ऑनलाइन संपर्क के सारे प्लेटफार्म ट्विटर, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम एकाउंट, यूट्यूब चैनल लगातार विवाद के घेरे में है, जिन्हें सोशल मीडिया कहा जाता है । इनके धंधों से माहौल इतना ‘अनसोशल’ हो गया है और हालात इस कदर असहज होते जा रहे हैं कि सरकार को हजारों खाते ब्लॉक करने पड़े हैं ।

देश-विदेश में परिवार, समाज से लेकर आर्थिक, राजनीतिक कारोबार में भी ऐसी अराजक स्थिति पैदा हो गयी है कि ऐसे मीडिया को ‘सोशल’(सामाजिक) कहना इस शब्द का अपमान है । खासकर ट्विटर और व्हाट्सएप ने तो धार्मिक, सामाजिक संतुलन को ही बिगाड़ दिया है । राजनीतिक सत्ता में भी इसके इस्तेमाल की खबरें हैं । इसकी चर्चा विदेश में ज्यादा है और भारत से तार जुड़े होने के कारण विवादास्पद है ।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी(नग्न तस्वीरें दिखाना) और रेप के वीडियो पोस्ट करनेवाले 23 ट्विटर एकाउंट हाल ही में दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध यूनिट ने बंद किए हैं । दिल्ली महिला आयोग की नोटिस के बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर से यूजर्स का ब्योरा मांगा और उनकी जांच व पहचान के लिए चार टीम बनायी गयी, जो एकाउंट ब्लॉक कराए गए, उनसे बच्चों के अश्लील वीडियो और दुष्कर्म के वीडियो ट्वीट कर शेयर किए गए थे । इसकी कितनी भी निंदा की जाए, कम होगी ।

यह खबर 28.09 की है । उसके दो दिन पहले 26.09 को कर्नाटक हाईकोर्ट में उस मामले पर सुनवाई की, जिसमें ट्विटर ने एकाउंट ब्लॉक करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी हुई है । ट्विटर की ओर से हाईकोर्ट में पेश वकील अरविंद दातार ने जो दलील दीए वो गौर करने लायक है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने जो प्रतिबंध आदेश जारी किए, उसके पीछे ऐसा ‘सोशल’ संदेश है, जो सरकार की नीतियों से मेल नहीं खाते । वकील ने ट्विटर के पक्ष में इसका एक उदाहरण दिया, जिसमें जम्मू व कश्मीर में तैनात एक मुस्लिम जवान की मॉम को बचाने के लिए एक हिंदु युवक के रक्तदान का संदेश वायरल हुआ ।

ट्विटर ने इस वर्ष के आरंभ में केंद्र सरकार के 2021 के आदेशों को कर्नाटक हाईकोर्ट ने चुनौती दीए जिसमें 39 एकाउंट बंद कर दिए गए । सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए हाईकोर्ट में कहा कि ट्विटर एक विदेशी प्लेटफार्म है, जो भारतीय नागरिकों की तरह अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार नहीं मांग सकती । ट्विटर ने इसी आधार पर केंद्र के आदेश को चुनौती दी । सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं, जिसमें ट्विटर ने भारत. विरोधी हिंसा उकसानेवाले और सांप्रदायिक सद्भाव खराब करनेवाले धार्मिक पहलुओं को वायरल किया ।

सितंबर का महीना सोशल.मीडिया पर अंकुश लगाने के ताबड़तोड़ सरकारी आदेशों और ट्विटर को लेकर छिड़े अंतरराष्ट्रीय घमासान के लिए याद किया जाएगा । अक्टूबर में भी उसका सिलसिला जारी है । सारे मामले एक.एक करके क्रमबद्ध तरीके से सामने आते गए ।

26 सितंबर को ही सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब को अपने 10 चैनलों से 45 वीडियो हटाने का निर्देश दिया । 2021 में बने सूचना टेक्नोलोजी(इंटरमीडियरी गाईडलाइन्स और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम के तहत केंद्र सरकार की ओर से यह निर्देश जारी किया गया । केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये चैनल देश में नफरत फैलानेवाले कार्यक्रम प्रसारित करने की साजिश में लिप्त पाए गए, जिससे विदेशों से भारत के मैत्रीपूर्ण रिश्ते प्रभावित हो रहे थे । अधिकारियों के अनुसार फर्जी खबरों और आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर धार्मिक समुदायों के बीच घृणा फैला रहे थे ।

13 सितंबर को ट्विटर व्हिसिलब्लोअर पीटर जाटको की अमेरिकी सीनेट की न्यायिक कमिटि के सामने पेशी हो रही थी । उसने अपने बचाव में जो सफाई दीए उसका सूत्र भारत से जुड़ा है। पीटर ने दावा किया कि भारत सरकार ने ट्विटर कंपनी के अंदर अपना एजेंट रखा हुआ है जो गुप्त तरीके से काम करता है और उसका सुराग नहीं मिल पा रहा है । जाटको ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि ट्विटर ने रक्षा मंत्रालय के अंदर पेरोल पर चीन का भी एजेंट रखा हुआ है । पीटर जाटको पहले ट्विटर का सुरक्षा अधिकारी था, जो अब ब्लिसिलब्लोअर है ।

यह राज खोले जाने से भारत में खलबली मची । सूचना व प्रसारण मंत्रालय से संबद्ध संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने भारत में तैनात ट्विटर अधिकारियें को तुरंत सम्मन किया ।

पीटर जाटको ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के आगे एक शिकायत दर्ज करायी, जिसमें उसने दावा किया कि भारत सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर पर एक.दो से ज्यादा व्यक्तियों को भाड़े पर रखने का ‘दबाव’ डाला, जो अन्य बातों के अलावा यूजर डाटा की तह तक जाए, वे ‘सरकारी एजेंट’ थे । उसी समय अगस्त में ही एक पूर्व ट्विटर कर्मचारी सऊदी अरब सरकार के लिए जासूसी करते पाया गया, जिसे सरकार विरोधियों के यूजर डाटा खंगालकर देना था ।

सोशल मीडिया आज समाज की जान है, उसके बिना जिंदगी चल नहीं सकती । इसलिए प्राइवेसी पर बढ़ता खतरा भी चर्चा में है । व्हाट्स एप् की प्राइवेसी नीति भारत और यूरोप के लिए अलग.अलग है । इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर 29 सितंबर को सुनवाई थी । याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ के सामने पेश वकील श्याम दीवान ने बताया कि मेरा कंपनी द्वारा व्हाट्सएप एप् का अधिग्रहण किए जाने के बाद प्राइवेसी नीति बदली गयी । युरोपीय देशों के यूजर को भारत की तुलना में ज्यादा प्राइवेसी मिली हुई है । केंद्र सरकार की ओर से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस भेदभाव के खिलाफ है और जो प्राइवेसी विदेशियों को प्राप्त है, वही भारतीयों को भी दी जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि इस संबंध में बिल लाने की तैयारी है और साथ में यह भी स्वीकारा कि एक बिल वापस ले लिया गया ।

दो दिन बाद एक अक्टूबर को व्हाट्स एप् को अपने 23 हजार खाते हटाने पड़े । 2021 में लागू आईटी नियमों के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफार्म(50 लाख से ज्यादा यूजर के साथ) को हर हर महीने रिपोर्ट देनी होती है । नियमों का उल्लंघन करने पर व्हाट्सएप ने 23028 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगा दिया ।

नियमों के उल्लंघन के कारण 29 सितंबर को ही केंद्र सरकार ने 67 अश्लील वेससाईट पर प्रतिबंध का आदेश दिया ।

इस्लामी उग्रवादी गुट पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया(पीएफआई) के देशभर में स्थित गुप्त ठिकानों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी की छापेमारी के दौरान प्रतिबंध लगाया गया । जांच के दौरान पता चला कि पीएफआई राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में युवाओं को शामिल करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था । 28 सितंबर को जारी आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पीएफआई की वेबसाईट ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम एकाउंट, यूट्यूब चैनल को ब्लॉक करने का आदेश दिया ।

अक्टूबर महीना आने के बाद सोशल मीडिया से जुड़ी दूसरे प्रकार की भी जानकारी सामने आयी । सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर एकाउंट खोला है । विश्वस्त सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय पुलिस तफ्तीश नेटवर्क इंटरपोल के दिल्ली में 18ण्21 अक्टूबर को आयोजित 90वीं महासभा के सिलसिले में ऐसा किया गया है । एनआईए, ईडी, एनसीबी(नारकोटिक्स जांच ब्यूरो) समेत सभी के पास सोशल मीडिया एकाउंट है, सीबीआई के पास नहीं है ।

कनाडा में भारत विरोध थमा नहीं है । 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन टोरंटो के मेयर पेट्रिक ब्राउन का एक ट्विटर चर्चा में आया, जिसमें वहां के भगवद्गीता पार्क में तोड़फोड़ वायरल है । ब्राम्पटन ट्रायर्स पार्क का नाम बदलकर हाल ही में भगवद्गीता पार्क रखा गया था ।

3 अक्टूबर को केंद्र सरकार को एक बार फिर से डिजिटल मीडिया, ओटीटी प्लेटफार्म और टीवी चैनलों के लिए परामर्श जारी करने पड़े । इसमें ऑनलाईन सट्टेबाजी को बढ़ावा मिलनेवाले विज्ञापन दिखाने से मना किया गया है ।

चीन ने अपने यहां अधिकांश पश्चिमी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगा रखा है और भारत में चीनी एप् से यहां की अर्थव्यवस्था बिगाड़ने की मुहिम चल रही है । भारत के युवकों के स्मार्ट फोन हैक करके उन्हें सस्ते लोन का प्रलोभन देकर चीनी एप गिरोह फंसाता है और फिर उनके निजी मामले की जानकारी को ब्लैकमेल करके उनसे मनमाना पैसा ऐंठता है । बाजार में इसकी चर्चा गर्म है ।

2021 में भी दशहरा, दीवाली के समय सोशल मीडिया ने सामाजिक विद्वेष फैलाया था, जिसकी हवा बांग्लादेश से आयी थी । दशहरा के दिन बांग्लादेश में पूजा पंडाल के मंडप में कुरआन रखने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने से बवाल मच गया । उसका असर बांग्लादेश सीमा से सटे पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में हुआ और वहां के मस्जिद पर हमले की खबर आयी । उसकी प्रतिक्रिया में उनाकोटी जिले के काली मंदिर की बाड़ क्षतिग्रस्त करने की भी खबर फैली । उसी समय 2901072021 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्विटर को हिंदू देवी से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री हटाने का आदेश दिया ।