संघ शासित क्षेत्र जम्मू व कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला गुजरा वर्ष 2024 के अंतिम पखवारे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले और उनसे राज्य दर्जा वापसी का आग्रह किया ।

अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री को उन बाधाओं से ही अवगत कराया, जो जम्मू व कश्मीर की निर्वाचित सरकार को जनता के प्रति अपने दायित्व निर्वहन में पूर्ण राज्य का दर्जा न होने के कारण उठानी पड़ रही है । उमर अब्दुल्ला जब दिल्ली में ही थे, उसी समय जम्मू व कश्मीर के सिविल सोसायटी संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील करके कहा कि संघ शासित क्षेत्र( น) यूटी को राज्य का दर्जा देने में देरी न की जाए । ग्रुप ऑफ कन्सर्न सिटिजेन्स( ळ्ब्. जीसीसी) को जम्मू व कश्मीर को पूर्ण राज्य दर्जा लौटाने में देर पर गंभीर चिंता जतायी और कहा कि इस ‘दुहरे नियंत्रण’ व्यवस्था से मतदाताओं की उम्मीदें निर्वाचित सरकार पूरी नहीं कर पा रही है ।

जम्मू व कश्मीर में विधान सभा चुनाव के बाद अक्टूबर में उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बने । उसके बाद से केंद्रीय गृह मंत्री को दूसरी बार उन्होंने राज्य का दर्जा लौटाने के चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान किए गए वायदे को याद दिलायी ।

वर्ष 2024 की शुरुआत जम्मू व कश्मीर को राज्य दर्जा वापसी की चर्चा से हुई । एक देश एक चुनाव’ की तरह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के लगभग सभी वरिष्ठ नेता जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने की बात करते थे ।

भाजपा और सभी राष्ट्रीय दल लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे थे । उसी सिलसिले में जम्मू व कश्मीर का विधान सभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराने की अटकलें भी लगायी जा रही थीं, लेकिन केंद्र सरकार और चुनाव आयोग ने अप्रील.मई में लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू व कश्मीर विधान सभा चुनाव कराने का कोई संकेत नहीं दिया । जबकि इसमें कोई बाधा नहीं थी, क्योंकि वहां नवंबर, 2018 में विधान सभा भंग होने के बाद से चुनाव टल रहा था । एक साल बाद अगस्त, 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लाकर जम्मू व कश्मीर राज्य को विशेष संवैधानिक दर्जा देनेवाली धारा.370 हटा दिया और विभाजित करके पूर्ण राज्य को दो संघ शासित क्षेत्रों में बदल दिया । जम्मू व कश्मीर से लद्दाख को अलग करके यूटी बना दिया गया ।

जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी का मामला नए सिरे से चर्चा में आया 2023 के अंत में सुप्रीम कोर्ट के धारा.370 पर फैसला सुनाने के बाद ।

धारा.370 हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय की संवैधानिक वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 11 दिसंबर, 2023 को फैसला आया । चीफ जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने केंद्र सरकार के निर्णय को तो गलत नहीं कहा । मगर धारा.370 के साथ जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा भी खत्म करने के लिए केंद्र को फटकारा । सुप्रीम कोर्ट ने विधान सभा चुनाव टालने के लिए भी सरकार की खिंचाई की और केंद्र की दलीलें ठुकरा दी । केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी और सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी के मामले को विधान सभा चुनाव टालने के बचाव में सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना चाहा । लेकिन भारत के प्रधान न्यायाधीश ने स्वयं सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा ‘जल्द से जल्द’ वापस लौटाने का आदेश केंद्र सरकार को दिया और विधान सभा चुनाव कराने की डेडलाईन 30.09.2024 तय कर दी । सुप्रीम कोर्ट पीठ के शब्दों में डेडलाईन तारीख का अर्थ यह था कि चुनाव आयोग जम्मू व कश्मीर में विधान सभा चुनाव कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2011 के सेक्शन.14 के अंतर्गत 30.09.2024 तक विधान सभा गठित हो सके । प्रधान न्यायाधीश ने सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता को फटकार के साथ कहा कि जम्मू व कश्मीर में सुरक्षा चिंता का विषय है, मगर प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता चुनाव राज्य दर्जा वापसी तक स्थगित नहीं रखा जा सकता ।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात के लिए सरकार को ज्यादा नहीं कुरेदा कि संविधान की धारा.3 का इस्तेमाल करके जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा खत्म कर इसे संघशासित क्षेत्र बनाने की क्या जरूरत थी । याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट पीठ का इस तरह ध्यान आकर्षित किया, जिसका माकूल जवाब केंद्र नहीं दे पाया । केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ को सिर्फ इतना बताया गया कि जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा फिर से बहाल कर दिया जाएगा । जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2011 लागू होने के बाद राष्ट्रपति द्वारा 05 और 06 अगस्त, 2011 को जारी आदेशों से धारा.370 के अंतर्गत जम्मू व कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा के सारे प्रावधान निष्प्रभावी हो गए और भारतीय संविधान अन्य राज्यों की तरह लागू हो गया । इसके बावजूद केंद्र को ऐसी क्या अनिवार्यता थी कि सिर्फ जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा घटाने के लिए पहली बार संविधान की धारा.3 का इस्तेमाल किया गया । इस प्रश्न का जवाब सुप्रीम कोर्ट ने महज केंद्र के इस आश्वासन पर छोड़ दिया कि राज्य दर्जा वापस कर दिया जाएगा ।

2024 शुरू होते ही सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ लोकसभा और उसके साथ आंध्रप्रदेश तथा ओडिशा विधान सभा चुनावों की तैयारी में जुट गया । लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जम्मू व कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बार.बार धारा.370 हटाने को उचित ठहराते हुए कहा कि राज्य दर्जा ‘जल्द’ लौटा दिया जाएगा । अन्य राज्यों में भी प्रधानमंत्री ने धारा.370 हटाने को भाजपा की ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताते हुए कहा कि इससे जम्मू व कश्मीर में शांति और विकास के नए युग की शुरूआत हुई । वर्ना ओडिशा और आंध्रप्रदेश की तरह जम्मू व कश्मीर में भी विधान सभा चुनाव लोकसभा के साथ किसी संवैधानिक अड़चन के बगैर कराया जा सकता था । जम्मू व कश्मीर में शांति के नए युग की शुरुआत तो धारा.370 हटने के बाद हुई, मगर विधान सभा चुनाव में सुरक्षा बाधक बन रही थी । इस समस्या के रहते हुए लोकसभा चुनाव के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तामीली के लिए जम्मू व कश्मीर में विधान सभा चुनाव भी अक्टूबर, 2024 के पहले सप्ताह में संपन्न हो गया । भाजपा शायद यह सपना देख रही थी कि धारा.370 हटाए जाने का जम्मू व कश्मीर के लोग स्वागत करेंगे और बदली हुई संवैधानिक स्थिति के बाद पहली सरकार भाजपा की बनेगी । वैसा नहीं होने का परिणाम ये हुआ है कि अब जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने की चर्चा जम्मू व कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस गठजोड़ सरकार करती है । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) और अन्य दल तो धारा.370 के अंतर्गत प्राप्त विशेष संवैधानिक दर्जा वापसी पर अड़े हैं । सरकार गठन के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक और विधान सभा के पहले सत्र में इसी आशय का प्रस्ताव पास हुआ । विपक्षी भाजपा ने विरोध किया । अब प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री समेत भाजपा के किसी केंद्रीय नेता के मुंह से जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने की बात नहीं निकलती ।

19.12.2024 को जम्मू व कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात कुल मिलाकर सुरक्षा समीक्षा पर केंद्रित था । जम्मू व कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंहा के साथ वहां के मुख्य सचिव अटल डुल्लु और डीजीपी नलिन प्रभात भी इस बैठक में भाग लेने आए थे । केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीजी सदानंद दाते और बीएसएफ के डीजी दलजीत सिंह चौधरी भी इस सुरक्षा बैठक में मौजूद थे । अक्टूबर में जम्मू व कश्मीर में सरकार गठन के बाद से यह पहली सुरक्षा समीक्षा बैठक थी । उमर अब्दुल्ला ने बैठक के बाद कहा. ‘राज्य दर्जा वापसी समेत जम्मू व कश्मीर की स्थिति पर चर्चा जारी है ।’ एक दिन बाद 20.12.2024 को संसद के शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन था । इस सत्र में केंद्र ने ‘एक देश एक चुनाव ‘योजना के अंतर्गत लोकसभा और विधान सभा चुनाव एक साथ कराने के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल पेश किया । विपक्ष की मांग पर इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति को विमर्श के लिए सौंपी गयी तो कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनुसार अगले सत्र के अंतिम सप्ताह में सदन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी ।

लेकिन जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने संबंधी संविधान संशोधन बिल की न तो इस सत्र में कोई चर्चा थी, न ही आनेवाले बजट सत्र में ऐसी कोई संभावना लग रही है ।

दरअसल जम्मू व कश्मीर को राज्य दर्जा लौटाना सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर, 2023 के फैसले के बावजूद केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं था । इसी मुद्दे पर गैर.भाजपा गठजोड़ दलों को जम्मू व कश्मीर में मिले बहुमत जनादेश के बावजूद केंद्र सरकार की इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है । इसके लिए धारा.3 समेत जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2019 में संशोधन करना पड़ेगा । यह चर्चा वर्ष 2025 को भी पीछा करेगी । अब केंद्र सरकार को जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा लौटाने के साथ.साथ यूटी लद्दाख को राज्य देने पर भी विचार करना पड़ सकता है । लोकसभा चुनाव के पहले से लद्दाख के लोग राज्य का और संविधान की 6वीं अनुसूची के तहत जनजातीय क्षेत्र का दर्जा के लिए आंदोलन कर रहे हैं । वहां के लोगों ने बिना विधान सभा के यूटी का दर्जा स्वीकार नहीं किया । जलवायु कार्यकर्ता मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक लेक अपेक्स बॉडी(सठ) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस(ज़क्।) समेत लद्दाख के सभी जनसंगठनों के समर्थन से लगातार अनशन आंदोलन कर रहे हैं । लेह से लोकसभा चुनाव के पहले शुरू हुआ सोनम वांगचुक का अनशन दिल्ली के लद्दाख भवन के बाहर कई दौर तक चला है । लद्दाख लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार हाजी हनीफा जान ने भाजपा और नेशनल कान्फ्रेंस. कांग्रेस गठजोड़ उम्मीदवारों को हराकर इसी मुद्दे पर जीत हासिल की ।

लद्दाख प्रतिनिधिमंडल से 15 जनवरी, 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्ता होनी तय है । 21.10.2024 को सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाने गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे लद्दाख भवन गए और 03.12.2024 को लद्दाख प्रतिनिधियों से गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय कमिटी की वार्ता हुई । उसके पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है । लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सरकार किन मांगों पर सहमत हुई है, जिसमें लद्दाख के लिए दो लोकसभा सीट और अलग लोक सभा आयोग गठन भी शामिल है ।

जम्मू व कश्मीर सरकार ने केंद्र से टकराव का रास्तो छोड़कर बातचीत और राजनीतिक माहौल बनाने की नीति अपनायी है । 22.12.2024 को सिविल सोसायटी संगठन ने केंद्र सरकार को राज्य का दर्जा लौटाने के साथ.साथ इस बात की भी याद दिलायी कि 6 साल बाद जम्मू व कश्मीर को जनप्रतिनिधित्व की सरकार मिली है, मगर वो मतदाताओं के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह नहीं कर पा रही है । 25.12.2024 को पूर्व प्रधापनमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 100वें जन्मदिन पर कश्मीरी नेताओं ने उनका नारा ‘इन्सानियत, जम्हूरियत, कश्मीरियत’ को याद करते हुए कहा कि वापजेयी रहते तो कश्मीर का दर्जा घटाया नहीं जाता । फिर भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मातमपुर्सी पर भी कश्मीरी नेताओं ने कहा कि उन्होंने ही कश्मीर में ‘शांति और विकास के नए युग’ की शुरूआत की थी ।

उमर अब्दुल्ला ने 04.11.2024 को विधान सभा सत्र के पहले दिन अपना भाषण अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ से शुरू किया । उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने अपना संबोधन जम्मू व कश्मीर का राज्य दर्जा वापसी से शुरू किया । विधान सभा ने ‘विशेष दर्जा’ वापसी और इसके लिए बातचीत का प्रस्ताव पास किया जो धारा.370 खत्म होने से पहले था । 18.10.2024 को मंत्रिमंडल से पास इसी आशय के प्रस्ताव की प्रति मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 24.10.2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मिलकर उनके हाथ में सौंपी । 14.11.2024 को उमर अब्दुल्ला राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मिले । उमर अब्दुल्ला. ‘विशेष राज्य दर्जा’ नहीं, सिर्फ राज्य दर्जा की बात करते हैं ।