पूर्वोत्तर राज्यों में कोरोना की स्थिति देश के अन्य हिस्सों की तरह भयावह नहीं है । अभी तक पूर्वोत्तर से कोरोना मौत की रिपोर्ट नहीं आयी है । लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लॉकडाउन एलान के काफी पहले से राजनीतिक कोरोना से ग्रसित मणिपुर की भाजपा गठजोड़ सरकार की सेहत ज्यादा खराब हो गयी । जून महीने में जब चारों तरफ लॉकडाउन में ढील और रियायतें दी जा रही थी, उस समय मणिपुर सरकार को बचाने के उपाय किए जा रहे थे । जून समाप्त होते-होते वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ गयी और सरकार की हालत अस्थिर चल रही है । नौ मंत्रियों और विधायकों ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से 17 जून को समर्थन वापस लेकर सरकार को अल्पमत में ला दिया । उनमें तीन भाजपा विधायक भी शामिल थे, जो कथित रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए । सरकार का साथ छोड़नेवाले उपमुख्यमंत्री वाई. जयकुमार समेत चार विधायक क्षेत्रीय नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के थे । उनके अलावे दो निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया । दिल्ली से लेकर गुवाहाटी और मेघालय तक भाजपा नेतृत्व में अफरातफरी मच गयी । एनपीपी विधायकों को वापस लाने के लिए और अन्य विधायकों को भी मनाने के लिए ताबड़तोड़ बैठकों का सिलसिला चला । मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा अपनी पार्टी एनपीपी के अध्यक्ष हैं । वहां गठजोड़ सरकार का भाजपा घटक है । असम की भाजपा सरकार के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा और कोनराड संगमा को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से हाई अलर्ट मिला । दोनों विशेष विमान से तत्काल मणिपुर की राजधानी इंफाल पहुंच गए । हिमंत बिस्व शर्मा भाजपा द्वारा क्षेत्रीय दलों को मिलाकर गठित नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस(एनईडीए) के संयोजक है । इन तमाम प्रयासों की कमान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संभाले हुए थे ।
भाजपा को किसी भी तरह से सरकार बचानी थी, क्योंकि 19 जून को राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए मतदान होना था । इन विधायकों ने दो दिन पहले ही समर्थन वापस लिया और मंत्रियों ने इस्तीफे दिए । पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह ने 17 जून को ही अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से कर डाली और सेक्युलर प्रोग्रेसिव फ्रंट सरकार गठन का दावा ठोंक दिया । उन्होंने बहुमत का आंकड़ा जुटाने का दावा किया ।
2017 विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा सीटें जीती । 60 सदस्यीय विधान सभा में भाजपा को मात्र 21 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस ने 28 सीटें जीती, जो 15 साल से सत्ता में थी । भाजपा ने बहुमत के लिए कम पड़ रही 10 सीटें कांग्रेस के समर्थन से जुटायी और सरकार बना लिया । कांग्रेस के टिकट पर जीते विधायक श्याम कुमार सिंह को मंत्री बना दिया गया, जो भाजपा में शामिल हो गए । एक कांग्रेस विधायक ने विधान सभा अध्यक्ष वाई. खेमचंद के पास श्याम कुमार सिंह समेत भाजपा का समर्थन कर रहे कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित करने की अर्जी लगायी । स्पीकर(विधान सभा अध्यक्ष) ने उस अर्जी पर विचार नहीं किया । मामला मणिपुर हाईकोर्ट गया, फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया । सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद स्पीकर अपनी सरकार बचाने के लिए निर्णय लेना टालते रहे । तीन साल तक स्पीकर के राजनीतिक अनिर्णय की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च, 2020 को श्याम कुमार सिंह को विधान सभा में प्रवेश करने से रोक दिया और मंत्रीपद से हटा दिया । सुप्रीम कोर्ट न अन्य सातों विधायकों पर भी एक निश्चित समय सीमा के अंदर स्पीकर को निर्णय लेने कहा । स्पीकर ने श्याम कुमार सिंह को तो 28 मार्च को अयोग्य घोषित कर दिया, लेकिन अन्य विधायकों पर निर्णय टालते रहे । मामला फिर मणिपुर हाईकोर्ट गया । हाईकोर्ट ने भी अपने 8 जून के फैसले में स्पीकर के निर्णय लेने तक इन सातों विधायकों का विधान सभा में प्रवेश करने से मना कर दिया । स्पीकर को सरकार भी बचानी थी और 19 जून को राज्यसभा की सीट भाजपा के खाते में डालनी थी । उसी दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सभा चुनाव से पहले स्पीकर को निर्णय घोषित करने से रोक दिया । इसलिए सात विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय की तारीख स्पीकर ने 22 जून तय की ।
उसके पहले ही राजनीतिक घमासान मच गया । केंद्र सरकार ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेरने के लिए दूसरा सियासी मोर्चा भी खोल दिया । कांग्रेस नेता ओकरम इबोबी सिंह ने भाजपा के अल्पमत में आ जाने से 17 जून को राज्यसभा सीट जीतने की उम्मीद जतायी । भाजपा उम्मीदवार जीते नहीं, जिताए गए । स्पीकर ने किस प्रकार अधर में लटके विधायकों के वोट डालने का इंतजाम लगाया, उस पर सवाल उठ रहे हैं । पूरी रिपोर्ट सामने नहीं आने दी गयी है । राज्यसभा के लिए मतदान हो जाने के बावजूद गठजोड़ सरकार को बहुमत में बनाए रखने की कवायद जारी रहो । मेघालय के मुख्यमंत्री अपने चार बागी विधायकों के साथ दिल्ली आकर गृहमंत्री अमित शाह से मिले, भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा से मिले । उसी दौरान सीबीआई मणिपुर विकास सोसायटी के चार पूर्व अध्यक्षों के कथित 332 करोड़ रूपये घोटाले के मामले में ओकरम इबोबी सिंह से पूछताछ करने पहुंच गयी । यह मामला नवंबर, 2019 में दर्ज किया गया था । कांग्रेस नेता अजय माकन और असम के कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई भी इंफाल पहुंच गए थे । हिमंत बिस्व शर्मा ने 22 जून को इंफाल छोड़ने से पहले कहा कि राज्य सभा चुनाव के बाद कई विधायक अयोग्य घोषित हो गए, उसके लिए उपचुनाव होंगे । लेकिन गठजोड़ सरकार की हालत पर कुछ बोलने से इंकार कर दिया । मुख्य गठजोड़ घटक एनपीपी की मणिपुर यूनिट ने कह दिया कि गठजोड़ में बने रहना मुश्किल है । मंत्री बनाने के वायदे पर चारों विधायक फिलहाल मान गए । लेकिन गठजोड़ को समर्थन दे रहे कांग्रेस छोड़कर आए विधायक, नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) के चार विधायक, तृणमूल कांग्रेस और लोकजनशक्ति पार्टो के एक-एक विधायक और निर्दलियों ने मंत्री बनाए जाने पर साथ रहने की शर्त रखी है । 60 सीटों वाले मणिपुर में मुख्यमंत्री समेत मात्र 12 मंत्री हो सकते हैं । अभी सीटों की संख्या कम हो गयी है । असंतुष्ट विधायक हिंमत बिस्व शर्मा और कोनराड संगमा के ‘हस्तक्षेप’ से नाराज हैं । जिन विधायकों की सदस्यता समाप्त हुई है वे अगर उपचुनाव में जीते तो मंत्री बनने के लिए दबाव बनाऐंगे । अन्यथा उनके पाला बदलने में दर नहीं लगेगी । एनपीएफ नगालैंड में विपक्ष में है, जहां की गठजोड़ सरकार में भाजपा शामिल है । एनपीएफ के भी सात विधायकों को अयोग्य घोषित करने का मामला एक साल से लटका हुआ है । गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा पीठ के आदेश के अनुसार स्पीकर को अगले हफ्ते फैसला लेना है । इन विधायकों ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का पार्टी का निर्णय नहीं माना ।
भाजपा शासित गुजरात में भी 8 कांग्रेस विधायकों ने ठीक राज्यसभा चुनाव से पहले विधान सभा से इस्तीफा दे दिया । इसलिए अयोग्य घोषित करनेवाले कोरोना की नौबत नहीं आयी । उनमें से 5 भाजपा में शामिल हो गए ।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने 28 जून को लॉकडाउन 15 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला तो पत्रकारों को सुन दिया । लेकिन अपनी सरकार की मौजूदा हालत के बारे में किसी सवाल का जवाब देने से इन्कार कर दिया ।