असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उनका मंत्रिमंडल असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई के ‘पाकिस्तानी लिंक’ पर बोरोलैंड टेरिटोरियल रिजन(बीटीआर) चुनाव के बाद चर्चा करेगा । बीटीआर की 40 सीटों के लिए 22 सितंबर को वोट डाले जाएंगे । मुख्यमंत्री के अनुसार कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(एसआईटी) की 96 पृष्ठ की रिपोर्ट ‘बेहद विस्फोटक दस्तावेज’ है, जिसमें भारत की सुरक्षा से जुड़े कागजात हैं । लेकिन राज्य की भाजपा सरकार इस पर मंत्रिमंडल में बहस बीटीआर चुनाव के बाद कराएगी ।

यह बात असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 13 सितंबर को कही, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुवाहाटी में ही थे । उत्तर-पूर्व के तीन राज्य असम, मणिपुर, मिजोरम दौरे के क्रम में प्रधानमंत्री पहले गुवाहाटी पहुंचे । ‘भारत रत्न’ महान लोक गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका जन्मशती समारोह प्रधानमंत्री का पहला कार्यक्रम था ।

असम में अगले वर्ष विधान सभा चुनाव भी होनेवाले हैं । मुख्यमंत्री ने ऐसे समय में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के ‘पाकिस्तानी लिंक’ की बात कही है, जब पूरे राज्य में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल बाहर करने का अभियान चलाया जा रहा है । उन्होंने दावा किया कि घुसपैठियों के कब्जे से लाखों बीघा जमीन मुक्त कराकर राज्य के मूल वाशिंदों को दी गयी है । अगले दिन 14 सितंबर को प्रधानमंत्री मणिपुर से लौटकर फिर असम गए और चुनावी पैकेजों के एलान के क्रम में कांग्रेस पर घुसपैठियों तथा राष्ट्रविरोधी ताकतों को संरक्षण देने का आरोप लगाया । असम के दरांग और गोलाघाट जिलों में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस भारतीय सेना का नहीं, पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों का समर्थन करती है ।’ उन्होंने घुसपैठियों को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया । गत पखवाड़े केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी यह वायदा असम के मतदाताओं से कर चुके हैं ।

लोकसभा और राज्य सभा समेत असम विधान सभा में भी मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के ‘पाकिस्तानी लिंक’ का मुद्दा चुनाव को ध्यान में रखकर जिस दिन हिमंत बिस्वा सरमा ने उठाया, उस दिन भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप टी-20 की तैयारी पूरी हो चुकी थी । 14 सितंबर को प्रधानमंत्री ने असम में जनसभाओं में कांग्रेस पर तीखा हमला पाकिस्तान से जोड़कर बोला और उसी दिन दुबई से एशिया कप में भारत द्वारा पाकिस्तान को सात विकेट से करारी शिकस्त देने की खबर आयी ।

पहलगाम आतंकी हमले में कश्मीर में 26 सैलानियों की मौत(अप्रैल, 2025) के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला मैच था । जब भारत सरकार ने इस मैच को मंजूरी दी तो शिवसेना(उद्धव ठाकरे) समेत कुछ दलों ने इसका विरोध किया । उन्हीं दलों के समर्थकों में से कुछ ने यह मैच रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी । शीर्ष कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इन्कार करते हुए कहा, ‘मैच होने दीजिए, सद्भाव का माहौल बनाने दीजिए ।’ विरोध करनेवालों को क्रिकेट खिलाड़ियों से सीख लेना चाहिए । दुबई से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार मैच से एक दिन पहले 13 सितंबर को दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने राजनीति से जुड़े मीडिया के किसी भी सवाल को एक सिरे से खारिज कर दिया ।

लेकिन असम के मुख्यमंत्री उसी दिन सियासी राजनीति को मीडिया सुर्खियों में लाने के लिए अपने प्रबल प्रतिद्वंदी कांग्रेस पर पाकिस्तान से जोड़कर निशाना साधा । हिमंत बिस्वा सरमा ने लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई के बारे में संवाददाताओं को बताया कि भारत-विरोधी अभियान देश के विकास को नजरअंदाज करके चलाया जा रहा है, जिसमें मुख्य भूमिका गौरव गोगोई की ब्रिटिश पत्नी हैं । गौरव गोगोई की पत्नी एलिसावेथ कोलबर्न गोगोई ब्रिटिश मूल की हैं और पाकिस्तानी नागरिक होने के साथ-साथ पाकिस्तान में एक प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही हैं । हिमंता बिस्वा सरमा के इस आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लोकसभा चुनाव के समय छोड़ा गया वो जुमला फिर दुहराया जिसके चलते वे अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं ।

असम के मुख्यमंत्री का बोरोलैंड टेरिटोरियल रिजन(बीटीआर) चुनाव से हफ्ता भर पहले प्रदेश कांग्रेस यूनिट प्रमुख पर यह आरोप लगाना और मंत्रिमंडल में इस पर चर्चा बीटीआर चुनाव बाद करने को लेकर कयासों का दौर चल रहा है । पहला तो ये कि मुख्यमंत्री को शायद डर है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ कथित ‘पाक लिंक’ की एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई से मतदाता कांग्रेस की तरफ जा सकते हैं । दूसरी अटकलबाजी यह है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने बीटीआर चुनाव से पहले यह खुलासा फिर से क्यों वैसे समय में दुहराया, जब भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेले जाने की इजाजत दोनों सरकारों ने दे दी ।

बोरोलैंड की जनजातीय परिषद बीटीआर में वहां क्षेत्रीय दल युनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के नेतृत्व में गठजोड़ शासन है, जिसमें भाजपा और गण सुरक्षा पार्टी शामिल है । इस बार विपक्षी बोरोलैंड पीपुल्स फ्रंट(बीपीएफ) के पक्ष में हवा है । बोरोलैंड त्रिपक्षीय समझौता जनवरी, 2020 में दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह, असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और विभिन्न बोरो गुटों के साथ हुआ । समझौते के दिन 27 जनवरी, 2020 को ही बोरो उग्रवादियों ने 40 बंगाली मुसलमानों की गोली मारकर हत्या कर दी । बंगाली मुसलमानों को भाजपा पाक-बांग्लादेशी घुसपैठिए और संदिग्ध नागरिकता वाले विदेशी मानती है । इनलोगों के बीच कांग्रेस का वोट ज्यादा है । 1986 से बोरो उग्रवादियों ने अलग राज्य आंदोलन के लिए हिंसा का रास्ता अपनाया, जिसमें कथित घुसपैठिए निशाने पर थे । 2003 में केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार के गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने बोरो उग्रवादियों से पहला समझौता किया, जब बोरोलैंड क्षेत्रीय परिषद बना ।

मुख्यमंत्री बिस्वा सरमा ने बीटीआर चुनाव से पहले कथित अवैध अप्रवासियों को निकाल बाहर करने के लिए 09 सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया(एसओपी) सख्ती से चलाने का फैसला किया । इसके अंतर्गत जिला कमिश्नरों और सीनियर एसपी को अवैध आप्रवासी घुसपैठियों को 10 दिनों के अंदर निष्कासित करने का अधिकार दिया गया । एसओपी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मई, 2025 में जारी अधिसूचना है, जिसको लेकर देश भर में घुसपैठियों की पहचान करके निकाल बाहर करने का अभियान चलाया जा रहा है । इसको लेकर कई मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हुए हैं ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल का यह फैसला विदेशी ट्रिब्यूनल को बाइपास कर दिया । उन्होंने कहा कि संदिग्ध विदेशी नागरिकता वालों के 82,000 मामले विदेशी ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं, जो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाने के डर से किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, और राज्य सरकार के लिए बोझ है ।

राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद बोरोलैंड इलाके में सत्तारूढ़ और विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा भड़की । जाहिर है कि हिमंता बिस्वा सरमा का कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के ‘पाकिस्तानी लिंक’ पर एसआईटी की रिपोर्ट का राज्य मंत्रिमंडल में पेश होना बीटीआर चुनाव परिणाम पर निर्भर है और वही 2026 विधान सभा चुनाव तक भाजपा के काम आएगा ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बिहार पहुंचे और घुसपैठियों के मामले को जोरदार तरीके से चुनावी बनाया । पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों की संदिग्ध नागरिकता/मतदाता असम की तरह पश्चिम बंगाल और बिहार के भी सीमावर्ती जिलों में विवाद का विषय बना हुआ है । भाजपा का यह प्रमुख चुनाव मुद्दा है । प्रधानमंत्री ने 15 सितंबर को बिहार के पूर्णियां जिले में जनसभाओं में कहा कि घुसपैठियों को हर हाल में भारत छोड़ना होगा और गैर-भाजपा दलों पर वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया । पूर्णियां से सटे अररिया, किशनगंज, कटिहार जिलों में अल्पसंख्यक आबादी ज्यादा है और भाजपा का आरोप है कि उनमें घुसपैठिया मतदाता बड़ी संख्या में हैं । चुनाव आयोग ने मतदाता गहन पुनरीक्षण में जिन 65 लाख मतदाताओं का नाम सूची से हटाने कहा है, उनमें ज्यादा इन्हीं जिलों के हैं । बिहार में गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग की सीधे सुप्रीम कोर्ट से ठनी हुई है । आयोग का कहना है कि चुनाव से सम्बन्धित सारे अधिकार संविधान के अनुसार चुनाव आयोग के पास है, सुप्रीम कोर्ट उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता । जबकि इस विवाद पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कह दिया है कि अगर कोई अनियमितता पायी गयी तो कोर्ट अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद हस्तक्षेप कर सकता है और अगर जरूरत पड़ी तो गहन पुनरीक्षण रद्द भी कर सकता है ।

बिहार में इसी वर्ष चुनाव है, जहां भाजपा पूरी तरह अपनी सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है । असम के साथ ही 2026 में पश्चिम बंगाल में भी विधान सभा होने हैं । बंगाल में 2011 से लगातार तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और ममता बनर्जी(दीदी) मुख्यमंत्री हैं । असम में 2016 में कांग्रेसी मुख्यमंत्री तरूण गोगोई को अपदस्थ करके सर्वानंद सोनोवाल ने सत्ता की कमान संभाली । 2021 में सोनोवाल को केंद्रीय मंत्री बनाकर भाजपा नेतृत्व ने हिमंता बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री पद सौंपा, जिनके निशाने पर हैं तरूण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई । असम में कांग्रेस की ओर से वही महामंत्री पद के दावेदार हैं ।

संयोग कुछ ऐसा रहा कि इसी दौरान इंगलैंड में अवैध आप्रवासियों /आतंकियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विवादास्पद आतंकवाद निरोधक(संशोधन) बिल, 2025 को मंजूरी दे दी । पाकिस्तान में ही सबकी नजर इस पर टिकी है कि यह कानून आतंक के खिलाफ ढाल बनेगा या खतरा । पाक पोषित इस्लामी आतंकवाद से भारत समेत पूरी दुनिया त्रस्त है । लंदन में रहनेवाले अवैध अप्रवासी मुद्दे को लेकर आतंकवाद विरोधी प्रदर्शन का कारण था एक सिख महिला के साथ दुष्कर्म का मामला । कुछ सिख संगठन भी कथित आतंकवादी गुटों में शामिल हैं, जो इंगलैंड में ज्यादा हैं । बवाल मचा तो लंदन में ब्रिटिश मूल के लोगों ने हल्ला मचाया ‘अपने देश वापस जाओ ।’

दुबई में भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों ने मैच जीतने के बाद अपने देश और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी राष्ट्रीय भावना का ख्याल रखा । भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा, ‘पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ हम एकजुटता से खड़े हैं और इस जीत को अपनी सेना को समर्पित करते हैं।’ यादव ने पाकिस्तानी कप्तान या खिलाड़ियों से पूर्व मैचों की तरह हाथ नहीं मिलाया ।

अवैध आप्रवासी और संदिग्ध मतदाता/नागरिकता विवाद में नया मोड़ 2020 में नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) लागू होने के बाद आया । इसमें इस्लामी देशों में प्रताड़ित गैर मुसलमान समुदायों को नागरिकता देनेवाले प्रावधान को लेकर देशभर में दंगे भड़के और मामले ने चुनावी रंग ले लिया । सबसे ज्यादा सुर्खियों में दिल्ली रही और आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल बहुमत से मुख्यमंत्री बने रह गए । असम में भाजपा ने 2021 चुनाव में सीएए का जिक्र नहीं किया । उसके पहले 2020 में बिहार विधान सभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उस समय उनके गठजोड़ घटक राष्ट्रीय जनता दल ने भाजपा की निंदा करके दंगे पर काबू पाया । नया विवाद केंद्र सरकार के हालिया आदेश जारी होने के बाद खड़ा हुआ है, जिस पर असम में ही ज्यादा प्रतिक्रिया हुई है । आप्रवासी और विदेशी एक्ट, 2025 के अनुसार 31 दिसंबर, 2024 को या उसके पहले अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आनेवाले हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, ईसाई अगर धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हैं तो वैध यात्रा कागजात के बिना भी भारत में रह सकते हैं । गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से पाकिस्तानी वीजा वालों को निकाल बाहर किया जा रहा है ।

असम की भाजपा नीत गठजोड़ सरकार के घटक असम गण परिषद ने केंद्र से कहा है कि असम को इसके दायरे से बाहर रखें । असम गण परिषद ने मुख्यमंत्री के पाक घुसपैठिया निकाल बाहर अभियान आदेश के दौरान कही । 1980 के दशक में अवैध आप्रवासियों के खिलाफ हुए हिंसक छात्र आंदोलन में असम गण परिषद के साथ सर्वानंद सोनोवाल भी थे ।