मीडिया और पत्रकारिता
पत्रकारिता के ज्वलंत मुद्दे
पत्रकारिता केवल खबर लिखने की विधा नहीं, बल्कि समाज, सत्ता और सार्वजनिक जीवन को समझने की जिम्मेदारी भी है। इसी बुनियादी दृष्टि से लिखी गई यह पुस्तक हिंदी पत्रकारिता के उन प्रश्नों पर केंद्रित है, जिनसे हर गंभीर पत्रकार, विद्यार्थी और पाठक को गुजरना पड़ता है।
इस पुस्तक में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, समाचार-मूल्य, संपादकीय विवेक, भाषा, निष्पक्षता, जनसरोकार और मीडिया की सामाजिक भूमिका जैसे विषयों को सरल, व्यावहारिक और अनुभव-समृद्ध ढंग से रखा गया है।
शशिधर खान ने चार दशकों से अधिक समय तक हिंदी के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं में सक्रिय लेखन किया है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से लंबे जुड़ाव और पत्रकारिता संस्थानों में अध्यापन-संवाद के अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को केवल सैद्धांतिक नहीं रहने दिया, बल्कि जमीन से जुड़ा और व्यवहारिक बनाया है।
यह पुस्तक पत्रकारिता के विद्यार्थियों, युवा पत्रकारों और उन पाठकों के लिए उपयोगी है, जो मीडिया को केवल सूचना के माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समाज की एक गंभीर सार्वजनिक संस्था के रूप में समझना चाहते हैं।