पेगासस जासूसी जांच रिपोर्ट का इंतजार

                                                                                             - शशिधर खान

	

		राजनीतिक विवादों से घिरे इजराइल निर्मित स्पाईवेयर पेगासस जासूसी कांड की जांच रिपोर्ट सामने आने से कई बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो भाजपा नीत केंद्र की गठजोड़ सरकार सार्वजनिक नहीं करना चाहती । पेगासस स्पाईवेयर के जरिए भाजपा सरकार ने अपने देश में कई प्रमुख राजनीतिज्ञों, पत्रकारों और सामाजिक संगठनों की जासूसी करायी । इस सनसनीखेज मामले की जांच प्रक्रिया की मानीटरिंग सीधे सुप्रीम कोर्ट कर रही है । 


		जनप्रतिनिधियों से जानकारी छिपाने के सरकार के इरादे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने की अर्जी जब चीफ जस्टिस ने स्वीकार कर ली, तो सरकार ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’का हवाला दिया । सरकार की नीयत संदिग्ध होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27/10/2021 को पूरे पेगासस स्पाईवेयर प्रकरण की जांच के लिए कमिटी गठित कर दी और इसकी निगरानी का काम पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज आर॰ वी॰ रवीन्द्रन को सौंपा । 

		चीफ जस्टिस एन॰ वी॰ रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने देश की प्रमुख हस्तियों की अवैध तरीके से निगरानी के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल गलत बताते हुए जांच स्वयं कराने का फैसला किया । सरकार की दलील पर सुप्रीम कोर्ट पर सरकार फ्री पास नहीं ले सकती । 22/02/2022 को सुनवाई के दिन सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश होनेवाले सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता के पास जवाब तैयार नहीं था । वे ज्यादा समय चाहते थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट 25 फरवरी से आगे की तारीख देने को तैयार नहीं हुई । २२ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट पीठ पेगासस आरोपों की जांच के लिए गठित टेक्नीकल कमिटी की अंतरिम जांच रिपोर्ट के आलोक में सुनवाई करनेवाली थी । सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमिटी में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॅाजी से सम्बद्ध विभिन्न क्षेत्रों के जानेमाने विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया । इस टेक्नीकल कमिटी ने 21/02/2022 को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी और सुप्रीम कोर्ट पीठ ने 22/02/2022 को सुनवाई की तारीख रख दी । सोलिसिटर जनरल ने अपनी लाचारी दिखाई तो सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी । अंतरिम जांच रिपोर्ट में भी कई ऐसे जासूसी भेदियों का राज अवश्य खुला होगा, इसलिए सरकार फानइल रिपोर्ट आने तक इसे छिपाए रखना चाहती है । 20/05/2022 को जस्टिस (रिटायर) आर॰ वी॰ रवीन्द्रन ने टेक्नीकल कमिटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट पीठ से फानइल जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए २० जनू तक का समय मांगा । चीफ जस्टिस ने स्वयं पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए समय तो दिया, मगर साथ में जांच की निगरानी कर रहे जज रवीन्द्रन से यह भी कहा कि जितना जल्दी संभव हो, फानइल रिपोर्ट सौंप दें । चीफ जस्टिस समेत तीन जजों की पीठ ने टेक्नीकल कमिटी से कहा कि चार हफ्ते के अंदर जांच पूरी करके निगरानी कर रहे जज को सौंपें । 

		याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह किया । इसका विरोध करते हुए सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह अंतरिम रिपोर्ट है और सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए । 


		अब २० जून तक फाइनल जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट को भी उसके अध्ययन में थोड़ा समय लगेगा, तबतक के लिए सरकार को राहत मिल गयी । 


		संसद में पेगासस जासूसी पर हुए हंगामे की पूरी खबर जनता के बीच गयी है । सुप्रीम कोर्ट में इस पर हुई सुनवाई की खबर जनता तक पहुंची है । उसके बावजूद सराकर ‘राजनीतिक’जासूसी को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जुड़ा मामला बताकर जनता से ज्यादा इजराइल से अपनी दोस्ती को तबज्जों दे रही है । जबकि इजराइल निर्मित पेगासस स्पाईवेयर के सियासी इस्तेमाल को लेकर खुद इजराइल के अंदर और यूरोपीय देशों में भी विवाद हुआ है । इजराइल का भारत से ज्यादा पुराना दोस्त अमेरिका ने सबसे पहले पेगासस को काली सूची में डाला । इजराइली रक्षा मंत्रलय द्वारा संचालित कंपनी एन॰ एस॰ ओ॰ निर्मित पेगासस को भारत सफेद सूची में रखना चाहता है ।