केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू व कश्मीर में सीट परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधान सभा चुनाव होगा और संघशासित क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा फिर से बहाल कर दिया जाएगा ।
इन्होंने जम्मू व कश्मीर के लोगों को याद दिलाया कि ‘मैंने संसद में यह आश्वासन दिया था कि जम्मू व कश्मीर का राज्य का दर्जा फिर से बहाल किया जाएगा । हालात सामान्य होने पर राज्य का दर्जा वापस मिलेगा ।
केंद्रीय गृह मंत्री ने अगस्त, 2019 में जम्मू व कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा वाला संवैधानिक प्रावधान खत्म करके इसे संघशासित क्षेत्र बनाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय तक जम्मू व कश्मीर में 87 विधायक और छह सांसद चुने जा रहे थे । सिर्फ तीन परिवार तत्कालीन राज्य पर शासन कर रहे थे । अब 30ए000 जनप्रतिनिधि(पंचायत सदस्य) लोगों की सेवा कर रहे हैं ।
भारत का पहला जिला मुख्यालय सूचकांक वर्चुअल रूप से जारी करते हुए उसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री ने 22 जनवरी को यह बात कही ।
लेकिन अमित शाह परिसीमन आयोग को विधान सभा सीटों के परिसीमन में जिस उलझन का सामना करना पड़ रहा है, उस पर कुछ नहीं बोले । उनके अनुसार केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार को सीट परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है, उसके बाद विधान सभा चुनाव कराया जाएगा ।
2021 का अंत और 2022 की शुरूआत जम्मू व कश्मीर परिसीमन आयोग के लिए सामान्य नहीं रही । अध्यक्ष रिटायर सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना देसाई हैं । मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चन्द्रा और जम्मू व कश्मीर के चुनाव आयुक्त के. के. शर्मा दोनों परिसीमन आयोग के पदेन सदस्य हैं । आयोग के सहयोगी सदस्यों में जम्मू व कश्मीर की सबसे मजबूत जनाधार वाली क्षेत्रीय पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस के तीन और भाजपा के दो सांसद हैं ।
परिसीमन आयोग सीट परिसीमन का ड्राफ्ट प्रस्ताव लेकर 20 दिसंबर को सहयोगी से विमर्श करने पहुंचा । मुख्य रूप से चुनाव आयोग द्वारा तैयार किए गए सीट परिसीमन ड्राफ्ट प्रस्ताव में जम्मू क्षेत्र में अतिरिक्त सात सीटें और कश्मीर पार्टी में सिर्फ एक(1) सीट बढ़ायी गयी । कुल 90 विधान सभा सीटों में से 43 जम्मू के लिए और 47 कश्मीर के लिए निर्धारित की गयी । परिसीमन आयोग ने पहली बार आबादी के आधार पर अनुसूचित जनजाति(एसटी) के लिए 9 सीटें रखने का प्रस्ताव दिया ।
प्रस्तावित जोड़ से जम्मू व कश्मीर में विधान सभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गयी । इसमें जम्मू की 37 से बढ़ाकर 43 की गयी और कश्मीर में सिर्फ एक सीट की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र में सीटों की संख्या 47 हो गयी । पाकिस्तानी कब्जेवाले कश्मीर(पीओके) के लिए अतिरिक्त 24 सीटें सुरक्षित रखने का भी प्रस्ताव ड्राफ्ट में था ।
परिसीमन आयोग अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई अपनी पूरी टीम के साथ 20 दिसंबर को श्रीनगर पहुंची । दोनों प्रमुख स्थानीय दलों. नेशनल कान्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्फ़्टिक पार्टी(पीडीपी) ने ड्राफ्ट प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया । दोनों ही पार्टियों ने एक स्वर से कहा कि यह प्रस्ताव ‘स्वीकारने योग्य नहीं’ है और परिसीमन आयोग पर भाजपा के ‘राजनीतिक एजेंडे’ को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया । इन दोनों दलों के अलावे जम्मू व कश्मीर अपनी पार्टी ने भी प्रस्ताव मानने से इन्कार कर दिया, जो पार्टी भाजपा की ही उपज मानी जाती है ।
अगले ही दिन नेशनल कान्फ्रेंस सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाले गुपकार गठजोड़ घटक दलों की बैठक अब्दुल्ला के जम्मू स्थित आवास पर हुई । सर्वसम्मति से ड्राफ्ट प्रस्ताव के विरोध में एक जनवरी को श्रीनगर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का फैसला हुआ । धारा.370 वापसी की लड़ाई के लिए बने गुपकार गठजोड़ के घटक दलों में पीडीपी, मुजप्फर अहमद शाह के नेतृत्वाली आवामी नेशनल कान्फ्रेंस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) है । पीडीपी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफती समेत सभी दलों ने ड्राफ्ट प्रस्ताव को ‘अलगाववादी’ और जम्मू व कश्मीर को बांटनेवाला बताया। जम्मू व कश्मीर अपनी पार्टी प्रमुख अलताफ बुखारी ने 23 दिसंबर को ही अलग विरोध रैली निकालने का एलान किया। लेकिन ऐसी किसी रैली की खबर कश्मीर से आयी नहीं। परिसीमन आयोग द्वारा सभी सहयोगी सदस्यों को अपने विचारों और सुझावों पर गौर करने का आश्वासन मिलने के कारण संभवतः रैली टाल दी गयी।
20 दिसंबर को बैठक के बाद जारी वक्तव्य में परिसीमन आयोग से सभी सदस्यों को 31 दिसंबर तक अपने सुझावों से अवगत कराने कहा । जनवरी के पहले सप्ताह में चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव तारीखों का एलान कर दिया । जाहिर है कि पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव संपन्न होने के बाद ही चुनाव आयोग जम्मू व कश्मीर की फिक्र करेगा । जम्मू व कश्मीर की पार्टियों ने गृह मंत्री की ‘सामान्य हालात’ की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल होने के बाद ही हालात सामान्य हो सकते हैं ।
परिसीमन आयोग जम्मू व कश्मीर के राजनीतिक दलों की आपत्तियों पर विचार करेगा या नहीं, यह स्पष्ट होने में तो समय लगेगा । लेकिन इतना तो पता चल गया कि सीट परिसीमन का काम भी सामान्य तरीके से नहीं चल रहा है, जिसके बाद विधान सभा चुनाव कराने की बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह गए ।
20 दिसंबर को परिसीमन आयोग की बैठक में पहली बार देखा गया कि नेशनल कान्फ्रेंस के तीनों सांसद. फारूक अब्दुल्ला, मुहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी शामिल हुए । भाजपा के दोनों सहयोगी सदस्य. केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह और सांसद जुगल किशोर शर्मा भी बैठक में मौजूद थे ।
बैठक में शामिल होने से पहले भाजपा सदस्य जुगल किशोर शर्मा ने संवाददाताओं को बताया. हम आयोग को ज्ञापन सौंपेंगे जिसमें आबादी के साथ.साथ जम्मू व कश्मीर के भौगोलिक क्षेत्र का भी ख्याल रखने और जम्मू डिवीजन तथा कश्मीर घाटी के बीच 90 सीटों का एक समान वितरण करने कहा जाएगा ।’
यह पता नहीं चल पाया कि 31 दिसंबर तक भाजपा सदस्यों ने कुछ सौंपा या नहीं और अगर सौंपा तो आयोग का ध्यान उस तरफ दिलाया कि नहीं । जम्मू में भी लोगों ने परिसीमन आयोग के सीटें बढ़ानेवाले ड्राफ्ट प्रस्ताव से खुशी नहीं है । 21 दिसंबर को जब फारूक अब्दुल्ला ने अपने जम्मू आवास पर गुपकार गठजोड़ की बैठक ड्राफ्ट प्रस्ताव के विरोध में रैली निकालने के लिए बुलायी, उसी समय वहां की हिंदू बहुल आबादी में असंतोष की चर्चा थी ।
नेशनल कान्फ्रेंस सदस्य हसनैन मसूदी के बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया. हमने अध्यक्ष रंजना देसाई से कहा कि आप स्वयं सुप्रीम कोर्ट जज रही हैं और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है । उन्होंने स्वीकारा भी । हमने आयोग के सदस्यों से कहा कि यह ड्राफ्ट प्रस्ताव हमें मंजूर नहीं है, परिसीमन 2011 जनगणना के आधार पर होना चाहिए ।
18/02/2021 को परिसीमन आयोग की पहली बैठक में नेशनल कान्फ्रेंस के तीनों सहयोगी सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया ।
6.9 जुलाई के बीच भी परिसीमन आयोग जम्मू व कश्मीर के राजनीतिक दलों से मिलने पहुंचा था । पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने आयोग से मिलने से इन्कार कर दिया । गुपकार गठजोड़ के घटक दलों ने और कांग्रेस ने परिसीमन की जरूरत पर ही सवाल उठा दिया । इन सभी दलों ने इस बात पर बल दिया कि पहले राज्य का दर्जा बहाल किया जाए, फिर चुनाव हो और राज्य के दर्जे तक परिसीमन न किया जाए । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने संबोधन में परिसीमन के बाद चुनाव की बात कही ।
आज भी कोई दल इस शर्त से समझौता करने को तैयार नहीं है । 20 दिसंबर को परिसीमन आयोग ने सहयोगी सदस्यों के साथ बैठक सीट परिसीमन के ड्राफ्ट प्रस्ताव की जानकारी देने और उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए बुलायी थी ।
इनमें नेशनल कान्फ्रेंस सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला का रूख अन्य दलों के मुकाबले जरा लचीला है । वे किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया में केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने के पक्ष में हैं। लेकिन गुपकार गठजोड़ की 21 दिसंबर को हुई बैठक के बाद प्रवक्ता सीपीएम के मुहम्मद युसुफ तारिगामी ने भी 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन के साथ.साथ यह भी कहा कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिएए क्योंकि गुपकार गठजोड़ घटकों ने धारा.
370 हटाने वाले जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन एक्ट, 2019 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है । इस पर सुनवाई शुरू भी नहीं हुई है । परिसीमन आयोग को 2021 समाप्त होने से पहले परिसीमन का काम पूरा कर लेना था । फरवरी, 2021 की बैठक सामान्य नहीं होने के बाद 4 मार्च को आयोग का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया । इस दौरान कोविड.19 के कारण भी आयोग के सदस्यों ने कार्यकाल बढ़ाने का आग्रह सरकार से किया । जब ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार हुआ तो उसके अंतिम रूप देने में राजनीतिक कोरोना लग गया । परिसीमन आयोग को 31/01/2022 तक अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देनी थी । उसकी संभावना अब लग नहीं रही हे । मार्च तक भी हो जाए तो गनीमत है ।