राष्ट्रध्वज तिरंगा और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ विवाद के घेरे में तो हमेशा रहता है । राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का भी वही हाल है । इसका दुरूपयोग, अपमान या व्यावहारिक इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कानून बने हुए हैं । बीच-बीच में सर्कुलर, आदेश जारी होते हैं और सुप्रीम कोर्ट को आदेश जारी करने पड़े हैं । पहले यदा-कदा तिरंगा और राष्ट्रगान के बारे में कुछ देखने-सुनने को मिलता था ।
मगर आजकल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें रोजमर्रे के राज-काज की तरह तिरंगे तथा राष्ट्रगान पर कुछ-न-कुछ फरमान जारी करती हैं, हमेशा कोई कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, मानो यह काम भी आए दिन होनेवाली अपराध, हादसे जैसा हो । खासकर तिरंगा फहराने का सिलसिला तो लगभग सालों भर चलता रहता है । इसकी ऊंचाई और झंडोत्तोलन को इस तरह पेश किया जा रहा है, मानो इससे जुड़ी राष्ट्रीय भावना जगाना सरकार की जिम्मेदारी है । इसके लिए कानूनी सहारा लेकर जबरन डंडे की बदौलत राष्ट्रीय भावना जगाने के आदेशों में ‘राष्ट्रीय’ शब्द का लोप होता जा रहा है। जनता में इससे दुर्भावना पैदा हो रही है, क्योंकि यह कुल मिलाकर सरकारी और राजनीतिक भावना बन गयी है ।
कश्मीर में पाकिस्तानी झंडा फहराना निश्चित ही राष्ट्रविरोधी है, उनके खिलाफ कार्रवाइर्द होनी जायज है। सभी जानते हैं कि यह पाकिस्तानी शह पर ककीर आजादी की मांग करनेवाले अलगाववादी तत्व हैं ।
लेकिन अपना राष्ट्रध्वज भी इस तरह न फहराना जाए, जिससे पड़ोसी पाकिस्तान के मन में दुर्भावना पैदा हो, यह देखना भी हमारा दायित्व है । पाकिस्तान से वार्ता पटरी पर आते-आते उबर जाती है। क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि तीरंगे की आड़ लेकर ऐसी एकसाने वाली और भड़काऊ राष्ट्रीय भावना पैदा न की जाए ।
भारत-पाक सीमा के अटारी में 120 फीट लंबा ऐसा तिरंगा फहराने की तैयारी की गयी है, जो लाहौर और पाकिस्तान के दूरदराज के इलाकों से भी दिखाई देगा । पंजाब के काबीना मंत्री अनिल जोशी का दावा है कि यह देश का सबसे लंबा तिरंगा होगा, जिसका वनज 65 किलोग्राम होगा ।
अनिल जोशी को पता ही होगा कि भारत-पाक संबंध कितना तनावपूर्ण चल रहा है और ककीर की तरह ही पंजाब सीमा पर भी तनातनी है ।
बड़ी जद्दोजहद के बाद दोनों देशों में स्थायी सिंधु आयोग(पीआईसी) पर बैठक आयोजित करने पर सहमति बनि है । इस महीने के अंत में लाहौर में आयोजित बैठक में शामिल होने का पाकिस्तानी न्योता भारत ने स्वीकार कर लिया है। इसे माहौल अच्छा बनने का संकेत माना जा रहा है। क्योंकि काफी दिनों से दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता बढ़िया से नहीं हो पा रही है। दक्षिण एसिया क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन के लिए कुछ महीने पहले भारत ने पाकिस्तानी बुलावा ठुकरा दिया था ।
लेकिन अभी स्थायी सिंधु आयोग बैठक से पहले जो बात कहकर भारत-पाक सीमा पर तिरंगा फहराने का प्रचार पंजाब सरकार कर रही है, उससे बैठक का माहौल प्रभावित हो सकता है । क्योंकि पंजाब के मंत्री ने तिरंगे की लंबाई की तारीफ में उकसाने वाली बात पर ज्यादा जोर दिया है कि यह लाहौर के अलावे पाकिस्तान के दूर-दराज के इलाकों से भी दिखाई देगा । मंत्री अनिल जोशी जानते ही होंगे कि भारत-पाकिस्तान की बैठक लाहौर में इसी महीने होनी तय है । देश का यह सबसे लंबा तिरंगा रविवार 19 मार्च को फहराया जाना है । पंजाब पुलिस बैंड और आसपास के स्थानयी लोगों के साथ अटारी पर यह तिरंगा मंत्री अनिल जोशी खुद फहराएंगे । उसके विषय में जो कुछ उन्होंने बोला है, इससे देश की जनता और सीमावर्ती इलाकों में तनाव के चलते दहशत में जी रहे लोगों के बीच क्या संदेश गया, यह तो मंत्री को ही पता होगा । मगर एक बार में देशवासियों के मन में स्वतः स्फूर्त राष्ट्रीय भावन पर यह जबरन थोपी गयी दुर्भावना हावी होती लगती है । राष्ट्र सर्वोपरि है, इस बात को पाकिस्तान और चीन की भारत विरोधी मोर्चाबंदी के संदर्भ में प्रचारित की जाती है । लेकिन राष्ट्र की जगह राजनीतिक राष्ट्रीय भावना जबरन सर्वोपरि बनायी जा रही है ।
अभी भारत-चीन वार्ता का भी वातावरण अनुकूल नहीं रहा । यह तो हुई पंजाब के एक मंत्री की बात, जिन्होंने गुजरता के मुख्यमंत्री विजय रूपणाी को पीछे कर दिया । गणतंत्र दिवस समारोह से पहले ही 16 जनवरी को विजय रूपाणी ने 100 फुट ऊंचे स्तंभ पर 20 फुट लंबी तळा 30 फु ट चौड़ी तिरंगा फहराकर सबसे ऊंचा राष्ट्रध्वज लहराने का रिकार्ड बनाया । पंजाब का रिकार्ड सबसे लंबा तिरंगा फहराने का है ।
2016 में 23 जरवरी को नेताजी सुभाष जयंती के दिनर रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने झारखंड जाकर सबसे ऊंचा तिरंगा फहराने का रिकार्ड बनाया था ।
मंत्रियों के बाद अब अफसर का ‘राष्ट्रगान प्रेम’ देखिए । ये हैं बिहार के वैशाली जिले की जिला मजिस्ट्रेट रचना पाटिल, जो रोजाना सुबह को सभी कार्यालयों में राष्ट्रगान गोन को मजबूर करती हैं। जिले के सारे अधिकारी और कर्मचारी उनसे परेशान हैं । एक अधिकारी के अनुसार जितना मजिस्ट्रेट ने भयादोहन की स्थिति पैदा कर रखी है । राष्ट्रगान गायन में शामिल न होनेवाले कर्मचारियों को अनुपस्थित करके वेतन काटने और रोकने की कार्रवाई भी जिला मजिस्ट्रेट करती हैं । मन ही मन गरिआते हुए नौकरी बचाने के लिए राष्ट्रगानर ‘समारोह’ में सारे कार्यालय कर्मी शामिल होने को मजबूर हैं । ये हे एक अवसर की भयादोहन करके लगायी जा रही राष्ट्रीय भावना की कहानी । सबसे विचित्र पहलू ये है कि इस राष्ट्रगान समारोह में मुस्लिम कर्मचारी शामिल नहीं होते । अधिकारी अपना नाम बताने से इनकार करते हुए बोलते हैं - ‘किसी मुस्लिम कर्मचारी से इसके लिए कैफियत मांग गयी तो या उनका वेतनकाटा गया हो, ऐसा अभी तक नहीं देखा’ वे किसी उलेमा फतबे का हवाला भी नहीं देते ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में सभी कार्यालयों में सुंबह राष्ट्रध्वज फहराने की चर्चा बिहार सरकार के कार्यालयों में होती है, लेकिन इसके लिए ऐसा निर्देश जारी नहीं हुआ है, जिसे न मानने पर कार्रवाई हो जाए ।
गुजरात का एक और रिकार्ड चर्चा करने लायक है । 21 जनवरी को राजकोट के नवनिर्मि खोडल धाम मंदिर में देवी खोडियार की मूर्ति स्थापित करने के अवसर पर 3.5 लाख लोगों ने राष्ट्रगान गाया ।
यह भावना अपने आप जाग्रत है, जबरन जगायी गयी नहीं है । लेकिन इसे दंडात्मक विधान से जोड़ने पर कानून सिनेमा हॉल में आ गया है । 22 जनवरी को मुंबई के गोरेगांव स्थित एक सिनेमा हॉल में दंगल फिल्म के एक दृश्य के दौरान राष्ट्रगान वजने पर खड़े होने से असमर्थ एक बुजुर्ग की पिटाई कर दी। कश्मीर में दो युवकों के 10 फरवरी को सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े न होने वाले दो युवकों को पुलिस से गिरफ्तार कर लिया ।
गत वर्ष दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सभी सिनेमा हॉलों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य कर दिया । आपसे गाना भले नहीं हो, मगर खड़े होना पड़ेगा। इससे लोगां में राष्ट्रगान के प्रति प्रेम/आदर जैसी राष्ट्रीय भावना जगी है या नहीं, इसका आकलन तो मुश्किल है । मगर राष्ट्रीय डर जरूर पैदा हुआ है और लोग अगला आदेश और इसकी उल्लंघन करनेवालों पर कार्रवाई देखते रहते हैं ।
2016 के मई में यूजीसी(विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने यह कहकर छात्रों को आतंकित कर दिया कि तिरंगे के अपमान पर रूक सकती है डिग्री । यूजीसी ने अपने दिशानिर्देश में कहा कि राष्ट्रध्वज के अपमान और तिरंगे पर विवाद के मामलों में कड़ी सजा के तौर पर उनकी डिग्री रोकी जा सकती है ।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को थोड़ा शिथिल करते हुए दिव्यांगों अर्थात् शरीर से लाचार लोगों को सिनेमा हॉलों में खड़े होने से छूट दे दी और यह भी निर्देश दिया कि सिनेमा हॉल के दरवाजे बंद करने की जरूरत नहीं है ।
2016 में संसद के शीतकालीन सत्र में पांच दिसंबर को इस संबंध में उठे सवाल पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा को स्पष्टीकरण देना पड़ा कि सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान अनिवार्य करने का सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं है । उसके बाद 15 से 22 अगस्त तक देश में सरकारी ‘तिरंगा यात्रा’ चली ।
जेएनयू का कन्हैया कुमार प्रकरण और तिरंगा विवाद लोग भूले नहीं हैं । मार्च, 2016 में संसद से सड़क तक ‘भारत माता की जय’ बोलने को लेकर राजनीति इतनी गर्मायी कि राष्ट्रीय भावना ठंढी होरक बर्फ की तरह जम गयी ।
बजट सत्र के समय हिन्दूवादी संगठन ‘भारत माता की जय’ की दुहाई दे रहे थे, क्योंकि आरएसएस प्रमुख ऐसा बोलने का फतवा जारी कर चुके हैं । मुस्लिम नेता ओबैसी ‘भारत माता की जय’ न बोलने पर अड़े थे । गीतकार जावेद अख्तर ने राज्य सभा से जाते-जाते ‘भारत माता की जय’ बोलकर काफी वाहवाही लूटी ।
मदरसों में तिरंगा न फहराने का मामला अगस्त, 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा । कोर्ट नोटिस के जवाब में राज्य सरकार ने मदरसों का बचाव में दलील दी । इलाहाबाद में ही सालभर बाद एक स्कूल का मैनेजर जिया उल हक राष्ट्रगान गाए जाने का विरोध करने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया । संसद, कोर्ट, शिक्षण संस्थान, पुलिस, सरकार, मजहबी संगठन सब हैं, मगर आम जनता की राष्ट्रीय भावना में कहीं भागीदारी नजर नहीं आती । विगत दो-तीन वर्षों में ऐसी अराजक स्थिति आयी है ।