प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(दीदी) ने ठीक उस समय रद्द किया, जब उन्हें पता चला कि भाजपा ने चुनावी हिंसा में मारे गए अपने 50 कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया है । प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री के शपथग्रहण समारोह में 30 मई को शरीक होना पहले से तय था । लेकिन ठीक एक दिन पहले ज्योंही दीदी को जानकारी मिली कि भाजपा ने चुनावी हिंसा के शिकार हुए 50 भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को भी शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है कि तत्काल मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया ।

गैर-कांग्रेसी नरेंद्र मोदी ने दोबारा लगातार पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बनने का नया रिकार्ड कायम किया है । इसके पहले सिर्फ प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी का ऐसा रिकार्ड है, जो दोनों लगातार दो बार पूर्ण बहुमत से प्रधानमंत्री बने । नरेंद्र मोदी का नाम इस बार मनमोहन सिंह के साथ नहीं जुड़ता, क्योंकि वे गठजोड़ घटकों से समर्थन जुटाकर लगातार दो बार प्रधानमंत्री बने ।

नरेंद्र मोदी के इस प्रचंड जनादेश के इस रिकार्ड में सबसे पहले नंबर पर है पश्चिम बंगाल, जहां से इतनी लोकसभा सीटें भाजपा ने पहली बार जीती और हिंसा से सराबोर चुनावी माहौल में 18 सीटों पर कब्जा जमाया । तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो दीदी के 2011 में सत्ता में आने के बाद से पश्चिम बंगाल में हिंसा और चुनाव एक-दूसरे के पर्याय बने हुए हैं । पंचायत से लेकर नगर निगम तक कोई भी चुनाव हिंसा से अछूता नहीं रहा है । हर चुनावी हिंसा का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गया । उन चुनावों में दीदी ने भाजपा समेत अपने तमाम राजनीतिक विरोधियों कांग्रेस, वामदल सबको जिम्मेदार ठहराया । दीदी के सत्ता में रहते हुए यह दूसरा लोकसभा चुनाव है । 2014 के मुकाबले 2019 में पश्चिम बंगाल में रिकार्ड हिंसा का तांडव मचा । इस लोकसभा चुनाव में पहली बार मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच बिल्कुल सीधा था । चुनाव प्रचार शुरू होने से लेकर मतदान और मतों की गिनती तथा परिणाम घोषित होने तक तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें होती रही । भाजपा राज्य घोषित हिंसा का आरोप लगाकर तृणमूल कांग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराती रही है । शपथग्रहण समारोह के समय इस आरोप-प्रत्यारोप ने दूसरा राजनीतिक रंग ले लिया । भाजपा ने यह कहकर अपने 50 मृतक कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को प्रधानमंत्री के शपथग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया कि ये सब कथित रूप से राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए । भाजपा ने दावा किया कि इन कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए किसी भी राजनीतिक हिंसा से इन्कार किया । उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शपथग्रहण समारोह की ‘गरिमा गिरा दी’ और इसका इस्तेमाल राजनीतिक मकसद साधने के अवसर के रूप में किया ।

30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शपथग्रहण समारोह था और 29 मई को ममता बनर्जी ने ट्वीटर पर पोस्ट किया - ‘मैं मीडिया रिपोर्ट देख रही हूँ, जिसमें भाजपा अपने 50 कार्यकर्ताओं के राजनीतिक हिंसा में मारे जाने का दावा कर रही है, जो पूरी तरह गलत है । शपथग्रहण समारोह लोकतंत्र मनाने का पवित्र अवसर है, किसी को भी इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर इसकी गरिमा कम नहीं करनी चाहिए । मुझे कृपया माफ करें नरेंद्र मोदी जी । इन रिपोर्टों ने मुझे शपथग्रहण समारोह में शामिल न होने को बाध्य किया । हमने दो-तीन मुख्यमंत्रियों से बात भी कर ली थी और तय किया था कि इकट्ठे हम सांविधानिक शिष्टाचार के इस औपचारिक कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश करेंगे’ । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह नहीं लिखा कि उन 54 भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारजनों को शपथग्रहण समारोह में बुलाए जाने के विरोध में वे ‘आई एम सॉरी नरेंद्र मोदी’ कह रही हैं । दोदी ने यह भी स्पष्ट नहीं बताया कि वे दो-तीन अन्य मुख्यमंत्री कौन-कौन थे, जिनके साथ शपथग्रहण समारोह में शामिल होने का उनका कार्यक्रम था । दीदी ने अभी तक पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को स्वीकार नहीं किया है । नरेंद्र मोदी और भाजपा के प्रति उनकी खुंदक शपथग्रहण के बाद भी निकल रही है । हिंसा का माहौल खतम नहीं हुआ । 30 मई को दीदी ने नैहाटो में रैली की, जहां उन किसान परिवारों के लोग धरने पर बैठे थे जिन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं के कथित अत्याचार के कारण अपने घरों से भागना पड़ा । दीदी अपनी रैली के दौरान ‘जय श्रीराम’ नारे से भड़क उठी । ‘जय श्रीराम’ बोलनेवालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गयी, लाठीचार्ज हुआ । इतना सब देखने-सुनने के बाद यह निश्चय करना तो कठिन है कि नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में ममता बनर्जी के शामिल न होने के पीछे भाजपा द्वारा अपने हिंसा के शिकार कार्यकर्ताओं के सगे-संबंधियों को बुलाना ही एकमात्र कारण था, या और भी कुछ । क्योंकि उसके बाद दीदी ने अपना तथा गैर-भाजपा महागठजोड़ पार्टियों का पुराना राग अलापते हुए ईवीएम छेड़छाड़ के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया, क्योंकि भाजपा उसी से जीती है ।

लेकिन ममता बनर्जी के अलावे कई गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों ने भी किसी-न-किसी बहाने नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह से खुद को अलग रखा । कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों में से पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह, मध्य प्रदेश के कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल का 30 मई का ‘अति व्यस्त’ कार्यक्रम रहा । कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी दिल्ली पहुंचे । वे स्वयं जद(सेक्युलर) के हैं, मगर कांग्रेस से गठजोड़ है । गत वर्ष छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने जितनी करारी हार देकर भाजपा के तीन बार के मुख्यमंत्री रमनसिंह को अपदस्थ किया, उतनी ही कड़ी शिकस्त लोकसभा में भाजपा ने कांग्रेस को दी ।

प्रधानमंत्री पद का शपथग्रहण संघीय व्यवस्था में राष्ट्रीय जनादेश का प्रतीक है । इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना मतदाताओं को ठीक नहीं लगा । ऐसा शायद पहलीबार हुआ है । बीजू जनता दल के नवीन पटनायक ने पांचवीं बार लगातार ओडिशा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली । उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों गठजोड़ों से खुद को अलग रखा हुआ है । नवीन पटनायक ने भी नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने से परहेज किया । ओडिशा में भाजपा ने नवीन पटनायक को शिकस्त दी है ।

केरल के वाममोर्चा मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन समेत कोई वामदल नेता शपथग्रहण समारोह में नहीं गए । जबकि केरल में भाजपा से ज्यादा वाममोर्चा को कांग्रेस ने पटखनी दी है, जिससे गठजोड़ करके वाममोर्चा बंगाल में भाजपा तथा तृणमूल से पिछड़ गया ।

लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी ने भाजपा विरोधी कांग्रेस महागठबंधन के तेलुगू देसम पार्टी प्रमुख चन्द्रबाबू नायडू को करारी मात दी है । नायडू ने रेड्डी के शपथग्रहण समारोह का बायकाट किया । सिक्किम में भाजपा समर्थित सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के प्रेमसिंह गोले ने पांच बार से लगातार मुख्यमंत्री सिक्किम संग्राम पार्टी के पवन कुमार चामलिंग को हरा दिया । उसके विरोध में चामलिंग ने नए मुख्यमंत्री गोले के शपथग्रहण का बायकाट किया । पूर्वोत्तर के ही मिजोरम के मुख्यमंत्री मिजो नेशनल फ्रंट प्रमुख जोरमथंगा भी नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण में नहीं गए, जबकि वे भाजपा नीत नार्थ इस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस(छम्क्) के घटक हैं ।

सबसे रोचक मामला है जद(यू) सुप्रीमो बिहार के जद(यू) भाजपा गठजोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के समय नीतीश कुमार ने अपने कोटे के किसी मंत्री को शपथ लेते नहीं देखा । 29 मई को ही नीतीश कुमार को इसका आभास हो गया था । क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बिहार में जद(यू) को भारी जीत के बावजूद एक से ज्यादा मंत्रीपद देने को तैयार नहीं थे । नीतीश कुमार तीन चाहते थे । वापस लौटकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और आठ मंत्रियों में से एक भी भाजपा के नहीं बने ।

अरूणाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला । 60 में से 41 सीटें भाजपा ने जीती । सात सीटें जीतकर जद(यू) सरकार में शामिल होना चाहती थी । सातों विधायक पटना आकर नीतीश कुमार से मिले थे । भाजपा ने अरूणाचल प्रदेश में भी जद(यू) को सरकार में शामिल नहीं किया ।

इन सब विसंगतियों में नरेंद्र मोदी शपथग्रहण समारोह के जश्न का माहौल मतदाता भूले नहीं कि एक झटका-सा लगा । केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी की दर 45 साल में सर्वाधिक 6. 1 फीसदी है और आर्थिक विकास दर पांच साल में न्यूनतम स्तर 5.8 पर आ गयी है । घरेलू गैस सिलेंडर में गैर सब्सिडी वाले 14.2 किग्रा की कीमत 25 रूपये बढ़ जायेगी, जो चुनाव के कारण अटकी थी ।