कहे के मुताबिक वार्ता का यह पखवाड़ा बीतने को है । दीदी को इस वाता में कोई दिलचस्पी नहीं है । विनय तमांग ने सात अक्टूबर को 11वें स्थापना दिवस पर गोरखालैंड आंदोलन तेज करने के लिए 11 कार्यक्रमों को ऐलान किया, जिसके बिना गोरखा नेता बने रहना असंभव है ।
सबसे बड़ी मुश्किल में भाजपा है, जो 2009 में भी गोरखालैंड राज्य के मुद्दे पर जीजेएम की बदौलत दार्जीलिंग लोकसभा सीट जीती है ।