असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर 'पाकिस्तानी लिंक' होने का आरोप लगाया है, जिसे वे बोरोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में चर्चा करेंगे। यह आरोप अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के भाजपा के अभियान और आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर राष्ट्रविरोधी ताकतों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है, जबकि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान सद्भाव का माहौल बनाने की बात कही गई थी।
यह लेख असम चुनाव में आदिवासी वोटों के महत्व पर केंद्रित है, विशेषकर चाय बागान मजदूरों के। इसमें इंडिया गठजोड़ के घटक दलों, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रहे टकराव और झामुमो के असम में पहली बार चुनाव लड़ने की रणनीति का विश्लेषण किया गया है। भाजपा भी आदिवासी वोटों को लुभाने के लिए धर्मान्तरण और सुप्रीम कोर्ट के एसटी दर्जे पर दिए गए आदेश जैसे मुद्दों का इस्तेमाल कर रही है।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 के लागू होने के बाद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर असम में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वर्तमान एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने अपने पूर्ववर्ती प्रतीक हाजेला पर अयोग्य व्यक्तियों को सूची में शामिल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट, असम सरकार और एनआरसी कोऑर्डिनेटर के बीच रस्साकसी को दर्शाता है, जिसमें सीएए विरोधी समूह भी हितेश देव सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत कर रहे हैं।
यह लेख मणिपुर में जारी जातीय हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की आलोचना करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे विभिन्न समुदाय और विपक्षी दल प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि वे अमेरिका यात्रा में व्यस्त थे। लेख में मणिपुर की माताओं और विपक्षी दलों द्वारा दिल्ली में किए गए विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में जातीय संघर्ष के बाद शांति स्थापित करने का प्रयास किया, जिसमें उन्होंने विभिन्न समुदायों से मुलाकात की और न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा की। लेख बताता है कि राज्य सरकार और हाईकोर्ट के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये ने हिंसा को बढ़ावा दिया, खासकर मेइती समुदाय को एसटी दर्जा देने के हाईकोर्ट के आदेश के कारण। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि अमित शाह ने शांति समिति बनाकर समाधान का प्रयास किया।
मणिपुर में भाजपा की पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी ने पूर्वोत्तर में शांति की नई आशा जगाई है। भाजपा एकमात्र पार्टी थी जिसने चुनाव में आफ्प्सा हटाने का वादा नहीं किया, जबकि अन्य दलों ने किया। चुनाव परिणामों से पता चलता है कि मणिपुर के मतदाता शांति और मजबूत सरकार चाहते हैं, और उनके लिए आफ्प्सा का मुद्दा चुनावी प्राथमिकता नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2023 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए पूर्वोत्तर का दौरा किया। भाजपा को त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें त्रिपुरा में आंतरिक कलह और 'ग्रेटर तिपरालैंड' की मांग, मेघालय में एनपीपी और टीएमसी की चुनौती, और नगालैंड में नगा राजनीतिक मुद्दे का अनसुलझा रहना शामिल है। लेख में भाजपा की चुनावी रणनीति और इन राज्यों में उसके सामने आने वाली बाधाओं का विश्लेषण किया गया है।