प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता बार.बार देश के लोगों को याद दिलाते है। कि संविधान की धारा.370 हटाए जाने से जम्मू व कश्मीर में समृद्धि का नया युग शुरू हुआ । जबकि यह मुल्क के अन्य हिस्सों की कौन कहे, जम्मू व कश्मीर के मतदाताओं के लिए भी अब कोई मुद्दा नहीं रह गया । लेकिन भाजपा चाहती है कि अवाम इसे याद रखे कि धारा. 370 का हटाया जाना भारतीय संविधान का नया अध्याय है और यह ‘ऐतिहासिक’ कदम है, जिसका श्रेय भाजपा को जाता है ।

हालिया लोकसभा और विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान धारा.370 चर्चा अभियान की कमान स्वयं प्रधानमंत्री ने थाम रखी थी । नरेंद्र मोदी अपने 10 साल के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हैं, धारा.370 समाप्त करके जम्मू व कश्मीर को पूरी तरह भारत के संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत लाना । क्योंकि इसी से कश्मीर में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ ।

लोकसभा चुनाव परिणाम की कश्मीर से मिली रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि कश्मीरी मतदाताओं को धारा.370 हटाए जाने से कोई लेना.देना नहीं है । मुस्लिम बहुल आबादी वाले कश्मीर क्षेत्र में वोटर टर्न आउट पिछले कई दशकों से ज्यादा हुआ, मगर धारा.370 हटाने को भुनाने का प्रयास करनेवाली भाजपा ने पहले ही कदम पीछे कर लिए । भाजपा समर्थित दलों को करारी हार मिली । धारा.370 के अंतर्गत राज्य को प्राप्त विशेष संवैधानिक दर्जा वापसी की लड़ाई के नाम पर वोट मांगनेवाले क्षेत्रीय दलों को भी मतदाताओं ने ठुकरा दिया । हिन्दू बहुल आबादी वाले जम्मू क्षेत्र की दोनों सीटें भाजपा को मिलने में धारा.370 की राजनीति का योगदान नहीं है ।

प्रधानमंत्री हर हाल में धारा.370 को चर्चा में बनाए रखना चाहते हैं । भाजपा को छोड़ किसी भी राजनीतिक दल के लिए धारा.370 कोई मुद्दा नहीं है और अन्य दलों को इस विषय पर चर्चा में कोई रूचि नहीं है । लेकिन प्रधानमंत्री अवाम से चर्चा कराने को ‘प्रतिबद्ध’ हैं ।

25वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास सेक्टर में आयोजित समारोह में 26072024 को प्रधानमंत्री ने देश की जनता को याद दिला दी कि 05 अगस्त को धारा.370 हटाने जाने के पांच साल पूरे होंगे । कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बने कारगिल पर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इन पांच सालों में जम्मू व कश्मीर के हालात बेहतर हुए । उन्होंने ‘अपने प्यारे देशवासियों’ को और उससे भी ज्यादा लड़ाखियों के माध्यम से कश्मीरवासियों को संदेश दिया कि धारा.370 को भूलें नहीं । जम्मू व कश्मीर में विधान सभा चुनाव अभी होने हैं, इसलिए भाजपा को धारा.370 के ही अजेंडे पर यह चुनाव भी लड़ना है । लड़ाखियों को धारा.370 से कोई मतलब नहीं है । लोकसभा चुनाव में लद्दाख की एकमात्र लोकसभा सीट से जीते निर्दलीय उम्मीदवार लद्दाख को राज्य का दर्जा संविधान की 6वीं अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्र के दायरे में लाने और लेह तथा कारगिल जिलों के लिए दो अलग.अलग लोकसभा सीटों की मांग उठाने के वायदे पर जीते हैं । धारा.370 हटाकर जम्मू व कश्मीर को दो यू टी(संघशासित क्षेत्र) में भाजपा सरकार ने विभाजित कर दिया । जम्मू व कश्मीर के साथ.साथ लद्दाख को यू टी का दर्जा मिलने से लद्दाख के लोग जितना खुश नहीं हुए, उससे ज्यादा इस बात से नाखुश हुए कि लद्दाखियों का विधान सभा में प्रतिनिधित्व पहले की तरह जम्मू व कश्मीर विधान सभा के साथ ही रहने दिया । 05 अगस्त, 2019 को जम्मू व कश्मीर पुनर्गठन बिल के संसद से पास होने के बाद धारा.370 समाप्त होने के साथ.साथ जम्मू व कश्मीर का राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया । अब भाजपा को धारा.370 के अलावे राज्य का दर्जा फिर से बहाल किए जाने के वायदे पर विधान सभा चुनाव में इस मुद्दे को आजमाना है ।

प्रधानमंत्री ने कारगिल से यह संदेश दिया कि धारा.370 हटाए जाने का 5वां साल उत्सव के रूप में मनाया जाए । भाजपा शासित राज्य सरकारें इसकी तैयारी में जुट गयीं । 26 जुलाई को प्रधानमंत्री ने लद्दाख में सबको याद दिलाया और तीन दिन बाद जयपुर से उनके ‘मन की बात’ के अनुकूल खबर आयी । राजस्थान की भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों को नया एकेडमिक कैलेंडर 29 जुलाई को जारी किया, जिसमें 05 अगस्त को ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने कहा गया है । राजस्थान शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस नए डिजाईन के शैक्षणिक कैलेंडर में 28 मई को वीर सावरकर जयंती के साथ 05 अगस्त का धारा.370 खात्मा दिवस को भी जोड़ दिया गया है । इसमें तारीखों के हिसाब से और भी कई जयंती दिवस मनाने का प्रस्ताव है, जिससे कहीं.न.कहीं भाजपा के सियासी राजनीति का पोषण होता है । मगर स्कूलों को दिए गए प्रस्ताव में धारा.370 खात्मा दिवस मनाने पर सबसे ज्यदा जोर दिया गया है । भाजपा के लिए ‘ऐतिहासिक’ उपलब्धि का दिन 05 अगस्त चुनावी राजनीतिक मस्तक पर ‘स्वर्ण मुकुट’ की तरह है । इसलिए राजस्थान सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं सरीखा सरकारी स्कूलों को भी यह दिन ‘स्वर्ण मुकुट मस्तक दिवस’ के रूप में मनाने कहा है । दिसंबर, 2023 में भाजपा राजस्थान में सत्ता में लौटी है । इस प्रस्ताव पर विवाद तूल पकड़ रहा है । राजस्थान प्रदेश कांग्रेस यूनिट के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए धारा.370 हटाए जाने की सियासी राजनीति में स्कूलों को घसीटने पर आपत्ति जतायी है । लेकिन उसके बावजूद हो सकता है, अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी धारा.370 खात्मे की पांचवीं बरसी ऐसे ही दिवस के रूप में मनायी जाए ।

स्कूली सिलेबसों में 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को क्लीन चिट देनेवाला फैसला और उसके बाद 22 जनवरी, 2024 को नरेंद्र मोदी द्वारा राम की मूर्ति को स्थापित करने के साथ धारा.370 हटाए जाने का विषय भी जोड़े जाने की चर्चा है । इसको लेकर उठे विवादों के बीच एनसीईआरटी(छब्न्). राष्ट्रीय शैक्षणिक शोध और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक दिनेश प्रसार सकलानी ने सफाई दी है ।

भाजपा नेताओं ने लोकसभा और विधान सभा चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा अयोध्या में राम मंदिर बनना और धारा.370 हटाए जाने का प्रचार लगभग सभी चुनावी सभाओं में किया । इसके पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 से 2024 तक किसी भी सार्वजनिक आयोजन के अपने संबोधन भाषण में धारा.370 का उल्लेख अवश्य किया । गृहमंत्री अमित शाह उनके पदचिन्हों पर चलते रहे ।

कारगिल विजय दिवस के बाद अब स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त आने वाला है । लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को संबोधित करते हुए धारा.370 पांचवीं बरसी जरूर बताएंगे । अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने लोगों से 15 अगस्त को भाषण के लिए सुझाव मांगा है । नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि अवाम उन्हें धारा.370 खात्मे की चर्चा स्वतंत्रता दिवस भाषण में करने कहे । क्योंकि भाजपा के अनुसार 05 अगस्त, 2019 को जम्मू व कश्मीर को स्वायत्तता मिली । भाजपा नेता एक ही जुमले की दुहाई हमेशा हर जगह देते हैं कि धारा.370 हटाए जाने से जम्मू व कश्मीर में शांति और विकास का नया युग शुरू हुआ । सुप्रीम कोर्ट में इस पर चली सुनवाई के दौरान भी भाजपा गठजोड़ सरकार ने यही दलील दीए जिसे चीफ जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने ठुकरा दिया । भारत के प्रधान न्यायाधीश(सीजेआई) डी. वाई. चन्द्रचूड़ ने कहा कि केंद्र सरकार के विचार धारा.370 हटाने के निर्णय को चुनौती देनेवाली याचिकाओं में उठाए गए मुददों से कोई ताल्लुक नहीं रखते, क्योंकि यह मामला पूरी तरह संवैधानिक चुनौती से जुड़ा है । धारा.370 खत्म किए जाने के सरकार के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर 2 साल तक सुप्रीम कोर्ट ने विचार नहीं किया । अगस्त, 2023 में सुनवाई शुरू हुई, जब आम चुनाव करीब आया और जम्मू व कश्मीर में भी विधान सभा चुनाव कराने की आवाजें तेज होने लगी । 11 दिसंबर, 2023 को सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट पीठ ने धारा.370 के क्लाउज(3) का हवाला देते हुए इसे हटाने के केंद्र के फैसले को सही ठहराया, क्योंकि इस क्लाउज में राष्ट्रपति के पास इसे खत्म करने का अधिकार है । लेकिन साथ.साथ जम्मू व कश्मीर का राज्य का दर्जा भी खत्म किए जाने और विधान सभा चुनाव टालने के लिए केंद्र को लताड़ा । 3000902024 तक चुनाव कराने का डेडलाईन सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया । शांति के नए युग का आलम ये है कि जम्मू क्षेत्र में हिंसा पर काबू पाना संभव नहीं हो पा रहा है । सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दलील दी कि तीन दशकों की आतंकी हिंसा के बाद धारा.370 हटाने से जनजीवन सामान्य हुआ है । लेकिन ताजा हालात ये है कि आतंकी हमले कश्मीर की जगह जम्मू में केंद्रित हो गए हैं । यह सेना और सुरक्षा बलों के लिए नयी चिंता का विषय है । 2500202022 को 4 हिजबुल मुजाहिदीन समर्थकों को हथगोले और एके.47 गोलियों के साथ पहली बार पकड़ा गया । उसके बाद से आतंकी हमले जारी है । लोकसभा चुनाव में प्रतिष्ठित बारामुला सीट से जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और धारा.370 वापसी के लिए बने गुपकार दलीय गठजोड़ के प्रमुख घटक नेशनल कान्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला 2 लाख से ज्यादा वोट से हारे । उनको हरानेवाला इंजीनियर अब्दुल राशिद 2017 आतंकी फंडिंग मामले में यूएपीए(गैर कानूनी गतिविधियां रोक कानून) के अंतर्गत तिहाड़ जेल में बंद है । जेल से ही चुनाव लड़कर जीता और कड़ी सुरक्षा में लोकसभा सदस्यता की शपथ लेने के बाद से जेल में ही ही है । कश्मीर की जनता के रुझान का धारा.370 हटाये जाने के बाद का सेमी फाइनल है ये । एक अन्य प्रतिबंधित आतंकी गुट ‘जमात.ए.इस्लामी’ चुनाव में हिस्सा लेने को उत्साहित है । केंद्र से वार्ता जारी है, इस गुट को यूएपीए प्रतिबंध हटाने का इंतजार है । अभी तक कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है, जो पीओके कहलाता है । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धारा.370 हटाने के बाद दावा किया कि जवाहर लाल नेहरू द्वारा की गयी भयंकर भूल’ को 72 साल बाद सुधारा गया । 2024 लोकसभा चुनाव ने कश्मीर का दोबारा धर्म के आधार पर विभाजन कर दिया । इसलिए भाजपा ने कश्मीर क्षेत्र में अपने उम्मीदवार खड़े नहीं किए । जम्मू से भाजपा जीती । जम्मू व कश्मीर से अलग किए गए लद्दाख में मुसलमान उम्मीदवार खड़े करने की मांग उठी । लेह जिले से बौद्ध उम्मीदवार प्रायः जीतते रहे हैं, जिनकी आबादी ज्यादा है । इस बार मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्र कारगिल से खड़े हुए निर्दलीय हाजी हनीफा जान ने भाजपा के ताशी ग्यालसन को हराया । जलवायु एक्टिविस्ट, सोनम वांगचुक ने लद्दाखियों के अलग राज्य और दो लोकसभा सीटों की मांग को लेकर फिर धमकी दी है कि जल्द ठोस वार्ता करें, वरना 15 अगस्त तक फिर अनशन शुरू किया जाएगा । भारी जनसमर्थन के साथ वांगचुक ने मार्च. अप्रैल में 66 दिनों का अनशन किया, जो लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 10 मई को स्थगित कर दिया था ।