भारत और लगभग विश्व के सबसे पुराने पेचीदा नगा झंझट के अंतिम समाधान की ठोस पहल चल रही है । केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार अक्षय कुमार मिश्र की सभी नगा गुटों समेत नगा सिविल सोसायटी और नगालैंड सरकार से भी लगातार बातचीत जारी है । इतना गंभीर प्रयास 1997 के बाद से पहली बार किया जा रहा है । 1997 में ही सबसे मजबूत और संगठित नेशनल सोसलिट काउंसिल ऑफ नगालैंड(एनएससीएन. आइसाक मुइवा आईएम गुट) से केंद्र का संघर्ष विराम समझौता हुआ और अभी तक वार्ताओं के सारे दौर बेनतीजा साबित हुए । 2015 में इस नगा गुट से एक ष्ठफ्रेमवर्क डील’ हुआ और उसके बाद भी वार्ता जारी रही, मगर कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला ।

केंद्र के वार्ताकार अक्षय मिश्र इस हफ्ते एनएससीएन(आईएम) के दीमापुर के निकट स्थित कैंप हेब्रन हेडक्वार्टर में इसके महासचिवए टी. मुइवा समेत अन्य विद्रोही नगा संगठनों से भी मिले । यह पहला अवसर था, जब केंद्र के किसी वार्ताकार ने एनएससीएन(आईएम) के भूमिगत अड्डे में जाकर सभी विद्रोही नेताओं से मुलाकात की । मिश्र ने मुलाकातों का सिलसिला जारी रखा हुआ है और इससे अभी नगा गुट आशावान हैं । सबसे ज्यादा हार्डलाइनर एनएससीएन (आईएम) की स्वयंभू समानान्तर भूमिगत फेडरल गवर्नमेंट ऑफ नगालिम के होम किलोन्सेर(गृह मंत्री) एम. डैनियल लोथा ने नगालैंड की राजधानी कोहिमा में 29.सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्र के वार्ताकार से 23 अप्रील को तीसरी बातचीत के बाद कहा - ‘अक्षय मिश्र ने आश्वस्त किया कि वे इस झंझट का अंतिम हल निकालने का एजेंडा लेकर आए हैं ।’ एनएससीएन(आईएम) के एक नेता ने 19 अप्रील को हेब्रन हेडक्वार्टर में बातचीत के बाद कहा - ‘ए. के. मिश्र के साथ यह अनौपचारिक मुलाकात इस मायने में सार्थक और महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहली बार केंद्र से किसी वार्ताकार ने हमारे हेडक्वार्टर में आकर हमलोगों से बातचीत की है ।’ गौरतलब है कि एनएससीएन(आईएम) भारत सरकार के समानान्तर ‘आजाद संप्रभु’ नगालिम सरकार का स्वयंभू सर्वेसर्वा खुद को मानता है । अभी तक की वार्ता के बेनतीजा होने का असली कारण इस गुट का यही अड़ियल रवैया है । एनएससीएन(आईएम) सुप्रीमो और स्वयंभू नगालिम ‘प्रधानमंत्री’ मुइवा ‘अलग संविधान तथा अलग झंडा’ वाले मुद्दे पर समझौता करने को तैयार नहीं हुआ । नगा नेशनल पौलिटिकल ग्रुप(एनएनपीजी) के बैनर तले आनेवाले सात नगा गुट इस अड़ंगा वाले विंदु पर लचीला रवैया अपनाने के पक्ष में है । लेकिन यह मंच एनएससीएन(आईएम) की सहमति के बगैर समझौता नहीं चाहता । एनएनपीजी गुटों के साथ भी केंद्र का संघर्षविराम समझौता चल रहा है । अक्षय मिश्र की हेब्रन मुलाकात के अगले दिन केंद्र ने एनएनपीजी के तीन नगा गुटों के साथ संघर्षविराम की अवधि एक साल के लिए बढ़ायी । यह भी अच्छा संकेत है कि केंद्र के वार्ताकार ने सभी नगा गुटों से एक साथ मुलाकात की ।

इंटेलिजेंस ब्यूरो(आईबी) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर अक्षय मिश्र नगा वार्ताकार बनाए जाने के बाद 15/10/2021 को एनएनपीजी के सातों गुटों से पहली बार दिल्ली में मिले । उसकी प्रतिक्रिया में एनएससीएन(आईएम) अलग झंडा और संविधान वाले शर्त से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ, जो दीमापुर से जारी उसके वक्तव्य से जाहिर है. ‘यह नगा संघर्ष और पहचान का प्रतीक है ।’

अक्षय मिश्र से पहले के वार्ताकार आर. एन. रवि भी आईबी स्पेशल डायरेक्टर पद से रिटायर हुए । आर. एन. रवि उसके बाद नगालैंड के राज्यपाल बनाए गए । राज्यपाल के रूप में आर. एन. रवि ने कथित 31/10/2019 तक हर साल में अंतिम समाधान निकालने की डेडलाइन तय कर दी, चाहे एनएससीएन(आईएम) की और नगालैंड सरकार की भी सहमति हो या नहीं । आर. एन. रवि को नगालैंड से हटाकर तमिलनाडु भेज दिया गया और अक्षय मिश्र ने वार्ता की कमान संभाली । कहा जाता है कि आर. एन. रवि ने आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट(आईच) के तहत सेना की चौकसी बढ़ाने पर एनएसएन(आईएम) ने नाराजगी जताकर वार्ता बंद कर दी और संघर्षविराम से भी मुकरने की धमकी दी। इसी आधार पर एनएसएन के दबाव में आर. एन. रवि को हटाया गया। नगा समाधान के आर. एन. रवि के तरीके से नगालैंड सरकार सहमत नहीं थी।

अभी अच्छे माहौल में निर्णायक दौर की मुलाकातें अक्षय मिश्र ने शुरू की है । क्योंकि 31 मार्च को केंद्र सरकार ने असम, नगालैंड और मणिपुर के कई जिलों से आफ्स्पा हटा लिया । असम और मेघालय के 50 साल पुराने सीमा विवाद सुलझाने के अवसर पर यह एलान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि समूचे पूर्वोत्तर को ‘झंझट मुक्त’ क्षेत्र बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है । पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्री काफी समय से आफ्स्पा हटाने की मांग कर रहे थे । सबसे ज्यादा नगालैंड, मणिपुर और असम से यह मांग की जा रही थी । नगा झंझट मुख्य रूप से इन्हीं तीनों राज्यों से जुड़ा है ।

नगा सुप्रीमो टी. मुइवा का जन्मस्थल मणिपुर और झंझट स्थल नगालैंड है । नगालैंड और मणिपुर में नगा लोगों में केंद्रीय सुरक्षा बलों के प्रति काफी रोक था जो आफ्स्पा के अंतर्गत तैनात किए गए थे । 04/12/2021 को नगालैंड के मोन जिले में उग्रवादी होने के संदेह में असम राइफल्स के जवानों द्वारा की गयी फायरिंग में 6 कोयला खान मजूदरों के मारे जाने पर संसद से लेकर नगालैंड विधान सभा तक में हंगामा मचा । नगालैंड मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार से आफ्स्पा हटाने की मांग की । सैनिकों पर ज्यादती के आरोप लगे ।

अक्षय मिश्र नगा आदिवासी गुटों का सबसे प्रभावशाली जनमंच ‘नगा हो हो’ के प्रतिनिधियों से 23 अप्रील को मिले । नगा हो हो मंच में अरूणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और नगालैंड के सदस्य हैं । नगा हो हो अध्यक्ष एच. के. झिमोमी और महासचिव के. एल. एनडांग के नेतृत्व में छह सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल मिश्र से मिला । हो हो की ओर से जारी वक्तव्य के अनुसार यह समाधान ‘सम्मानजनक और सभी नगाओं के स्वीकारने योग्य होगा ।’

नगा झंझट से जुड़े सभी पक्षों से मिलने के क्रम में नगा वार्ताकार ने 24 अप्रील को नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो के नेतृत्व में गठित नगा राजनीतिक मुद्दा पर राज्य सरकार संचालन समिति से मुलाकात की । उसके बाद 23 अप्रील को कोहिमा स्थित छूमोकेडिमा पुलिस काम्प्लेक्स में एनएससीएन(आईएम) नेता मुइवा और अक्षय मिश्र की वन. टु.वन मुलाकात हुई । इसी जगह 23 अप्रील को मिश्र ने नगा प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से बंद कमरे में बातचीत की ।

अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि नगा गुटों से मुलाकातों में ‘अलग संविधान और अलग झंडे’ वाला मुद्दा उठा है या नहीं । अक्षय मिश्र ने इस संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। नगा नेताओं ने भी इसका जिक्र नहीं किया है । हार्डलाइनर एनएससीएन(आईएम) के भी अबकी नरम रवैया अपनाने के आसार लग रहे हैं ।

मुख्यमंत्री नेफियू रियो उप मुख्यमंत्री वाई. पेट्टन और नगालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री टी. आर. जेलियांगए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से गत हफ्ते दिल्ली में मिले । नगालैंड के इन नेताओं ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मिलकर 2019 से पटरी से उतरी नगा वार्ता को पुनः पटरी पर लाने का आग्रह किया । उसके बाद से नगा वार्ताकार अक्षय मिश्र ने वार्ताओं का मैराथन दौर शुरू किया । उप मुख्यमंत्री वाई. पेट्टन भाजपा कोटे के हैं और काफी आश्वस्त हैं । संचालन समिति के सदस्य के रूप में वे भी अक्षय मिश्र से मिले । नगा संकट के समाधान के लिए नगालैंड में एकीकृत डेमोक्फ़्रेटिक एलायंस ऑफ नगालैंड(डीएएन) सरकार चल रही है, जहां की 60.सदस्यीय विधान सभा में विपक्ष है ही नहीं । गत फरवरी.मार्च में मणिपुर विधान सभा चुनाव भाजपा मुख्यमंत्री एन. वीरेन सिंह ने दूसरी बार नगा समेत तमाम उग्रवादी झंझट के हल के वायदे पर जीता है ।