तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की आत्मकथा के विमोचन के अवसर पर जुटनेवाले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव मौजूद नहीं थे । तमिलनाडु के द्रमुक(डीएमके) मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की तीन खंडों में प्रकाशित आत्मकथा का विमोचन इसी हफ्ते कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किया । वास्तव में वो आयोजन मुख्य रूप से भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों की मोर्चाबंदी और भाजपा विरोधी राज्य सरकारों के केंद्र से बिगड़ते रिश्ते का मंच था ।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 28 फरवरी को आयोजित इस समारोह में केरल के वाममोर्चा मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कान्फ्रेंस सुप्रीमो की उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी गयी । बिहार के विपक्षी नेता राष्ट्रीय जनता दल के सबसे प्रभावशाली हस्ती तेजस्वी यादव भी मौजूद थे । इन नेताओं ने खुलकर केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधों में खटास पैदा करनेवाले हालिया प्रकरण उठाए । राहुल गांधी की मौजूदगी के कारण राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत संभवतः नहीं पहुंचे होंगे । महाराष्ट्र के शिवसेना-कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस गठजोड़ महाराष्ट्र विकास आघाड़ी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को न्योता था या नहीं अथवा वे भी राहुल गांधी के शामिल होने के कारण चेन्नई नहीं गए, इसके बारे में कोई पक्की रिपोर्ट नहीं मिल पायी । एकमात्र मुख्यमंत्री थे, केरल के पिनारायी विजयन ।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव का उस समारोह में शामिल होने से परहेज की ओर सबका ध्यान गया । ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) और चन्द्रशेखर राव भी अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति(टीआरएस) के सर्वेसर्वा खुद हैं। केंद्र की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ सरकार की हालिया नीतियों/प्रस्तावों को संघीय ढांचे के खिलाफ बताकर भाजपा विरोधी मोर्चाबंदी अभियान चलाने में दीदी(ममता बनर्जी) और चन्द्रशेखर राव ही अगुवा हैं। वैसे तो केंद्र राज्य संबंधों में तल्खी जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) कोरोना टीकाकरण और राज्य सरकारों की सहमति के बगैर सीमा सुरक्षा बल के अधिकार बढ़ाने समेत कई मुद्दों को लेकर आयी है ।

लेकिन नए साल में आईएएस काडर के नियमों में संशोधन के प्रस्ताव से विपक्षी दलों और विपक्ष शासित राज्यों ने भाजपा विरोधी मुहिम तेज हो गयी । इसका झंडा सबसे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उठाया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव झंडा में हाथ लगानेवाले दूसरे नेता हैं । विरोध के कारण तीनों कृषि कानून केंद्र सरकार को वापस लेने पड़े । नागरिकता संशोधन कानून, 2019 लागू करने के नियम तय करना केंद्र लगातार टाल रहा है ।

आईएएस, आईपीएस काडर प्रतिनियुक्ति नियमों में बदलाव के प्रस्ताव के खिलाफ तो लगभग सभी मुख्यमंत्रियों ने खुलकर बोला है । यहां तक कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ के भाजपा मुख्यमंत्रियों समेत बिहार के जनता दल(यू)-भाजपा गठजोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है । भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए रखनेवाले भाजपा के खिलाफ मुहिम से भी अलग रहनेवाले ओडिशा के बीजू जनता दल मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी आईएएस काडर बदलने के प्रस्तावित संशोधन का विरोध किया है ।

लेकिन दीदी के नेतृत्व में चल रहे भाजपा विरोधी मुहिम में कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और कांग्रेस पार्टी को भी शामिल नहीं किया गया है । जबकि 10 फरवरी को संसद के दोनों सदनों में आईएएस काडर का विरोध करनेवाली 10 विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस ही ज्यादा मुखर देखी गयी ।

14 फरवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री दीदी ममता बनर्जी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तेलंगाना के मुख्यमंत्री से बात करने के बाद कहा कि ‘कांग्रेस अपने रास्ते जा सकती है, हम अपने रास्ते चलेंगे ।’ स्थानीय निकायों के चुनाव में अपनी जीत का परचम बरकरार रखने के बाद दीदी ने तमिलनाडु और तेलंगाना सरकारों से बात करके विपक्ष शासित राज्यों की दिल्ली में जल्द ही बैठक बुलाने का आग्रह किया । पश्चिम बंगाल में दीदी कांग्रेस और वाममोर्चा दोनों को बैकफुट पर ला चुकी हैं । गत वर्ष विधान सभा चुनाव में मजबूत विपक्षी दल के रूप में उभरी भाजपा स्थानीय निकाय चुनावों में तीसरे नंबर पर रही । विधान सभा चुनाव में वाममोर्चा एक भी सीट नहीं जीत पायी । दीदी ने गोवा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस से चुनावी गठजोड़ का प्रयास विफल रहा । दीदी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मंच शेयर कर चुनाव प्रचार में शामिल हुई और कहा कि ‘मैं कभी नहीं चाहूंगी कि अखिलेश यादव किसी सीट पर कमजोर पड़ें ।’ अखिलेश यादव का भाजपा से सीधा मुकाबला है और उन्होंने कांग्रेस से गठजोड़ नहीं किया है । 2 मार्च को पश्चिम बंगाल में घोषित 108 नगरपालिका चुनावों में दीदी ने 102 सीटें जीती । कांग्रेस और भाजपा का खाता भी नहीं खुला। राज्यपाल जगदीप धनखड़ से दीदी की लगातार ठनी हुई है । संसद में एक टीएमसी सदस्य ने राष्ट्रपति से राज्यपाल को हटाने की मांग कर डाली । 20 फरवरी को तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव मुंबई पहुंचे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ-साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार से भी मिले । राव ने महाराष्ट्र गठजोड़ सरकार के दोनों घटक नेताओं से उनके आवास पर मिलकर भाजपा विरोधी गठजोड़ में सभी क्षेत्रीय दलों के शामिल होने के विषय में चर्चा की । राव ने शरद पवार के आवास पर मुलाकात करके कहा कि पवार के गृह शहर बारामती में सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों का जमावड़ा हो । लेकिन चन्द्रशेखर राव किसी कांग्रेसी नेता से नहीं मिले । 14 फरवरी को कोलकाता से ही खबर आयी कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने दीदी को ट्वीट करके कहा कि वे जल्द ही उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मिलकर भाजपा के खिलाफ पार्टियों को एकजुट करने का प्रस्ताव करेंगे । स्टालिन सोचते ही रह गए, चन्द्रशेखर राव मुंबई पहुंच गए । स्टालिन ने भी अभी स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी भारी जीत दर्ज करने के बाद अपनी आत्मकथा के विमोचन समारोह का आयोजन किया । कयास यह लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथों विमोचन होना चन्द्रशेखर राव और ममता बनर्जी को अच्छा नहीं लगा । शायद इसलिए दोनों मुख्यमंत्रियों ने समारोह में शामिल होने से परहेज किया । बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव से इन नेताओं को गुरेज नहीं है । तेजस्वी यादव हैदराबाद जाकर राव से और कोलकाता जाकर दीदी से मिले हैं । बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के संबंध बिगड़े हुए हैं । बिहार विधान परिषद् की 24 सीटों के लिए 4 अप्रैल को होनेवाले चुनाव के लिए राजद और कांग्रेस का तालमेल नहीं हो पाया । नवंबर, 2020 में हुए विधान सभा चुनाव के बाद से ही इन नेताओं को छत्तीसगढ़, पंजाब, राजस्थान में से किसी भी कांग्रेसी मुख्यमंत्री को भाजपा विरोधी मुहिम में शामिल करना उचित नहीं लगता । लेकिन तमिलनाडु की द्रमुक सरकार कांग्रेस और वाममोर्चा को भी साथ लेकर चलना चाहती है । जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कान्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने अपने राज्य के अधिकार छीनकर इसे दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांटे जाने की बात पुस्तक विमोचन समारोह में उठायी । राहुल गांधी ने भी इसे दुहराया । उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के अधिकार बढ़ाकर पंजाब की सैकड़ों एकड़ जमीन हड़पने का केंद्र सरकार पर आरोप लगाया और इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया । यह मामला दिसंबर, 2021 में बंगाल में दीदी ने भी उठाया था । फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू व कश्मीर के विभाजन का तमिलनाडु ने विरोध करके जो भाईचारा दिखाया, उसे कश्मीरी नहीं भूल सकते । इसे संघीय ढांचा पर मंडराता खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु की भी वही गत हो सकती है । लेकिन क्षेत्रीय दलों को इस खतरे से मुकाबले के लिए भाजपा विरोधी एकजुटता मुहिम में कांग्रेस को शामिल करने से परहेज है । एम. के. स्टालिन की दुविधा और केरल की वाममोर्चा सरकार से भी दूरी से फर्क तो पड़ेगा ।