केंद्र शासित क्षेत्र पुडूचेरी के कांग्रेसी मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी और उपराज्यपाल भाजपा नेता किरण बेदी के बीच अधिकारों को लेकर चल रही लड़ाई विधान सभा, मद्रास हाईकोर्ट से निकलकर अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गयी । पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी केंद्र शासित क्षेत्र पुडूचेरी के मामले में उपराज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों की बात करती हैं । मगर वास्तव में निर्वाचित सरकार से किरण बेदी की तनातनी राजनीतिक ‘पावर’ को लेकर है और यह मई, 2016 से ही है, जब से वो पुडूचेरी की उपराज्यपाल बनी हैं । ताजा मामला गरम इसलिए हो गया, क्योंकि किरण बेदी ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें उपराज्यपाल के अधिकारों पर लगाम लगा दिया गया । उपराज्यपाल की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश पुडूचेरी सरकार को दिया और यह भी कहा कि उसके पहले मंत्रिमंडल की बैठक में अगर वित्तीय असरवाला कोई निर्णय लिया जाता है तो उस पर 21 जून तक अमल नहीं किया जाए ।

ऐसी नौबत आने का असली कारण है, पुडूचेरी में कांग्रेस की सरकार का होना । मद्रास हाईकोर्ट ने इसी टकराव से सम्बंधित कांग्रेस विधायक की अर्जी पर 30 अप्रील को फैसला दिया कि उपराज्यपाल पुडूचेरी की निर्वाचित सरकार के रोजमर्रे के राज-काज में हस्तक्षेप नहीं कर सकती । मद्रास हाईकोर्ट के जज आर. महादेवन ने अपने फैसले में कहा कि उपराज्यपाल मंत्रिमंडल के निर्णयों से बंधी हैं, जो पुडूचेरी विधानमंडल से जुड़ा है । उस फैसले के समय लोकसभा मतदान प्रक्रिया जारी थी और चुनाव आचारसंहिता लागू थी । राज्य सरकार भी कोई वित्तीय फैसला ले नहीं सकती थी । इसलिए उपराज्यपाल किरण बेदी चुप्पी साध रही । उनकी नजर मुख्य रूप से सरकार के वित्तीय कामकाज पर थी और किरण बेदी के अनुसार केंद्र शासित क्षेत्र पुडूचेरी की सरकार उपराज्यपाल की पुर्वानुमति के बगैर कोई वित्तीय निर्णय नहीं ले सकती । लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद उपराज्यपाल ने सबसे पहले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की ठानी । क्योंकि इस फैसले से उपराज्यपाल के उस ‘अधिकार’ पर ही रोक लग गयी थी, जिसे वे संवैधानिक बताती हैं । 19-20 मई को घोषित चुनाव परिणाम से उपराज्यपाल की भवें ज्यादा तन गयीं । पुडूचरी की एकमात्र लोकसभा सीट से कांग्रेस के वी. वैथीलिंगम ने भाजपा उम्मीदवार को भारी मतों से पराजित किया, जो दिल्ली तक भाजपा के केंद्रीय नेताओं को अच्छा नहीं लगा । कांग्रेस के इस विजयी उम्मीदवार से भाजपा की पुडूचेरी यूनिट पहले से ही खार खायी हुई थी । क्योंकि वी. वैथीलिंगम पुडूचेरी विधान सभा के अध्यक्ष थे और उन्होंने विधायी मामले में उपराज्यपाल के हस्तक्षेप पर सवाल उठा दिया । बल्कि यों कहें कि उपराज्यपाल की चलने नहीं दी । इसलिए चुनाव परिणाम आने के हफ्ते भर वाद 27 मई को उपराज्यपाल किरण बेदी ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी । सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की तारीख 30 मई तय की । उपराज्यपाल ने खास तौर पर इस बात का ख्याल रखा था कि पुडूचेरी सरकार मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को ढाल बनाकर स्वतंत्र रूप से कोई कामकाज न कर डाले । मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने मंत्रिमंडल की बैठक तीन जून को तय कर रखी थी । लेकिन जब उन्हें पता चला कि सुप्रीम कोर्ट चार जून को ही कोई नाटिस जारी करनेवाला है, तो उसकी तारीख 7 जून कर दी । उपराज्यपाल किरण बेदी तथा केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल अमन लेखी और ए एन एस नाडकर्णी ने चार जून को सुप्रीम कोर्ट पीठ के सामने राज्य मंत्रिमंडल का एजेंडा रखा । किरण वेदी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट जज इंदू मल्होत्रा और एम. आर. शाह की अवकाश पीठ को बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के एजेंडे में लगभग सारे आइटम वित्तीय असर डालनेवाले हैं । केंद्र सरकार और उपराज्यपाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट का बताया गया कि मंत्रिमंडल की बैठक तीन जून को तय थी, जो स्थगित करके सात जून ले जायी गयी । सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अगर मंत्रिमंडल के वित्तीय फैसले अमल में लाए गए तो मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अर्जी बेकार हो जाएगी । पुडूचेरी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट पी. चिदंबरम और कपिल सिब्बल पेश हुए, जो दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं। दोनों नेताओं ने अतिरिक्त सोलिसिटर जनरलों की दलील का विरोध किया । अतिरिक्त सोलिसिटर जनरलों ने उसी दलील पर जोर दिया जो किरण बेदी ने अपनी अर्जी में लगायी थी । उपराज्यपाल किरण बेदी ने मद्रास हाईकोर्ट के 30 अप्रील के फैसले से पहले की स्थिति बनाए रखने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया । किरण बेदी ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र शासित क्षेत्र पर उपराज्यपाल के प्रशासनिक नियंत्रण की वास्तविक संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने का भी अनुरोध किया । वे यह कहकर यथास्थिति बनाए रखना चाहती थी कि सारे सरकारो अधिकारी पसोपेस में हैं, क्योंकि मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपराज्यपाल निर्वाचित सरकार के मामले में स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय नहीं ले सकती । किरण बेदी पुडूचेरी उपराज्यपाल के रूप में प्राप्त वो ‘स्पेशल पावर’ बरकरार रखना चाहती हैं, जो उनके अनुसार ‘जनहित’ में राज्य सरकार पर प्रभुत्व प्रदान करता है । मद्रास हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल के इस ‘स्पेशल पावर’ में कटौती कर दी । फिलहाल तो सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को वित्तीय फैसला लेने से और अगर ऐसा हो तो उसके कार्यान्वयन पर 21 जून तक रोक लगा दी । चार जून को राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने इस आशय की नोटिस दी । लगता है, सात जून को या तो मंत्रिमंडल की बैठक फिर टल गयी, अथवा राज्य सरकार ने कोई वित्तीय फैसला नहीं लिया । क्योंकि उस सम्बन्ध में पुडूचेरी से कोई खबर नहीं आयी । लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एक-दो और रोचक घटनाएं हुई । पुडूचेरी के भाजपा नेताओं को शायद उपराज्यपाल के ‘स्पेशल पावर’ के विषय में कुछ ज्यादा ही जानकारी दी । सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही विधान सभा अध्यक्ष को लेकर टकराव ज्यादा बढ़ गया । वी. वैथीलिंगम के लोकसभा के लिए चुन लिए जाने से विधान सभा अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया । तीन जून को उनकी जगह वी. पी. शिवकालंथू स्पीकर नियुक्त किए गए, जिसके खिलाफ भाजपा नेता उपराज्यपाल के पास पहुंच गए और स्पीकर को बर्खास्त करने की मांग कर डाली । भाजपा नेताओं का कहना था कि स्पीकर की नियुक्ति उपराज्यपाल की ‘मंजूरी’ के बगैर नहीं की जा सकती । ऐसा तो शायद मद्रास हाईकोर्ट ने भी नहीं सोचा होगा और न ही सुप्रीम कोर्ट के जज ऐसी स्थिति के लिए तैयार होंगे ।

उपराज्यपाल किरण बेदी की राज्य सरकार से बहुत दिन से ठनी हुई है । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस विवाद में शिरकत कर चुके हैं । अभी लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने अपनी आम आदमी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में पहला वायदा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित क्षेत्र पुडूचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने का किया था । अरविंद केजरीवाल भी दिल्ली के उपराज्यपाल वी. एन. बैजल से अधिकारों की लड़ाई लड़ चुके हैं । सुप्रीम कोर्ट के बीच बचाव के बाद सामान्य स्थिति कायम हो पायी । लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले फरवरी-मार्च में तो पुडूचेरी में सरकार का ये हाल हो गया कि मुख्यमंत्री नारायणसामी ने उपराज्यपाल के खिलाफ राज भवन में धरना दिया । मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ राज भवन के बाहर तंबू लगाकर रात गुजारी । उनके समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री पुडूचेरी पहुंचे ।

कई दिनों तक चली काफी जद्दोजहद के बाद उपराज्यपाल ने पुडूचेरी विधान सभा से दो मार्च को पारित लेखानुदान(वोटऑन एकाउंट) बिल को मंजूरी दी । राज्य सरकार को इस बात के लिए रोष था कि उपराज्यपाल ने मुफ्त चावल योजना समेत 39 कई प्रस्तावों पर अड़ंगा लगा दिया ।

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 14 फरवरी के उस फैसले का हवाला दिया जो दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के झगड़े में सुनाया गया था । मद्रास हाईकोर्ट जज आर. महादेवन के अनुसार दिल्ली सरकार पर जो प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था, वो पुडूचेरी सरकार पर लागू नहीं होता । किरण बेदी ने भी बार-बार कहा है कि पुडूचेरी का मामला दिल्ली वाला नहीं है । इन दोनों टकरावपूर्ण बातों का क्या संवैधानिक अर्थ है, यह तो सुप्रीम कोर्ट का पुडूचेरी पर फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा ।

लेकिन उपराज्यपाल किरण बेदी ऐसे मामलों को लेकर भी विवाद के घेरे में हैं, जिसका सीधा ताल्लुक भाजपा से है । विधायक मनोनीत करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल उपराज्यपाल ने अप्रील, 2017 में दो भाजपाइयों के पक्ष में किया । अरविंद केजरीवाल की वी. नारायणसामी से हमदर्दी का कारण ये है कि दोनों 2015 में भारी बहुमत से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने । भाजपा ने किरण बेदी को दिल्ली से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर अरविंद केजरीवाल से भिड़ाया था । बुरी तरह हारने के बाद किरण बेदी को 2016 में पुडूचेरी का उपराज्यपाल बना दिया गया ।