अलग ‘खालिस्तान’ समर्थक सिखों ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी अमृतसर स्वर्ग मंदिर परिसर में और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का शहादत दिवस कनाडा में साथ-साथ मनाया । पंजाब से पनपे खालिस्तान उग्रवादियों ने धर्म को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने के लिए स्वर्ग मंदिर परिसर में गुप्त हमला अड्डा बनाया था और वहीं से सुरक्षा बलों की योजना को कार्यरूप दिया जाता था । 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस अड्डे और खालिस्तान उग्रवाद का सिरमौर सबसे खूंखार उग्रवादी संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले के सफाए के लिए स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसकर सैनिक कार्रवाई ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने का आदेश दिया । उसके बाद उग्रवादी हिंसा में जलते पंजाब की आग तो बुझ गयी मगर उसकी राख से खालिस्तान का धुआं थोड़ा-थोड़ा निकलता रहा ।
ऑपरेशन ब्लू स्टार की 39वीं बरसी पर अमृतसर स्वर्ण मंदिर परिसर से निकले खालिस्तान समर्थक नारे और कनाडा में इंदिरा गांधी का शहादत ‘बदला दिवस’ उत्सव के रूप में मनाने की खबर सिख उग्रवाद की आग सुलगने का प्रमाण है । स्वर्ण मंदिर परिसर में एक खास राजनीतिक दल के संसद सदस्य का अपने समर्थकों के साथ जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर युक्त तख्तियों के साथ ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ नारे लगाना चिंता का विषय है । दूसरा गंभीर मसला है, कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में इंदिरा गांधी का शहादत दिवस ‘बदला’ के रूप में मनाना ।
यह खालिस्तान ‘नवजागरण’ एक दशक से कनाडा और इंगलैंड में चल रही भारत विरोधी गतिविधियों के बीच से उभर रहा है । यह भी याद रखना होगा कि खालिस्तान मांग की नींव कनाडा में ही वहां रहनेवाले सिखों ने ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ संगठन के बैनर तले रखी थी । भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा के सरकार को कड़ा संदेश देते हुए चेताया है । क्योंकि इंदिरा गांधी का शहादत दिवस ‘बदला’ के रूप में मनाने में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो की तरफ से खालिस्तान उग्रवादियों को खुली शह देने की खबरों की जोरदार चर्चा है । सोसल मीडिया पर सबसे ज्यादा यही खबर उछली है । कहा जा रहा है कि कनाडा सरकार का भारत विरोधी सिखों को शह वोट बैंक राजनीति का हिस्सा है । कनाडा में सिखों की आबादी तकरीबन 8,00,000 आंकी गयी है । गत कुछ वर्षों में कनाडा में हर साल खालिस्तानी अलगाववादी सिख गुटों द्वारा ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार(1984) घटना की ‘परेड झांकी’ जारी की जा रही है और इंदिरा गांधी की हत्या को ‘बदला’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है । इसमें कनाडा सरकार के कथित ‘समर्थन’ का प्रमाण कनाडा के भारत के ऐसे अंदरूनी मामलों में दखल से मिलता है, जिसमें सिखों की सक्रिय भूमिका हो । इसका एक उदाहरण है, 2020 का किसान आंदोलन ।
विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा के साथ-साथ इंगलैंडए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अन्य युरोपीय देशों का भी नाम लेकर उन देशों में चल रही खालिस्तान समर्थकों की भारत विरोधी गतिविधियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की । उन्होंने कहा कि इसका भारत के साथ कनाडा और इन देशों के द्विपक्षीय सम्बंधों पर असर पड़ेगा । विदेश मंत्री ने कहा कि खालिस्तान को बढ़ावा देने और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने से कई अन्य नकारात्मक पहलू भी जुड़े हैं। फिर जयशंकर ने जम्मू व कश्मीर से धारा.370 खत्म करने को सही और इसे भारत का आंतरिक मामला बताते हुए अन्य देशों में इसकी प्रतिक्रि को अनपेक्षित कहकर सफाई/स्पष्टीकरण की औपचारिकता पूरी कर दी । यह निरंतर चलनेवाली सामान्य प्रक्रिया है, जो शायद सितंबर में होनेवाले ळ.20 सम्मेलन में दिखेगीए जिसमें युरोपीय देशों के राजनयिक भारत में जुटेंगे ।
लेकिन बात सिर्फ यहीं खतम नहीं होती कनाडा में सिख आबादी वहां की सरकार के लिए ‘वोट बैंक’ राजनीति हो सकती है । लेकिन खालिस्तान समर्थक नारों में ऑपरेशन ब्लू स्टार की स्वर्ण मंदिर परिसर में बरसी और इंदिरा गांधी की हत्या को उसी के ‘बदले’ के रूप में प्रचार पर सियासी राजनीति का कलेवर लग रहा है ।
जनसाधारण के बीच इस पर राजनीतिक दलों को इस रूप में देखा जा रहा है, मानो खालिस्तानी उग्रवादी भारत के नहीं, बल्कि किसी कांग्रेस नेता और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का जश्न मना रहे हों । इससे फैल रहे संदेश का वैदेशिक से ज्यादा देश की अंदरूनी राजनीति पर असर पड़ सकता है । कांग्रेस को छोड़ अन्य किसी भी पार्टी ने इंदिरा गांधी की हत्या का कनाडा में जश्न पर तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी । भाजपा नेताओं के लिए यह एक परिवारवादी पार्टी का मामला हो सकता है । मगर 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के खिलाफ गोलबंद हो रहे विपक्षी दलों का इस घटना के प्रति उदासीन रवैया खटकने वाला है । अब देखना है कि बिहार में जद(यू)+राजद+कांग्रेस गठजोड़ सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बुलावे पर 23 जून को पटना में जुट रहे गैर.भाजपा नेता कुछ बोलते हैं या नहीं । उस जुटान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भी पहुंचने की खबर चर्चा में है । अभी तक की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ कांग्रेस नेताओं ने ही खालिस्तान ‘नवजागरण’ और उसकी आड़ में इंदिरा गांधी की छवि बिगाड़ने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है ।
यहां तक कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के लिए भी स्वर्ण मंदिर परिसर में भिंडरावाले की तस्वीर के साथ ‘दल खालसा’ पंथियों का ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ नारे लगाना कोई असामान्य बात नहीं है । संसद सदस्य सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्ववाले शिरोमणि अकाली दल(अमृतसर) और उनके सहयोगी पूर्व संसद सदस्य धियान सिंह भी अपने समर्थकों के साथ स्वर्ण मंदिर परिसर के अकाल तख्त पर मौजूद थे । खालिस्तान समर्थक नारों के बीच अकाल तख्त के जत्थेदार गियानी हरप्रीत सिंह ने समूचे सिख समुदाय के नाम अपने संदेश में कहा कि समय की मांग है कि सारे सिख पंथी और विद्वान गांव.गांव जाकर लोगों के बीच सिखवाद का प्रचार करें तथा अकाल तख्त के बैनर तले सबको एकजुट करें उसी समय कनाडा के ब्रैम्पटन शहर से इंदिरा गांधी की हत्या को ‘बदले’ की कार्रवाई के रूप में सार्वजनिक रूप से मनाने का सोसल मीडिया वायरल सभी अखबारों और टी वी चैनलों में प्रमुखता से देखा.सुना गया । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 1984 ऑपरेशन ब्लू स्टार सैनिक कार्रवाई के बाद उनके सिख बॉडीगार्डों ने गोली मारकर हत्या कर दी । पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की भी हत्या कर दी गयी ।
इंदिरा गांधी की हत्या वाली वारदात पर कनाडा के प्रमुख शहर ब्रैम्पटन और ओंटारियो में खालिस्तान समर्थक सिख गुटों ने परेड के साथ एक झांकी रखी, जिस पर लिखा गया. ‘यह श्री दरबार साहिब पर हमले का बदला था।’ एक ट्वीट में इंदिरा गांधी को खून के छींटेवाला उजली साड़ी में दोनों हाथ उठाए और दो पगड़ीधारियों को उनकी ओर बंदूक ताने दिखाया गया ।
भारत सरकार ने तो अपना प्रोटोकॉल निभाया और कनाडा सरकार को अपनी नाराजगी से अवगत कराया । 07 जून को कांग्रेस के दिल्ली मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस नेता रनदीप सिंह सुरजेवाला और विनीत पुनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या पर उत्सव परेड के विषय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से बात करके कहना चाहिए कि ऐसे कृत्य भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है । कांग्रेस नेता जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल ने भी सवाल उठाया कि विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत स्थित कनाडा के हाई कमिश्नर को बुलाकर भारतीयों की आहत भावना से क्यों नहीं अवगत कराया । कनाडा के भारत स्थित हाई कमिश्नर केमरोन मेके ने अपने यहां की घटना पर ‘अफसोस’ जताकर पल्ला झाड़ लिया ।
कांग्रेस को हराकर दिल्ली के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी(आप) सत्ता में आयी है । स्वर्ण मंदिर परिसर की घटना से पंजाब के आप मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को कोई फर्क नहीं पड़ा है । जबकि पंजाब अभी धर्म की आड़ में उपजे गए उग्रवाद से जूझ रहा है । पंजाब सरकार ने सिर्फ अपने यहां के लोगों को स्वदेश भेजने का मामला कनाडा सरकार के सामने उठाया ।
कनाडा में 1985 में भी एयर इंडिया की फ्लाईट पर बमबारी की घटना हुई थी । भारत में प्रतिबंधित अलगाववादी गुट ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने गत नवंबर में ब्रैम्पटन में खालिस्तान के लिए जनमतसंग्रह कराया । उसके पहले सितंबर में ओंटारियो में महात्मा गांधी की मूर्ति तोड़कर उस पर ‘खालिस्तान’ लिख दिया गया ।
अभी 7 जून को मुंबई में एक स्पेशल कोर्ट ने खालिस्तान समर्थक दो सिख उग्रवादी. हरपाल सिंह और गुरजीत सिंह को पांच.पांच साल जेल की सजा सुनायी है । हरपाल 2018 के एक मामले में और गुरजीत 2020 के खालिस्तान उछाल मामले में नच(गैर.कानूनी गतिविधियां रोक एक्ट) के अंतर्गत दोषी पाया गया । इन दोनों ने पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में मुख्य अभियुक्त उग्रवादी जगतार सिंह हवारा और ऑपरेशन ब्लू स्टार की तारीफ का कथित वीडियो पोस्ट किया था । दोनों का उग्रवादी गुट ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ और सह.अभियुक्त हथियार सप्लायर मोईन खॉ से भी लिंक पाया गया ।