धर्म की आड़ लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक असहजता का माहौल पैदा किया जा रहा है । सांप्रदायिकता और धर्म की राजनीति की परिभाषा अपने मतलब के हिसाब से तय करने का जुगार अभी सुर्खियों में है । इसमें गौर करने का लायक नया चलन है सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद का बदलता राजनीतिक स्वरूप । हिन्दू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) और उसके राजनीतिक मंच जनसंघ(जो आज भाजपा है) को सारे तथाकथित ‘धर्मनिरेपक्ष’ दल सांप्रदायिकधफिरकापरस्त प्रचारित करते नहीं थकते थे । उसी भाजपा के अपने सियासी राष्ट्रवाद नारे के व्यापक असर ने सारे गैर.भाजपा दलों को राजनीतिक दिवालिया बना दिया है । भाजपा अपने रास्ते से गुजरते हुए जो कुछ छोड़ देती है या छूट जाता है, उसे बटोरने की आपाधापी सभी भाजपा विरोधियों में मची है । भाजपा ने अपना रास्ता नहीं बदला, मंदिरधहिन्दुत्व की राजनीति नहीं छोड़ी, बल्कि उसे साथ लिए हुए अन्य धर्मों को भी अपने खेमे में शामिल करने में जुटी है ।
ताजातरीन घटनाओं पर नजर डालने से वैसे सभी ‘धर्मनिरपेक्ष’ तत्वों की कलई खुलती है, जिनकी सियासी राजनीति में इसाई और इस्लाम धर्म की राजनीति करनेवाले अल्पसंख्यक तथा तुष्टीकरण के हकदार हैं । लेकिन हिंदुत्व की राजनीति को आधार बनाने वाली भाजपा सांप्रदायिकधविघटनकारी ताकतों को बढ़ावा देनेवाली पार्टी है । इसाई और इस्लाम धर्म का पूरी दुनिया में बोलबाला है । इन दोनों मजहबों ने अन्य देशों से ज्यादा भारतीय सामाजिक जीवन में अंदर तक घुसपैठ करके अलगाववाद की राजनीति को बढ़ावा दिया है । फर्क सिर्फ इतना है कि इस्लाम की आतंकवादी हिंसा के रूप में बदनामी हुई है और इसाई मिशनरियां पूरी खामोशी से ऐसा उग्रवादी मिशन चला रही हैं, जिसकी जड़ें गहरी हैं ।
इस्लाम से ज्यादा भाजपा विरोधी चर्चों के राजनीतिक प्रभुत्व वाले पूर्वोत्तर की दशा.दिशा भाजपा ने बदल दी । यह देश का ऐसा उपद्रवग्रस्त क्षेत्र है, जहां हर राज्य में दर्जनों उग्रवादी गुट अलग अस्तित्व के लिए आंदोलन कर रहे हैं । उग्रवाद का संचालन और उसके राजनीतिक इस्तेमाल की नीति चर्चों के पादरी तय करते हैं । इन राज्यों में अभी तक कांग्रेस सत्ता में थी और उग्रवादी गुटों से चुनावी तालमेल पर्दे के पीछे से चर्च के इशारे पर होता है । लगभग सभी उग्रवादी गुट इसाई हैं । आजादी से पहले ही चर्च के उकसावे पर पूर्वोत्तर में अलगाववाद की नींव रखनेवाले एनएससीएन(नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल और नगालिम) समेत तमाम नगा गुटों के नेता इसाई हैं ।
इसी आलोक में इसाई बहुल आबादी वाले गोवा का घटनाक्रम देखिए, जहां 2022 के शुरू में ही चुनाव होना है । ग्रुप.20 देशों के जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने रोम गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्राध्यक्षों से पहले अंतरराष्ट्रीय इसाई धर्मगुरू पोप फ्रांसिस से मिले और उन्हें भारत आने का न्योता दिया । 30 अक्टूबर को नरेंद्र मोदी और पोप फ्रांसिस की वेटिकन सिटी में मुलाकात से एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) गोवा में अपनी पार्टी के लिए चुनाव जमीन तैयार करने पहुंची हुई थी । गोवा में दीदी ने जोर देकर कहा कि वे मंदिर, मस्जिद, चर्च तीनों की समान रूप से हिमायती हैं । गोवा में चर्चों के राजनीतिक प्रभाव के बावजूद भाजपा की सरकार है । दीदी ने अभी हाल ही में भाजपा के सत्ता परिवर्तन अभियान को भाजपा का ही तरीका अपनाकर असफल किया है और लगातार तीसरी वार पूर्ण बहुमत से सिर्फ अपनी बदौलत सत्ता में लौटी हैं । चुनाव प्रचार अभियान में दीदी ने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की कुर्सी बरकरार रखने के लिए एकमात्र बड़ी चुनौती भाजपा की काट में दुर्गा सप्तसती का पाठ किया और खुद को ‘ब्राह्मण कन्या’ बताया । इसके पहले के बंगाल के दोनों चुनावों में दीदी का सीधा मुकाबला जब सिर्फ कांग्रेस और वामदल से था, तब वे ‘सेक्युलर’ थीं । गोवा में भी दीदी ने अपनी मुलाकातों में मंदिर, मस्जिद, चर्च का ख्याल रखा । उसी समय 29 अक्टूबर को ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी राजनीतिक दौरे पर गोवा में थे । आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के ৩
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी 01 नवंबर को गोवा पहुंचे, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों को दिल्ली से बाहर भी पटखनी देने में लगे हैं । केजरीवाल ने एक डिग्री आगे बढ़कर कहा कि उनकी पार्टी को अगर बहुमत मिला तो अयोध्या में राम मंदिर ए तमिलनाडु में वेलानकन्नी चर्च ए राजस्थान में अजमेर शरीफ़ और महाराष्ट्र में शिर्डी के लिए मुफ़्त तीर्थ यात्रा करायी जाएगी। उन्होंने वायदा किया कि गोवा के श्रद्धालु अपनी अपनी आस्था के अनुसार इन चारों तीर्थ स्थलों में से जहां भी जाना चाहें ए उन्हें ए.सी. ट्रेन से ले जाने और ए.सी.होटेल में ठहराने का इंतज़ाम किया जाएगा ।
जहां तक इसाई धर्म के भाजपा से ताल्लुक की बात है, 1999 में भाजपा गठजोड़ प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के न्योते पर पोप जॉन पॉल ¤ भारत आए थे । 2013 में पोप बनने के बाद फ्रांसिस से मिलनेवाले पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं । पोप ने नरेंद्र मोदी के भारत आने का न्योता स्वीकार कर लिया । प्रधानमंत्री अवश्य ही फ्रांसिस पोप का गोवा चुनाव से पहले स्वागत करना चाहेंगे । इसका फायदा भाजपा को इसाई प्रभुत्ववाले मणिपुर में भी मिल सकता है । जहां भाजपा पहलीबार सत्ता में आयी है । वहां भी चुनाव करीब है । नगालैंड, मेघालय, मिजोरम के बाद चर्च दंबगियत वाला चौथा राज्य मणिपुर है । लेकिन वेटिकन से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पोप फ्रांसिस ने बातचीत में धार्मिक आजादी से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की । हालांकि विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने इसका खंडन किया ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रोम में थे, उसी समय तमिलनाडु से चर्च के कारनामे उजागर करनेवाली खबर वेटिकन सूत्रों से आयी । चेन्नई से 31 अक्टूबर को प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार वेटिकन के दिल्ली स्थित राजदूत एपोस्टोलिक ननकिएचर ने तमिलनाडु के विशप कौंसिल को निर्देश दिया कि चर्च पादरी वित्तीय और राजनीतिक सत्ता बनाने के लिए किसी ट्रस्ट या सोसायटी से न जुड़ें । 18 पादरियों की तमिलनाडु बिशप कौंसिल के एक दबंग पादरी को हालिया विधान सभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत वाले भाषण देने के कारण गिरफ्तार किया था । तमिल नेशनलिस्ट पार्टी के बैनर तले इस पादरी ने दक्षिण तमिलनाडु में अकृत संपत्ति बनायी है और इसने चर्चवाला चोगा पहनकर इसाई मतदाताओं के बीच चुनाव प्रचार अभियान चलाया था । तमिलनाडु से ज्यादा केरल में चर्चों का ज्यादा पुराना और संगठित राजनीतिक आधार है । तमिलनाडु के साथ ही केरल में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा । जबकि सत्तारूढ़ वाममोर्चा सरकार हिन्दुओं के महज मामूली राजनीतिक सामाजिक हैसियत का फायदा उठाकर सत्ता में बनी रही । वाममोर्चा और कांग्रेस का रवैया साबरीमाला मंदिर विवाद के समय ही हिंदुत्व रंग ले चुका था । अब केरल सरकार को अपने परंपरागत वोट बैंक इसाई और मुसलमान से मतलब है, जिनके मतदाता ज्यादा हैं । 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की अपील पर नोटिस भेजा । केरल हाईकोर्ट ने मुसलमानों और इसाईयों के लिए 80रू20 के अनुपात में अल्पसंख्यक नाम पर स्कॉलरशिप देने के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया । उसके खिलाफ केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी ।
हिन्दू और मुस्लिम राजनीतिक दुर्भावना का हाल जानने के लिए त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल चलें । त्रिपुरा में भाजपा को कई दशकों से लगातार चली आ रही मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी सरकार को हटाकर सत्ता में आने का मौका मिला है । बांग्लादेश में दशहरा के समय पूजा पंडाल के मंडप में कुरान रखने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिन्दुओं के खिलाफ हमले का असर इन दोनों राज्यों में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में नजर आया । क्योंकि त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में ज्यादातर मतदाता 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद वहां से भागकर आए बांग्ला भाषी मुसलमान हैं ।
28 अक्टूबर को बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्री एमण् हसन महमूद कोलकाता प्रेस क्लब में सफाई दे रहे थे कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात जिम्मेदार है । उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमला करके सांप्रदायिक तनाव पैदा करनेवालों के खिलाफ एकड़े कदम’ उठाये हैं ।
28 अक्टूबर को ही त्रिपुरा पुलिस उत्तरी त्रिपुरा के रामनगर में मस्जिद पर हुए हमले को सोशल मीडिया द्वारा फैलायी गयी अफवाह बता रही थी । भारत बांग्लादेश सीमा पर स्थित इस मस्जिद को विश्व हिन्दू परिषद समर्थकों की रैली में नुकसान पहुंचाया गया । बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा 18 अक्टूबर को भड़की थी । उसकी प्रतिक्रिया में त्रिपुरा में मस्जिद पर हुए हमले के जवाब में उनाकोटी जिले में काली मंदिर की बाड़ क्षतिग्रस्त करने और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता पर 30 अक्टूबर को चाकू से हमले हुए । निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी । उत्तरी त्रिपुरा जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल रहीम चौधुरी ने एक दर्द भरी बात कही कि 30 वर्षों में ऐसी सांप्रदायिक हिंसा पहले कभी नहीं देखी गयी ।
उसी दिन पाकिस्तान के सिंघ प्रांत स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर से नकदी और मूर्तियों के जेवरात लूटने की खबर आयी । याद रहे कि कुछ दिन पहले देवी मंदिर में तोड़फोड़ के खिलाफ पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया और सरकार को उसके पुनर्निर्माण का आदेश दिया ।
राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म के इस्तेमाल से ज्यादा सोशल मीडिया अनसोशल बातों से सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा रही है ।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को हिंदू देवी से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री हटाने को आदेश ट्विटर को दिया । बांग्लादेश के सांप्रदायिक हिंसा फैलने का कारण यह सामने आया कि एक फेसबुक पोस्ट से अफवाह फैली कि रंगपुर जिले के पीरगंज गांव में किसी ने ‘धर्म का अपमान’ किया है ।
बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने आरोप लगाया कि हिंदुओं पर हमले के खिलाफ बोलने के बाद उनका फेसबुक बंद कर दिया गया । उन्होंने 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद हिंदुओं पर हुए अत्याचार के खिलाफ भी बोला, लिखा था । पश्चिम बंगाल में 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले 37 वर्ष तक राज करनेवाली वाममोर्चा ने तसलीमा को कोलकाता में पनाह देने से इन्कार कर दिया ।
सनसनी वाली खबरों के सार्वजनिक मंचों पर टांगें फैलाकर पसरे रहने के कारण सद्भावना वाली फिलर दब जाती हैं । भारत और पाकिस्तान के बीच दुबई में हुए हालिया टी20 विश्व कप के पहले मैच में भारत की हार के बाद भारतीय टीम के गेंदबाज मोहम्मद शमी के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करनेवालों को भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने आड़े हाथों लिया ।
विराट कोहली ने 30 अक्टूबर को दुबई में ही प्रेस कान्फ्रेंस में कहा. ‘मोहम्मद शमी को ट्रोल करनेवाली भीड़ की रीढ़ नहीं । धर्म के नाम पर आलोचना करनेवाले ये नहीं समझते कि हमारे खेलने का एक अच्छा कारण है और धर्म के आधार पर पक्षपात के बारे में कभी नहीं सोचा ।’ जो सदभाव भारत और पाकिस्तान के राजनीतिज्ञों की तड़ी के कारण डम्प रहता है वो विराट कोहली ने खेल.खेल में कायम कर दिया ।
तालिबानी कब्जे में जा चुके काबुल की एक नदी का जल वहां की एक लड़की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भेजा । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस जल से अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का अभिषेक किया ।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव प्रचार में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करनेवाले कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत सबका टोन बदला हुआ है, मायावती अयोध्या के बाद मथुरा, वृंदावन के भी मंदिर निर्माण का चुनाव सभाओं में समर्थन कर रही हैं । कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को रैलियों में देवी पाठ और ‘हर.हर महादेव’ जाप करते सुना गया ।