मणिपुर में चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन हटाकर सरकार गठन की विधायकों की मांग पर बनी दूसरी सरकार का काम.काज अमूमन ‘वर्चुअल मोड’ पर चल रहा है । नेतृत्व परिवर्तन नीति के तहत दो उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं ने दिल्ली में पार्टी विधायकों से विमर्श के बाद लिया ।
सरकार गठन का पहला आलम फरवरी में ये देखने को मिला कि सिर्फ मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर की राजधानी इंफाल में अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली । उपमुख्यमंत्री नेपचा किपगेन और लोसी दिखो शपथ लेने इंफाल नहीं जा पाए । दोनों ही को दिल्ली स्थित मणिपुर भवन में ‘वर्चुअल मोड’ सह वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी पड़ी । राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दोनों मंत्रियों को इंफाल से मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के साथ ही शपथ दिलायी ।
उसके बाद अभी मार्च में नयी सरकार द्वारा आहूत विधान सभा के पहले बजट सत्र का मंजर ये रहा कि भाजपा के 9 में से 6 कुकी.जो विधायकों ने ‘वर्चुअल मोड’ से सत्र में हिस्सा लिया । वे विधायक विधान सभा तक नहीं पहुंच पाए । सदन में उनकी उपस्थिति स्क्रीन पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए दिखायी गयी ।
इसका कारण है, लगातार जारी जातीय हिंसा, सामाजिक तनाव और कानून व्यवस्था के असामान्य हालात । इस पर काबू पाना कई महीनों से संभव नहीं हो रहा है । आनेवाले 03 मई को हिंसा के तीन साल पूरे हो जाएंगे । 03.05.2023 से उफनी जातीय हिंसा में सरकारी रिपोर्ट के ही अनुसार अबतक 275 लोग मारे जा चुके हैं और 60ए000 लोग विस्थापित होकर यहां.वहां या सरकारी शरणार्थी कैंपों में गुजर.बसर कर रहे हैं ।
मणिपुर में विधायकों की मांग थी कि 13.02.2026 को राष्ट्रपति शासन की मियाद पूरी होने से पहले सरकार गठित हो जाए । उस हिसाब से 05 फरवरी को सरकार का गठन हो गया । हिंसा में लिप्त एक.दूसरे के जानी दुश्मन बने विभिन्न जातीय समुदायों को सरकार में प्रतिनिधित्व देकर केंद्र सरकार ने आपसी सामंजस्य का प्रयास किया ।
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह पहले की तरफ प्रभावशाली राजनीतिक हैसियत वाले मेइतेइ समुदाय के बनाए गए । दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक नेमचा किपगेन कुकी.जो समुदाय से लिए गए और दूसरी लोसी दीखो नगा समुदाय से उपमुख्यमंत्री बनायी गयीं । लेकिन सरकार का गठन होते ही हिंसा फिर से दूसरे रूप में भड़क उठी । 07 फरवरी को कुकी.जो और नगा समुदाय के लोगों ने एक.दूसरे पर हमला कर दिया । लगभग आधे हफ्ते तक यह हिंसा जारी रही । कुकी हमलावरों ने एक तान्खुल नगा की जान ले ली । उसके बाद दोनों पक्षों के आगजनी और फायरिंग पर तुले जनजातीय संगठनों ने सरकारी क्वार्टर समेत 20 से ज्यादा मकानों में आग लगा दी । उखरूल जिले के लिशन इलाके में निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी ।
अभी 12 मार्च को उसी उखरूल जिले में लिशन के ही नजदीक दो लापता कुकी.जो आदिवासियों की लाश पायी गयी । मुख्यमंत्री को सदन में इस घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) से कराने का आश्वासन देना पड़ा । उसी दिन विधान सभा सत्र के दौरान ही 21 नगा मुसाफिरों के उखरूल.इंफाल रोड पर अगवा की वारदात हुई । राज्य के गृहमंत्री गोविंददास कोन्यूजाम ने सदन में बताया कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सहयोग से 21 नगाओं को मुक्त करा लिया गया है । इंफाल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने 21 तान्खुल नगाओं को अगवा किया, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी थे । जिन 2 कुकी लोगों की लाश पायी गयी, वे पानी का पाईप फिक्स करके अपने घर से निकले थे और उसके बाद से दोनों को कोई अता.पता नहीं था । लाशें मिलने के बाद उग्र प्रदर्शनकारियों ने मोंगकोट पुलिस थाने में पुलिस गाड़ी पर हमला किया और पत्थरों.बोल्डरों से उखरूल.इंफाल रोड जाम कर दिया । तान्खुल नगा यात्रियों के अगवा का भी मामला था । कूकी और नगा दोनों समुदाय के लोगों ने जवाबी हिंसा में राहगीरों तथा गांव में घुसकर परस्पर एक.दूसरे को निशाना बनाया ।
14 मार्च को नोनी जिले में ताओलिंगपुंज गांव में एक 4 साल के बच्चे की मौत विस्फोट में हो गयी और उसके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए । दोनों अपने घर के बाहर झाड़ी साफ कर रहे थे, उसी दौरान झाड़ी में छुपाकर रखा गया बम फटा और बच्चे की मौत घटनास्थल पर ही हो गयी ।
बेकाबू हिंसा के समाधान के उपाय कारगर साबित नहीं हो पाने के बावजूद जातीय समुदायों में विश्वास और समन्वय का अभाव है । उससे भी ज्यादा आपसी सामंजस्य और साथ चलने की भावना की कमी मंत्रियों और विभिन्न जातीय समुदायों के विधायकों में है। सबसे ज्यादा सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक ही उस झमेले से जुझ रहे हैं और अपने राज्य को जलते देख रहे हैं । मणिपुर में 36 समुदायों के लोग हैं ।
‘शांतिपूर्ण माहौल बनाने के लिए 05 फरवरी को गठित दूसरी सरकार में तीनों समुदायों. मेइतेइ, कुकी.जो और नगाओं को समान स्थान दिया गया । बाकी सभी इन्हीं तीनों जातियों की उपजातियां हैं। कुकी में भी नगा हैं ।
इनका प्रतिनिधित्व करनेवाले मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह और अन्य दो उपमुख्यमंत्री शपथ लेने के एक महीने के बाद पहली बार दिल्ली के मणिपुर भवन में मिले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तीनों ने तस्वीरें साझा की । नेपचा किपगेन(कुकी) को अपना कार्यालय नहीं है । वे इंफाल से नहीं हिलते । किपगेन मेइतेइ बहुल घाटी में नहीं जाते । दूसरी उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो(नगा) इंफाल जाने से परहेज करती हैं । दूसरी सरकार गठन के बाद नयी कुकी, नगा हिंसा भड़की, जिनका आपसी झगड़े का पुराना इतिहास रहा है । 1990 के दशक में नगा.कुकी हिंसा में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए और दसियों हजार बेघर हुए । कुकी लोग सरकार में शामिल होने के खिलाफ हैं । उन्हें अलग ‘कुकीलैंड’(यूटी) चाहिए ।
मई, 2023 से शुरू हिंसा में मुख्य रूप से मेइतेइ और कुकी शामिल थे । एन. बीरेन सिंह ने 2022 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने मेइतेइ समुदाय के लोगों का ज्यादा हित सोचा । मेइतेइ को कुकी जनजातियों की तरह एस टी(ज.अनुसूचित जनजाति) का दर्जा देने का प्रस्ताव उन्होंने मंत्रिमंडल से पास कराया और दोनों जातियों में हिंसा भड़क उठी । मणिपुर हाईकोर्ट ने भी उस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी । हाईकोर्ट के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट में गया । सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट को फटकार लगाते हुए अपने ‘अधिकारक्षेत्र की सीमा’ में रहने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी समुदाय को एसटी का दर्जा देने का अधिकार केंद्र का है । नाराज विधायकों ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को हटाने की मांग के लिए दिल्ली दौड़ लगायी ।
भाजपा में फूट पड़ गयी । 60..सदस्यीय मणिपुर विधान सभा में भाजपा के 32 विधायक हैं । विपक्षी कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी और उसने मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली । अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले 09 फरवरी, 2025 को एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया ।
मणिपुर में हिंसा से जुड़े तथ्यों का पता लगाने सामाजिक हालात को टटोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस (रिटायर) गीता मित्तल की अध्यक्षता में कमिटी बनाकर मणिपुर भेजा ।
09 मार्च से शुरू विधान सभा सत्र में मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कुल बजट का 734 करोड़ इस 2026.27 राजकोषीय वर्ष में हिंसा से विस्थापित 60 हजार लोगों के पुनर्वास के लिए रखा हैं ।
मणिपुर में 2027 में चुनाव है । कुकी.जो संगठनों के लोग(भाजपा विधायक समेत) उसके पहले अलग कुकी प्रशासन(यूटी टाईप) की मांग पर कायम हैं ।
इनकी शिकायत है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दिसंबर, 2025 में मणिपुर दौरे के कार्यक्रम में कुकी.जो इलाके शामिल नहीं थे । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंसा के दो साल से ज्यादा गुजर जाने के बाद मणिपुर गए ।
कुकी और नगा दोनों को मेइतेइ का नेतृत्व मंजूर नहीं । राजधानी इंफाल के मेइतेइ आबादी वाले घाटी और कुकी बहुल पहाड़ी का आपसी संपर्क आज तक सामान्य नहीं हुआ है ।