लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ने के लिए गैर.भाजपा दलों का संयुक्त मंच छक्प(इंडिया) नाम भाजपा नेताओं को खटक रहा है । यह गठजोड़ ‘छक्प’ का अर्थ ‘भारत’ नहीं है । वास्तव में यह विपक्षी दलों के एकजुटता मंच इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस(प्छण्क्ण्ण) का संक्षिप्त नाम है, ताकि बोलचाल में आसानी हो । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत लगभग सभी वरिष्ठ भाजपा नेताओं को विपक्षी दलों द्वारा इंडिया(प्छक्प) नाम का चुनावी इस्तेमाल गले के नीचे नहीं उतर रहा है । केंद्र की भाजपा गठजोड़ सरकार नहीं चाहती कि सरकार नियंत्रित प्रसारण तंत्र आकाशवाणी और दूरदर्शन किसी बुलेटिन में विपक्षी दलों से जुड़े समाचार में का इस्तेमाल किया जाए । जो पाठक आकाशवाणी और दूरदर्शन के बुलेटिन सुनते होंगे, उन्होंने गौर किया होगा कि विपक्षी दलों के इस मंच को समाचार में ‘इंडिया’ की जगह ‘आई एन डी ए’ कहकर संबोधित किया जाता है । इंडिया गठजोड़ की किसी बैठक की खबर को प्रमुखता न मिलना तो जानी हुई बात है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी भाषणों में ‘इंडिया’ गठजोड़ को ‘घमंडिया’ कहकर मतदाताओं को समझाते हैं कि विपक्षी दल ‘इंडिया’ का प्रतिनिधित्व नहीं करते । वास्तव में उनका निशाना कांग्रेस पर है, क्योंकि कांग्रेस की ही पहल पर सभी गैर.भाजपा दलों को एक मंच पर लाने की कवायद शुरू हुई है । इसके दो प्रमुख कारक है । ‘इंडिया’ गठजोड़ संक्षिप्तिकरण का पाला दोनों अक्षर च और छ का मतलब है. ‘इंडियन नेशनल’ । कांग्रेस का चुनाव आयोग से पंजीकरण प्छब(इंडियन नेशनल कांग्रेस) के नाम से है । दूसरा ये है कि अभी पांच राज्यों में हो रहे विधान सभा चुनावों में ‘इंडिया’ गठजोड़ का प्रमुख दल कांग्रेस से भाजपा का सीधा मुकाबला है । मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है । तेलंगाना में सत्तारूढ़ ठै(भारत राष्ट्र समिति) सुप्रीमो मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव ने प्पछण्क्ष्णण मंच से दूरी बना रखी है । बताते चलें कि इंडिया गठजोड़ बनाने के प्रयासों से कुछ दिन पहले ही के. चन्द्रशेखर राव ने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति(ज्रै) का नाम बदलकर चुनाव आयोग से ‘भारत’ राष्ट्र समिति के रूप में मान्यता प्राप्त की है । राव ‘इंडिया’ के चक्कर में नहीं पड़े हैं । मिजोरम में भी सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट के खिलाफ अपने.अपने स्तर से कांग्रेस और भाजपा जोर. आजमाईश में जुटे हैं । मिजोरम समेत उत्तर पूर्व की कोई क्षेत्रीय पार्टी उनके हिसाब से ‘मेनलैंड इंडिया’ के इस गैर.भाजपा गठजोड़ में शामिल नहीं है ।
‘भारत’ और ‘इंडिया’ के इसी चुनावी छीनाझपटी में एक नया विवाद छब्त्(नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड टेनिंग) के स्कूल पाठ्यपुस्तकों को लेकर जुड़ गया । छब्त् के सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तकों में से ‘इंडिया’ हटाकर उसकी जगह ‘भारत’ करने के प्रस्तावों को लेकर उठे विवाद से इस झमेले ने पूरी तरह राजनीतिक रंग पकड़ लिया। संयोग कुछ ऐसा रहा कि ‘इंडिया’ को ‘भारत’ करने पर विचार करने के लिए गठित कमिटी ने विगत चार महीने पहले अपनी रिपोर्ट छब्त् को सौंपी और लगभग उसी समय से छब्न गठजोड़ दलों की विभिन्न स्थानों पर बैठकें हो रही हैं । 17.18 जुलाई को बेंगलुरु में सभी दल जुटे और हालिया बैठक 31ध08.01 सितंबर को मुंबई में हुई है । सितंबर से ही छब्न के स्कूल सिलेबस में ‘इंडिया’ को ‘भारत’ करने को लेकर अटकलबाजियां विवाद तूल पकड़े हुए है । अक्टूबर आते.आते यह चर्चा गर्म हो गयी कि सरकार ने ‘इंडिया’ के अलावे और भी कई तथ्य हटाने का फैसला लिया है । सिर्फ लागू होने भर की देर वाली बात सामने आने पर सारे विपक्षी दल और गैर.भाजपा शासित राज्य सरकारों ने इसके खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी । आखिरकार छब्न द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमिटी के अध्यक्ष सी. एल. आइस्साक(ब रू प्व) को संवाददाता सम्मेलन बुलाकर सफाई देनी पड़ी । 24 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ‘भारत’ (मंत्र) देने के लिए उसी अवसर को चुना, जो आरएसएस का स्थापना दिवस भी है । अपने संगठन के मुख्यालय नागपुर में आयोजित विजयादशमी समारोह के दिन मोहन भागवत ने ‘सांस्कृतिक मार्क्सवाद ‘की निंदा के बहाने भाजपा की भारत सरकार के इसी प्रस्ताव पर फोकस किया । 25 अक्टूबर को छब्न कमिटी के अध्यक्ष सी. एल. आइस्साक ने दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में स्पष्टीकरण दिया कि ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखने की सिफारिश की गयी है और हिंदू योद्धाओं की जीत की कहनियां भी शामिल करने का प्रस्ताव है, लेकिन ‘भारत’ नाम पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है । मोहन भागवत ने विजयादशमी के दिन अपने आरएसएस संबोधन में जोर देकर कहा कि हमारा देश वर्षों से ‘भारत’ के रूप में जाना जाता रहा है ।
उबानेवाला बहुप्रचारित ळ.20(ग्रुप.20) शिखर सम्मेलन आयोजनों के समापन के समय 09 सितंबर को डिनर के लिए राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए निमंत्रण में भी इंडिया.भारत को लेकर विवार खबरों में आया । निमंत्रण में ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ लिखा गया था । सभी राजनीतिक दलों ने जबरन ‘भारत’ थोपे जाने की इस नीति की आलोचना की ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च(प्ब्भ) के सदस्य सी. एल. आइस्साक लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं और आरएसएस संचालित भारतीय विचारकेन्द्रम के अभी अध्यक्ष हैं । ‘इंडिया’ को ‘भारत’ करने की सिफारिश वाली कमिटी के अन्य सदस्यों का भी आरएसएस से लगाव है । मालूम हो कि भारत के ज्यादातर इतिहासकार कमोवेश वामपंथ से जुड़े या प्रभावित रहे हैं । इसलिए ‘इंडिया’ को ‘भारत’ करने के बहाने भाजपा के आरएसएस संचालकों ने इतिहास को अपने हिसाब से बदलने के लिए ‘संस्कृति’ की दुहाई देनी शुरू कर दी है । स्कूल सिलेबस से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी प्रसंग भी हटाए जाने की चर्चा है । कांग्रेस और वामदलों ने इसे आड़े हाथों लिया है । एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता संस्कृति के मद्देनजर विपक्षी दलों के गठजोड़ के प्छक्य नामकरण पर एतराज है, दूसरी ओर वे ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ करने के झंडे तले देश के इतिहास और संस्कृति पर आरएसएस का हिन्दुत्व एजेंडा थोपने पर तुले हैं । 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए प्रधानमंत्री को न्योता देने जब गत हफ्ते कुछ साधू.संत पहुंचे तो नरेंद्र मोदी ने कहा. ‘किसी भी अन्य आयोजन से ज्यादा मैं इस न्योते के लिए गैरवान्वित महसूस कर रहा हूँ । इसका मतलब भाजपा अपना पुराना राममंदिर चुनावी कार्ड को जिंदा रखते हुए नया हिन्दू सांस्कृतिक आरएसएस बाद स्थापित करना चाहती है । मोहन भागवत के भाषण से लगा मानों उन्हें हिन्दुत्व विचारकों से ज्यादा मार्क्स का अध्ययन है । उन्होंने कहा कि ‘सांस्कृतिक मार्क्सवाद’ का प्रचार करनेवाले ने मार्क्स को भुला दिया, मार्क्स का ‘कार्यवाद’ और ‘अर्थव्यवस्थावाद , इन माक्सवादियों से भिन्न था ।
छबन्त् कमिटी के एक सदस्य पुरातात्वविद वसंत शिंदे ने प्रस्ताव भेजने की पुष्टि करते हुए ‘विष्णु पुराण’ का हवाला दिया और कहा कि हर हाल में देश का नाम ‘भारत’ ही उचित है, जो सिफारिश सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से भेजा है ।
केरल में सत्तारूढ़ ब्ब्ड के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने संविधान की धारा.1 का हवाला देते हुए कहा कि केरल के स्कूल सिलेबस में देश का नाम इंडिया ही रहेगा जैसा संविधान में है । कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी. शिवकुमार ने. छब्त्न् के प्रस्ताव को ‘गलत’ बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने दवाब डालकर ऐसा प्रस्ताव तैयार करवाया है । सीपीएम और कांग्रेस ने भारत.इंडिया’ विवाद के अलावे डार्विन का सिद्धांत, मुगल इतिहास और महात्मा गांधी का जीवन, कार्यकाल तथा हत्या प्रसंग कथित रूप से हटाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है ।