केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राज्यपालों और राज्य सरकारों के बीच कुलपति नियुक्तियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद केरल के राज्यपाल ने कई कुलपतियों से इस्तीफा मांगा, जिस पर राज्य सरकार ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया। यह विवाद संवैधानिक प्रमुखों और निर्वाचित सरकारों के बीच अधिकारों के टकराव को दर्शाता है, जिसमें भाई-भतीजावाद और यूजीसी मानदंडों के उल्लंघन के आरोप शामिल हैं।
दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस फैसले को पलट दिया जिसमें कोरोना मरीजों के इलाज को दिल्लीवासियों तक सीमित किया गया था। यह लेख दिल्ली और पुडुचेरी में उपराज्यपालों और निर्वाचित सरकारों के बीच चल रहे शक्ति संघर्ष और संवैधानिक अस्पष्टताओं पर प्रकाश डालता है, जिसमें अदालती फैसलों और राजनीतिक टकरावों का जिक्र है। यह दिखाता है कि कैसे उपराज्यपाल के अधिकार अक्सर मुख्यमंत्री के निर्णयों पर भारी पड़ते हैं, जिससे शासन में चुनौतियां आती हैं।
यह लेख राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) बिल, 2021 के पारित होने पर केंद्रित है, जिसने दिल्ली की निर्वाचित सरकार के अधिकारों को कम कर दिया और उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां प्रदान कीं। यह बिल आम आदमी पार्टी के जनादेश और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के बावजूद पारित हुआ, जिससे दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रहा टकराव और गहरा गया। लेख में इस संशोधन को भाजपा द्वारा दिल्ली में लगातार हार स्वीकार न करने का परिणाम बताया गया है, और पुडुचेरी में भी इसी तरह की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
नगालैंड के राज्यपाल आर. एन. रवि ने मुख्यमंत्री नेफियू रियो को पत्र लिखकर राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति और सशस्त्र नगा गुटों द्वारा समानांतर सरकार चलाने व टैक्स वसूली पर चिंता जताई है। इस पर एनएससीएन(आईएम) ने अपनी 'संप्रभु सरकार' के अधिकार के रूप में टैक्स वसूली को उचित ठहराया, जबकि मुख्यमंत्री ने स्थिति को बेहतर बताया। यह लेख राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नगा गुटों के बीच चल रहे गतिरोध और नगा शांति वार्ता की जटिलताओं पर प्रकाश डालता है।
यह लेख नगा शांति वार्ता में पूर्व खुफिया प्रमुख आर. एन. रवि को नगालैंड का राज्यपाल बनाए जाने पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि 2015 की 'नगा डील' के चार साल बाद भी नगा समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला है, क्योंकि नगा गुट अलग संविधान और झंडे की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। लेख वार्ता की गोपनीयता और नगा सिविल सोसाइटी के असंतोष पर भी प्रकाश डालता है।
केंद्र शासित प्रदेश पुडूचेरी में मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी और उपराज्यपाल किरण बेदी के बीच अधिकारों को लेकर चल रही लड़ाई मद्रास हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल के अधिकारों पर लगाम लगाते हुए कहा था कि वे निर्वाचित सरकार के रोजमर्रा के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। उपराज्यपाल ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहाँ वित्तीय निर्णयों पर 21 जून तक रोक लगा दी गई है, जिससे उपराज्यपाल के संवैधानिक और राजनीतिक 'पावर' पर सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान को लेकर ममता बनर्जी सरकार और राज्यपाल के बीच फिर तनातनी हुई। हिंसा के इतिहास को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का आदेश देना पड़ा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप है कि वे विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोकने और तृणमूल कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए हिंसा का सहारा लेती हैं।