जम्मू व कश्मीर से धारा.370 हटाने और उसके तहत विशेष राज्य का संवैधानिक दर्जा प्राप्त इस राज्य को दो यूटी(संघशासित क्षेत्रों) में विभाजित किए जाने का मामला अब तीसरे वर्ष में प्रवेश कर गया । अगस्त महीना बीतने के साथ ही इस मुद्दे का राजनीतिक उफान भी गुजर गया है । 050802019 को जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लागू हुआ और जम्मू व कश्मीर भारत के अन्य हिस्सों की तरह पूर्ण रूप से भारतीय संवैधानिक ढांचे का अंग बन गया ।

जम्मू व कश्मीर के दोनों बड़े जनाधार वाले स्थानीय दल नेशनल कान्फ्रेंस और पीडीपी(पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) ने धारा.370 वापस लाने के लिए संषर्घ का मोर्चा बनाया । कांग्रेस समेत लगभग सभी गैर.भाजपा दलों ने 2020 में बने इस गठजोड़ पीएजीडी(पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) में शिरकत कीए जो जम्मू व कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा वापस लाने के लिए संघर्ष करने के मकसद से गठित हुआ । नेशनल कान्फ्रेंस और पीडीपी ने तो यहां तक कह दिया कि धारा.370 वापस लाने से पहले वे किसी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे । कांग्रेस गठजोड़(पीएजीडी) में शामिल तो रही, मगर धारा.370 हटाने का अन्य पार्टियों की तरह खुलकर विरोध नहीं किया । कांग्रेस ने जल्द.से.जल्द विधान सभा चुनाव कराने और राज्य का दर्जा लौटाने पर जोर दिया । आज जब जम्मू व कश्मीर में विधान सभा चुनाव तैयारियों की चर्चा जोर.शोर से चल रही है, धारा.370 का मुद्दा बैकफुट पर चला गया है । वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के पार्टी छोड़ देने से जम्मू व कश्मीर यूनिट बिखर रही है । पीएजीडी में भी चुनावी एजेंडे को लेकर दरार खुलकर सामने आ गयी है ।

गुलाम नबी आजाद जम्मू व कश्मीर में कांग्रेस के मजबूत हैसियत वाले नेता थे और मुख्यमंत्री भी रह चुके थे । धारा.370 पर कांग्रेस की ओर से हमेशा आजाद ही बयान जारी करते थे । जम्मू व कश्मीर पूनर्गठन एक्ट, 2019 संसद से पारित होने के समय 030802019 को राज्य सभा में कांग्रेस और विपक्षी नेता के रूप में गुलाम नबी आजाद ने ही बिना बहस कराए जम्मू व कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा हटाने जाने का जबर्दश्त विरोध किया था । मगर कुछ दिन बाद ही कांग्रेस की नीति बदल गयी और गुलाम नबी आजाद समेत कांग्रेस नेताओं ने धारा.370 पर जम्मू व कश्मीर के स्थानीय दलों के रवैए से खुद को अलग कर लिया । कांग्रेस ने कश्मीर में अपने रानजीतिक एजेंडे को राज्य का दर्जा लौटाने और विधान सभा चुनाव कराने तक सीमित रखा । बाद में गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े(ग्रुप.23) में शामिल हो जाने से धारा.370 और पूरा कश्मीर मामला ही ठंडे बस्ते में चला गया ।

नेशनल कान्फ्रेंस सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने ही धारा.370 वापस लाने की लड़ाई लड़ने के लिए पीएजीडी गठजोड़ बनाने में मुख्य भूमिका निभायी थी । गुपकार रोड स्थित उनके आवास पर हुई उस बैठक के प्रस्ताव का नाम इसीलिए पीएजीडी(पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) पड़ा था । लेकिन थोड़े दिनों बाद फारूक अब्दुल्ला ने हार्डलाईन छोड़कर धारा.370 पर लचीला रूख अपनाया और भाजपा की नीतियों के अनुसार धारा.370 हटाने के बाद का जनादेश प्राप्त करने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्फिर्या वाला बीच का रास्ता चुना ।

फारूक अब्दुल्ला पीएजीडी के भी अध्यक्ष हैं और वे भाजपा को यह अवसर नहीं देना चाहते कि कांग्रेस समेत स्थानीय पार्टियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सहयोग करने के बजाए अनिश्चितता का माहौल कायम रखने की राजनीति कर रही हैं ।

22 अगस्त को श्रीनगर में हुई सर्वदलीय बैठक से एक बात जो स्पष्ट रूप से उभरी वो ये है कि कश्मीरी नेता जम्मू व कश्मीर को अभी तक पूरी तरह भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का अंग मानने को तैयार नहीं है । लेकिन इस मुद्दे पर भी आपस में मतभेद खुलकर सामने आया । पहली बार कश्मीरी दलों की बैठक में शिव सेना के मनीष साहनी ने हिस्सा लिया । पीडीपी की ओर से उसकी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और सीपीएम नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी मौजूद थे । अलताफ बुखारी के नेतृत्ववाली अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कान्फ्रेंस ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया । अपनी पार्टी शुरू से ही भाजपा के एजेंडे पर चल रही है । इस बैठक में भाग लेनेवाले नेताओं ने कहा कि वे ऐसी मतदाता सूची स्वीकार नहीं करेंगे, जिसमें जम्मू व कश्मीर में ‘गैर.स्थानीय’(नन.लोकल) को मताधिकार दिया जाए । बैठक के बाद संवाददाताओं को फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि बाहरी लोगों को अगर वोट डालने का अधिकार दिया गया तो हमारी पहचान समाप्त हो जाएगी ।’ इस तरीके से यहां के परंपरागत डोगरा, कश्मीरी, पहाड़ी, गुज्जर या सिख का सफाया हो जाएगा और विधान सभा बाहरी लोगों के हाथ में चली जाएगी, जम्मू व ‘कश्मीर के लोग ही बाहरी हो जाएंगे ।’

इसके जवाब में भाजपा की जम्मू व कश्मीर यूनिट के अध्यक्ष रवीन्दर रैना ने सवाल उठाया कि महबूबा मुफ्रती के पिता मरहूम मुफ्रती मुहम्मद सईद जब 1989 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव जीतकर गृहमंत्री बने थे, उस समय यह ‘गैर.स्थानीय’ का मुद्दा कहां था । कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद 1980 और 1985 में महाराष्ट्र के वासिम लोकसभा सीट से जीते थे, उस समय यह मुद्दा कहां था । जम्मू व कश्मीर मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त समाचार के अनुसार लगभग 25 लाख नए मतदाता जुड़ेंगे, जो 18 साल के हो चुके हैं । धारा.370 हटाए जाने के बाद जम्मू व कश्मीर और लद्दाख यूटी में यह पहला चुनाव होगा । संवैधानिक प्रावधान बदले जाने के बाद पहली बार मतदाता सूची में संशोधन किया जा रहा है । उसके पहले जम्मू व कश्मीर में स्थानीय निवासी का प्रमाणपत्र लेना पड़ता था ।

चुनाव के मद्देनजर जम्मू व कश्मीर में विधान सभा और लोकसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया के दौरान परिसीमन आयोग गठन 2020 से फरवरी, 2022 तक चले कश्मीरी नेताओं से विचार.विमर्श के क्रम में भी सभी ने धारा. 370 को ही ढाल बनाया । पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफती ने रिटायर सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले परिसीमन आयोग के सदस्यों से मिलने से ही इन्कार कर दिया । 140302022 को परिसीमन आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद से सभी दल चुनाव के मूड में हैं । धारा.370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में 2020 से लंबित हैं । इस पर सुनवाई शुरू भी नहीं हुई है । नए सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस यू यू ललित ने लंबित मामले को क्लियर करने का काम प्राथमिकता के आधार पर लिया है । धारा.370 वाली याचिकाएं चर्चा में नहीं है ।

एकमात्र हार्डलाइनर महबूबा मुफ्रती धारा.370 को मुद्दा बनायी हुई हैं, लेकिन नेशनल कान्फ्रेंस उनको दरकिनार कर सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है ।

जम्मू व कश्मीर के साथ ही यूटी का दर्जा प्राप्त लेह.लद्दाख की विधान सभा जम्मू व कश्मीर ही है । लद्दाख में धारा.370 कोई मुद्दा ही नहीं है । वहां वोट या तो भाजपा को मिलेगा या कांग्रेस को । स्थानीय दल गौण हैं ।

कांग्रेस अभी पहले अपने नेतृत्व झमेले से तो उभरे । मगर चुनावी राजनीति गुलाम नबी आजाद के इर्द.गिर्द घूमेगी, जो बहुत पहले साफ कह चुके हैं कि जम्मू व कश्मीर में धारा.370 और विशेष दर्जा वापसी फिलहाल संभव नहीं । इसके लिए कई संवैधानिक धाराएं बदलनी होगी, संशोधन करना होगा, जो संसद में कांग्रेस को दो.तिहाई बहुमत मिले बगैर असंभव है । भविष्य में ऐसी संभावना नजर नहीं आती. ऐसा कहनेवाले आजाद अब खुद दूसरी संभावना इतर धारा.370 तलाश रहे हैं ।