अलग संविधान, अलग झंडा के साथ ‘स्वतंत्र संप्रभु’ नगालिम पर अड़े नगा विद्रोही गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम(आइसाक.मुइवा). एनएससीएन(आईएम) ने धमकी दी है कि अगर किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से भारत.नगा समझौता जल्द नहीं हुआ तो फिर से भारत के खिलाफ हिंसक लड़ाई छेड़ देंगे । इस गुट के साथ 2015 से केंद्र सरकार का ‘फ्रेमवर्क डील’ चल रहा है, मगर अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचाया जा सका है । एनएससीएन(आईएम) से संघर्षविराम सहमति हुए 27 वर्ष गुजर गए ।
‘फ्रेमवर्क डील’ 10वें वर्ष में प्रवेश करने के अब कुछ महीने बचे हैं । 2015 के बाद से यह पहला अवसर है, जब एनएससीएन(आईएम) ने हिंसा की ओर लौटने की धमकी दी है । लेकिन ये नगा लोग ‘अलग झंडा और अलग संविधान’ का हट छोड़ना नहीं चाहते । अभी तक की सारी वार्ताएं बेनतीजा होने का यही असली कारण है । 03.08.2015 को दिल्ली में एनएससीएन(आईएम) के साथ हुई ‘फ्रेमवर्क डील’ में केंद्र के साथ किन विंदुओं पर सहमति हुई, उसका पूरा खुलासा दोनों पक्षों में से किसी ने नहीं किया है । मगर एनएससीएन(आईएम) एकतरफा प्रचार कर रहा है कि भारत सरकार ने ‘संप्रभु नगा राष्ट्रीय झंडा और संविधान’ को मान्यता दी है ।
‘फ्रेमवर्क डील’ पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ एनएससीएन(आइएम) सुप्रीमो टी. मुइवा(ञ्. डनपओ) ने दस्तखत किए । मुइवा अपने को समानान्तर भूमिगत स्वतंत्र संप्रभु नगालिम संघीय सरकार के स्वयंभू ‘प्रधानमंत्री’ मानते हैं । इस गुट के दूसरे नेता आइसाक चिशी स्वू इस नगालिम सरकार के स्वयंभू ‘राष्ट्रपति’ थे, जिसका अगस्त, 2015 डील से कुछ दिन पहले दिल्ली में ही निधन हो गया । अब 90 साल की उम्र पार कर रहे टी. मुइवा को ऐसा ‘फाइनल डील’ चाहिए, जिसमें भारत के संवैधानिक ढांचे के अंदर समानान्तर अलग नगालिम संविधान और झंडा भारत सरकार स्वीकार करे ।
एनएससीएन(आईएम) ने यह धमकी भारत के 76वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के समय दुहरायी है । यह नगा गुट अपने नगालैंड के दिमापुर स्थिति हेब्रन हेडक्वार्टर में हर साल समानान्तर ‘स्वतंत्र दिवस’ और ‘गणतंत्र दिवस’ मनाते हैं । एनएससीएन(आईएम) के अखबार ‘नगालिम बॉयस ’ के हवाले से दिमापुर के अखबार ‘भोरंग एक्सप्रेस’ और ‘इस्टर्न मिरर’ ने देर से प्राप्त खबर में छापी है । एनएससीएन(आईएम) का दावा है कि नगा विद्रोह की नींव रखनेवाले अन्गामी जापुओ फिजो(I.O. थ्रव) ने भारत की आजादी से पहले ही नगालिम को ‘स्वतंत्र और गणतंत्र’ घोषित कर दिया था ।
नवंबर, 2024 में भारतीय संविधान दिवस की 75वीं वर्षगांठ आयोजनों से पहले एनएससीएन (आईएम) ने अपना पहला अल्टीमेटम भारत सरकार को दिया था ।
नवंबर, 2024 के दूसरे सप्ताह में एनएससीएन(आईएम) ने अपने सुप्रीमो मुइवा के दस्तखत से सभी मीडिया को अपना 5 पृ’ का वक्तव्य जारी किया । उस वक्तव्य में मुइवा ने पहली बार ‘फाइनल डील’ में किसी तीसरे मध्यस्थ पर भी बल दिया । हिंसा की ओर फिर से लौटने की धमकी के साथ भारत सरकार को 2025 शुरू होन से पहले ‘फाइनल डील’ का अल्टीमेटम दिया । उस वक्तव्य पर अपनी प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार के सूत्रें ने बताया कि टी. मुइवा के नाम से जारी यह वक्तव्य दरअसल उनके दो चीन स्थित सलाहकार फुनथिंग शिमरे और पामशिव मुइवा का ड्राफ्ट किया हुआ है । सूत्रों के अनुसार वयोवृद्ध टी. मुइवा लगातार बीमार चल रहे हैं । हाल में उन्होंने पामशिव मुइवा को अपना राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया है । टी. मुइवा के वक्तव्य से अंदाजा लगाया गया कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की बात में एनएससीएन(आइसाक.मुइवा) का इशारा किसी ‘विदेशी ताकत’ और वो शायद चीन की ओर रहा होगा । यह नगा जुमला एनएससीएन(आईएम) ने ऐसे समय में छोड़ा है, जब भारत सरकार ने चीन समर्थित लगभग सभी नगा गुटों को संघर्षविराम समझौते के टेबुल पर लाकर भारत के संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत व्यवस्था के लिए राजी किया हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के उत्तर पूर्व सलाहकार अक्षय कुमार मिश्र लगातार इस प्रयास में जुटे हैं । एनएससीएन(आईएम) समेत अन्य नगा गुटों से केंद्र सरकार की ओर से वार्ताकार अक्षय मिश्र ही हैं । 1600172025 को अक्षय मिश्र ने अलग ‘फ्रंटियर नगालैंड’ की मांग करनेवाले नगा गुटों से गुवाहाटी में वार्ता की है । पूर्वी नगालैंड के 6 जिलों को मिलाकर अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग करनेवाले सात नगा जनजातियों का गुट ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन(म्छच) को नगालैंड से काटकर अलग कार्यकारी, विधायी और वित्तीय स्वायत्तता वाला फ्रंटियर नगालैंड टेरिटरी(थ्छर) चाहिए । गुवाहाटी में गत 15 जनवरी को हुई इस विपक्षीय वार्ता में केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रतिनिधित्व अक्षय कुमार मिश्र कर रहे थे । नगा संगठन की ओर से इसके अध्यक्ष ए. चिंगमाक यांग के अलावे नगालैंड सरकार के भी प्रतिनिधि शामिल थे । एफएनटी(फ्रंटियर नगालैंड टेरिटरी) की मांग करनेवाले इन नगाओं ने केंद्र पर दबाव बनाने के लिए हिंसा का रास्ता छोड़कर दूसरा तरीका अपनाया हुआ है । ईएनपीओ(ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन) का गठन नगालैंड विधान सभा चुनाव से कुछ दिन पहले फरवरी, 2023 में हुआ । 6 पूर्वी जिलों के इन आदिवासी मतदाताओं ने चुनाव का बायकाट करने की धमकी दी । मांगों पर विचार करने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन पर इनलोगों ने बायकाट वापस ले लिया । मार्च के पहले सप्ताह में विधान सभा चुनाव संपन्न होने के डेढ़ महीने बाद अप्रैल, 2023 में ईएनपीओ प्रतिनिधिमंडल से गुवाहाटी में ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी मिले । सहमति नहीं बनने की प्रतिक्रिया में ईएनपीओ के आह्वान पर 2024 लोकसभा चुनाव के समय 6 जिलों के किसी भी बूथ पर कोई भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचे । अभी जनवरी, 2025 की वार्ता के प्रति ईएनपीओ तो आशावान है, मगर अक्षय मिश्र समेत गृह मंत्रालय के किसी अधिकारी ने कोई टिप्पणी नहीं की । 150102025 को हुई इस वार्ता से पांच दिन पहले 11 जनवरी को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. वीरेन सिंह ने कहा कि राज्य में जातीय हिंसा का हल निकालने में तीसरे पक्ष की जरूरत है और नगा तथा चर्च समुदाय के लोगों से आगे आने का आग्रह किया । मणिपुर के मुख्यमंत्री ने नगा बहुल आबादी वाले सेनापति जिले के माराम में आयोजित जनसभा में कहा कि भारतीय संविधान के अंतर्गत सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है । मई, 2023 से कुकी.मेइतेक समुदायों के बीच जारी हिंसा का अभी तक कारगर निदान नहीं निकल पा रहा है, जो राष्ट्रीय चर्चा का विषय है । अभी संसद के बजट सत्र में यह मामला फिर उठेगा । इस हिंसा में 252 लोगों के मारे जाने और हजारों के बेघर होने की सरकारी तौर पर पुष्टि हो चुकी है ।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने सेनापति जिले में जाकर नगा और चर्च समुदायों से हिंसा पर काबू पाने के लिए मदद मांगा । उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि सेनापति जिला एनएससीएन(आईएम) सुप्रीमो टी. मुइवा का जन्मस्थान है और वहां का सबसे दबंग उखरूलधतांगखुल नगा समुदाय संकट का ऐसा हल चाहता है, जिसमें अलग संविधान और अलग झंडा को भारत मान्यता दे । इसके लिए बातचीत को वे लोग ‘भारत.नगा’ वार्ता कहते हैं । उन नगाओं के अनुसार यही उनकी ‘विशिष्ट संस्कृति और इतिहास’ की पहचान है । सभी जानते हैं कि नगा हिंसा और शांति वार्ता दोनों का संचालन चर्चों के जरिए होता है ।
1801102025 को केंद्र सरकार के सूत्रों से पता चला कि मणिपुर में शांति के लिए किसी ‘तीसरे तटस्थ पक्ष’ की जरूरत महसूस की जा रही है । मणिपुर पुलिस के तीनों समुदायों. मेइतेकए कुकी.जो और नगाओं के जवानों के लिए असम राइफल्स ने विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाया । उसके संपन्न होने के बाद एक अधिकारी ने ऐसा सुझाव दिया ।
एनएससीएन(आईएम) से 2015 ‘फ्रेमवर्क डील’ के बाद से जितने दौर की वार्ता हुई है, किसी में भी टी. मुइवा खुद शामिल नहीं हुए । अक्टूबर, 2024 में मुइवा के एजेंडे पर उनके प्रतिनिधियों से केंद्र की वार्ता पहले की तरह विफल होने के बाद नवंबर में एनएससीएन(आईएम) ने अपना वक्तव्य जारी किया । मुइवा ने जो ‘तीसरे पक्ष’ के हस्तक्षेप की बात कहीए उसका मतलब दूसरा था । मुइवा ने अपने अल्टीमेटम में भारत सरकार पर ‘वादाखिलाफी’ का आरोप लगाते हुए ऐसे पक्ष से हस्तक्षेप करने कहा जो नगाओं के ‘अलग झंडा और अलग संविधान’ की शर्त मानने को भारत सरकार पर दबाव डालेए अगर भारत सरकार नहीं मानती है, तब नगा लोग फिर हिंसा का रास्ता अपनाएंगे । केंद्र के वार्ताकार अक्षय मिश्र की अन्य सात नगा गुटों से भी वार्ता जारी है ।
इन सात नगा गुटों के संयुक्त मंच नगा नेशनल पोलिटिकल ग्रुप(एनएससीएन) से 2017 से केंद्र का संघर्षविराम चल रहा है । ये लोग ‘अलग झंडा, अलग संविधान’ पर तो ज्यादा जोर नहीं दे रहे हैं, मगर एनएससीएन ने भी अक्टूबर, 2024 में ही केंद्र से कहा कि 2025 आने से पहले उस मुद्दे पर केंद्र नगा समझौता करेए जो 2017 में तय हुआ । अगर एनएससीएन ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा तो एनएनपीजी को भी राजी करना मुश्किल होगा ।
नवंबर, 2024 में एनएससीएन की धमकी के बाद मणिपुर के उखरूल नगा महिलाओं के परंपरागत ‘पीसकीपर’(उखरूल भाषा में ‘प्रक्रीला’) संगठनों ने शांति मार्च निकाला । इसमें भी ऐसा नगा शांति समझौता पर बल दिया गया, जिसमें भारत सरकार से ‘अलग झंडा और अलग संविधान’ को मान्यता मिले । ये मांग करनेवाले थे सभी तांगखुलधउखरूल नगा है । रिपोर्ट है कि हजारों की संख्या में गुटी इन महिलाओं में म्यांमार के नगा भी शामिल थे । 1974 में गठित ‘भारत.नगा शांति वार्ता मिशन’ के स्वर्णजयंती समारोह के सिलसिले में 15.11.2024 को आयोजित इस शांति मार्च में महिला संगठनों ने एनएससीएन की हिंसा की ओर लौटने की धमकी पर जरूर चिंता जतायी, मगर इन्हें भी ‘अलग झंडा, संविधान’ वाला फाइनल डील चाहिए । ये मणिपुर.म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ हैं । इनके संगठन तांगखुल शनाओ लोंग(टीएसएएल) अध्यक्ष थिन्ग्रेइकी लुढगावोशी ने नगालैंड से आफ्रस्पा(आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट, ।थ्च) रदद् करने की मांग करते हुए कहा कि हम अपने अधिकारों के लिए लड़ते.लड़ते थक चुके हैं, नगा समझौते से ही पूर्वोत्तर में शांति कायम होगी । नगा महिला यूनियन अध्यक्ष प्रिसथिला थुमाई और तांगखुल छात्र संगठन रामरीयन केकशिंग ने चेताया कि भारत सरकार के प्रति सम्मान का मतलब हमारे नेताओं की कमजोरी नहीं समझी जानी चाहिए । उनका दावा है कि प्रस्तावित ‘नगालिम’ में नगालैंड मणिपुर के अलावे म्यांमार के भी जिले हैं । 60: नगा भारत में और 40: म्यांमार में हैं, उन्हें बाड़ लगाकर अलग कैसे किया जा सकता है ।
नगाओं के इसी रवैये के कारण 1996.1997 में प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और इन्द्र कुमार गुजरात के प्रयासों से किसी तरह एनएससीएन(आईएम) को संघर्षविराम के लिए राजी किया जा सकाए ताकि सुरक्षा बलों को हिंसा से राहत मिले । लेकिन ‘फाइनल डील’ पर वार्ता उस समय से अब तक बेनतीजा चल रही है ।
2003 में नगालैंड विधान सभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो कह दिया कि नगा संकट के लिए अगर जरूरत पड़ी तो संविधान संशोधन को तैयार हैं, उसका गलत अर्थ नगाओं ने निकाल लिया । मगर धारा.370 खत्म करके जम्मू व कश्मीर का अलग संविधान और झंडा का अस्तित्व मिटना नगाओं को समझ में नहीं आता ।