संघशासित क्षेत्र जम्मू व कश्मीर में विधान सभा सीटों के परिसीमन के लिए गठित आयोग का दूसरा मसौदा रिपोर्ट भी गतिरोध के घेरे में है । वैसे परिसीमन आयोग अगर उनमें से तीन सदस्यों ने पहले मसौदा रिपोर्ट की तरह इस मसौदे को भी तुरंत ठुकरा दिया । ये तीनों सहयोगी सदस्य नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद हैं. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और अकबर लोन । अन्य दो सदस्य हैं. भाजपा के केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा ।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग की 20 दिसंबर को सभी सदस्यों के साथ श्रीनगर में हुई बैठक में आपस में सदस्यों ने अपनी राय दीए जो परिसीमन आयोग के मसौदे रिपोर्ट से मेल नहीं खाते थे । जम्मू व कश्मीर की सबसे ज्यादा जनाधार वाली पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस के तीनों सांसदों ने सीट परिसीमन में कश्मीर घाटी को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने का मामला उठाया और मसौदा रिपोर्ट को भाजपा का ‘राजनीतिक एजेंडा’ बताकर नामंजूर कर दिया ।

16/12/2021 को जिस रिपोर्ट का पहला मसौदा परिसीमन आयोग ने सहयोगी सदस्यों को उनकी राय जानने के लिए सौंपे उसमें जम्मू व कश्मीर की कुल विधान सभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 90 करने का प्रस्ताव था । उनमें जम्मू क्षेत्र की सीटें 37 से बढ़ाकर 43 और कश्मीर घाटी में सिर्फ 1 सीट का इजाफा करने का प्रस्ताव था । उस हिसाब से कुल 90 सीटों में से जम्मू के लिए 43 और 47 कश्मीर के लिए प्रस्तावित थी । पहली बार अनुसूचित जनजाति(एस टी) के लिए 9 सीटें और पाक कब्जेवाले कश्मीर(पीओके) के लिए 24 सीटें सुरक्षित रखने का भी मसौदे में प्रस्ताव रखा गया ।

नेशनल कान्फ्रेंस के तीनों सहयोगी सदस्यों ने और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्ववाली पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने कश्मीर घाटी के लिए सिर्फ 1 सीट तथा जम्मू के लिए सात सीटें बढ़ाने का विरोध किया । परिसीमन आयोग ने विधान सभा सीटें मौजूदा 87 से बढ़ाकर 90 करने को आबादी के मद्देनजर अपर्याप्त बताया । नेशनल कान्फ्रेंस सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में पार्टी के तीनों सांसदों ने पहले तो 2011 की जनगणना के आधार पर सीट परिसीमन करने का आग्रह किया । साथ में परिसीमन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई को यह भी याद दिलाया कि जब जम्मू व कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा धारा.370 हटानेवाला जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2019 सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो फिर सीट परिसीमन की सरकार को जल्दबाजी क्यों है । उसी एक्ट के तहत जम्मू व कश्मीर राज्य को दो संघशासित क्षेत्रों में बांटा गया ।

16 दिसंबर को बैठक में परिसीमन आयोग के पदेन सदस्य मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चन्द्रा और जम्मू व कश्मीर के चुनाव आयुक्त के. के. शर्मा मौजूद थे, जिन्होंने मसौदा रिपोर्ट तैयार किया । आयोग ने सहयोगी सदस्यों से 31 दिसंबर तक अपनी राय देने कहा ।

उस बैठक से पहले भाजपा के सहयोगी सदस्य सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि परिसीमन आयोग से जम्मू व कश्मीर की आबादी के साथ.साथ भौगोलिक क्षेत्र का भी ख्याल रखने और दोनों ही क्षेत्रों के बीच 90 सीटों का समान वितरण करने का आग्रह किया जाएगा । सांसद और केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह कुछ नहीं बोले ।

यह तो पता नहीं चल पाया कि 31/12/2021 तक दोनों दलों के सहयोगी सदस्यों ने क्या सुझावविचार दिए । लेकिन 05/02/2022 की बैठक के बाद परिसीमन आयोग ने जो दूसरा मसौदा रिपोर्ट जारी किया, उसमें सीटों के अंदर आनेवाले इलाकों में फेरबदल और नया चुनावी नक्शा का सिर्फ विवरण है । सीटों की संख्या उतनी नहीं है, जितनी पहले मसौदा रिपोर्ट में थी और जिसे भाजपा छोड़ सभी कश्मीरी पार्टियों ने नामंजूर कर दिया था । उसके बावजूद परिसीमन आयोग ने 14 फरवरी तक दुबारा सहयोगी सदस्यों से राय मांगी है । उसके बाद मसौदा रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाएगा ।

पांच फरवरी को परिसीमन आयोग ने सहयोगी सदस्यों को दूसरे मसौदा रिपोर्ट का जो खाका सौंपा उसमें जम्मू और श्रीनगर के 5 लोकसभा सीट समेत कई विधान सभा सीटों का नक्शा बदल दिया गया है इसमें जम्मू व कश्मीर की बहुत सारी ऐसी सीटों के इलाकों में फेरबदल किया गया है, जो भाजपा समेत स्थानीय पार्टियों के चुनावी गढ़ रहे हैं ।

परिसीमन आयोग का काम गठन के ही समय से सामान्य तरीके से नहीं चल रहा है, ठीक उसी तरह जैसे जम्मू व कश्मीर के संघशासित क्षेत्र बनने के बाद से वहां हालात असामान्य बने हुए हैं । सीमा पर भी तनाव बरकरार है ।

पांच फरवरी को जब परिसीमन आयोग की बैठक हो रही थी, उसी दिन जम्मू व कश्मीर सरकार ने जेएंडके लोक सेवा आयोग और जेएंडके सेवा चयन बोर्ड को दी गयी रिक्त पदों से सम्बन्धित आदेश वापस ले लिया । 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू व कश्मीर संघशासित क्षेत्र बना और उसी समय से रिक्तियां चली आ रही हैं, जिनके लिए आवेदन मांगने का काम सरकार ने आयोग और बोर्ड को दिया था । लेकिन इसे वापस लेना पड़ा । इस संबंध में दायर कई याचिकाएं विभिन्न कोर्टों में लंबित हैं ।

परिसीमन आयोग ने पीओके के लिए अतिरिक्त 24 सीटों का प्रस्ताव अपने खाका में रखा है । इसी हफ्ते विंटर ओलंपिक के बहाने चीन से दोस्ती बढ़ाने बीजिंग गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने रवाना होने से पहले कहा कि कश्मीर मुद्दे का हल कूटनीतिक बातों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होना चाहिए । बीजिंग में भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इमरान खान के चार दिनों के दौरे की समाप्ति पर कहा कि चीन की क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान पहली प्राथमिकता है । इसमें लीन पाकिस्तान द्वारा आर्थिक कोरीडोर(सीपीइसी) पर बल दिया गया जो पीओके से गुजरता है ।

जहां तक परिसीमन आयोग की बात है, 18/02/2021 को हुई पहली बैठक का ही नेशनल कान्फ्रेंस सदस्यों ने इसके प्रस्तावित मसौदे को ‘पूर्वाग्रह’ से ग्रसित कहकर बायकाट किया । फिर जुलाई में परिसीमन आयोग जम्मू और श्रीनगर में सभी राजनीतिक दलों से विचार विमर्श करने पहुंचा । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने आयोग के सदस्यों से मिलने से इंकार कर दिया । अन्य दलों में भाजपा को छोड़ सभी दलों ने एक साथ परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठा दिया । सबने एक स्वर से पहले राज्य का दर्जा बहाल करने और उसके बाद चुनाव कराने पर बल दिया । जम्मू व कश्मीर के राजनीतिक दल ये मानकर चल रहे हैं कि जम्मू व कश्मीर के ‘विशेष राज्य दर्जा’ के समय उसके अपने कानून के तहत लागू प्रावधान के अनुसार 2026 में पहली जनगणना रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद विधान सभा सीटों का परिसीमन होगा । जम्मू व कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 में यह संशोधन 2002 में किया गया, जिसे 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया । जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2019 के संवैधानिक औचित्य को सुप्रीम कोर्ट में नेशनल कान्फ्रेंस ने चुनौती दे रखी है, जिस पर अभी सुनवाई शुरू भी नहीं हुई है ।

पूरा मामला दिग्भ्रमित और द्विविधा में डालनेवाला है । परिसीमन आयोग को सभी दल आबादी का ख्याल करके 2011 जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन करने कहा है । लेकिन 06/07/2021 को नेशनल कान्फ्रेंस ने परिसीमन आयोग को ज्ञापन सौंपा, उसके अनुसार 2026 की जनगणना से पहले परिसीमन नहीं किया जा सकता ।

अभी की बात करें तो दिसंबर, 2021 को जब परिसीमन आयोग ने सदस्यों के साथ बैठक की और नेशनल कान्फ्रेंस सांसदों ने प्रस्तावित खाका को भाजपा का राजनीतिक एजेंडा बताया, उसके एक महीने बाद 22 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा. ‘परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधान सभा चुनाव होगा और स्थिति सामान्य होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा ।’