पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को ‘निर्मूल’ करने की भाजपा रथयात्रा रैली का पहिया फंस गया है । पश्चिम बंगाल भाजपा यूनिट ने रथयात्रा रैली की जोर-शोर से तैयारी तभी से शुरू कर दी, जब पांच राज्यों में हालिया चुनाव प्रचार अभियान पूरे उफार पर था । भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ही सभी रैलियों में पार्टी की भारी जीत सुनिश्चित बता रहे थे । लेकिन चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले ही तृणमूल सुप्रीमो दीदी(ममता बनर्जी) राज में भाजपा की रथयात्रा रैली का चक्का फंसने लगा । राज्य सरकार ने रैली की इजाजत नहीं दी । भाजपा प्रदेश यूनिट कलकता हाईकोर्ट गयी । हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को रैली की इजाजत का आदेश देने से इन्कार कर दिया तो भाजपा नेता उसके खिलाफ खंडपीठ के पास गए । हाईकोर्ट खंडपीठ के जजों ने न तो रोक सही ठहराया, न ही राज्य सरकार को इजाजत देने कहा, आपसी बातचीत से रैली झमेला सुलझाने का निर्देश सरकार को दिया । इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रदेश भाजपा नेता अपने हलकानवाले उत्तर बंगाल के इलाकों में प्रचार करते रहे कि पांच राज्यों में हो रहे चुनावो के परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बंगाल में ताबड़तोड़ रैलियां करेंगे । माहौल जमाय रखने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष, राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय सब के सब जुट रहे । चुनाव परिणामों ने रथयात्रा का पहिया हिला दिया ।
राज्य सरकार की रोक और उसके खिलाफ कलकता हाईकोर्ट जाना प्रदेश भाजपा समेत राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए कोई नयी बात नहीं है । 2014 में भाजपा गठजोड़ के प्रचंड बहुमत से सत्ता में आने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही अमित शाह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को ‘निर्मूल’ करने का अभियान चला रहे हैं । नवंबर, 2014 में अमित शाह ने इसी इराद से सी आर एवेन्यू में ही रैलो आयोजित करना चाहा, जहां से ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल से वाममोर्चा शासन को निर्मूल करने का अभियान शुरू किया था । तृणमूल कांग्रेस सरकार ने वहां रैली करने से रोका तो अमित शाह ने कलकता हाईकोर्ट से इजाजत लेकर दिसंबर के पहले सप्ताह में सी आर एवेन्यू में ही रैली की और तृणमूल को ‘निर्मूल’ करने का नारा भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच दिया । जनवरी, 2017 में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का कोलकाता पुलिस ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रैली करने से रोका तो वे उसके खिलाफ हाईकोर्ट गए और इजाजत लेकर उन्होंने भी अमित शाह के अभियान को ताकत दी ।
लेकिन अभी की प्रस्तावित रथयात्रा रैली के पहियों को कलकता हाईकोर्ट में लटकने और भाजपा नेताओं के खिलाफ राज्य सरकार के व्यापक धरपकड़ अभियान से ज्यादा विधान सभा चुनाव परिणामों ने फंसाया है । तृणमूल को ‘निर्मूल’ करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का अपना ही मूल कमजोर पड़ गया है । हार के कारणों की समीक्षा और अगले साल होनेवाले लोकसभा चुनाव की कार्यनीति पर विचार करने के लिए पार्टी मुख्यालय दिल्ली में 13 दिसंबर को आयोजित बैठक में अमित शाह ने तृणमूल का नाम नहीं लिया । रैलो की कहीं कोई चर्चा नहीं । प्रधानमंत्री की सिलीगुड़ी में रैली की भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि की दिल्ली से कोलकाता तक कोई सूचना नहीं थी । विस्तृत विचार-विमर्श भी अगले महीने के लिए टाल दिया गया । लेकिन 13 दिसंबर को बंगाल भाजपा तृणमूल कांग्रेस सरकार से रथयात्रा रैली को लेकर कलकता हाईकोर्ट में उलझी रही । अधिकांश भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को तो पुलिस ने 7-8 दिसंबर को ही कूचबेहार जिले में रैली आयोजित करने के दौरान गिरफ्तार कर लिया था । हाईकोर्ट खंडपीठ के आदेश पर प्रदेश भाजपा ने अपने तीन प्रतिनिधियों का नाम दिया । एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने 11 दिसंबर को हाईकोट को बताया तीन से में दो भाजपा प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं । हाईकोर्ट ने सरकार की दलील खारिज करके 13 दिसंबर को बैठक करने और 14 को उसकी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया । लेकिन इससे यह क्लियर नहीं हुआ कि वैसी रथयात्रा रैली होगी या नहीं, जिसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह संबोधित करेंगे । आपराधिक मामले के पहले आरोपी तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए मुकुल रॉय हैं, जो अभी भाजपा चुनाव प्रबंधन कमिटी के संयोजक हैं ।
उधर 11 दिसंबर को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी चुनाव परिणाम पर भाजपा को अपना ‘शत्रु’ बताकर उत्साहित हो रही थीं ।
रथयात्रा रैली मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विश्वनाथ सोमाद्देर और जस्टिस अरिंदम मुखर्जी की खंडपीठ सात दिसंबर को जब राज्य सरकार को निर्देश दे रही थी, उसी दिन कूचबेहार में रैली में भाग लेनेवाले भाजपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो रही थी । 11 दिसंबर को विधान सभा चुनाव परिणाम और हाईकोर्ट में सरकार के सख्त रवैए से खिन्न उत्तर बंगाल क्षेत्र के भाजपा संयोजक रतीन्द्र बोस हताशा व्यक्त कर रहे थे । उन्होंने कहा कि उधर मामला हाईकोर्ट में है और इधर जलपाईगुड़ी, कूचबेहार, दक्षिण दिनाजपुर जिलों में सैकड़ों कार्यकर्ताओं तथा पार्टी नेताओं को आपराधिक मामलों में फंसाकर जेल में डाल दिया गया है, ऐसे में क्या रैली होगी । कई कार्यकर्ता घर छोड़कर भागे हुए हैं । चुनाव परिणाम आने से पहले अमित शाह का भो नाम उछाला जा रहा था, और परिणाम आने के बाद सिर्फ प्रधानमंत्री के सिलीगुड़ी में रैली को संबोधित करने की बात कही गयी । तीन बिंदुओं से शुरू होनेवाली रथयात्रा रैली चुनाव परिणाम आने के बाद सिर्फ एक बिंदु सिलीगुड़ी पर केंद्रित रह गयी है । दार्जीलिंग लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री एस. एस. अहलूवालिया जीते हुए हैं ।
नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से कई बार बंगाल में परिवर्तन रैली कर चुके हैं । 2016 में विधान सभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के 2011 से ज्यादा बड़ी जीत हासिल करने के बाद वे नरम पड़ गए । अभी प्रदेश भाजपा नेता ‘परिवर्तन’ पर जो दे रहे हैं ।
हालिया चुनाव परिणामों का आलम ये रहा कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार चौथी बार सत्ता में नहीं आ पायी । तेलंगाना में मतदाता परिवर्तन नहीं चाहते थे । अमित शाह और प्रधानमंत्री ने वहां काफी मिहनत की । क्योंकि भाजपा गठजोड़ से अलग होकर तेलुगू देसम पार्टी प्रमुख आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने कांग्रेस के साथ मिलकर ‘महाकुटमी’ बनाया । तेलंगाना में दो बार से विधायक रहे भाजपा के जी. किशन रेड्डी चुनाव हार गए । तेलंगाना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. लक्ष्मण हार गए । एकमात्र उम्मीदवार जीते । मिजोरम में भाजपा मात्र एक सीट जीती । तेलुगू देसम पार्टी तेलंगाना में मात्र दो सीट जीत पायी । राजस्थान में हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन की प्रधानमंत्री की अपील काम नहीं आयी ।
तृणमूल को ‘निर्मूल’ करने की रथयात्रा के बजाए भाजपा को लोकसभा चुनाव के लिए यात्रा का रूट बदलना होगा । तेलंगाना में दूसरी बार मुख्यमंत्री बननेवाले तेलंगाना राष्ट्र समिति प्रमुख के. चन्द्रशेखर राव का कांग्रेस जितना बैर भाजपा से नहीं है । उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका की बात कही है । चन्द्रबाबू नायडू महागठजोड़ बनाने के बाद कोलकाता आकर ममता बनर्जी से मिले । दीदी कांग्रेस से नाराज नहीं है । दीदी ने कभी तेलंगाना राज्य आंदोलन में रूचि नहीं ली, जिसका कारण था अपना गोरखालैंड । भाजपा के शीर्ष नेताओं को तृणमूल को ‘निर्मूल’ करने के अभियान की सार्थकता पर नए सिरे से सोचना पड़ेगा । अभी की रैली में पहले जैसी ठनक तो लानी मुश्किल है ।