जलवायु एक्टिविस्ट से राजनीतिक एक्टिविस्ट बने लद्दाख के बहुचर्चित समाजवादी सोनम वांगचुक की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई में एक ओर जहां इस पहाड़ी क्षेत्र की हवा थोड़ी सामान्य हुई है, वहीं दूसरी ओर कुछ नए सवाल भी खड़े हुए हैं ।

अंतरराष्ट्रीय मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (एनएसए)ए 1980 के अतंर्गत दर्ज मामला वापस लेने और उन्हें जोधपुर जेल से रिहा करने का आदेश केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 14 मार्च को जारी किया । उन्हें 26.09.2025 को लद्दाख में राज्य दर्जा आंदोलन को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से हिंसा उकसानेवाले भाषणों के आरोप में लेह में गिरफ्तार किया गया । एनएसए की विभिन्न धाराएं लगाकर वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल ले जाकर बंद कर दिया गया । सोनम वांगचुक की रिहाई 6 महीने बाद उस समय हुई, जब उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई समाप्त करने की तारीख शीर्ष कोर्ट ने तय कर दी ।

10 मार्च को सुनवाई के दौरा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और पी. वी. बाराले की पीठ के सामने गीतांजलि एंग्मो ने खुद उपस्थित होकर कहा कि सोनम वांगचुक के भाषण के जो शब्द भड़काऊ बताकर प्रदर्शन के वीडियो फुटेज में रिकार्ड किए गए हैं, वो उनके पति के मुंह से निकले हुए नहीं हैं । गृह मंत्रालय ने उसी वीडियो को आधार बनाकर वांगचुक के खिलाफ एनएसए लगाया ।

वांगचुक की पत्नी शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट को बता रही हैं कि 24.09.2025 के विरोध प्रदर्शन का जो वीडियो गृह मंत्रालय की ओर से एटोर्नी जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश किया है, उसमें वांगचुक के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए हैं और उनके भाषणों को तोड़मरोड़कर मनगढंत बातें जोड़कर दिखाए गए हैं ।

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने 10 मार्च को साफ शब्दों में कह दिया कि 17 मार्च को अंतिम सुनवाई होगी और फैसला उस दिन रिजर्व रख लिया जाएगा । दोनों जजों ने स्वीकारा कि इस मामले को निबटाने में बहुत दे हो चुकी है, अब और नहीं होगी । 06.10.2025 से सुनवाई चल रही है ।

10 मार्च की सुनवाई मुख्य रूप से उसी वीडियो फुटेज पर केंद्रित थी, जो अधिकारियों के लिए सोनम वांगचुक के खिलाफ लगे आरोपों का आधार है । गीतांजलि एंग्मो की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और एंग्मो दोनों ने सुप्रीम कोर्ट पीठ को बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक के भाषण लद्दाखी भाषा में है, जिसकी अनुवादित ट्रांस्क्रिप्ट पर भरोसा करके अधिकारियों ने उन्हें जेल में डाला हुआ है । उन शब्दों का उच्चारण वांगचुके ने कभी किया ही नहीं ।

उसके बाद शीर्ष कोर्ट पीठ ने भाषण का वीडियो देखने का फैसला किया । 10 मार्च को पेश अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल के. एम. नटराज के वीडियो पर जोर देने वाली दलील को बीच में ही काटते हुए जजों ने कहा कि कोर्ट ने वीडियो नहीं देखी है, जो पेनड्राइव में कोर्ट को दी गयी है । उस दिन वीडियो में अंतर की भी बात सामने आयी शीर्ष कोर्ट ने जोधपुर सेंट्रल जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को गिरफ्तार करने के समय जो पेन ड्राइव दिया गया, वहीं कोर्ट के सामने रखा जाए । इससे कोर्ट को यह तय करने में सहूलियत होगी कि वीडियो में हिंसा उकसानेवाली कोई रिकार्ड है या नहीं । जजों को बताया गया कि गिरफ्तारी के समय एक्टिविस्ट वांगचुक को कानूनी प्रावधान के अनुसार जो वीडियो दिया गया, वो उस वीडियो से मेल नहीं खाताए जिस पर भरोसा करके उन्हें जेल में रखा गया है और जिसकी पेनड्राइव सुप्रीम कोर्ट को दी गयी है ।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कह दिया कि केंद्र को जो कुछ भी कहना है 14 मार्च को ही कहे और कोर्ट सिर्फ उन्हीं पहलुओं पर दलील सुनेगाए जो याचिकाकर्ता की ओर उठाए गए हैं ।

केंद्र सरकार ने 17 मार्च करीब आने से पहले ही सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत दर्ज मामला खत्म करके उन्हें रिहा कर दिया । 14 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक के खिलाफ एनएसए हटाने और उनकी रिहाई का आदेश जारी कर दिया ।

एक्टिविस्ट वांगचुक के मुक्त होने के दो ही दिन बाद 14 मार्च को लद्दाख में लगभग 6 महीने से कूल पड़ी हवा में गर्मी आ गयी । लेह और कारगिल दोनों जिलों में विशाल रैलियां निकाली गयी जिसमें विशाल जनसमूह उमड़ा । लद्दाख को राज्य का और संविधान की 6ठी अनुसूची के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे दोनों सामाजिक संगठनों एलएबी(सठ)ए केडीए(ज्ञक्।) के कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी । उसके पांच दिन बाद 22 मार्च को वांगचुक लद्दाख पहुंचे तो उनके स्वागत में भीड़ का जश्न जैसा माहौल हो गया । वांगचुक ने कहा. हम केंद्र के साथ ‘विन.विन और गिव एंड टेकष्ठ वाले फार्मूले पर आगे बात करेंगे, जरूरत पड़ेगी तो फिर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे ।’ लोगों ने 24.09.2025 की वारदात के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की भी मांग उठायी ।

बौद्ध बहुल संगठन लेह आपेक्स बॉडी(एलएबी) और मुल्सिम बहुल संगठन कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के नेताओंए एक्टिविस्टों ने एक साथ जुटकर अपनी मांगों की याद लद्दाख प्रशासन को दिलायी । लद्दाख नेताओं ने 24.09.2025 को राज्य दर्जा आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में हुए प्रदर्शन पर पुलिस फायरिंग में मारे गए अपने 4 समर्थकों के मारे जाने लगभग 80 लोगों के घायल होने की घटना को भी याद किया ।

एलएबी नेता चेरिंग दोरजे लाकरूक ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की रिहाई से उनका मकसद स्पष्ट हो गया है । दोरजे लाकरूक ने कहा कि उस समय के लद्दाख उपराज्यपाल( एलजी) कवीन्दर गुप्ता ने वांगचुक और लद्दाखवासियों को ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दिया था, जो हमने गलत साबित कर दिया ।

केडीए नेता असगर अली कर्बानी ने कारगिल में रैली में केंद्र सरकार पर दोनों समुदायों में दरार पैदा करने का आरोप लगाया और इस बात पर जोर दिया कि लद्दाखियों के वाजिब हक के लिए सभी आपस में एकजुट हैं ।

16 मार्च की लद्दाख रैली के दिन सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गातांजलि एंग्मो दिल्ली में थे । दोनों ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लद्दाख में विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य रचनात्मक संवाद प्रक्रिया शुरू करना है । दोनों ने कहा. हम पूरे घटनाक्रम को सकारात्मक रूप में देखना चाहते हैं और केंद्र से आशा करते हैं कि आंदोलनकारी संगठनों की मांगों पर सार्थक वार्ता होगी ।

लद्दाख में प्रदर्शनकारियों ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से जल्द अगली वार्ता का आग्रह किया । केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मंत्रालय कमिटी लद्दाखी प्रतिनिधियों से वार्ता कर रही थी, जो प्रदर्शनकारियों की मौत और वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद ठप्प हो गयी ।

सोनम वांगचुक के खिलाफ एनएसए कार्रवाई रद्द करने के फैसले के साथ गृह मंत्रालय ने भी 14 मार्च को वांगचुक से मिलना.जुलता बयान जारी किया । गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार लद्दाख में सकारात्मक माहौल तैयार कर सभी हितधारकों के साथ सार्थक बातचीत को आगे बढ़ाना जरूरी है, इसी तथ्य को ध्यान में रखकर और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद वांगचुक की हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया गया ।

05 मार्च को राज्यपालों की बदला-बदली और नियुक्ति के क्रम में लद्दाख के भी उपराज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता को हटाकर उनकी जगह दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख भेजा गया ।

उसके एक महीना पहले 12 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय कमिटी ने लद्दाखियों प्रतिनिधियों की राज्य दर्जा और 6ठी अनुसूची दर्जा की मांगें ठुकरा दी । 04 फरवरी को एलएबी और केडीए प्रतिनिधिमंडल को गृह मंत्रालय ने दिल्ली बुलाया मगर मांगों पर वार्ता नहीं हुई । गृह मंत्रालय के जवाब के बाद दोनों संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया में इसे धोखा बताया और कहा कि वे एकजुट होकर अपना शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे । वार्ता दो दशकों से चल रही है ।

गत वर्ष 06 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में गीतांजलि एंग्मो की याचिका पर पहली सुनवाई हुई और उसी दिन केंद्र ने वार्ता की तारीख रखी, जिसे प्रतिनिधिमंडल ने नहीं माना । सुप्रीम कोर्ट से वांगचुक को जमानत नहीं मिलने का मलाल एंग्मो को जो रहा होगा वो अब खतम हो गया होगा ।

जम्मू व कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए थी । सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने जम्मू व कश्मीर के साथ वापस लद्दाख को मिलाकर राज्य दर्जा लौटाने की मांग दुहरायी ।

जनवरी-फरवरी, 2026 में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से बताया गया कि सोनम वांगचुक ने महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल करके हिंसा भड़काया । उसके जवाब में जजों ने ही कहा कि जो वीडियो अभी तक उपलब्ध है, उसमें तो वांगचुक प्रदर्शनकारी युवाओं को शांति बनाए रखने कह रहे हैं ।

लोकसभा चुनावए 2024 के एलान से एक महीना पहले सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू किया और तारीखें घोषित होने के बाद स्थगित कर दिया । उस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार हाजी हनीफा जान ने लद्दाखी मांगों के मुद्दे पर भाजपा के अधिकृत और बागी दोनों उम्मीदवारों को हराया । भाजपा ने अपने वोट वाले बौद्ध बहुल लेह निवासी ताशी ग्यालशन को उम्मीदवार बनाया था । 2014 आम चुनाव से ही वार्ता आंदोलन जारी है ।

हाजी हनीफा जान को केंद्र ने वार्ता के लिए बनी किसी कमिटी में न तो शामिल किया, न बुलाया । सोनम वांगचुक भी कभी नहीं बुलाए गए ।

हाजी हनीफा जान शिया मुस्लिम हैं और इरान.इजराइल.अमेरिका युद्ध से कारगिल में खलबली है, जहां शिया मुस्लिम मतदाता ज्यादा हैं ।