यह लेख असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NCR) के पहले मसौदे के प्रकाशन और उससे जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित है। इसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण बिगड़े आबादी संतुलन, दशकों से चल रहे हिंसक आंदोलन, और नागरिकता पहचान की जटिल प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों की निष्क्रियता तथा राजनीतिकरण पर भी प्रकाश डाला गया है, खासकर हिंदू और मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान को लेकर।
यह लेख नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े विवादों का विश्लेषण करता है, विशेष रूप से असम के संदर्भ में। यह बताता है कि कैसे कोरोना महामारी ने विरोध प्रदर्शनों को धीमा कर दिया, लेकिन कानून के विवादास्पद प्रावधानों और असम समझौते के उपबंध-6 के कार्यान्वयन में देरी के कारण तनाव बना हुआ है। लेख डॉ. कफील खान जैसे सीएए विरोधी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और अदालती मामलों पर भी प्रकाश डालता है, साथ ही असम में 2021 के चुनावों से पहले केंद्र सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा करता है।
यह लेख विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), 2019 के कार्यान्वयन में केंद्र सरकार की दिग्भ्रमित स्थिति का विश्लेषण करता है। यह बताता है कि कैसे सरकार सीएए के नियम बनाने में विफल रही है, जबकि नागरिकता कानून, 1955 का उपयोग करके पड़ोसी देशों के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान कर रही है। लेख असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के लंबित मुद्दों और सीएए के खिलाफ व्यापक विरोध और कानूनी चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 के लागू होने के बाद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर असम में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वर्तमान एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हाजेला पर अयोग्य व्यक्तियों को सूची में शामिल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट, असम सरकार और एनआरसी कोऑर्डिनेटर के बीच रस्साकसी को दर्शाता है, जिसमें सीएए विरोधी समूह भी हितेश देव सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत कर रहे हैं।
यह लेख नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों और सरकार की प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सीएए विरोध प्रदर्शनकारियों के पोस्टर लगाने और संपत्ति क्षति वसूली के लिए अध्यादेश लाने के खिलाफ न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर प्रकाश डाला गया है। लेख में भाजपा के एजेंडे और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए गए हैं, साथ ही शाहीन बाग धरने और दिल्ली दंगों का भी उल्लेख है।
यह लेख 2020 की शुरुआत में एनआरसी और सीएए को लेकर चल रहे विवादों पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि कैसे सीएए धार्मिक आधार पर गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देता है, मुसलमानों को छोड़कर, जिससे देशव्यापी विरोध हुआ। केंद्र सरकार ने इन विरोधों को अनदेखा करते हुए एनपीआर को भी मंजूरी दी, जिससे जनता में भ्रम और संघीय व्यवस्था में तनाव बढ़ा।
यह लेख असम में एनआरसी के प्रकाशन के बाद पश्चिम बंगाल में नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल में एनआरसी लागू करने का कड़ा विरोध किया है, जबकि भाजपा इसे देशव्यापी स्तर पर लागू करने की वकालत कर रही है। लेख में पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम में एनआरसी से उत्पन्न असंतोष और गोरखा समुदाय पर इसके प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया है, साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं का भी उल्लेख है।
यह लेख असम के तिनसुकिया जिले में पांच बंगालियों की हत्या के बाद की स्थिति का विश्लेषण करता है, जिसमें उल्फा (आई) पर संदेह है। यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के कारण असम में बढ़ती जातीय हिंसा और राजनीतिक तनाव को उजागर करता है। लेख उल्फा शांति वार्ता की अनिश्चित स्थिति और केंद्र व राज्य सरकारों की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।
यह लेख पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच बढ़ते तनाव का विश्लेषण करता है, खासकर कोलकाता नगर निगम और अन्य नगरपालिकाओं के आगामी चुनावों के संदर्भ में। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। लेख में एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर दोनों सरकारों के बीच मतभेद और अतीत में चुनाव के दौरान हुई हिंसा का भी जिक्र है।
चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर संसद में बीएलओ की मौतों और नागरिकता सत्यापन के अधिकार को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्ष और सरकार आमने-सामने हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट में भी एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं। यह विवाद नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से भी जुड़ा है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक तकरार बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है, जिससे लाखों लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। यह विवाद नागरिकता और एनआरसी जैसे संवेदनशील मुद्दों से भी जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी हस्तक्षेप कर रहा है।