विपक्षी एका में छेद ही छेद, कांग्रेस से गुरेज क्यों ?

                                                                                      - शशिधर खान

	



	२०२४ आम चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, बिखरे-बंटे विपक्षी दल भाजपा से मुकाबला के लिए आपसी मतभेद दूर करने और चुनावी नजदीकी कायम करने के कवायद में जुट गए हैं । 

	केंद्र में और कई राज्यों में सत्तारूढ़ भाजपा को लगातार तीसरा लोकसभा चुनाव न जीतने देने के लिए एका नाव जिस घाट पर लगती है, एक नया छेद सामने आ जाता है । वैसे तो खुद को राष्ट्रीय दल मानेवाले कई क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस के साथ मिलकर एका नाव में बैठने से परहेज है । मगर जिन्हें मंच साझा करने से एतराज है, वो पार्टियां भी साझा विपक्षी गठजोड़ में कांग्रेस का नेतृत्व या महत्वपूर्ण भूमिका स्वीकारने को तैयार नहीं है । उनमें पहले नंबर पर है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जो कांग्रेस से ही अलग होकर मजबूत पार्टी के रूप में उभरी है । दूसरे नंबर पर है, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू), जिन्होंने भाजपा गठजोड़ से अलग होकर दूसरी बार कांग्रेस और बिहार में ताकतवर पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के साथ सत्ता में बने रहने के लिए गठजोड़ किया हुआ है । फर्क सिर्फ इतना है कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में सिर्फ अपने बलबूते तीसरी बार सत्ता बरकरार रखी है लेकिन नीतीश कुमार भाजपा और राजद के मुकाबले बहुत कम सीटें होने के बावजूद मुख्यमंत्री बने हुए हैं । इनके वर्तमान गठजोड़ में कांग्रेस और वामदल शामिल जरूर हैं, मगर कांग्रेस नीतीश कुमार के साथ मिलकर गैर-भाजपा राष्ट्रीय गठजोड़ बनाने के प्रयास में नीतीश कुमार के ताजा अतीत से सतर्क है । 

	विपक्षी एका का ताजा लेखा-जोखा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेते हैं । संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 13 मार्च को शुरू होने के बाद संसद के गलियारे और आसपास से खबरें आ रही हैं । अडानी प्रकरण की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग को लेकर दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लंदन में भारतीय लोकतंत्र पर की गयी टिप्पणी को लेकर भाजपा सदस्यों ने हंगामा किया । 

	संसद का कामकाज ठीक से नहीं चल पा रहा है । उसी दौरान गैर-भाजपा विपक्षी एका में दरार नजर आयी । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में 16 विपक्षी दलों ने संसद में भाजपा के विरोध में १४ मार्च को एकजुटता दिखायी, जिसमें तृणमूल कांग्रेस शामिल नहीं हुई । 


	कांग्रेस ने आप नेता मनीष सिसोदिया और के॰ कविता के मामले से खुद को अलग रखा हुआ है । कांग्रेस काफी समय से अपने अंदरूनी संगठनात्मक नेतृत्व की किल्लत से जूझ रही है, सभी जानते हैं । साथ-साथ यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि अंदर और बाहर से कमजोर हो चुकी कांग्रेस को विपक्षी दल में किसी अन्य दल या धुरी का नेतृत्व मंजूर नहीं है । जबकि कोई भी दल कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रभावशाली हैसियत वाली पार्टी मानने को तैयार नहीं है । तीन पूर्वोत्तर राज्य - त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड में ताजा चुनाव परिणाम कांग्रेस के वजूद पर खतरे की घंटी है, जिस पूर्वोत्तर में कांग्रेस का वर्चस्व रहा है । नगालैंड में एनसीपी से जीते 7 विधायक उस सत्तारूढ़ गठजोड़ के साथ हो गए, जिसमें भाजपा शामिल है ।


	भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी रखनेवाले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की दीदी से करीबी है । २०२१ उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव प्रचार रैलियों में ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ वोट मांगा । अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती से भी हाथ नहीं मिलाना चाहते है । सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 11 मार्च को लखनऊ और अहमदाबाद दोनों जगह ईडी छापेमारी पर कहा कि भाजपा कांग्रेस की पंरपरा को दुहरा रही है । सपा को राजद के साथ बैठने में कोई दिक्कत नहीं है जिनका आपस में रिश्ता भी है । उधर राजद, कांग्रेस और वामदल के साथ गठजोड़ कायम रखने के पक्ष में है । सपा नेता अखिलेश यादव ने हाल ही में बसपा को कांग्रेस की बी टीम बताया । २०२१ उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अपनी हार के लिए कांग्रेस और बसपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इन दोनों दलों ने भाजपा को जिताने के लिए वोटकटवा का काम किया । 


	गत फरवरी में पटना में भाकपा (माले) के 11वें अधिवेशन के अंतिम दिन 18-02-2023 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री राजद के तेजस्वी यादव और कांग्रेस की ओर से सलमान खुर्शीद पहुंचे । नीतीश कुमार और तेजस्वी दोनों ने कहा कि हम सब गैर-भाजपा राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार हैं, कांग्रेस निर्णय करे । कहने का तात्पर्य यह था कि भाजपा विरोधी महागठजोड़ की एका में कांग्रेस बाधक है । नीतीश कुमार ने सलमान खुर्शीद से कहा कि मेरा सुझाव मान लीजिएगा तो भाजपा २०२४ लोकसभा चुनाव में 100 के नीचे आ जाएगी । नीतीश के एलान पर पूर्णियां में महागठजोड़ एका रैली में कांग्रेस नेता के॰ सी॰ वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने कटाक्ष किया - ‘कांग्रेस एकमात्र पार्टी है, जिसने भाजपा से कभी समझौता नहीं किया ।’राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्र एका के लिए नहीं । गौरतलब है कि राहुल गांधी की लगभग 4000 किमी भारत जोड़ो यात्रा में विपक्षी दलों ने कोई रूचि नहीं दिखायी । जम्मू व कश्मीर में वहां के कुछ नेता शामिल हुए, जिनमें प्रमुख थे नेशनल कान्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला । जम्मू व कश्मीर में चुनाव पर जोर डालने के लिए फारूक अब्दुल्ला सभी दलों को साथ लेकर चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं । अब देखें, कौन-कौन दल शामिल होते हैं । 

	अब जरा दक्षिण की ओर चलें । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम॰ के॰ स्टालिन कांग्रेस का साथ लेकर चलना चाहते हैं, जो दीदी, चन्द्रशेखर राव और आप को मंजूर नहीं है ।


	संगठनात्मक नेतृत्व कांग्रेस का कमजोर होने के कारण आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने 12 मार्च को दूसरी बार कांग्रेस छोड़ी । ये आंध्र प्रदेश को काटकर तेलंगाना बनाने के पक्ष में नहीं थे । २०१४ में रेड्डी अलग हो गए । आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को एक भी लोकसभा या विधान सभा सीट नहीं मिली । महीनों बातचीत के बाद किरण कुमार रेड्डी वापस आए और अभी फिर छोड़ दिया । ओडिशा के बीजू जनता दल मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के प्रति तटस्थ रवैया अपना रखा है ।