यह लेख आधार कार्ड की अनिवार्यता और उससे जुड़ी समस्याओं पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि कैसे सरकारी योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने से गरीबों को राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ा, जिसके कारण झारखंड में एक बच्ची की भूख से मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट में आधार की संवैधानिक वैधता और निजता के अधिकार के उल्लंघन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी चर्चा की गई है, जिसमें सरकार के अड़ियल रवैये और अदालती कार्यवाही का उल्लेख है।
यह लेख असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NCR) के पहले मसौदे के प्रकाशन और उससे जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित है। इसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण बिगड़े आबादी संतुलन, दशकों से चल रहे हिंसक आंदोलन, और नागरिकता पहचान की जटिल प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों की निष्क्रियता तथा राजनीतिकरण पर भी प्रकाश डाला गया है, खासकर हिंदू और मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान को लेकर।
यह लेख 27 जनवरी, 2020 को केंद्र सरकार, असम सरकार और विभिन्न बोडो उग्रवादी गुटों के बीच हुए ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते पर केंद्रित है। यह असम में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शनों के बीच इस समझौते के महत्व पर प्रकाश डालता है और सुझाव देता है कि उल्फा और नगा गुटों जैसे अन्य विद्रोही समूहों के लिए भी ऐसी ही शांति पहल की जानी चाहिए। लेख बोडो विद्रोह के इतिहास, पिछले समझौतों और सभी गुटों को मुख्यधारा में लाने की चुनौतियों पर भी चर्चा करता है।
यह लेख नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े विवादों का विश्लेषण करता है, विशेष रूप से असम के संदर्भ में। यह बताता है कि कैसे कोरोना महामारी ने विरोध प्रदर्शनों को धीमा कर दिया, लेकिन कानून के विवादास्पद प्रावधानों और असम समझौते के उपबंध-6 के कार्यान्वयन में देरी के कारण तनाव बना हुआ है। लेख डॉ. कफील खान जैसे सीएए विरोधी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और अदालती मामलों पर भी प्रकाश डालता है, साथ ही असम में 2021 के चुनावों से पहले केंद्र सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा करता है।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 के लागू होने के बाद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर असम में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वर्तमान एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हाजेला पर अयोग्य व्यक्तियों को सूची में शामिल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट, असम सरकार और एनआरसी कोऑर्डिनेटर के बीच रस्साकसी को दर्शाता है, जिसमें सीएए विरोधी समूह भी हितेश देव सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत कर रहे हैं।
यह लेख नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों और सरकार की प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सीएए विरोध प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने और संपत्ति क्षति वसूली के लिए अध्यादेश लाने के खिलाफ न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर प्रकाश डाला गया है। लेख में भाजपा के एजेंडे और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए गए हैं, साथ ही शाहीन बाग धरने और दिल्ली दंगों का भी उल्लेख है।