केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि आगामी आम चुनाव से पहले सीएए(नागरिकता संशोधन एक्ट) लागू करने के नियम जारी हो जाएंगे और तुरंत बाद इसके लाभार्थियों को नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी ।
अमित शाह ने यह बात वर्तमान 17वीं लोकसभा के अंतिम सत्र के बाद कही । गृहमंत्री ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के अवसर पर जोर देकर कहा कि सीएए देश का कानून है और आम चुनाव से पहले इसकी अधिसूचना निश्चित रूप से जारी कर दी जाएगी, किसी को भी इसमें भ्रम नहीं होना चाहिए ।
केंद्रीय मंत्रियों की ओर से बार-बार सीएए लागू करने की बात दुहरायी जा रही है । केंद्रीय नौवहन और जलमार्ग राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र भी बोल चुके हैं कि सीएए लागू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी ।
इन तीनों मंत्रियों ने मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल को लक्ष्य करके दो अवसरों पर बंगाल में एक ही जगह जाकर एक खास समुदाय को नागरिकता प्रदान करने के चुनावी लहजे में सीएए का हवाला दिया ।
अजय मिश्र और शांतनु ठाकुर ने तो कोलकाता पहुंचकर सीएए लागू होने की अलग-अलग समय सीमा का भी एलान कर दिया ।
वर्ष 2024 आने और 2023 बीतने के समय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर सीएए लागू करने का बार-बार प्रचार किया । इसकी शुरूआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में कोलकाता में एक कार्यक्रम से यह कहकर किया कि भाजपा नीत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठजोड़ सरकार नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(एसीआर) हर हाल में लागू करेगी ।
उसके बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र ने पश्चिम बंगाल के मतुआ(डाज्न) बहुल आबादी वाले उत्तरी 24 परगना जिले में कहा कि मतुआ समुदाय को नागरिकता शीघ्र मिलेगी और कोई उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं कर सकता । अजय मिश्र ने उत्तरी 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सीएए का अंतिम मसौदा 30 मार्च तक तैयार हो जाएगा ।
डेढ़ महीने बाद 28-29 जनवरी, 2024 को केंद्रीय नौवहन और जलमार्ग मंत्री शांतनु ठाकुर ने भी पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में जाकर कहा कि सीएए सात दिनों में लागू हो जाएगा । शांतनु ठाकुर इस जिले की बोन्गांव लोकसभा सीट से जीते हैं, जहां मतुआ समुदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी है । शांतनु ठाकुर ने कहा कि सीएए लागू करने के लिए तैयार हैं, अधिसूचना जल्द जारी हो जाएगी । उन्होंने भी पश्चिम बंगाल के हिन्दू वोट पर फोकस करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन हो चुका है, अब एक हफ्ते के अंदर सीएए पश्चिम बंगाल ही नहीं, पूरे देश में लागू हो जाएगा । पूरे देश में लागू करने के केंद्रीय मंत्री के भाषण के कारण उसकी प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल से बाहर भी तुरंत हुई । 29.01.2024 को शांतनु ठाकुर ने सीएए जल्द लागू होने का ऐलान किया और 30 जनवरी को ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा कि सीएए तमिलनाडु में लागू नहीं होगा । गैर-भाजपा द्रमुक सरकार के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने नागरिकता संशोधन एक्ट को मुस्लिम विरोधी और श्रीलंकाई तमिल विरोधी बताते हुए कहा कि तमिलनाडु में यह कानून लागू नहीं किया जाएगा ।
उनके साथ ही अखिल भारतीय अन्नाद्रमुक महासचिव के. पलानीस्वामी ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनकी पार्टी कभी भी ऐसे कानून की इजाजत नहीं देगी, जिससे अल्पसंख्यक प्रभावित हों । 2019 में सीएए बिल संसद से पास होने के समय पलानीस्वामी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने बिल का समर्थन किया था । उस वक्त पलानीस्वामी की पार्टी अन्नाद्रमुक का भाजपा से गठजोड़ था, जो आज नहीं है ।
गत 09 फरवरी 2024 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोक सभा चुनाव से पहले सीएए लागू करने की बात कही तो साथ में यह सफाई भी दी कि सीएए से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी, क्योंकि इस कानून में वैसा प्रावधान नहीं है ।
अभी अमित शाह ने सीएए लागू होने का ऐलान दिल्ली में किया और पश्चिम बंगाल का नाम नहीं लिया । लेकिन बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उसका अप्रत्यक्ष जवाब देने में देर नहीं की। पश्चिम बंगाल से रिक्त हुई राज्य सभा की पांच सीटों के लिए उम्मीदवार की घोषणा 11 नवंबर को कर दी गयी, जिनमें पहले नंबर पर हैं, मतुआ समुदाय की प्रतिनिधि ममता बाला ठाकुर ।
मतुआ समुदाय के लोग पूर्वी पाकिस्तान(आज का बांग्लादेश) से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भागकर आए हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, 1950 के दशक से पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं । भाजपा की पश्चिम बंगाल के हिन्दू वोटों में मतुआ समुदाय पर खास नजर है । इसलिए दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने मतुआ आबादी वाले इलाके में ही जाकर जनसभा आयोजित की । मतुआ समाज के लोग हिन्दुत्व आस्था वाले हैं और अनुसूचित जाति(एससी) समुदाय से आते हैं । सीएए लागू करने के प्रचार का भरपूर फायदा भाजपा को पश्चिम बंगाल में पिछली लोकसभा और विधान सभा चुनाव में मिला है । भाजपा नेतृत्व के प्रचार अभियान में तृणमूल को निर्मूल करना मुख्य कारण है ।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) को कड़ी शिकस्त देने में भाजपा कामयाब रही । इसलिए दीदी अभी पहले से ही चेती हुई है ।
दोनों गृहमंत्रियों को जवाब देने के लिए दीदी ने मतुआ समुदाय के बीच जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया और आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए सीएए और एनसीआर का इस्तेमाल कर रही है ।
फिर जब तीसरे केंद्रीय मंत्री ने बंगाल जाकर एक हफ्ते के अंदर सीएए लागू करने का ऐलान किया तो उसके जवाब में साफ-साफ कह दिया कि पश्चिम बंगाल में सीएए लागू नहीं होने दिया जाएगा ।
नागरिकता संशोधन एक्ट दिसंबर, 2019 में संसद से पास हुआ और 10 जनवरी, 2020 को लागू होते ही पूरे देश में बवाल मच गया । सीएए के प्रावधान को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसके विरोध में हिंसा, दंगा, धार्मिक उन्माद भड़का । धर्म आधारित सीएए के प्रावधान आज भी विवादास्पद बने हुए हैं । सीएए के अंतर्गत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31.12.2014 से पहले तक धार्मिक प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है । इसमें सिर्फ मुसलमान को छोड़कर हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, इसाई सभी धर्मों के लोग शामिल हैं, जो इन तीनों पड़ोसी देशों से भारत आए । सीएए जनवरी, 2020 में लागू तो कर दिया गया, मगर इसे अमल में लाने के नियम बनाने का काम टलता रहा । सीएए लागू होने के बाद भड़की हिंसा पर काबू पाने और इसका चुनावी इस्तेमाल के मोर्चे पर भाजपा तथा सभी गैर-भाजपा आमने-सामने थे । हिंसा का सबसे बड़ा केंद्र राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली बनाए जहां महीनों तक शाहीन बाग समेत कई इलाकों में जन-जीवन ठप्प रहा । उसके अलावा पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर प्रदेश में स्थिति बेकाबू हुई । असम और पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की आबादी देश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा है । उनमें मुसलमानों की संख्या अधिक होना पहले से ही विवादित है । असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और नागरिकता सुनिश्चित करने के लिए विदेशियों की पहचान का काम कई ट्रिब्यूनल बनाने तथा सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद क्लियर नहीं हुआ है । 2019 में यह विवाद चरम पर था, जब सीएए का मसौदा तैयार हुआ । सीएए लागू होने पर राजनीतिक उथल-पुथल से दिल्ली में आम आदमी पार्टी 2020 में सत्ता में बरकरार रह गयी । असम विधान सभा चुनाव में प्रचार के दौरान भाजपा ने सीएए का नाम नहीं लिया । बिहार में सीएए कोई चुनावी मुद्दा नहीं बना ।
जब सीएए लागू हुआ, उस समय भाजपा शासित राज्य सरकारों ने भी इसे लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी । 2019 में बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गठजोड़ में भाजपा शामिल थी, लेकिन सीएए लागू करने से नीतीश कुमार ने इन्कार कर दिया । अब लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जब अमित शाह ने सीएए नियम लागू करने की बात कही तब नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल का साथ छोड़कर फिर से भाजपा का सहयोग ले लिया । तमिलनाडु ने 2019 में भी यह मुद्दा उठाया था कि श्रीलंका में प्रताड़ित होकर भारत आए तमिलों के लिए भारतीय नागरिकता का प्रावधान सीएए में क्यों नहीं । मुस्लिमों को राष्ट्रीय स्तर पर चिन्हित करने के कानून पर विवाद केरल में भी उठेगा । तमिलनाडु सरकार ने सबको याद दिला दिया, जब केंद्रीय मंत्रियों ने सीएए बार-बार दुहराया ।