यह लेख एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की संभावना पर केंद्रित है, जिसे चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक संशोधन और पर्याप्त वीवीपीएटी मशीनों के बिना यह संभव नहीं है। भाजपा सरकार इस पर दबाव बना रही है, जबकि विपक्षी दल इसे असंवैधानिक और अव्यावहारिक मानते हैं, और ईवीएम छेड़छाड़ के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
यह लेख चुनाव प्रक्रिया, विशेषकर ईवीएम और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्रित है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मतदाताओं से दुष्प्रचार से बचने का आग्रह किया है। लेख में बताया गया है कि कैसे विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और आप, हार के बाद ईवीएम और मतदाता सूची पर सवाल उठाते हैं, जबकि चुनाव आयोग और अदालतों ने इनकी विश्वसनीयता को बार-बार प्रमाणित किया है।
यह लेख 2024 के लोकसभा चुनावों के संदर्भ में मतदाताओं की बढ़ती उदासीनता पर प्रकाश डालता है, जबकि चुनाव आयोग भागीदारी बढ़ाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। यह उदासीनता के कारणों की पड़ताल करता है, जिसमें राजनीतिक दलों का स्वार्थ, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की उपस्थिति और ईवीएम की विश्वसनीयता पर विवाद शामिल हैं। लेख बिहार और यूपी जैसे राज्यों में कम मतदान प्रतिशत पर विशेष चिंता व्यक्त करता है और मणिपुर व पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के उदाहरण देता है।
यह लेख भारतीय चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौतियों पर केंद्रित है। इसमें चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास, ईवीएम-वीवीपैट विवाद, सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, चुनावी बांड, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों और आदर्श आचार संहिता के नियमों में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है। लेखक का तर्क है कि चुनाव आयोग की जगह अब सुप्रीम कोर्ट पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आ गई है।
यह लेख ईवीएम में कथित छेड़छाड़ के विवाद पर केंद्रित है, जो 2019 के आम चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा उठाया गया था। इसमें बताया गया है कि कैसे विभिन्न दल, अपनी चुनावी हार-जीत के आधार पर, ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं या उसका बचाव करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ईवीएम को 'फुलप्रूफ' बताया और चुनाव आयोग को राजनीतिक फुटबॉल न बनाने की अपील की।
यह लेख बताता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप अक्सर चुनाव हारने वाली पार्टियों द्वारा लगाए जाते हैं, जबकि जीतने वाली पार्टियां जनादेश का हवाला देती हैं। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनावों के बाद यह फिर साबित हुआ कि यह एक राजनीतिक मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपीएटी के बावजूद छेड़छाड़ की आशंकाओं को खारिज कर दिया, और चुनाव आयोग ने लगातार ईवीएम को 'फूलप्रूफ' बताया है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दल अपनी सुविधा के अनुसार ईवीएम पर अपना रुख बदलते रहे हैं।