कांग्रेस-वाम बेमेल गठजोड़ की गांठें
- शशिधर खान
केरल के एर्नाकुलम जिले की थ्रिक्काकारा विधान सभा सीट कांग्रेस विधायक पी॰ टी॰ थॉमस के निधन से रिक्त हुई थी । उसके लिए हुए उपचुनाव में थॉमस की पत्नी उमा थॉमस को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था । 3 जून को घोषित परिणाम ने मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन को कई कारणों से सकते में डाल दिया, जिनके लिए यह हार स्वीकारना कठिन हो रहा है । कांग्रेस की तरह सीपीएम ने भी इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया हुआ था और सीपीएम ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व में फूट डालने का भी प्रयास किया ।
इस विधान सभा सीट के लिए मतदान से पहले की चुनाव प्रचार और अन्य जितनी खबरें तिरूवनंतपुरम से मिली, उससे लगता है कि इन दोनों दलों की गांठों के बंधन में धार्मिक एजेंडा समाया था । सीपीएम और कांग्रेस दोनों को एक-दूसरे पर भाजपा के ‘हिन्दुत्व एजेंडे’के प्रति नरम रवैया रखने का आरोप लगाकर इसाई समुदाय के वोटों पर दबदबा का सबूत जुटाया था । इसमें कांग्रेस के लिए ‘जीओ या मरो’ वाली यह जीत थी । क्योंकि केरल में निर्णायक भूमिका निभानेवाले मुस्लिम और इसाई वोटों पर कांग्रेस की परंपरागत पकड़ है । विशेषकर थ्रिक्काकारा सीट तो खास माएने रखती थी, जहां सबसे ज्यादा इसाई वोटर हैं । इस चुनाव परिणाम से कई परतें उजागार हुई हैं, जो अभी तक चुनावी परिपाटी मानी जाती थी और चुनाव परिणाम का अंदाजा पहले से ही तय रहता था ।
थ्रिक्काकारा में सीपीमए की एक चुनावी सभा में बरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री के॰ पी॰ थॉमस ने मुख्यमंत्री विजयन की तारीफ की और पार्टी पर आरोप लगया कि कांग्रेस के ‘नरम हिन्दुत्व लाईन’अपनाने से देश में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल खराब हो रहा है । केरल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के॰ सुधाकरन तुंरत एक्शन में आए और 12 मई को चुनाव सभा के दिन ही के॰ वी॰ थॉमस को पार्टी से निकाल दिया । कांग्रेस को अपना इसाई वोट बैंक सुनिश्चित करना था और भारी जीत से कांग्रेस नेताओं ने इत्मीनान महसूस किया ।
२०२१ विधान सभा चुनाव से कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट का केरल के साबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के फैसले के कारण कांग्रेस और सीपीएम में तकरार बढ़ी । कांग्रेस ने हिन्दू वोट भाजपा के खाते में जाने से रोकने के लिए अपनी नीति बदली, क्योंकि भाजपा नेता इस मुद्दे को भुनाने में जुटे । मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन तटस्थ बने रहे । भाजपा का खाता भी नहीं खुला । कांग्रेस का वोट बंट गया । 2016 विधान सभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पर सोने की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगा कि भरा थैला उन्हें मिला, जिसका तार संयुक्त अरब अमीरात से जुड़ा था । इसे भाजपा और कांग्रेस दोनों ने उछाला । अभी उपचुनाव परिणाम सामने आने के बाद पूर्व वाणिज्य दूतावास अधिकारी और एक अभियुक्त स्वप्ना सुरेश ने इसे फिर दुहराया । आरोप के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ‘एक खास एजेंडे’ का हिस्सा है, जिसमें उनका इशारा कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर है ।
अप्रील, २०२२ में केरल के कन्नूर में आयोजित सीपीएम के 23वें वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए के॰ पी॰ थॉमस और तिरूवनंतपूरम लोकसभा सीट से जीते कांग्रेस नेता शशि थरूर को आमंत्रित किए जाने पर भी कांग्रेस नेतृत्व असहज हो गया । केरल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुधाकरन ने पहले ही डिक्टैट जारी कर दिया कि संसद सदस्य समेत कोई पार्टी नेता सीपीएम के सेमीनारों में अगर हिस्सा लेते हैं तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना होगा ।
२०२१ में तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में भी कांग्रेस ने डीएमके से हमेशा रहनेवाला चुनावी गठजोड़ त्यागकर उसी से मुकाबले के लिए सीपीएम के साथ गठजोड़ कर लिया । दोनों में से किसी को भी एक भी सीट नहीं मिली । भाजपा ने ४ सीटों पर बाजी मार दी । डीएमके नेता एम॰ के॰ स्टालीन भारी बहुमत से मुख्यमंत्री बने । कांग्रेस-वाम बेमेल गठजोड़ की गांठें
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