यह लेख लद्दाख और दार्जीलिंग की चुनावी दास्तान की तुलना करता है, जहाँ राज्य के दर्जे और स्वायत्तता की मांगें प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। लद्दाख में धारा 370 हटने के बाद राज्य के दर्जे की मांग पर आंदोलन चल रहा है, जबकि दार्जीलिंग में दशकों से अलग गोरखालैंड की मांग है। दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक दल इन मांगों पर वायदे कर चुनाव जीतते रहे हैं, लेकिन मतदाताओं में असंतोष बढ़ रहा है, जिससे नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं।
लद्दाख में जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी और फिर रिहाई के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट में उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो की याचिका पर सुनवाई के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक के खिलाफ मामला वापस ले लिया। अब लद्दाख में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांगों को लेकर आंदोलन फिर तेज हो गया है, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) एकजुट हैं।
यह लेख लद्दाख लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों का विश्लेषण करता है, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवार हाजी मुहम्मद हनीफा जान की जीत ने भाजपा की लद्दाख नीति पर पुनर्विचार करने का दबाव बनाया है। यह जीत लद्दाखियों की राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होने की पुरानी मांगों को दर्शाती है, जिसे सोनम वांगचुक के नेतृत्व में हुए आंदोलन ने उजागर किया था। लेख जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों पर भी प्रकाश डालता है, जहाँ क्षेत्रीय और सामाजिक मुद्दे हावी रहे, और भाजपा पर जल्द विधानसभा चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है।
यह लेख लद्दाख में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची के तहत जनजातीय क्षेत्र की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का विश्लेषण करता है। इसमें सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी, केंद्र सरकार के साथ वार्ताओं की विफलता और पुलिस फायरिंग जैसी घटनाओं का उल्लेख है। लेख जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली और गोरखालैंड आंदोलन से भी इसकी तुलना करता है, जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
लद्दाख पहाड़ी विकास परिषद कारगिल चुनाव परिणाम ने केंद्र सरकार की नीतियों को मतदाताओं द्वारा अस्वीकार किए जाने का संकेत दिया है। भाजपा, जिसने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, को केवल 2 सीटें मिलीं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, जिन्होंने धारा 370 को खत्म करने के केंद्र के फैसले को मुख्य मुद्दा बनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चुनाव चिन्ह के मामले में लद्दाख प्रशासन को फटकार लगाई, जिससे भाजपा की रणनीति को झटका लगा। यह परिणाम आगामी लोकसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि स्थानीय लोग धारा 370 की वापसी और 6ठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं।
लद्दाख में पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की 6ठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर सिविल सोसायटी संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 21 दिन की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद 'बोर्डर मार्च' का ऐलान किया है। केंद्र सरकार और लद्दाखी नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही है, जिससे आंदोलनकारी अब आम चुनाव से पहले ठोस आश्वासन चाहते हैं।